बालकोनगर, 15 सितंबर, 2026। हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।
बालको जब 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहाँ हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।
पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू कहती हैं, “मैं उन युवा इंजीनियर्स में से एक हूँ, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहाँ प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।”
बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं, “एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआई और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।”
एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ कहते हैं, “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”
कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं, “हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है।”
कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।
रायपुर।CG BIG BREAKING : छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में वर्ष 2022 में हुई State Tax Inspector की पदोन्नति परीक्षा अब एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। 11 सितंबर 2026 के आदेश में गंभीर अनियमितताओं के आधार पर 2022 की परीक्षा से जुड़ी पदोन्नति एवं नियुक्तियों को प्रारंभ से ही शून्य (Void ab initio) घोषित कर निरस्त किया गया है और प्रभावित कर्मचारियों को मूल पदों पर वापस भेजा गया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है—अगर पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, तो आखिर परीक्षा के दौरान क्या हुआ था और जिम्मेदार कौन है?
मेहनत परीक्षार्थियों की, सवाल पूरी व्यवस्था पर CG BIG BREAKING
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इस परीक्षा में शामिल कर्मचारियों ने पदोन्नति की उम्मीद में मेहनत की, तैयारी की और परीक्षा दी। करीब 350 कर्मचारियों के लगभग 42 पदों के लिए परीक्षा में शामिल होने की बात पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उठाई थी। ऐसे में यदि चयन प्रक्रिया में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार परीक्षार्थियों को हुआ होगा जिन्होंने अपनी मेहनत के भरोसे परीक्षा दी थी।
विज्ञापन कुछ, चयन प्रक्रिया कुछ? CG BIG BREAKING
मामले का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में 28 अप्रैल 2022 के विज्ञापन में जिस नियम के अनुसार चयन की बात कही गई थी, परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने के बाद 19 मई 2022 को नए नियम अधिसूचित किए जाने और बाद में उन्हीं के आधार पर अंक देने को लेकर विवाद दर्ज है। याचिकाकर्ताओं ने इसे चयन प्रक्रिया के बीच “rules of the game” बदलने का मुद्दा बताया। हालांकि, एकल पीठ ने उस चुनौती को स्वीकार नहीं किया और 1 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज कर दी। मामला आगे भी न्यायिक प्रक्रिया में उठा है।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि कौन चयनित हुआ, बल्कि यह भी है कि चयन की पूरी प्रक्रिया विज्ञापन और लागू नियमों के अनुरूप कितनी पारदर्शी थी।
अंकों और उत्तरपुस्तिकाओं पर भी उठ चुके हैं सवाल CG BIG BREAKING
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में याचिकाकर्ताओं की ओर से उत्तरपुस्तिका में अंकों में कथित हेरफेर का मुद्दा भी उठाया गया है। ऐसे में अब यह मांग और गंभीर हो जाती है कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं, मूल्यांकन प्रक्रिया, अंकों का रिकॉर्ड, मेरिट तैयार करने की प्रक्रिया और चयन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच हो।
ननकीराम कंवर ने PM तक उठाया था मामला
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पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भी इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी। उन्होंने परीक्षा में कथित अनियमितताओं, चयनित अभ्यर्थियों के असामान्य रूप से अधिक अंकों और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। ये आरोप अभी जांच के जरिए सत्यापित किए जाने बाकी हैं, लेकिन अब 11 सितंबर के निरस्तीकरण आदेश के बाद इन सवालों को फिर से नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
अब असली परीक्षा जांच की है
नियुक्तियां निरस्त करना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन परीक्षा की कथित गड़बड़ी की जड़ तक पहुंचना उससे भी बड़ा सवाल है।
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच से सच्चाई सामने आएगी। और यदि कहीं अंकों, उत्तरपुस्तिकाओं, नियमों या चयन प्रक्रिया में जानबूझकर अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
सरकार ने हाई कोर्ट में लगाया केवीएट
छत्तीसगढ़ सरकार ने इन नीतियों को निरस्त करने के साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक केवीएट फाइल कर दिया है जिससे कोई कर्मचारी इस आदेश से शुभ होकर हाई कोर्ट जाना चाहे तो सरकार ने पहले ही केवीएट दायर कर दिया है ताकि उच्च न्यायालय उनको किसी तरह से स्थगन या राहत देने से पहले सरकार की बात को भी सुने इससे यह स्पष्ट हो रहा है की सरकार इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है और आगे जांच की प्रक्रिया तेज हो सकती है.
