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Shivay Hospital Korba: डॉ. नागेंद्र बागरी की निगरानी में 600 ग्राम के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग, 90 दिन NICU के बाद 2.070 किलो होकर घर जाने को तैयार

Shivay Hospital Korba
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कोरबा। Shivay Hospital Korba : उम्मीद कितनी भी छोटी क्यों न हो, अगर उसे संभालने वाले हाथ मजबूत हों तो जिंदगी मुश्किल से मुश्किल जंग भी लड़ सकती है। कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में जन्मे 600 ग्राम के एक नन्हे मासूम की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसने जन्म के बाद करीब 90 दिनों तक जिंदगी की कठिन परीक्षा का सामना किया और अब 2 किलो 70 ग्राम वजन के साथ डिस्चार्ज होने की स्थिति तक पहुंच गया है।

सर्वमंगला नगर निवासी विजय समर्थ और उनकी पत्नी करीब चार साल से अपने घर में बच्चे की किलकारी का इंतजार कर रहे थे। चार साल बाद जब खुशियों ने दस्तक दी, तो उसके साथ एक ऐसी चुनौती भी आई, जिसने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया।

 

15 जून की वह रात…Shivay Hospital Korba

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15 जून 2026 की रात करीब 1 बजे गर्भवती महिला को गंभीर और आपात स्थिति में शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा लाया गया। गर्भकाल महज 25 सप्ताह था। स्थिति को देखते हुए अस्पताल की टीम ने तत्काल जांच और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। डाक्टरों के कुशल मतदर्शन में करीब 2:20 बजे डिलीवरी हुई, लेकिन खुशी के उस पल के साथ परिवार के सामने जिंदगी की सबसे कठिन चुनौती खड़ी थी। नवजात का वजन महज 600 ग्राम था। इतना छोटा शरीर… और जिंदगी की इतनी बड़ी जंग।

नवजात को तत्काल NICU में भर्ती किया गया। इसके बाद शुरू हुआ करीब 90 दिनों का वह सफर, जिसमें हर दिन बच्चे की सांस और स्वास्थ्य को लेकर परिवार की उम्मीदें जुड़ी रहीं।

 

90 दिन NICU में… हर दिन उम्मीद और इंतजार  Shivay Hospital Korba

600 ग्राम के इस अति-प्रीमैच्योर बच्चे को करीब तीन महीने तक NICU में विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया। इस दौरान उसे विशेष नवजात देखभाल, श्वसन सहायता, नियंत्रित तापमान और लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत रही। इस पूरे उपचार के दौरान Paediatric विशेषज्ञ Dr. Nagendra Bagri सहित NICU की टीम ने बच्चे की लगातार निगरानी की। परिवार के लिए हर दिन एक ही सवाल होता था…आज बच्चा कैसा है?और हर छोटे सुधार के साथ उम्मीद थोड़ी और मजबूत होती गई।

धीरे-धीरे मासूम का वजन बढ़ने लगा। उसकी स्थिति में सुधार आता गया और 600 ग्राम से शुरू हुआ सफर अब 2.070 किलोग्राम तक पहुंच चुका है।

आरएमओ डॉ प्रवीण और डॉ बरखा ने भी संभाली कमान

नवजात की देखरेख के लिए आरएमओ डॉ प्रवीण और डॉ बरखा ने भी अहम भूमिका निभाते हुए लगातार बच्चे की देखरेख में लगे है। डॉ प्रवीण ने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ मरीज का बेहतर उपचार कर उन्हें नए जीवन देने का प्रयास करना।

 

डर से उम्मीद तक… पिता की आंखों में बदली तस्वीर

बच्चे के पिता विजय समर्थ उस मुश्किल दौर को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि पहली बार जब उन्होंने अपने बच्चे को देखा तो वह बेहद छोटा और नाजुक था। परिवार के लिए वह समय बेहद कठिन था।

विजय समर्थ के अनुसार, शिवाय हॉस्पिटल की डॉक्टरों और नर्सिंग टीम ने इलाज के साथ परिवार को लगातार हिम्मत दी। करीब तीन महीने तक बच्चे की देखभाल और निगरानी ने परिवार को उम्मीद बनाए रखने की ताकत दी।आज वही बच्चा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।

चार साल के लंबे इंतजार के बाद परिवार के लिए यह सिर्फ बच्चे के स्वस्थ होने की खबर नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी खुशी की वापसी है।

