रायपुर (ब्लैकआउट न्यूज़)Chhattisgarh IAS Transfers छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग महानदी रायपुर में 43 आईएएस अफसर का तबादला सूची जारी किया है जिसमें कई जिले के कलेक्टर भी प्रभावित हुए हैं देखिए सूची :
Chhattisgarh IAS Transfers



कोरबा। शहर के शांत, सहज, सरल और मृदुभाषी व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाने वाले विजय लाम्बा का बुधवार को 64 वर्ष की आयु मे आकस्मिक निधन हो गया। विजय लाम्बा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित नागरिक सुरेंद्र लाम्बा के छोटे भाई थे।

उनके निधन की खबर फैलते ही परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों में गहरा शोक व्याप्त हो गया। कोरबा अंचल में उन्हें मिलनसार और सौम्य स्वभाव के लिए जाना जाता था। उनके निधन से समाज ने एक संवेदनशील और स्नेही व्यक्तित्व को खो दिया है।
विजय लाम्बा का अंतिम संस्कार आज दोपहर 1 बजे स्थानीय मुक्तिधाम में किया जाएगा।
BALCO Organizes Bada Khana 2026
बालकोनगर, 04 मई 2026। BALCO Organizes Bada Khana 2026 : वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने वित्तीय वर्ष 2026 में लगातार दूसरे वर्ष शून्य सुरक्षा दुर्घटनाएं और शून्य चोरी की घटनाएं दर्ज करते हुए सुरक्षा प्रदर्शन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इन उपलब्धियों के पीछे सुरक्षा टीम के समर्पण और प्रतिबद्धता को सम्मानित करने के लिए कंपनी ने ‘बड़ा खाना 2026’ के तीसरे संस्करण का आयोजन किया.

वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान बालको ने कुल घटनाओं में लगभग 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की और बिना किसी संचालन बाधा के सफल रिकवरी सुनिश्चित की। यह उपलब्धि एक सुदृढ़ सुरक्षा ढांचे के माध्यम से संभव हुई, जिसमें तकनीक-सक्षम निगरानी, डेटा-आधारित विश्लेषण और अनुशासित क्रियान्वयन को संयोजित किया गया। इस दौरान 55 लाख से अधिक बालको एवं व्यावसायिक साझेदार कर्मचारियों की आवाजाही और 1.25 लाख से अधिक वाहन गतिविधियों की निगरानी उन्नत सर्विलांस सिस्टम और जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए की गई। साथ ही 1500 से अधिक ‘सुरक्षा मित्रों’ से प्राप्त रियल-टाइम इंटेलिजेंस के आधार पर लगभग 37 प्रतिशत संभावित घटनाओं को पहले ही रोका गया, जो सामुदायिक सहभागिता आधारित सतर्कता मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

सुरक्षा को एक रणनीतिक सक्षमकर्ता के रूप में स्थापित करते हुए ‘बड़ा खाना 2026’ में 200 से अधिक बालको कर्मचारी, व्यावसायिक साझेदार और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह पहल सुरक्षा कार्यप्रणाली में जवाबदेही, अनुशासन और सक्रिय जोखिम प्रबंधन को पहचानने और प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण मंच रही।

