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Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again,जुड़वा बच्चों में से एक की मौत पर परिजनों का अस्पताल में हंगामा, लापरवाही का लगा गंभीर आरोप

Korba's Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again
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कोरबा (ब्लैकआउट न्यूज़ )Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again :  कोरबा के आयुष्मान चिकित्सालय शारदा विहार में जन्मे जुड़वा बच्चों में से एक नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चे को समय पर उचित इलाज के लिए रेफर नहीं किया गया, जिसके बाद अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ। पुलिस को सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंची।

Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again

Korba's Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again
Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again

परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा की पत्नी ने 17 जुलाई को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। शादी के लगभग 16 साल बाद घर में बच्चों के आने से परिवार में खुशी का माहौल था। जन्म के समय दोनों बच्चों का वजन सामान्य था। हालांकि, जन्म के कुछ घंटों बाद ही एक बच्चे के शरीर पर पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे। परिजनों ने तुरंत इसकी जानकारी ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों को दी।

परिजानों का आरोप- डाक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again

Korba's Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again
Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again

परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें आश्वासन दिया। इसके बाद बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई। जब स्थिति अत्यधिक खराब हो गई, तब परिजनों के दबाव में आकर अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को रेफर किया।

बच्चे को आनन-फानन में दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ओझा परिवार का कहना है कि यदि समय रहते बच्चे को बड़े अस्पताल भेजा जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने और मरीजों की गंभीरता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग की है।

अस्पताल प्रबंधन बोला-पीलिया के लक्षण दिखे तो रिफर किया Korba’s Ayushman Hospital in the spotlight for controversy again

इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पीलिया के लक्षण दिखते ही उचित उपचार शुरू किया गया था और स्थिति गंभीर होने पर ही बच्चे को रेफर किया गया।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba : शिक्षा,लोकतंत्र और जनहित के लिए सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय अनशन 20 को

Sonam Wangchuk's impact in Korba 
Sonam Wangchuk's impact in Korba 

कोरबा (ब्लैकआउट न्यूज़) Sonam Wangchuk’s impact in Korba आज जब देश के नागरिक अपने-अपने घरों में सो रहे थे, उसी समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण अनशन कर रहे देश के प्रख्यात शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक एवं पर्यावरणविद् श्री सोनम वांगचुक जी को अनशन स्थल से जबरन उठाकर ले जाने की घटना सामने आई।जो अत्यंत निंदनीय हैँ.

Sonam Wangchuk’s impact in Korba

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सोनम वांगचुक जी कोई अपराधी नहीं हैं। वे लोकतंत्र के सिपाही हैं। वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे थे। उनसे बातचीत की जा सकती थी, उन्हें सम्मानपूर्वक अनशन समाप्त करने का आग्रह किया जा सकता था। लेकिन जिस तरीके से उन्हें अनशन स्थल से उठाकर ले जाया गया, वह लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बालको निवासी अधिवक्ता एवं सोशल कार्यकर्त्ता मो नफीस खान ने अपने फेसबुक वाल पर पोस्ट कर उक्त अनशन की जानकारी मुहय्या कराई हैँ उन्होंने शहर वासियों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में उपस्थित होने और अनशन समर्थन देने की अपील भी की हैँ उन्होंने स्पष्ट किया हैँ की यह विशुद्ध रूप से गैर राजनितिक अनशन हैँ.

क्या लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध है?
क्या शांतिपूर्ण अनशन करना अपराध है?
क्या असहमति की आवाज़ को संवाद के बजाय जबरन दबाया जाएगा?भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, राजतंत्र नहीं। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनी जाती है, असहमति का सम्मान किया जाता है और शांतिपूर्ण आंदोलनों का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाता है।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba

Sonam Wangchuk's impact in Korba 
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सोनम वांगचुक जी जिन मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वे केवल उनके व्यक्तिगत मुद्दे नहीं हैं। वे NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा, प्रभावित छात्रों को न्याय, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही, लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत संरक्षण तथा लद्दाख के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे हैं।

 

उन्होंने देशवासियों से 20 जुलाई 2026 को उनके आंदोलन के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान किया था, लेकिन आज उन्हें बलपूर्वक अस्पताल ले जाया गया।
हर नागरिक दिल्ली नहीं जा सकता, लेकिन अपने शहर में रहकर लोकतंत्र की इस आवाज़ के साथ खड़ा जरूर हो सकता है।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba

Sonam Wangchuk's impact in Korba 
Sonam Wangchuk’s impact in Korba

इसीलिए मैं और मेरे कुछ साथी सोनम वांगचुक जी के शांतिपूर्ण आंदोलन और उनकी जनहित की मांगों के समर्थन में, 20 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे सुभाष चौक, निहारिका, कोरबा में एक दिवसीय शांतिपूर्ण एवं संविधानसम्मत अनशन पर बैठ रहे है ।

यह अनशन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षा में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा, संविधान की गरिमा, लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण असहमति के सम्मान के समर्थन में है।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba 

अनशन के दौरान महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन भी प्रेषित किया जाएगा, जिसमें सोनम वांगचुक जी की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने, उनसे सार्थक संवाद स्थापित करने तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाएगा।

मैं कोरबा के सभी नागरिकों—विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, युवाओं और हर जागरूक नागरिक से हृदय से अपील करता हूँ कि इस शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अभियान में अपनी सहभागिता दें।

आप पूरे दिन अनशन नहीं कर सकते तो कुछ समय के लिए उपस्थित होकर अपना नैतिक समर्थन दें। और जो साथी हमारे साथ एक दिवसीय अनशन करना चाहते हैं, उनका हृदय से स्वागत है।

शिक्षा, छात्रों के भविष्य और लोकतंत्र की आवाज़ को मजबूत करें। हमने जिला प्रशासन को दिनांक 17/7/2026 को लिखित में सूचना दे दी है।
जय हिंद।

Bodies of 5 members of the same family found in CG : एक बंद कमरे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों का शव,3 मासूम बच्चे भी शामिल

Bodies of 5 members of the same family found in CG.
Bodies of 5 members of the same family found in CG.

रायपुर, Bodies of 5 members of the same family found in CG : छत्तीसगढ़ 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले संजय नगर इलाके (मदनी चौक) में शुक्रवार की देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक ही घर के भीतर से एक ही परिवार के 5 सदस्यों के शव बरामद किए गए। इस हृदयविदारक घटना की खबर हवा की तरह पूरे इलाके में फैल गई, जिसके बाद घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस खौफनाक और दुखद घटना के बाद से पूरे पड़ोस और स्थानीय निवासियों में गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

मृतकों में 3 मासूम बच्चे शामिल, मुखिया का शव फंदे पर मिला Bodies of 5 members of the same family found in CG.

Bodies of 5 members of the same family found in CG.
Bodies of 5 members of the same family found in CG.

पुलिस प्रशासन से मिली शुरुआती और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मृतकों की पहचान घर के मुखिया साजिद अली (50 वर्ष), उनकी पत्नी राबिया बानो , दो बेटियों और एक बेटे के रूप में हुई है। इस घटना में तीन बच्चों की भी मौत हुई है, जिनकी उम्र इस प्रकार है:📍बेटा सैयद इरशाद अली: 19 साल📍बड़ी बेटी शाहिना : 17 साल📍छोटी बेटी शबा : 16 साल

 

घटनास्थल का मुआयना करने पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घर के मुखिया साजिद अली का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया है। वहीं, उनकी पत्नी और तीनों बच्चों के शव संदिग्ध परिस्थितियों में बिस्तर पर पड़े मिले। पुलिस की प्रथम दृष्टया आशंका है कि साजिद अली ने पहले अपनी पत्नी और बच्चों को जहर दिया या उन्होंने सामूहिक रूप से जहर का सेवन किया, और उसके बाद साजिद ने खुद फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। हालांकि, मौत के सही कारणों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी।

 

8 महीने पहले ही आए थे किराए के मकान में Bodies of 5 members of the same family found in CG.

स्थानीय निवासियों और पड़ोसियों से पूछताछ में सामने आया है कि साजिद अली अपने पूरे परिवार के साथ करीब 8 महीने पहले ही मकान मालिक जहीर के घर में किराए पर रहने आए थे। पड़ोसियों ने बताया कि गुरुवार की शाम से ही उनके घर का दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था।

 

शुक्रवार को दिनभर और फिर देर रात तक जब घर में कोई हलचल महसूस नहीं हुई और न ही किसी ने दरवाजा खोला, तो पड़ोसियों को किसी अनहोनी का गहरा शक हुआ। इसके बाद स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए तत्काल टिकरापारा थाना पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब दरवाजा तोड़ा, तो भीतर का नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया।

आर्थिक तंगी और कर्ज के चलते होता था विवाद Bodies of 5 members of the same family found in CG.