600 ग्राम से 2.070 किलो तक…

15 जून को जन्म के समय जिस बच्चे का वजन महज 600 ग्राम था, 19 सितंबर तक उसका वजन बढ़कर 2 किलो 70 ग्राम हो गया।परिवार के लिए यह महज वजन का आंकड़ा नहीं है।यह 90 दिनों की चिंता, इंतजार, दुआ और उम्मीद का हिसाब है।

शिवाय हॉस्पिटल के डॉक्टर नागेंद्र बागरी के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है।

 

शिवाय हॉस्पिटल: जहां नन्ही सांसों की जंग में परिवार के साथ खड़ी रही टीम

600 ग्राम जैसे बेहद कम वजन वाले नवजात की देखभाल में लगातार निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सा की जरूरत होती है। ऐसे समय में Dr. Nagendra Bagri (Paediatric), Dr. Barkha (Duty Doctor) और NICU टीम की निरंतर चिकित्सा निगरानी ने इस नन्हे मासूम के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिवाय हॉस्पिटल की NICU टीम के लिए भी यह मामला एक चुनौतीपूर्ण नवजात देखभाल का उदाहरण रहा, जहां उपचार के साथ परिवार को लगातार भरोसा और हिम्मत देना भी जरूरी था।

BALCO Cancer Hospital : बीएमसी का वार्षिक कॉन्क्लेव कैंसर के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगाः विष्णु देव साय

BALCO Cancer Hospital 
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रायपुर, 19 सितंबर 2026। वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की इकाई और मध्य भारत में कैंसर उपचार के प्रमुख केंद्र बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया। 18 से 20 सितंबर तक नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

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इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, आईएएस भी उपस्थित रहे।

इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के लिए राज्य के प्रयासों को और मजबूत करना तथा भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के व्यापक लक्ष्य में योगदान देना है।

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम संभव है। हमारा संकल्प है कि हम सर्वाइकल कैंसर मुक्त छत्तीसगढ़ से सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत की ओर आगे बढ़ें। इस मिशन में बीएमसी का वार्षिक कॉन्क्लेव क्षेत्र में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।”

छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “यह उत्साहजनक है कि देश और दुनिया के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रायपुर में एक साथ आए हैं।”

‘कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना’ विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव में स्तन, स्त्री रोग संबंधी और मूत्र-जनन तंत्र के कैंसर के उपचार में सही विकल्प चुनने पर विशेष चर्चा हुई। इसमें आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के साथ वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णय, मरीज-केंद्रित उपचार, उपचार की किफायती पहुँच, रोकथाम और समान अवसर पर जोर दिया गया।

बीएमसी ने एकैन्सर, टाटा मेमोरियल सेंटर और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में 20 से अधिक विशेषज्ञ पैनल चर्चाएँ, सजीव सर्जिकल प्रदर्शन और विशेष व्यावहारिक कार्यशालाएँ आयोजित कीं। कॉन्क्लेव में 500 से अधिक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय विशेषज्ञों तथा 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।

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कैंसर उपचार में उल्लेखनीय योगदान के लिए बीएमसी ने वेदावती अग्रवाल ऑरेशन अवॉर्ड से डॉ. रवि कन्नन को सम्मानित किया। उन्हें टिकाऊ और समान अवसर वाली कैंसर देखभाल तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने में उनके योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। यह ऑरेशन वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने अपनी माता और वेदांता के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल की माता स्वर्गीय श्रीमती वेदावती अग्रवाल जी की स्मृति में शुरू किया है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर वाली कैंसर देखभाल को सभी तक पहुँचाने की साझा सोच को आगे बढ़ाना है।

डॉ. भावना सिरोही, मेडिकल डायरेक्टर, बालको मेडिकल सेंटर ने कहा, “बीएमसी में हमारा मानना है कि कैंसर की रोकथाम बीमारी का बोझ कम करने का एक प्रभावी तरीका है और केवल भौगोलिक दूरी के कारण किसी मरीज की गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुँच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। हमारा उद्देश्य मध्य भारत में ऐसी व्यापक कैंसर देखभाल व्यवस्था विकसित करना है, जहाँ मरीजों को अपने घर के करीब रोकथाम, जाँच, निदान, उपचार, पुनर्वास और सहायक सेवाएँ मिल सकें।