क्योंकि सवाल सिर्फ 2022 में चयनित हुए कर्मचारियों का नहीं है—सवाल उन सैकड़ों कर्मचारियों की मेहनत, परीक्षा की विश्वसनीयता और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर जनता के भरोसे का है।
अब देखना यह है कि मामला सिर्फ नियुक्तियां रद्द करने तक सीमित रहता है या परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पूरी परत भी खुलेगी।
रायपुर : छत्तीसगढ़ में अडानी के आने से पहले न ही यहां रोजगार थी और न ही शिक्षा के लिए एक अच्छा स्कूल था। प्रदेश में बच्चों को अंग्रेजी का ABCD तक पढ़ना नहीं आता था। अडानी फाउंडेशन के पहल के बाद ही यहां के बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ है। यह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ में सरकार की नाकामी को उजागर करता है।
दरअसल, अडानी समूह द्वारा प्रचार के लिए एक वीडियो जारी किया गया जिसमें दावा किया गया कि उसके आने के बाद से ही शिक्षा बेहतर हुआ है। यानी छत्तीसगढ़ में सरकार पूरी तरह फेल है। यदि किसी निजी कंपनी को यह बताना पड़ रहा है कि उसके आने से पहले बच्चों को बुनियादी शिक्षा तक उपलब्ध नहीं थी, तो यह सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
शिक्षा, स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी कॉरपोरेट समूह के प्रचार वीडियो में सरकारी व्यवस्था से पहले की स्थिति को बेहद खराब बताना राजनीतिक रूप से सरकार के लिए असहज पैदा करने वाली स्थिति है।
अडानी फाउंडेशन के दावे में कितना दम
अडानी फाउंडेशन का दावा है कि उसके आने से ही यह सब संभव हो पाया है। अडानी समूह की ओर से शिक्षा, स्कूलों के उन्नयन, डिजिटल सुविधाओं और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने जैसी पहलों का उल्लेख किया जाता रहा है। अडानी से जुड़े अन्य शिक्षा कार्यक्रमों में कंप्यूटर लैब और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे भी सामने आए हैं।
BALCO मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ
रायपुर, 14 सितंबर 2026। मध्य भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) द्वारा चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव 18 से 20 सितंबर 2026 तक मेफेयर लेक रिजॉर्ट्स, नया रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के साथ चूजिंग वाइजली इंडिया की सातवीं बैठक भी आयोजित होगी, जो ईकैंसर, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम ‘कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना’ है। इसमें मुख्य रूप से स्तन कैंसर, स्त्री रोग संबंधी कैंसर और मूत्र-जनन तंत्र के कैंसर पर चर्चा होगी। उपचार के सही विकल्प चुनने और मरीज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मरीज-केंद्रित उपचार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न सत्रों में अनावश्यक उपचार से बचने, उपचार से जुड़े निर्णयों में मरीज की भागीदारी सुनिश्चित करने और दुनिया भर में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को भारत में रोजमर्रा के कैंसर उपचार में प्रभावी रूप से अपनाने पर चर्चा होगी।
वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही ने कहा, “कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना का अर्थ मरीजों को उनके घर के करीब बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना भी है। जब देश और दुनिया के विशेषज्ञ क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञों के साथ एक मंच पर आते हैं, तो ज्ञान और अनुभव साझा करने के साथ बेहतर चिकित्सा पद्धतियों से सीखने और स्थानीय स्तर पर उपचार की क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलता है। नया रायपुर में कैंसर विशेषज्ञों का एक साथ आना हमारे लिए बेहद उत्साहजनक है और ऐसे मंचों के महत्व को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “कैंसर उपचार की क्षमता को मजबूत करने के साथ अगली पीढ़ी के विशेषज्ञों को तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष हम देशभर के 50 युवा डॉक्टरों को यात्रा सहायता देते हैं, ताकि वे कॉन्क्लेव में शामिल होकर इस क्षेत्र के श्रेष्ठ विशेषज्ञों से सीख सकें और अपने ज्ञान व कौशल को मजबूत कर सकें।”
कॉन्क्लेव में यूके, अमेरिका, यूएई, नेपाल, श्रीलंका, इजराइल, बेल्जियम, कनाडा और स्विट्जरलैंड से 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनके साथ देशभर से 200 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। विशेषज्ञ कैंसर उपचार, चिकित्सा अनुसंधान, सटीक कैंसर उपचार, रेडिएशन, सर्जरी और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