पुलिस की शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, साजिद अली मौदहापारा इलाके में बैटरी रिपेयरिंग (मरम्मत) का काम करता था। पिछले कुछ समय से उसका काम ठीक नहीं चल रहा था और परिवार गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।

बताया जा रहा है कि परिवार पर कुछ भारी कर्ज (लोन) भी था, जिसकी वसूली के लिए बैंकों या फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंट अक्सर उनके घर आते थे। इस भारी कर्ज और तंगहाली की वजह से पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद और मानसिक तनाव रहने की बात भी सामने आ रही है। आशंका जताई जा रही है कि इसी आर्थिक मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर परिवार ने यह आत्मघाती कदम उठाया।

FSL टीम जांच में जुटी, पुलिस की अफवाहों से बचने की अपील Bodies of 5 members of the same family found in CG.

 

घटना की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की एक्सपर्ट टीम खोजी कुत्तों के साथ मौके पर पहुंच गई। FSL टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स, संदिग्ध दवाइयां और घटना से जुड़े तमाम साक्ष्यों व सामानों को अपने कब्जे में ले लिया है।

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की बेहद बारीकी और गंभीरता से जांच की जा रही है। सभी शवों को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि विसरा विश्लेषण रिपोर्ट और फॉरेंसिक (FSL) जांच के आधार पर ही मौत के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

 

इस संवेदनशील मामले को देखते हुए रायपुर पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर ध्यान न दें और न ही उन्हें शेयर करें।

अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि पुलिस पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है और जल्द ही जांच पूरी कर घटना की वास्तविक वजह सबके सामने लाई जाएगी।

Lotlota Rakhad Dam Dispute : काम तो आज चालू होगा चाहे मारना पड़े तो मारेंगे, अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे का वीडियो वायरल, ग्रामीणों में आक्रोश देखें वीडियो

कोरबा। Lotlota Rakhad Dam Dispute जिले के लोतलोता स्थित बंद पड़े राखड़ डैम को दोबारादोबारा शुरू कराने पहुंचे सीएसईबी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अधिकारी के कथित तौर पर ऐसे शब्द सुनाई दे रहे हैं, जिन्हें लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई है।

बताया जा रहा है कि राखड़ डैम का लंबे समय से ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। इसी बीच डैम को पुनः शुरू कराने पहुंचे अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बहस हो गई। इसी दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे के कथित बयान, “मारना पड़े तो मारो”, का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया।

Lotlota Rakhad Dam Dispute 

Lotlota Rakhad Dam Dispute 
Lotlota Rakhad Dam Dispute

 

वीडियो वायरल होते ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे ग्रामीणों के साथ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है। अब ग्रामीण इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लोतलोता राखड़ डैम पहले से ही पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर विवादों में रहा है। ऐसे में अधिकारी का कथित बयान सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। सोशल मीडिया पर भी वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

Lotlota Rakhad Dam Dispute 

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हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

 

Korba Breaking News : आवारा कुत्तो ने 5 वर्षीय मासूम की ली जान, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

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कोरबा – Korba Breaking News : 16 जुलाई। मानिकपुर चौकी क्षेत्र के दादर इलाके में गुरुवार शाम आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में एक 5 वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर तत्काल नियंत्रण के लिए प्रशासन से विशेष अभियान चलाने की मांग की हैँ.

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मृतक की पहचान प्रकाश पटेल (5 वर्ष) के रूप में हुई है। वह किशोर पटेल का पुत्र था और पहली कक्षा का छात्र था। परिवार मूल रूप से जांजगीर-चांपा जिले का निवासी है तथा वर्तमान में दादर क्षेत्र में मजदूरी कर जीवन-यापन कर रहा है।

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परिजनों के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 4 बजे किशोर पटेल एक मकान में मजदूरी कर रहे थे। इसी दौरान प्रकाश उनसे मिलने पहुंचा। कुछ देर बाद वह अकेले घर लौटने लगा। रास्ते में 5 से 6 आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर अचानक हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्चे को जमीन पर गिराकर बुरी तरह नोच डाला।