महिलाओं में होने वाले कैंसर के बेहतर उपचार पर केंद्रित चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रमुखता दी गई। बीएमसी एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रमों और सुलभ स्व-जाँच विधियों के माध्यम से सरकारी पहलों को सहयोग दे रहा है। उन्नत इंटरस्टिशियल ब्रैकीथेरेपी की शुरुआत के साथ बीएमसी उन्नत अवस्था के सर्वाइकल कैंसर के उपचार में बेहतर परिणामों की दिशा में काम कर रहा है।

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए बीएमसी का नया स्तन स्वास्थ्य क्लिनिक पूरी तरह महिला कैंसर विशेषज्ञों द्वारा संचालित है। कई स्थानीय महिलाएँ स्तन और स्त्री रोग संबंधी जाँच के लिए महिला चिकित्सकों को प्राथमिकता देती हैं। यह विशेष टीम महिलाओं को गोपनीय, सहज और सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराती है, जिससे वे जाँच के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित हों।”

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शोध के महत्व पर डॉ. दिवाकर पांडे, कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, बालको मेडिकल सेंटर ने कहा, “कैंसर उपचार की प्रभावी और टिकाऊ रणनीति तैयार करने में शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह देखकर खुशी होती है कि युवा कैंसर विशेषज्ञ अपने मरीजों और समुदायों की स्थानीय जरूरतों से जुड़े शोध में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। ऐसे शोध से रोकथाम और उपचार की ऐसी रणनीतियाँ विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो प्रभावी होने के साथ किफायती और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हों।”

कॉन्क्लेव में वूमेन फॉर ऑन्कोलॉजी (डब्ल्यू4ओ) का आयोजन भी हुआ। यह महिला कैंसर विशेषज्ञों के बीच सहयोग, मार्गदर्शन और नेतृत्व को बढ़ावा देने वाला मंच है।

अकादमिक कार्यक्रमों के साथ बीएमसी ने ‘कैनवास फॉर ‘ए’ लाइफ’ कला एवं विरासत प्रदर्शनी भी आयोजित की। इसका उद्देश्य बीएमसी चैरिटेबल फंड के माध्यम से मरीजों को उपचार, जाँच और पोषण के लिए आर्थिक सहायता के साथ उपचार के दौरान आवास और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव का समापन क्षेत्र में कैंसर की रोकथाम को जनस्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

SECL द्वारा हरदीबाजार के CHC, पटवारी भवन को जमींदोज किये जाने पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश भाजपा विधायक के नेतृत्व में GM दफ़्तर में तालाबंदी

कोरबा / हरदीबाजार 19 सितंबर 2026: राज्य, जिला पंचायत और केंद्र में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के बावजूद कटघोरा के भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल को अपनी ही व्यवस्था और प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। शुक्रवार तड़के पुलिस बल की मौजूदगी में एसईसीएल (SECL) द्वारा हरदीबाजार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को बुलडोजर से जमींदोज किए जाने के बाद विधायक और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।

शनिवार को विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में सराई सिंगार, रेंकी और आसपास के गांवों के सैकड़ों भू-विस्थापितों ने दीपका स्थित SECL महाप्रबंधक (GM) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी और दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।

वोट बैंक खिसकने की आशंका और चुनावी रोष

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विधायक का यह सख्त रुख न केवल जनहित से जुड़ा है, बल्कि आगामी चुनावों में होने वाले बड़े राजनीतिक नुकसान का परिणाम भी है। SECL की दीपका विस्तार परियोजना के तहत 18 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के कारण कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा पर बुलडोजर चलने और विस्थापितों की अनदेखी से जनता में गहरा आक्रोश है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

विस्थापितों और विधायक की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने SECL प्रबंधन पर एकतरफा और तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:

100% उचित मुआवजा: भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी परिवारों को नियमानुसार पूर्ण और न्यायसंगत मुआवजा मिले।

नौकरी और पुनर्वास: प्रभावित विस्थापितों को स्थायी नौकरी और सम्मानजनक नई बसाहट उपलब्ध कराई जाए।

वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था: ध्वस्त किए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के विकल्प के तौर पर तत्काल योग्य डॉक्टरों और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की जाए।