तीन दिनों के दौरान 20 से अधिक परिचर्चाएं, बहु-विषयक सत्र, वाद-विवाद और वास्तविक मरीजों के मामलों पर आधारित चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें स्तन कैंसर की लाइव सर्जरी का प्रदर्शन भी शामिल होगा। साथ ही विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें इंटरस्टिशियल ब्रैकीथेरेपी, चिकित्सा अनुसंधान और क्लिनिकल ट्रायल की रूपरेखा, आनुवंशिक जांच और सटीक कैंसर उपचार, कैंसर की पैथोलॉजी, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तथा नई पीढ़ी की न्यूक्लियर मेडिसिन और थेरानोस्टिक्स जैसे विषय शामिल होंगे।
कॉन्क्लेव में वीमेन फॉर ऑन्कोलॉजी की नेटवर्किंग और मार्गदर्शन बैठक भी आयोजित होगी। इसमें कैंसर उपचार के क्षेत्र में कार्यरत महिला विशेषज्ञों को एक-दूसरे से जुड़ने, अपने अनुभव साझा करने, सहयोग बढ़ाने और नेतृत्व व मार्गदर्शन के अवसर तलाशने का मंच मिलेगा।
शैक्षणिक कार्यक्रम के साथ बीएमसी की ओर से ‘कैनवास फॉर ए लाइफ’ नाम से कला और विरासत प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी बीएमसी चैरिटेबल फंड के समर्थन में होगी। यह फंड जरूरतमंद मरीजों को उपचार, जांच और पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उपचार के दौरान आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं में भी सहयोग करता है।
पिछले वर्ष आयोजित कॉन्क्लेव में देशभर से 1,000 से अधिक चिकित्सकों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया था। इस वर्ष का आयोजन इससे भी व्यापक होने की उम्मीद है। कॉन्क्लेव के माध्यम से देश-दुनिया के विशेषज्ञ एक साथ मिलकर भारत में अधिक प्रभावी, समान और मरीज-केंद्रित कैंसर उपचार की दिशा में विचार साझा करेंगे। कॉन्क्लेव के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है। इच्छुक प्रतिभागी बालको मेडिकल सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बीएएलसीओएमईडीआईसीएएलसीईएनटीआरई डॉट कॉम के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले प्रतिनिधि और फैकल्टी सदस्य छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, रायपुर से सीएमई क्रेडिट पॉइंट्स प्राप्त करने के पात्र होंगे।
बस्तर : Ajab gajab news : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में रविवार को एक ऐसी अदालत लगी, जहां कटघरे में इंसान नहीं, देवी-देवता थे। भंगाराम माई की अदालत में 157 मामलों की सुनवाई हुई। किसी पर गांव में बीमारी फैलाने, किसी पर फसल खराब होने तो किसी पर अनहोनी का आरोप था।
लोक आस्था की इस अनोखी न्याय व्यवस्था में 35 देवी-देवताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि कुछ को एक साल की रिमांड पर भेज दिया गया। कई आरोपों से बरी हुए तो कुछ के काम की अदालत ने सराहना की।
Ajab gajab news
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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भंगाराम माई की अनोखी देव अदालत लगी, जहाँ 157 मामलों की सुनवाई हुई। इस लोक आस्था की न्याय व्यवस्था में 35 देवी-देवताओं को ‘उम्रकैद’ की सजा सुनाई गई और कुछ को एक साल की रिमांड पर भेजा गया।
देश में अनोखी मानी जाने वाली कोंडागांव जिले की इस देव अदालत ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा।नौ परगना के ग्रामीणों के लिए यह अदालत उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
भादो जात्रा के मुख्य पुजारी सरजू राम गौर बताते हैं कि जिन देवी-देवताओं या शक्तियों को समाज के लिए हानिकारक माना जाता है, उनके मामले यहां लाए जाते हैं। लोक परंपरा और पुजारियों की अगुवाई में चली सुनवाई के बाद दोषी मानी गई देव-शक्तियों पर फैसला सुनाया जाता है। उम्रकैद का अर्थ उनकी पूजा, स्थापना और मान्यता पर स्थायी रोक है।
अदालत की सबसे रोचक परंपरा ‘रिमांड’ है। हर मामले में तत्काल अंतिम फैसला नहीं होता। कुछ देवी-शक्तियों को एक वर्ष के लिए रिमांड पर रखा जाता है। इस दौरान उनके प्रभाव और गांव की परिस्थितियों को परखा जाता है। अगले वर्ष भादो जात्रा में मामला फिर अदालत में आता है और उसके बाद अंतिम निर्णय सुनाया जाता है।
भंगाराम माई : देवी-देवताओं की सर्वोच्च अदालत Ajab gajab news
न कोई जज है, न वकील, न आइपीसी की धारा। फैसला होता है ढोल-मांदर की थाप, पुजारी के मंत्र और सदियों से चली आ रही आदिवासी आस्था के आधार पर। दूर-दराज के गांवों से हजारों लोग सिर्फ यह न्याय देखने आते हैं।
केशकाल की भादो जात्रा सिर्फ मेला नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की अपनी सर्वोच्च अदालत है। जहां आस्था ही संविधान है और परंपरा ही कानून।
यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, लोकविश्वास और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के बीच संपन्न होती है। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं।
कोरबा | युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संसद की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से जेसीआई कोरबा सेंट्रल द्वारा सेंट जेवियर पब्लिक स्कूल में युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रिया, सदन की कार्यवाही तथा पक्ष-विपक्ष के बीच होने वाली बहस की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
युवा संसद में विद्यार्थियों ने लोकसभा स्पीकर, सत्तापक्ष एवं विपक्ष के सांसदों की भूमिका छात्रों ने निभाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में नवनिर्वाचित छात्र सांसदों को हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई गई। इसके बाद स्पीकर द्वारा सदन की कार्यवाही प्रारंभ की गई।
सदन में विभिन्न सामाजिक एवं आधुनिक विषयों को चर्चा के लिए रखा गया। विद्यार्थियों ने स्पीकर के समक्ष अपने-अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया तथा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच प्रश्नोत्तर एवं तार्किक बहस हुई। विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति और आत्मविश्वास ने कार्यक्रम को रोचक बना दिया।
युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादा, नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री किशोर शर्मा, डॉ. डी.के. आनंद, अंश अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, दीपेश अग्रवाल, कपिल विश्वकर्मा, हर्ष गुप्ता, शीतल बजाज, अध्यक्ष सीए त्रिलोकी नाथ बजाज एवं संस्था के अन्य पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।
जेसीआई कोरबा सेंट्रल द्वारा आयोजित यह युवा संसद विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र को समझने और संसदीय प्रक्रिया को करीब से अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक अवसर साबित हुई।
कोरबा। क्या स्नेह सदन वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को किसी बम या विस्फोट से खतरा है? निश्चित रूप से इस सवाल का सामान्य जवाब नहीं होगा, लेकिन प्राप्त दस्तावेजों में वृद्धाश्रम के लिए 300 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति और इसके लिए 4 लाख 91 हजार 100 रुपए के भुगतान का उल्लेख सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इनकी खरीद किस आवश्यकता और किस आधार पर की गई?
करीब दो वर्ष पूर्व समाज कल्याण विभाग द्वारा कोरबा में 60 सीटर स्नेह सदन वृद्धाश्रम प्रारंभ किया गया था। वृद्धाश्रम के संचालन के लिए विभिन्न आवश्यक सामग्रियों की खरीदी की गई। इसी खरीदी से संबंधित सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों की पड़ताल में बमरोधी कंबल की खरीदी का यह मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार के तहत उपलब्ध कराए गए बिल- चालान के अनुसार स्नेह सदन वृद्धाश्रम के लिए कुल 300 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दर्शाई गई है। इसके लिए दो अलग- अलग बिलों के माध्यम से कुल 4 लाख 91 हजार 100 रुपए का भुगतान किया गया है। पहले बिल में 1,680 रुपये प्रति नग की दर से 240 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दर्शाई गई है। इसकी कुल कीमत 4 लाख 3 हजार 200 रुपए है। वहीं दूसरे बिल में 1,465 रुपए प्रति नग की दर से 60 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दिखाई गई है। इसकी कुल कीमत 87 हजार 900 रुपए है। दोनों बिल सरोज सिंघल एंड कंपनी, पावर हाउस रोड, कोरबा द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं।
बिल में गृह मंत्रालय के स्वीकृत विनिर्देश का उल्लेख
मामले को और महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि आपूर्तिकर्ता सरोज सिंघल एंड कंपनी द्वारा जारी दोनों बिलों में उत्पाद के विवरण में सामान्य कंबल का उल्लेख नहीं है, बल्कि स्पष्ट रूप से ‘अनब्रांडेड बम ब्लैंकेट’ अर्थात बमरोधी कंबल लिखा गया है। इसके साथ ही उत्पाद को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत अथवा निर्धारित तकनीकी विनिर्देश के अनुसार बताया गया है। बिल में गृह मंत्रालय के संबंधित पत्र क्रमांक और 24 अगस्त 2015 की तारीख का भी उल्लेख किया गया है। इससे दस्तावेज में दर्ज विवरण के आधार पर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि यदि आपूर्ति सामान्य कंबल की थी, तो बिल में उसे बमरोधी कंबल बताते हुए गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख क्यों किया गया?
बमरोधी कंबल का उपयोग सामान्य वृद्धाश्रम में क्यों?