बालको के सीईओ राजेश कुमार सिंह ने कहा कि हमारे लिए ‘जीरो हानि’ और उत्कृष्टता केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि हमारी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर निर्णय और कार्य को दिशा देता है। तकनीक के बेहतर उपयोग, मजबूत प्रक्रियाओं और साझा जिम्मेदारी की भावना के साथ हम सुरक्षा और संरक्षा के क्षेत्र में लगातार अच्छे और स्थिर परिणाम हासिल कर रहे हैं। हमारी टीम का समर्पण और अनुशासन इस सफलता की मुख्य ताकत है। आने वाले समय में हम अपने सिस्टम को और उन्नत करेंगे। साथ ही नई तकनीकों को अपनाएंगे और संभावित जोखिमों को पहले से पहचानने की क्षमता बढ़ाएंगे, ताकि कार्यस्थल को और अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ बनाया जा सके।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें नृत्य और संगीत के साथ-साथ सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (सीएसओसी) टीम द्वारा अग्नि सुरक्षा जागरूकता पर आधारित नाट्य प्रस्तुति शामिल थी। सम्मान समारोह के दौरान विभिन्न व्यक्तियों और टीमों को घटना रोकथाम, आपातकालीन प्रतिक्रिया और संचालन अनुशासन में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया।
कंपनी ने सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए स्वचालित निगरानी और सख्त अनुपालन तंत्र लागू किए हैं। फायर एवं रेस्क्यू टीमों ने जिला प्रशासन के सहयोग से मॉक ड्रिल आयोजित कर आपातकालीन तैयारी को मजबूत किया। इसके साथ ही, 5500 से अधिक लोगों को अग्नि सुरक्षा, सीपीआर और आपातकालीन प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
बालको की सुरक्षा प्रणाली उन्नत तकनीक और समावेशी पहलों के माध्यम से निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और अनुपालन को सशक्त बनाती है। इसमें पूर्णतः महिला संचालित सीएसओसी शामिल है, जिसमें 11 ट्रांसजेंडर कर्मियों की भागीदारी है। साथ ही 1600 से अधिक एआई-आधारित कैमरे, 59 वाहनों की जीपीएस आधारित निगरानी, क्यूआर कोड आधारित पेट्रोलिंग और एक समर्पित त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्यूआरटी) कार्यरत है। इस व्यवस्था को 14 प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड, 100 प्रतिशत बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल और प्रभावी समन्वय के लिए एकीकृत संचार प्रणालियों का मजबूत सहयोग प्राप्त है, जिससे सुरक्षा तंत्र और अधिक सुदृढ़ और भरोसेमंद बनता है।
बालको सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने, तकनीक के उपयोग को विस्तार देने और सुरक्षा संस्कृति को संस्थागत रूप से और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि एक सुरक्षित, सुदृढ़ और भविष्य-तैयार संचालन तंत्र सुनिश्चित किया जा सके।
कोरबा : (ब्लैकआउट न्यूज़) Oxygen cylinder explodes at Dr Nayak’s place : कोरबा की ख्याति लब्ध चाइल्ड केयर सेंटर डॉक्टर हरिश नायक के हॉस्पिटल मे एक बड़ा हादसा टल गया अचानक ऑक्सीजन सिलेंडर में जोर से धमाके के साथ आग लग गयी आनन फानन में लोगों ने आग पर काबू पा लिया बताया जा रहा है.
कि जहां बच्चों को लाइव सपोर्ट के रूप में ऑक्सीजन सप्लाई होती है इस प्लांट का कोई सिलेंडर अचानक फट गया जिससे अफरा तफरी का माहौल कायम हो गया आनन फानन में लोगों ने आग पर काबू पा लिया जिससे बड़ा हादसा टल गया.

रायपुर/दिल्ली। कुछ ही देर पहले आपके फोन पर खतरे की घंटी बजी है। दरअसल यह तेज आवाज के साथ आने वाला एक इमरजेंसी अलर्ट है, जो कि दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा मिलकर किए जा रहे सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की टेस्टिंग के तौर पर भेजा गया। इसे लोग किसी तरह का खतरा समझ सकते हैं, लेकिन यह कोई खतरा नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा की तैयारी है। दरअसल सरकार यह चेक करना चाहती है कि भविष्य में किसी आपदा के समय लोगों तक सही तरीके से जानकारी और अलर्ट भेजा जा सकता है या नहीं।