वार्ता विफल, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

धरने के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दीपका जीएम अशोक कुमार मौके पर पहुंचे और विधायक व ग्रामीणों से चर्चा की। हालांकि, ठोस और लिखित आश्वासन न मिलने के कारण वार्ता पूरी तरह विफल रही। विस्थापितों और विधायक ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक मांगों का लिखित समाधान नहीं होता, आंदोलन खत्म नहीं होगा। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

बालको में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई भगवान विश्वकर्मा जयंती

बालकोनगर, 17 सितंबर 2026। वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में भगवान विश्वकर्मा की जयंती श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संयंत्र की विभिन्न इकाइयों और कार्यालयों में पूजा-अर्चना कर कंपनी की निरंतर प्रगति, कर्मचारियों की सुरक्षा और समृद्धि की कामना की गई।

सुबह से ही संयंत्र परिसर में उत्सव का माहौल रहा। विभिन्न इकाइयों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर आकर्षक सजावट की गई। कंपनी के सीईओ एवं वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेका कामगारों ने एकजुट होकर पूजा-अर्चना में भाग लिया। धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया गया।

भगवान विश्वकर्मा को सृजन, शिल्पकला और निर्माण का देवता माना जाता है। उनकी आराधना बालको की उस कार्यसंस्कृति को भी अभिव्यक्त करती है, जिसमें सुरक्षा, नवाचार, जिम्मेदारी और निरंतर प्रगति को विशेष महत्व दिया जाता है। यह अवसर प्रत्येक कर्मचारी को सुरक्षित कार्यप्रणाली अपनाने और सामूहिक प्रयासों से बेहतर भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक श्री राजेश सिंह ने कहा, “भगवान विश्वकर्मा की आराधना हमें सृजन के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देती है। बालको में प्रत्येक कर्मचारी का योगदान हमारी सामूहिक प्रगति का आधार है। सुरक्षित कार्यसंस्कृति, नवाचार और टीम भावना के साथ हम औद्योगिक विकास के नए आयाम स्थापित करने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बालको में विश्वकर्मा जयंती का आयोजन औद्योगिक परंपरा और आधुनिक कार्यसंस्कृति के सुंदर संगम का प्रतीक है। यह पर्व कर्मचारियों के बीच एकजुटता को मजबूत करने के साथ सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के संकल्प को दोहराने का अवसर भी है।

बालको मेडिकल सेंटर ने किया स्तन कैंसर की लाइव सर्जरी का आयोजन

कोरबा, 18 सितंबर 2026।* मध्य भारत में कैंसर उपचार के प्रमुख केंद्र बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने रायपुर में चौथे वार्षिक छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का शुभारंभ स्तन संरक्षण और स्तन पुनर्निर्माण की लाइव सर्जिकल डेमोन्स्ट्रेशन के साथ किया। इस दौरान देशभर से आए 50 से अधिक सर्जन और चिकित्सकों ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों को देखा और स्तन कैंसर के उपचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

लाइव सर्जिकल डेमोन्स्ट्रेशन का नेतृत्व मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल की सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. शलाका जोशी, प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जन डॉ. दुष्यंत जायसवाल और कोलकाता स्थित टाटा मेडिकल सेंटर के वरिष्ठ स्तन कैंसर सर्जन डॉ. संजीत कुमार अग्रवाल ने किया।

डेमोन्स्ट्रेशन के दौरान स्तन संरक्षण सर्जरी में ट्यूम र के साथ उसके आसपास के स्वस्थ ऊतक का एक हिस्सा निकालते हुए स्तन के अधिकांश हिस्से को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया दिखाई गई। इसमें कैंसर सर्जरी के साथ प्लास्टिक सर्जरी की तकनीकों का भी उपयोग किया गया, जिससे बचे हुए स्तन ऊतक को व्यवस्थित कर उसके आकार और स्वरूप को बनाए रखने में मदद मिलती है।

इसका का उद्देश्य आधुनिक सर्जिकल तकनीकों को साझा करने के साथ चिकित्सकों के बीच अनुभव और ज्ञान का आदान-प्रदान करना था। इस दौरान सर्जिकल योजना, उपचार के विकल्पों और मरीज-केंद्रित निर्णयों पर भी चर्चा हुई।