बमरोधी कंबल एक विशेष सुरक्षा उपकरण होता है, जिसका उपयोग संदिग्ध विस्फोटक या विस्फोट की स्थिति में सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य विस्फोट के दौरान उत्पन्न टुकड़ों, मलबे और उसके प्रभाव से आसपास मौजूद लोगों तथा संपत्ति को यथासंभव सुरक्षा प्रदान करना होता है। ऐसे विशेष सुरक्षा उपकरण का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में संचालित वृद्धाश्रम में क्यों आवश्यक पड़ा, यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।
विभाग का दावा- साधारण कंबल की हुई है खरीद
दस्तावेज सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग, कोरबा के उप संचालक हरीश सक्सेना तथा संबंधित लिपिक से इस संबंध में चर्चा की गई। उप संचालक का कहना था कि खरीदी गई वस्तु बमरोधी कंबल नहीं, बल्कि साधारण कंबल है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रह गया। यदि वस्तु साधारण कंबल थी, तो आपूर्तिकर्ता के दोनों बिलों में उसे बमरोधी कंबल क्यों दर्शाया गया? साथ ही बिल में गृह मंत्रालय के पत्र क्रमांक और उसके द्वारा स्वीकृत तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख किस आधार पर किया गया? इस संबंध में विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। सूचना का अधिकार के तहत कंबल की खरीद के लिए मंगाए गए दर प्रस्ताव, प्राक्कलन और खरीद से संबंधित अन्य दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई थी, लेकिन उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि 300 कंबलों की आवश्यकता किस आधार पर निर्धारित की गई। इसी तरह सामग्री की आपूर्ति के बाद उसके भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया, सत्यापन करने वाले अधिकारी अथवा समिति तथा सामग्री को स्वीकार किए जाने से संबंधित अभिलेख भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए। यदि विभाग का कहना है कि खरीदी गई वस्तु सामान्य कंबल थी, तो उसका तकनीकी विवरण, खरीद का आधार, आवश्यकता का आकलन और आपूर्ति के बाद किए गए सत्यापन का अभिलेख सामने आना चाहिए।
60 सीटर वृद्धाश्रम में 300 कंबलों की आवश्यकता क्यों?
मामले में दूसरा बड़ा सवाल खरीदी गई मात्रा को लेकर है। स्नेह सदन वृद्धाश्रम की क्षमता 60 बुजुर्गों की है। इसके बावजूद यहां 300 नग कंबलों की खरीद दर्शाई गई है। वृद्धाश्रम शुरू होने के समय यहां रहने वाले बुजुर्गों की संख्या शून्य थी। उद्घाटन के दौरान दूसरे क्षेत्रों से कुछ बुजुर्गों को यहां लाया गया था। इसके बाद भी समय-समय पर बुजुर्गों का प्रवेश होता रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 17 माह की अवधि में 32 बुजुर्ग वृद्धाश्रम छोड़कर जा चुके हैं। ऐसे में 60 सीटर वृद्धाश्रम के लिए 300 नग कंबलों की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई, यह भी जांच का विषय है। यदि साधारण कंबल थे तो 300 नग खरीदने का आधार क्या था?
आपूर्तिकर्ता से संपर्क का प्रयास भी विफल
मामले को और स्पष्ट करने के लिए सरोज सिंघल एंड कंपनी के बिल में दर्ज मोबाइल क्रमांक पर लगातार चार दिनों तक संपर्क करने का प्रयास किया गया, मोबाइल बंद मिला। ऐसे में इस खरीद को लेकर विभागीय पक्ष और दस्तावेजों में दर्ज विवरण के बीच अंतर दिखाई देता है।
विसंगति की निष्पक्ष जांच जरूरी
यह मामला केवल बमरोधी कंबल शब्द के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। इसमें खरीद की आवश्यकता, वस्तु की वास्तविक प्रकृति, गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख, वस्तु का वर्गीकरण, 300 नग की मात्रा, खरीद प्रक्रिया, आपूर्ति के बाद सत्यापन और भुगतानकृसभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है। यदि वास्तव में सामान्य कंबल की खरीद की गई थी तो बिल में बमरोधी कंबल और गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख क्यों किया गया, इसका स्पष्ट उत्तर सामने आना चाहिए। वहीं यदि दस्तावेजों में दर्ज विवरण के अनुसार वास्तव में बमरोधी कंबल ही खरीदे गए थे, तो 60 सीटर वृद्धाश्रम में 300 नग ऐसे विशेष सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता और उपयोगिता का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए। दस्तावेजों में सामने आई इस विसंगति की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल बिल में दर्ज विवरण की त्रुटि है, वस्तु के वर्गीकरण से जुड़ा मामला है या खरीद प्रक्रिया में किसी अन्य प्रकार की अनियमितता हुई है।
बालकोनगर, 11 सितंबर 2026।BALCO: A Leader in Community Development : किसी गांव में जब किसान अपनी फसल के लिए बारिश का इंतजार करने के बजाय सिंचाई के भरोसे दूसरी और तीसरी फसल लेने लगे, जब किसी महिला के हाथों का हुनर परिवार की आय का जरिया बन जाए, जब किसी युवा को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार का अवसर मिले और जब किसी बच्चे को गांव की आंगनबाड़ी में बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, तब विकास केवल एक आंकड़ा नहीं रहता, वह जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन जाता है।
BALCO: A Leader in Community Development
BALCO: A Leader in Community Development
भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास यात्रा समुदाय के साथ मिलकर दीर्घकालिक बदलाव की सोच पर केंद्रित है। वित्तीय वर्ष 2026 में बालको की पहल ने 123 गांवों में 1.80 लाख लोगों तक पहुंच बनाई। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल के माध्यम से लोगों की क्षमताओं को मजबूत किया गया। किसान आधुनिक कृषि अपनाकर दूसरों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और उद्यमों का संचालन कर रही हैं तथा युवा कौशल के माध्यम से रोजगार और नेतृत्व के अवसर हासिल कर रहे हैं। यह साझी भागीदारी विकास को केवल परियोजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्थायी सामाजिक बदलाव की यात्रा बनाती है।
जीवन के हर पड़ाव से जुड़ा विकास BALCO: A Leader in Community Development
बालको की सामुदायिक विकास रणनीति ‘मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण’ पर आधारित है, जिसमें व्यक्ति और परिवार के जीवन के विभिन्न चरणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था में पोषण और शिक्षा से लेकर स्कूली शिक्षा, कौशल, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक निरंतर विकास पर ध्यान दिया गया है।
इसी सोच का उदाहरण नंद घर हैं, जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक और बच्चों के अनुकूल सीखने के स्थानों में विकसित किया गया है। वित्तवर्ष 2026 में 111 नंद घरों से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया तथा चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में बालको ने सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं, रिमेडियल एजुकेशन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया। बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कोरबा और कवर्धा में 2 कोचिंग केंद्र संचालित किए गए। वित्तवर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ। इन प्रयासों ने युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ अपने भविष्य को नई दिशा देने का अवसर दिया।
कृषि नवाचार और तकनीक से खेती में नया विश्वास BALCO: A Leader in Community Development
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार आज भी कृषि है। इसी सोच के साथ मोर जल मोर माटी कार्यक्रम के माध्यम से जल सुरक्षा, आधुनिक कृषि और आय के विविध स्रोतों को एक साथ जोड़ा गया है। वित्तवर्ष 2026 में यह पहल 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंची और 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया।
जल संरक्षण की विभिन्न व्यवस्थाओं, सूक्ष्म सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई के साथ किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत गुणवत्ता वाले बीजों के चयन, मिट्टी की जांच तथा फसल में कीट एवं पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाईं। इससे उत्पादन में लगभग 1.25 से 1.5 गुना वृद्धि, औसत कृषि आय में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि और खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया। पशुपालन, लाख उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के वैकल्पिक स्रोत भी विकसित हुए। इस तरह खेती अधिक स्थायी आजीविका का आधार बनी।
वेदांता स्किल स्कूल: कौशल से रोजगार तक BALCO: A Leader in Community Development
ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाने में वेदांता स्किल स्कूल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तवर्ष 2026 में कोरबा, कवर्धा और सरगुजा स्थित तीन केंद्रों में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 82 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार या उद्यमिता से जुड़ाव हासिल किया। रोजगार उपलब्ध कराने वाली 75 संस्थाओं का नेटवर्क 12 राज्यों तक विस्तारित हुआ।
प्रशिक्षण में 61 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी रही, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ युवाओं को व्यक्तित्व विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से परिचय, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य संबंधी सत्र और कर्मचारियों का मार्गदर्शन भी मिला। यह पहल युवाओं में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता विकसित कर उन्हें बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्नति परियोजना: लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता तक BALCO: A Leader in Community Development
बालको के सामुदायिक विकास प्रयासों में महिला सशक्तिकरण को आर्थिक और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उन्नति परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है।
वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 561 समूह और 6,003 महिलाओं तक पहुंची। इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक रूप से सक्रिय हैं। समूहों की सामूहिक बचत बढ़कर 0.92 करोड़ रुपये हुई, जबकि 90 प्रतिशत समूह नियमित बैठकों और आंतरिक ऋण व्यवस्था में सक्रिय रहे। 19 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोड़ा गया, जिससे लगभग 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला।
उन्नति महासंघ के सहयोग से उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी के अंतर्गत कोसा रेशम जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और लगभग 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। वहीं 21 सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से 104 महिलाओं को अवसर मिला और प्रति महिला लगभग 3,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय का अवसर बना।