एक समय तक सरकार आपदाओं से जुड़ी जानकारी सचेत सिस्टम के जरिए SMS के द्वारा भेजती थी। हालांकि ऐसे खतरे जिसमें समय की कमी बड़ा पहलू होती है जैसे कि बिजली गिरना, सुनामी या गैस लीक आदि को देखते हुए सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी को लाया गया। इसका फायदा यह था कि SMS नेटवर्क की वजह से अटक सकता था या फिर देर से पहुंच सकता था लेकिन सेल ब्रॉडकास्ट एक साथ एक खास इलाके के सभी मोबाइल फोन पर तुरंत पहुंचता है।

इसे C-DOT ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। इस टेक्नोलॉजी की खासियत है कि इसके लिए मोबाइल में नेटवर्क का सिग्नल मजबूत होना भी जरूरी नहीं है, यह सीधे टॉवर से फोन तक पहुंच सकती है।

कोरबा – rescue of poisonous snake : कोरबा जिले में मौसम का मिज़ाज बदलते ही सांपों के निकलने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है,अलग-अलग क्षेत्रों से सांप निकलने की सूचनाएं मिल रही हैं।
जितेंद्र सारथी और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए कई स्थानों पर सफल रेस्क्यू ऑपरेशन किए,ताजा मामले में एक जहरीला कोबरा सांप एक गाड़ी के अंदर घुस गया था, जिससे आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी व सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया,रेस्क्यू के बाद सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया।