भारत में स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों पर डॉ. शलाका जोशी ने कहा, “स्तन कैंसर आज दुनिया और भारत में महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है। भारत में इस बीमारी से जूझ रही कई महिलाएँ देर से उपचार के लिए पहुँचती हैं, जिससे उपचार अधिक जटिल और परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। बेहतर परिणामों के लिए जागरूकता, शुरुआती पहचान, सही निदान, उचित उपचार और पुनर्वास तक देखभाल की निरंतरता जरूरी है। मरीजों के आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की क्षमता को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव जैसे मंच चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों को देखने, जटिल मामलों पर चर्चा करने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर देते हैं।”

लाइव सर्जिकल डेमोन्स्ट्रेशन में स्तन पुनर्निर्माण की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। बालको मेडिकल सेंटर की कंसल्टेंट, प्लास्टिक, पुनर्निर्माण एवं एस्थेटिक सर्जन डॉ. इशिता कात्याल ने कहा, “कैंसर उपचार का उद्देश्य केवल बीमारी को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना भी है। स्तन पुनर्निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारा प्रयास स्तन के प्राकृतिक स्वरूप और संतुलन को यथासंभव बनाए रखना है, ताकि मरीज आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।”

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बीएमसी में स्तन स्वास्थ्य क्लिनिक का शुभारंभ किया। यह पहल क्षेत्र में व्यापक स्तन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के बीएमसी के प्रयासों का हिस्सा है। महिला विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के नेतृत्व में संचालित यह क्लिनिक विभिन्न विशेषज्ञताओं को एक साथ लाकर स्तन स्वास्थ्य प्रबंधन, कैंसर उपचार, स्तन पुनर्निर्माण और कॉस्मेटिक ब्रेस्ट सर्जरी की सभी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा।

इसके बारे में सर्जन आरती सरीन (सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल), पूर्व महानिदेशक, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाएँ ने कहा, “कैंसर उपचार में शुरुआती पहचान और समय पर उपचार महत्वपूर्ण है। व्यापक स्तन स्वास्थ्य क्लिनिक इस क्षेत्र में स्तन स्वास्थ्य से जुड़ी संपूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें कैंसर की रोकथाम, नियमित जाँच, शुरुआती निदान, समय पर उपचार और पुनर्निर्माण के साथ पोषण, फिजियोथेरेपी और लिम्फेडेमा प्रबंधन जैसी सहायक सेवाएँ भी शामिल होंगी।”

इस पर डॉ. भावना सिरोही, मेडिकल डायरेक्टर एवं वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, बालको मेडिकल सेंटर ने कहा, “कैंसर उपचार से जुड़ी विभिन्न विशेषज्ञ सेवाओं को एक साथ लाकर हमारा उद्देश्य मध्य भारत में उपचार की निरंतरता को मजबूत करना और महिलाओं को निदान एवं उपचार से लेकर स्वस्थ होने तक उनकी पूरी उपचार यात्रा में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। यह दृष्टिकोण क्षेत्र में अधिक सुलभ और मरीज-केंद्रित कैंसर उपचार व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान देगा।”

चौथा वार्षिक छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव क्षेत्र में कैंसर उपचार की विशेषज्ञ क्षमताओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सहयोग और निरंतर सीखने को बढ़ावा देने की बीएमसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। देश के अग्रणी विशेषज्ञों और क्षेत्रीय चिकित्सकों को एक मंच पर लाकर यह आयोजन मध्य भारत में कैंसर उपचार से जुड़ी जानकारी और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान कर रहा है।

Korba break : तालाब में डूबने से एक मोहल्ले की तीन बच्चियों की मौत,गांव में पसरा मातम 

Korba break

कोरबा | छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र में तालाब में नहाने गई तीन बच्चियां गहराई में डूब गईं. मृतकों की पहचान इंदु (7 वर्षीय), राखी (8 वर्षीय) और साधना (8 वर्षीय) के रूप में हुई है. तीनों बच्चियां एक ही बस्ती की रहने वाली थीं और आपस में सहेलियां थीं.दरअसल उस दिन तीनों बच्चियां स्कूल नहीं गई थीं और घर पर ही थीं. उनके परिजन काम पर गए हुए थे. दोपहर के समय तीनों तालाब नहाने गई थीं. काफी देर तक वापस घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई।

 

 

परिजन और ग्रामीण तालाब पर पहुंचे तो किनारे पर तीनों बच्चों के कपड़े और चप्पल मिले. इसी दौरान तालाब में इंदु का शव तैरता हुआ दिखाई दिया. संदेह गहराने पर तालाब में खोजबीन शुरू की गई.जानकारी के मुताबिक, तीनों बच्चियां स्कूल जाने के बजाय तालाब में नहाने चली गई थीं. इसी दौरान गहरे पानी में सभी डूब गईं. स्कूल से नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की. पता चला कि तीनों तालाब गईं थी. इसके बाद अलगू तालाब में उन्हें ढूंढने के प्रयास शुरू किया गया.घटना की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई. सूचना मिलते ही पाली थाना प्रभारी मनोज कौशिक स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे.