कोसा रेशम: विरासत से आजीविका तक BALCO: A Leader in Community Development
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोसाकारी पहल की शुरुआत की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘कोसाकारी’ नाम से ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत ने बुनकरों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में नई राह खोली।
स्वास्थ्य: बेहतर उपचार आपके द्वार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालको ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अत्याधुनिक कैंसर उपचार तक बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की है। आरोग्य परियोजना के माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सेवाएं मिलीं।
65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। 2,310 महिलाओं की एनीमिया जांच में 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ। दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों ने 70 बस्तियों में पखवाड़ेवार सेवाएं दीं, जिनका 26,500 लोगों ने लाभ लिया।
नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर ने उन्नत कैंसर उपचार की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,290 मरीजों ने सामुदायिक विकास सहायता के तहत उपचार सेवाओं का लाभ लिया। केंद्र में 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार हुए। साथ ही, मध्य भारत की पहली दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली स्थापित की गई।
बेहतर जीवन के लिए सामुदायिक सुविधाएं
विकास का अर्थ बुनियादी सुविधाओं तक सम्मानजनक पहुंच भी है। वित्तवर्ष 2026 में बालको ने 4 सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और 2 सामुदायिक मंच बनाए, जिनसे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन सुविधाओं ने स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए साझा स्थान उपलब्ध कराए।
खेल और संस्कृति से नई उड़ान
युवाओं की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें अवसर देने के लिए लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी कार्यक्रम शुरू किया गया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीरंदाजी विरासत को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जोड़ते हुए 29 स्कूलों में तीरंदाजी प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच हुई और 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।
आंकड़ों से आगे, बदलाव की कहानी
1.80 लाख लोगों तक पहुंच बालको की सामुदायिक विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आंकड़ा है, लेकिन इसकी असली पहचान उन बदलावों में है, जो लोगों के जीवन में दिखाई देते हैं। किसान का बढ़ा आत्मविश्वास, महिला की आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता, कौशल और रोजगार से जुड़ता युवा, बेहतर सीखने के अवसर पाता बच्चा और समय पर स्वास्थ्य सेवा से मजबूत होता परिवार, यही इस यात्रा की वास्तविक उपलब्धियां हैं।
बालको का प्रयास सामुदायिक विकास को परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय साझी विकास यात्रा बनाना है, जहां समुदाय अपनी क्षमताओं को मजबूत कर भविष्य की चुनौतियों का सामना स्वयं कर सके। स्थायी विकास तभी संभव है, जब सहयोग आत्मविश्वास में, आत्मविश्वास क्षमता में और क्षमता पूरे समुदाय की ताकत में बदल जाए। यही बालको की भावना है, प्रेरित करना, सक्षम बनाना और समुदाय के साथ मिलकर बेहतर, समावेशी और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना।
कोरबा। Shivay Hospital Sets an Example : डेढ़ साल से असहनीय दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की पीड़ा झेल रही 46 वर्षीय महिला के लिए शिवाय हॉस्पिटल में हुई आधुनिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नई जिंदगी की शुरुआत बन गई। गर्भाशय में 10 से 12 सेंटीमीटर के 600 ग्राम यूटरस के कारण महिला की हालत बेहद मुश्किल हो गई थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण मामले में विशेषज्ञों ने बिना बड़े चीरे के लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल सर्जरी कर मरीज को राहत दिलाई।
इस सफल उपचार की खास बात यह रही कि सर्जन डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में मेडिकल टीम ने जटिल ऑपरेशन को आधुनिक दूरबीन तकनीक से अंजाम दिया। शिवाय हॉस्पिटल के अनुसार, अस्पताल बिना बड़े चीरे वाली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराने वाला जिले का प्रथम अस्पताल है।
महिला पिछले करीब डेढ़ वर्षों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और बड़े-बड़े रक्त के थक्कों की समस्या से जूझ रही थीं। हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें दिनभर में करीब 8 पैड तक बदलने पड़ते थे। लगातार रक्तस्राव और दर्द ने उनके सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था।
गर्भाशय में मिला 10-12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड Shivay Hospital Sets an Example
Shivay Hospital Sets an Example