रेस्क्यू टीम ने लोगों से अपील की है कि इस मौसम में सतर्क रहें, घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा किसी भी स्थिति में सांप को खुद पकड़ने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंतवन विभाग एवं विशेषज्ञों को सूचना दें।
वाइल्डलाइफ रेस्क्यु टीम
हेल्प लाइन नंबर
8817534455,7999622151
कोरबा : Massive Fire at Korba Plant : जिले के बांधाखार स्थित मारुति क्लीन कोल एंड पावर प्लांट में बुधवार की रात करीब 1.45 बजे 300 मेगावाट यूनिट से जुड़े पावर ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई। आग लगते ही प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और एहतियातन यूनिट का संचालन बंद करना पड़ा। घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है और लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि ट्रांसफार्मर से अचानक धुआं और तेज लपटें उठने लगीं। सूचना मिलते ही प्लांट की सुरक्षा टीम और चाकाबुड़ा स्थित संयंत्र से दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। समय रहते कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
घटना के बाद प्लांट प्रबंधन ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी और ओवरलोडिंग को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रबंधन द्वारा अतिरिक्त रुप से रखे गए पावर ट्रांसफार्मर को जोड़ कर बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर जिले के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ समय पहले वेदांता पावर प्लांट में हुए बायलर विस्फोट की भयावह घटना अभी भी लोगों के जेहन में ताजा है। उस हादसे में 25 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे।
उस घटना के बाद उद्योगों में सुरक्षा मानकों को लेकर बड़े दावे किए गए थे, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं व्यवस्थाओं की पोल खोल रही हैं। कोरबा को ऊर्जा नगरी कहा जाता है और यहां सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के कई बड़े ताप विद्युत संयंत्र संचालित हैं। ऐसे में लगातार सामने आ रहे हादसे श्रमिकों की सुरक्षा और प्लांटों की तकनीकी निगरानी पर गंभीर चिंता पैदा कर रहे हैं।
बालको : BALCO’s Commendable Contribution : छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। धान यहां की मुख्य फसल है। टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के रिसर्च से पता चलता है कि खरीफ के मौसम में लगभग 85% कृषि भूमि का उपयोग धान उगाने के लिए किया जाता है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं। यहां सिंचाई की सुविधाएँ बहुत कम हैं इस वजह से ग्रामीण आय केवल एक ही फसल चक्र पर निर्भर करती है। इससे किसान मौसम में होने वाले बदलावों, बढ़ती लागत और अन्य फसलें उगाने के सीमित विकल्पों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूरे साल लगातार आय सुनिश्चित करने के लिए केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए ध्यान केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती के साथ-साथ आय के कई अन्य स्रोत निर्मित करने पर है।
BALCO’s Commendable Contribution
यह वह बदलाव है जो वेदांता बालको के कामकाज वाले क्षेत्रों में हो रहा है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा ज़िले के 123 गाँवों में बालको के योगदान से अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह सिर्फ़ इन प्रयासों का स्तर ही नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका भी है। यहां खेती-बाड़ी, कौशल विकास, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढाँचा आदि ये सभी मिलकर ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को और ज़्यादा स्थिर बनाने का काम कर रहे हैं।
पारिवारिक आय की स्थिरता के वाहक के रूप में महिलाओं की भूमिका BALCO’s Commendable Contribution
इस बदलाव के केंद्र में वे महिलाएँ हैं जो अब अपने परिवारों में सहायक कमाने वाली की भूमिका से मुख्य कमाने वाली की भूमिका की ओर बढ़ रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है, जिनमें 6,000 से ज्यादा महिलाएँ शामिल हैं। इसके कारण इस क्षेत्र में समुदाय द्वारा संचालित सबसे मज़बूत स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्कों का निर्माण हुआ है।
‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों पर आधारित और वित्तीय साक्षरता, सही बचत और ऋण प्रणालियों जैसे प्रशिक्षणों से समर्थित ये स्वयं सहायता समूह साधारण बचत समूहों से विकसित होकर आजीविका के सशक्त नेटवर्क बन गए हैं। आज 600 से ज्यादा महिलाएँ छोटे व्यवसायों के माध्यम से कमाई कर रही हैं और छत्तीसगढ़ के 45 से ज्यादा गाँवों में 2,200 से ज्यादा महिलाएँ नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और आजीविका के अन्य कार्यों जैसी आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हैं। ये सभी मिलकर घरेलू आय को ज्यादा स्थिर बनाने, समुदायों को ज्यादा सशक्त बनाने तथा स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण वाहक बनने में सहायता कर रही हैं।
यह बदलाव क्लीनला जैसे छोटे व्यवसायों में देखा जा सकता है जहाँ आठ महिलाओं का एक समूह घर की सफ़ाई के उत्पाद बनाता है। सही ट्रेनिंग, उत्पादन में मदद और अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिलने से अब हर महिला हर महीने लगभग ₹6,000 कमाती है। इससे पता चलता है कि मिलकर काम करने से आय का एक स्थिर ज़रिया बनाने में कैसे मदद मिल सकती है।
व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका असर साफ़ दिखता है। कोरबा ज़िले की विजय लक्ष्मी सारथी ने निजी और आर्थिक मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत मिली ट्रेनिंग और मदद से उन्होंने घर से ही खाने का बिज़नेस शुरू किया और अब हर महीने ₹12,000 से ₹15,000 कमाती हैं। उनकी कहानी एक बड़े बदलाव को दिखाती है जहाँ महिलाएँ न सिर्फ़ परिवार की आमदनी में हाथ बँटा रही हैं बल्कि खुद भी कमाने वाली बन रही हैं और अपने परिवारों और समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद कर रही हैं।
कृषि के अलावा आय के दूसरे स्रोतों का सृजन BALCO’s Commendable Contribution