 

पुलिस और ग्रामीणों ने तालाब में उतरकर तलाश शुरू की. काफी मशक्कत के बाद राखी और साधना के शव भी बरामद कर लिए गए.बताया जा रहा है कि जब तीनों सहेली नहाने गईं, उस दौरान तालाब पर कोई नहीं था. एक ग्रामीण जब तालाब के पास पहुंचा तो एक का शव तैरता देखा. उसके बाद भीड़ जुट गई और पुलिस को सूचना दी गई. प्रारंभिक जांच में डूबने से मौत की आशंका जताई जा रही है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.पाली थाना प्रभारी मनोज कौशिक ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची. तीनों बच्चियों के शव बरामद कर आवश्यक कार्रवाई की गई है.

बालको मेडिकल सेंटर ने मध्य भारत में कैंसर उपचार को बनाया अधिक सुलभ

 

कैंसर का पता चलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन मध्य भारत के कई मरीजों के लिए असली चुनौती उपचार केंद्र तक पहुँचना भी है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को कई सौ किलोमीटर दूर बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। रहने की व्यवस्था, काम से छुट्टी और बार-बार परामर्श, जाँच, कीमोथेरेपी, सर्जरी और फॉलो-अप के लिए यात्रा, ये सब परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं।

इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में नया रायपुर में बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) की स्थापना हुई। आज आठ वर्षों बाद बीएमसी मध्य भारत में विशेषज्ञ कैंसर उपचार की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है। अब तक यहाँ 75,000 से अधिक मरीजों का उपचार, लगभग 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96,000 से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं।

कोंडागांव के 28 वर्षीय एक मरीज की कहानी इस बदलाव को समझने में मदद करती है। नया रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रहने वाले इस मरीज को दुर्लभ और गंभीर रक्त कैंसर का पता चला। बीएमसी में कई चरणों की कीमोथेरेपी के बाद उनका ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। उपचार के लिए उन्हें अलग-अलग संस्थानों के बीच भटकना नहीं पड़ा और उनका पूरा उपचार एक ही केंद्र में हुआ।

इसी तरह, 48 वर्षीय एक मरीज को पैंक्रियाज के ऐसे कैंसर का पता चला, जिसकी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से बीएमसी में उनका उपचार किया गया। दो वर्ष बाद जब वे फॉलो-अप के लिए लौटे, तो वे स्वस्थ थे और सामान्य जीवन में वापस आ चुके थे।

ये अनुभव बताते हैं कि कैंसर उपचार में विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका मरीज तक पहुँचना और उपचार का पूरा होना। बीएमसी का प्रयास इसी दिशा में है, उपचार के विभिन्न चरणों को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध कराना। यहाँ मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ हेमेटोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पैलिएटिव केयर टीम मिलकर काम करती हैं। मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के माध्यम से विशेषज्ञ मरीज की स्थिति की संयुक्त समीक्षा कर उपचार की योजना तैयार करते हैं।

बीएमसी ने मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, उन्नत जाँच और हेमेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का भी विस्तार किया है। यहाँ 180 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं और इसका ट्रांसप्लांट कार्यक्रम मध्य भारत के बड़े कार्यक्रमों में शामिल है।

उपचार के साथ मरीजों और उनके परिजनों की अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है। सुख सराय में उपचार के दौरान रियायती आवास की सुविधा मिलती है। दूरदराज के मरीजों के लिए परिवहन सहायता उपलब्ध है, जबकि कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार दिया जाता है। पात्र मरीजों को उपचार और जाँच के लिए बीएमसी चैरिटेबल फंड से आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिसमें सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहने वाले मरीज भी शामिल हैं।