जांच के दौरान पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी में गर्भाशय में करीब 10 से 12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड पाया गया। ट्यूमर के कारण गर्भाशय का आकार सामान्य से बढ़कर करीब 16 से 18 सप्ताह के गर्भ जैसा हो गया था।
डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में चुनौतीपूर्ण लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन Shivay Hospital Sets an Example
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. पूर्णिमा सुरभि और गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा कुंडू की अगुवाई में मेडिकल टीम ने आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी का निर्णय लिया।
25 जुलाई 2026 को टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी (TLH) और बाइलेटरल साल्पिंगेक्टॉमी की गई। इस दौरान लेप्रोस्कोपिक मोर्सेलेशन तकनीक की मदद से विशाल ट्यूमर और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। जटिलता के बावजूद सर्जरी के दौरान किसी आपातकालीन स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।
सफल ऑपरेशन के बाद मुस्कुराते हुए घर लौटीं महिला
सर्जरी के बाद महिला की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। पूरी तरह स्वस्थ और हेमोडायनामिक रूप से स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
डेढ़ साल की पीड़ा से राहत मिलने के बाद मरीज और उनके परिजनों ने डॉ. पूर्णिमा सुरभि सहित पूरी मेडिकल टीम का आभार जताया। परिजनों के मुताबिक, शिवाय हॉस्पिटल में मिली आधुनिक चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञों के प्रयास से मरीज को एक नई जिंदगी मिली है।
शिवाय हॉस्पिटल में हुई यह सर्जरी कोरबा में आधुनिक लेप्रोस्कोपिक उपचार की बढ़ती सुविधाओं को रेखांकित करती है।
बालकोनगर, 5 सितंबर 2026। वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने कर्मचारी कल्याण और टाउनशिप विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘वरदान’ अपार्टमेंट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक श्री राजेश कुमार सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में युवा कर्मचारियों को उनके नए आवास की चाबियां सौंपी गईं।
‘वरदान’ अपार्टमेंट को बालको के युवा कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। ‘वरदान’ नाम शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। इसी भावना के साथ इस आवासीय परिसर को आधुनिक जीवनशैली और बेहतर सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। जी+9 संरचना वाले ‘वरदान’ अपार्टमेंट में कुल 172 सुसज्जित आवास हैं। प्रत्येक आवास को वन बीएचके स्टूडियो अपार्टमेंट की अवधारणा पर तैयार किया गया है, जो खास तौर पर युवा कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखता है।
इस अवसर पर श्री राजेश कुमार सिंह ने कहा, “बालको की प्रगति में हमारे कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका कल्याण हमारी विकास यात्रा का एक अहम हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहाँ कर्मचारी कार्यस्थल के साथ-साथ अपने घर और समुदाय में भी बेहतर जीवन जी सकें। ‘वरदान’ अपार्टमेंट इसी दिशा में एक कदम है। यह हमारे युवा कर्मचारियों को सुविधाजनक और बेहतर आवास उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी। हमें विश्वास है कि यह बालकोनगर में बेहतर जीवनशैली और सुखद आवासीय वातावरण बनाने के हमारे प्रयासों को और मजबूती देगा।”
प्रत्येक आवास में मॉड्यूलर किचन, टेलीविजन, फर्निश्ड अलमारी, सोफा-कम-बेड तथा फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं से कर्मचारियों को अपने नए घर में आराम और सुविधा के साथ रहने में मदद मिलेगी। परिसर में तीन लिफ्ट, आधुनिक कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण की व्यवस्था, सुरक्षित वातावरण और लगभग 35,000 वर्गफुट का हरित एवं मनोरंजन क्षेत्र विकसित किया गया है। इसके अलावा कैफेटेरिया-कम-डाइनिंग स्पेस और बैंक्वेट हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ये सुविधाएं कर्मचारियों को साथ एक साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराएंगी।
‘वरदान’ अपार्टमेंट में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। परिसर में 50 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था की गई है। यह बालको और वेदांता समूह के स्थायित्व लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जल संरक्षण के लिए 80 किलोलीटर प्रतिदिन (80 हजार लीटर) क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और तीन वर्षा जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इन व्यवस्थाओं से पानी के बेहतर उपयोग और संरक्षण में मदद मिलेगी।
‘वरदान’ अपार्टमेंट केवल रहने की जगह नहीं है, बल्कि यह बालको की कर्मचारी-केंद्रित सोच का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को काम के साथ-साथ बेहतर जीवन के लिए भी सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। आधुनिक सुविधाओं से तैयार यह परिसर कर्मचारियों को बेहतर जीवन, आपसी जुड़ाव और नई शुरुआत का अवसर प्रदान करता है। यह पहल बालको की कर्मचारी कल्याण और टाउनशिप में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।