बेटे की चीख-पुकार सुनकर पिता मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि कुत्ते बच्चे को घसीटते हुए लगातार काट रहे थे। किसी तरह कुत्तों को भगाकर गंभीर रूप से घायल प्रकाश को तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे के सिर, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए।

घटना की सूचना मिलते ही मानिकपुर चौकी पुलिस अस्पताल पहुंची। अस्पताल से प्राप्त मेमो के आधार पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि दादर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे पहले भी राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में रोष है।

ग्रामीणों और परिजनों ने जिला प्रशासन एवं नगर निगम से मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने तथा उनकी बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा, कच्चा मकान भरभरा कर गिरा 9 लोग मालवे में दबे, मूसलाधार बारिश से बचने खड़े थे मकान के निचे

रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा, कच्चा मकान भरभरा कर गिरा 9 लोग मालवे में दबे, मूसलाधार बारिश से बचने खड़े थे मकान के निचे

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। रथयात्रा पर्व के दौरान लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच उरमाल बाजार में एक बड़ा हादसा हो गया। बारिश से बचने के लिए लोग बाजार स्थित ईंट-खपरे से बने एक पुराने होटल में शरण लिए हुए थे। इसी दौरान लगातार बारिश के कारण कमजोर हो चुका भवन अचानक भरभराकर ढह गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

भरभरा कर ढहा होटल


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय होटल के अंदर और आसपास 9 से अधिक लोग मौजूद थे। अचानक मलबा गिरते ही चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उरमाल पहुंचाया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उरमाल के डॉक्टर पांडे ने बताया कि एक व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है, जिसे एक्स-रे के लिए भेजा गया है। शेष सभी घायलों को सामान्य चोटें आई थीं, जिनका प्राथमिक उपचार कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

घायलों के नाम


घायलों में रोहित सिन्हा (28 वर्ष, ग्राम धोरकोट), प्रीतिवास (उरमाल), तिलेश्वर सोनवानी (बेहरामुड़ा), होरेंद्र सिंह मरकाम, उड़ीसा के बेहरामुड़ा निवासी एक व्यक्ति, दो वर्षीय एक बच्ची, चार वर्षीय एक बच्ची सहित अन्य लोग शामिल हैं।

घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और भवन गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

बालकोनगर में आयोजित जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव में उमड़े श्रद्धालु

बालकोनगर, 16 जुलाई। भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा का आयोजन बालकोनगर उत्कल भारती समिति द्वारा किया गया। इस अवसर पर बालको के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (धातु) श्री निकेत श्रीवास्तव सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिवारजन एवं बड़ी संख्या में नगरवासी धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के पश्चात भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा एवं भगवान बलभद्र को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर रथयात्रा का शुभारंभ किया गया।

श्री निकेत श्रीवास्तव ने पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा श्रद्धालुओं के साथ स्वयं रथ खींचकर इस पावन परंपरा में सहभागिता निभाई। रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रथयात्रा के आगे चल रहे कर्मा नृत्य दल ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को उत्सवमय बना दिया।

रथयात्रा राम मंदिर से प्रारंभ होकर बालकोनगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए रामलीला मैदान स्थित श्री गुंडिचा मंदिर पहुंची। यहां भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा एवं भगवान बलभद्र की विधिवत स्थापना की गई तथा विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। आयोजन समिति के अनुसार 16 जुलाई से 24 जुलाई तक श्री गुंडिचा मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, महाप्रसाद वितरण एवं अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बालकोनगर में पिछले 45 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। यह उत्सव केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक सहभागिता का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

Historic verdict by the CG High Court : बेवफा पत्नी को गुजारा भत्ता लेने का कोई हक़ नहीं हैँ

Historic verdict by the CG High Court
Historic verdict by the CG High Court

बिलासपुर : Historic verdict by the CG High Court :छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी का किसी अन्य पुरुष से संबंध साबित होता है, तो इसे एडल्ट्री माना जाएगा और ऐसी स्थिति में वह पति से भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी.

शादी के बाद अगर किसी महिला का दूसरे गैर मर्द से अवैध संबंध है, तो वह अपने पति से गुजारा भत्ता वसूल नहीं कर सकती है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐसे ही मामले में कहा कि धोखेबाज पत्नी को पति से गुजारा भत्ता पाने का कोई अधिकार नहीं है. हाईकोर्ट का ये फैसला उन पति को एक बड़ी राहत है, जिन्हें पत्नी के बेवफाई के बाद अदालतों का चक्कर लगाने और अपनी कमाई लुटाने के लिए मजबूर होने पड़ता था.