प्रारंभिक पहचान के महत्व पर वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत कश्यप कहते हैं, “कैंसर के उपचार में इसकी शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी किस अवस्था में सामने आती है, इसका सीधा असर उपचार के विकल्पों और परिणामों पर पड़ सकता है। इसलिए नियमित जाँच और जागरूकता के माध्यम से कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में करना आवश्यक है। इसी दिशा में केंद्र ने छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण एवं शहरी समुदायों में 500 से अधिक कैंसर जाँच और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसमें स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुख का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर व ओरल (मुख) के कैंसर पर विशेष ध्यान दिया गया है।”

आज बीएमसी तक छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी मरीज पहुँच रहे हैं। इससे नया रायपुर की भूमिका क्षेत्रीय कैंसर उपचार केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है। बालको मेडिकल सेंटर में सभी सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, मुख्य मंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अलावा सभी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञ उपचार, ट्रांसप्लांट, बहु-विषयक चिकित्सा, आर्थिक सहायता, आवास, परिवहन और शुरुआती जाँच, इन सभी को एक साथ लाकर बीएमसी कैंसर उपचार की राह में आने वाली कई दूरियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। उद्देश्य यही है कि मरीज की उपचार यात्रा में दूरी उसकी उम्मीद और उपचार के बीच बाधा न बने।

10 accused sentenced to death in CG : झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को फांसी की सजा, 13 साल बाद NIA की विशेष अदालत का फैसला

10 accused sentenced to death in CG 
10 accused sentenced to death in CG 

जगदलपुर/रायपुर। 10 accused sentenced to death in CG : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद अदालत का फैसला आया है। जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इससे पहले 5 सितंबर 2026 को अदालत ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था।

25 मई 2013 को हुआ था हमला 10 accused sentenced to death in CG

10 accused sentenced to death in CG 
10 accused sentenced to death in CG

25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और अन्य कांग्रेस नेताओं सहित कुल 29 लोगों की मौत हुई थी।

करीब 13 साल चली न्यायिक प्रक्रिया 10 accused sentenced to death in CG

मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मामले में कुल 11 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि अन्य आरोपी अभी फरार बताए गए हैं।

10 दोषियों को मृत्युदंड 10 accused sentenced to death in CG

5 सितंबर को दोषसिद्धि के बाद अदालत ने 16 सितंबर को सजा का ऐलान किया। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड दिया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं।

अभी फांसी की सजा लागू नहीं होगी

 

कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा को हाईकोर्ट से पुष्टि (confirmation) मिलना आवश्यक है। दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। इसलिए अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बावजूद इसे तत्काल लागू नहीं किया जाएगा।

झीरम कांड की जांच और साजिश पर सवाल

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे गंभीर माओवादी हमलों में गिना जाता है। इस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी हमले के व्यापक षड्यंत्र, इसमें शामिल अन्य लोगों और फरार आरोपियों से जुड़े सवाल चर्चा में बने हुए हैं। अदालत का यह फैसला मामले में अभियोजन के खिलाफ चले मुकदमे में 10 दोषियों के संबंध में ट्रायल कोर्ट का निर्णय है; आगे हाईकोर्ट में अपील और मृत्युदंड की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया बाकी है।

अब UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज, 15 अक्टूबर से लागु,जाने कितने ट्रांजेक्शन पर कितना लगेगा चार्ज

नई दिल्ली। UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा। फीस की मैक्सिमम लिमिट 300 रुपए तक की गई है। यह अमाउंट अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर निर्भर करेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बिजनसेमैन से लिया जाएगा।

हालांकि ₹2,000 तक पेमेंट करने पर ग्राहक और बिजनेसमैन दोनों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर यह स्थिति साफ कर दी थी। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस छूट में शामिल किया गया है।

दरअसल, अगस्त में संसद से टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास होने के बाद UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर चर्चा शुरू हुई थी।

BALCO : एल्यूमिनियम निर्माण के अगले अध्याय को आकार देते बालको के इंजीनियर

बालकोनगर, 15 सितंबर, 2026। हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।

 

बालको जब 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहाँ हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।

 

पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू कहती हैं, “मैं उन युवा इंजीनियर्स में से एक हूँ, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहाँ प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।”

बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं, “एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआई और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।”

एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ कहते हैं, “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”

कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं, “हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है।”

कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।