 

हाईकोर्ट ने जशपुर की रहने वाली एक महिला और युवक के मामले में ये फैसला सुनाया है. इन दोनों की शादी 19 अप्रैल 2018 को हिंदू रीति-रिवाज के जरिए हुई थी. लेकिन शादी के बाद दोनों के बीच काफी झगड़ें और मनमुटाव होने लगा. शादी के महज 8 महीने बाद दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए.

किन पत्नियों ने नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता?Historic verdict by the CG High Court

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जब ये मामला कोर्ट तक पहुंचा, तो पत्नी ने अपने पति और परिवार पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए और साथ ही भारी गुजारे भत्ते की मांग की. अदालत में खुद को पीड़ित बताने के लिए महिला ने ससुरालवालों पर कई गंभीर आरोप लगाए. उसका कहना था कि पति उसके चरित्र पर शक करता है. जब भी वह किसी से बात करती थई, तो उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया.

महिला ने आरोप लगाया कि 3 लाख रुपये दहेज के लिए वह से काफी परेशान हो गई. यहां तक की तंग आकर उसने खुदकुशी करने तक की कोशिश की. लेकिन ऐन वक्त पर ग्रामीणों ने उसे देख लिया और उसकी जान बचा ली. महिला इन सभी दुखों का हवाला देकर कोर्ट में गुजारा भत्ता की मांग करने लगी. लेकिन कहानी में उसकी ट्विस्ट तब आया जब पति ने अफेयर का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया.

पत्नी ने दिया पति को धोखा Historic verdict by the CG High Court

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जब पति ने पत्नी की बेवाफाई के सबूत अदालत के सामने पेश किए गए, तो पत्नी ने सबूत को झूठा साबित करने के लिए एक और बड़ा दावा कर डाला. महिला के वकील ने अदालत में बताया कि रायपुर फैमिली कोर्ट ने सबूत देख महिला को धोखेबाजी का दोषी करार दिया है. सभी आरोप फर्जी और मांग अवैध है. महीला का सीधा आरोप था कि उसके पति ने AI की मदद से नकली आवाज तैयार की और सबूत इक्ट्ठा किए. जिसके बाद कोर्ट ने सभी सबूतों की वैज्ञानिक जांच भी कराई.

महिला की याचिका हुई खारिज Historic verdict by the CG High Court

 

आखिरकार यह मामला बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच के सामने पहुंचा. कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं और निचली अदालत के रिकॉर्ड व मामले से जुड़े सबूतों की जांच की. जांच के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि रायपुर फैमिली कोर्ट के फैसले में कोई गलती नहीं है और पत्नी के खिलाफ पेश किए गए सबूत मजबूत हैं.

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई पत्नी अपनी इच्छा से किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध में रह रही है, तो वह पति से गुजारा भत्ता या आर्थिक सहायता मांगने की हकदार नहीं होगी. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला की याचिका खारिज कर दी गई और फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा गया.

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को बालको पुलिस ने किया गिरफ्तार

कोरबा। जिले में एक नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपी शिवा मंझवार उर्फ शिव सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजने की कार्रवाई की है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त स्कूटी को भी जब्त किया है।

पुलिस के अनुसार, घटना 10 जुलाई 2026 की है। करीब 14 वर्षीय किशोरी दोपहर के समय सोसायटी जाने के लिए घर से निकली थी। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले युवक ने भी सोसायटी जाने की बात कहकर किशोरी को अपनी स्कूटी पर बैठा लिया।

आरोप है कि रास्ते में युवक स्कूटी को बस्ती से आगे जंगल की ओर ले गया। वहां किशोरी को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद आरोपी किशोरी को जामबहार स्थित सोसायटी के पास लेकर पहुंचा, लेकिन तब तक सोसायटी बंद हो चुकी थी।

इसके बाद किशोरी ने आरोपी के साथ वापस जाने से इनकार कर दिया और जामबहार में रहने वाली अपनी एक परिचित महिला के घर पहुंची। किशोरी ने महिला को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद उसे सुरक्षित घर पहुंचाया गया। परिजनों को घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।

आरोपी गिरफ्तार, स्कूटी जब्त

पुलिस के मुताबिक, 14 जुलाई को आरोपी शिवा मंझवार उर्फ शिव सिंह थाने पहुंचा। पूछताछ और विवेचना के आधार पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त स्कूटी CG 12 BV 7078 को जब्त कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर 14 जुलाई को विधिवत गिरफ्तार किया। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजने की कार्रवाई की गई है।

कांग्रेस के पूर्व पार्षद महेश अग्रवाल की कथा या आत्मकथा कार्यकर्ता अब ‘यूज़र’ है, परिवार नहीं ?पढ़िए उनकी कलम से 

कोरबा ( ब्लैकआउट न्यूज़ )कांग्रेसबके पूर्व पार्षद महेश अग्रवाल का यह लेख सोशल मिडिया में वायरल है जिसमे उन्होंने राजनितिक दलों पर कटाक्ष करते हुए लिखा है हालांकि खुद भी कांग्रेस के नेता है और सक्रिय राजनीती में उनका बड़ा योगदान रहा है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है की यह कथा है या आत्मकथा बहरहाल पढ़िए उनकी खुद की कलम से

एक समय था जब राजनीति में कार्यकर्ता सबसे बड़ी पूंजी होता था। आज समय बदल गया है। अब सबसे बड़ी पूंजी है—पद, प्रचार और प्रोफाइल फोटो। पहले नेता के घर का दरवाज़ा हमेशा खुला रहता था, आज विपरीत स्थिति है।

पहले कार्यकर्ता किसी भी जिले में किसी वरिष्ठ नेता जनप्रतिनिधि के यहां पहुंच जाए तो वहां का नेता कहता था नाश्ता करिए, चाय लीजिए —”भोजन करिए, फिर काम देखते हैं।” आज जवाब मिलता है—”भाई, पहले टाइम लेकर आते , फिर देखेंगे।”

पहले जेब में पैसे कम होते थे,गाड़िया तो यदा कदा किसी के पास होती थी, लेकिन दिल बहुत बड़ा होता था। आज गाड़ियों का काफिला लंबा है, लेकिन मिलने का समय छोटा पड़ गया है।

पहले संगठन की पहचान थी—सेवा।अब पहचान है—सेल्फी। पहले गद्रे स्मृति भवन से लिखा गया एक पत्र पूरे प्रदेश के लिए आदेश नहीं, अपनापन होता था। आज सैकड़ों व्हाट्सऐप ग्रुप हैं, हजारों संदेश हैं, लेकिन जरूरत के समय मुश्किल में कोई मिलता नहीं है।

पहले नेता पूछता था—”घर में सब ठीक है? खाना खाया?” आज पूछता है—”अगला चुनाव किसके साथ हो?” पहले कार्यकर्ता का बेटा बीमार पड़ जाए तो नेता अस्पताल पहुंच जाता था। आज कार्यकर्ता खुद अस्पताल में है और नेता सोशल मीडिया पर “शीघ्र स्वास्थ्य लाभ” लिखकर अपना कर्तव्य पूरा मान लेता है।

पहले राजनीति एक परिवार थी। मतभेद थे, लेकिन मनभेद नहीं थे। पद छोटे-बड़े हो सकते थे, लेकिन कार्यकर्ता कभी छोटा नहीं होता था।आज राजनीति में सबसे तेज़ विकास अगर किसी चीज़ का हुआ है, तो वह है ‘मैं’ का।”हम” धीरे-धीरे शब्दकोश से गायब हो गया है।

सबकी सुविधाएं बढ़ीं, संसाधन बढ़े, सबके एसी कार्यालय बन गए, लग्जरी गाड़ियां आ गईं, मोबाइल और सोशल मीडिया आ गए, लेकिन रास्ते में थके हुए कार्यकर्ता को देखकर गाड़ी रोक देने वाली संवेदना कहीं पीछे छूट गई।

आज राजनीति में संगठन कम और प्रबंधन अधिक दिखाई देता है। समर्पण कम और समीकरण अधिक दिखाई देते हैं। रिश्ते कम और नेटवर्क अधिक दिखाई देते हैं।

कड़वा है, लेकिन सच है—

पहले नेता कार्यकर्ता बनाता था,
आज कार्यकर्ता नेता बनाता है… और नेता बनने के बाद वही कार्यकर्ता पहचान में नहीं आता।