हालांकि खेती अभी भी बुनियादी आय का आधार बनी हुई है लेकिन आय के स्रोतों में विविधता लाने का सबसे बड़ा बदलाव खेती से बाहर के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए वेदांता स्किल स्कूल के ज़रिए तीन केंद्रों में अब तक कुल 15,000 से ज़्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से हर साल 1,000 से ज़्यादा युवाओं को इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से अलग-अलग ट्रेड में कुशल बनाया जाता है। यह प्रोग्राम ट्रेनिंग को सीधे रोज़गार से जोड़ता है और 11 राज्यों में फैली 70 से ज़्यादा संस्थाओं में प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक होती है।
कई परिवारों के लिए यह एक ढांचागत बदलाव को दर्शाता है जहाँ आय अब केवल ज़मीन या मौसमी चक्रों पर निर्भर नहीं रहती। इसके बजाय इसे औपचारिक रोज़गार से होने वाली स्थिर और साल भर की कमाई का सहारा मिलता है।
कोरबा के पोड़ीबहार के रहने वाले आर्यन दास महंत के लिए यह बदलाव उनकी ज़िंदगी बदलने वाला साबित हुआ है। रोज़ाना मज़दूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में ‘फ़ूड एंड बेवरेज सर्विस स्टीवर्ड’ कोर्स में दाखिला लिया। बातचीत करने और मेहमानों को संभालने के हुनर सीखने के बाद उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी मिल गई। अब वे ‘होटल श्री महाराजा’ में ‘ट्रेनी कैप्टन’ के तौर पर काम कर रहे हैं और सालाना लगभग ₹2 लाख कमा रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्किल ट्रेनिंग न सिर्फ़ लोगों को नौकरी दिलाने में मदद करती है बल्कि उनके करियर को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।
इस प्रगति को उन शिक्षा कार्यक्रमों से भी समर्थन मिल रहा है जो ज़्यादा अवसर पैदा करते हैं। कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग सेंटर हर साल 300 से ज़्यादा छात्रों को सरकारी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करते हैं और अब तक 84 छात्रों का चयन भी हो चुका है। इसके साथ ही वेदांता लिमिटेड द्वारा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू किए गए 110 ‘नंद घर’ प्री-स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र बाला पेंटिंग्स और डिजिटल उपकरणों जैसे इंटरैक्टिव सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये केंद्र 7,000 से ज़्यादा माताओं और बच्चों तक पहुँच रहे हैं, जिससे शुरुआती शिक्षा और पोषण में सुधार हो रहा है। वहीं स्कूल सहायता कार्यक्रमों ने अब तक 4,000 से ज़्यादा छात्रों की मदद की है।
ये प्रयास शिक्षा से रोज़गार तक का एक स्पष्ट जरिया बनाते हैं जिससे लोगों को एक मज़बूत व्यवस्था के सहयोग से समय के साथ अलग-अलग तरीकों से कमाई करने में मदद मिलती है।
आजीविका को सहारा देने वाले इकोसिस्टम की मज़बूती BALCO’s Commendable Contribution
आय में स्थिर रूप से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लोगों को समय के साथ मज़बूत प्रणालियों के माध्यम से सहयोग देना महत्वपूर्ण है। वेदांता बालको इसी दृष्टिकोण का पालन करता है। यह न केवल रोज़गार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि उन परिस्थितियों को भी बेहतर बनाने पर ज़ोर देता है जो लोगों को अपने रोज़गार को बनाए रखने में मदद करती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बीमारियों की जल्दी पहचान और नियमित रूप से लोगों तक पहुँचने के प्रयास लोगों को अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए काम करना आसान बनाती है और उनकी कार्य-क्षमता में भी सुधार लाती है।
सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं जैसे सामुदायिक बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधारों से लोगों के लिए यात्रा करना और बाज़ारों, प्रशिक्षण तथा रोज़गार से जुड़ना आसान हो रहा है। ये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हैं बल्कि ऐसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो लोगों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आजीविका बनाने में मदद करते हैं।
इस इकोसिस्टम में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण अवसरों को आय से जोड़ने में मदद करते हैं। वेदांता बालको प्रारंभिक शिक्षा, कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाकर रोज़गार के स्पष्ट मार्ग तैयार करता है। कोचिंग कार्यक्रम इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो केंद्रों के माध्यम से 300 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 206 अन्य छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है जिससे ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियों को पाने में मदद मिल रही है।
निर्भरता से विविधता तक
यह बदलाव अब इन क्षेत्रों में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ग्रामीण परिवार अब केवल आय के एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ अन्य काम और व्यवसाय भी कर रहे हैं।
वेदांता बालको इसी बदलते दृष्टिकोण का पालन करता है। कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय और शिक्षा कार्यक्रम मिलकर काम करते हैं ताकि ज्यादा स्थिर और नियमित आय के अवसर पैदा किए जा सकें। इसका उद्देश्य खेती की जगह लेना नहीं है बल्कि खेती के साथ आय के और अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। इससे ज्यादा संतुलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जहाँ आय ज्यादा स्थिर होती है, अचानक आने वाली समस्याओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं, और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।
यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ़ ज़्यादा आमदनी का नहीं बल्कि ऐसी आजीविका पैदा करने की बात है जो ज़्यादा सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।
रायपुर: 4 CG Policemen Arrested in Guwahati : गुवाहाटी पुलिस ने छत्तीसगढ़ पुलिस की चार सदस्यीय टीम को हिरासत में लिया है। जिस पर साइबर अपराध के तीन आरोपियों से रिश्वत लेने का आरोप है। साइबर अपराध के तीन आरोपियों को असम से गिरफ्तार किया गया था। छत्तीसगढ़ पुलिस की इस टीम में एक निरीक्षक सहित चार कर्मी शामिल हैं।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दिसपुर थाने में रायपुर पुलिस के चार कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें पूछताछ के लिए मंगलवार रात हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘रायपुर पुलिस की टीम छत्तीसगढ़ में हुए एक साइबर अपराध के सिलसिले में रविवार को गुवाहाटी पहुंची। उसने बिहार से एक आरोपी को गिरफ्तार किया और बिहार निवासी तीन अन्य आरोपियों को सोमवार को गुवाहाटी से पकड़ा।’’

अधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ की टीम ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर दो आरोपियों को रिहा कर दिया और तीसरे को मांगी गई रकम के भुगतान तक हिरासत में रखा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें रिहा किए गए दोनों आरोपियों से इस मामले में शिकायत मिली थी, जिसके बाद हमने कार्रवाई की और एक अभियान चलाया। पूरी टीम को कल रात पकड़कर दिसपुर थाने लाया गया।’’
पुलिस ने बताया कि जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और शुरुआती पूछताछ के बाद टीम को नोटिस देकर थाने से जाने की अनुमति दी गई। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने उन्हें नोटिस जारी किया और अग्रिम कार्रवाई के लिए उन्हें आज फिर पेश होने के लिए कहा है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के साइबर अपराध मामले में एकमात्र आरोपी को ‘पीआर बॉन्ड’ के तहत रिहा कर दिया गया है। ‘पीआर बॉन्ड’ यानी व्यक्तिगत जमानत आरोपी की अस्थायी रिहाई का एक तरीका है।
बालकोनगर, 29 अप्रैल 2026। Mock Drill at BALCO : वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अपने पावर डिवीजन में रासायनिक रिसाव (केमिकल स्पिलेज) की स्थिति से निपटने के लिए सफलतापूर्वक मॉक ड्रिल आयोजित की। यह अभ्यास 1200 मेगावाट यूनिट-3 एवं 4 के केमिकल प्रोसेस यूनिट (सीपीयू) कास्टिक सोडा टैंक क्षेत्र में किया गया, जिसका उद्देश्य आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया प्रणाली की जांच करना था।

कोरबा जिला प्रशासन की उपस्थिति में केंद्र सरकार के निर्देशानुसार आयोजित मॉक ड्रिल में प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं के कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें श्री विजय सिंह पोटाई (डिप्टी डायरेक्टर इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी, कोरबा), श्री देवेंद्र पटेल (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, कोरबा), श्री सरोज महिलांगे (सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट, कोरबा), श्री प्रमोद नायक (जिला खनन अधिकारी), श्री राकेश द्विवेदी (सब डिवीजनल ऑफिसर, पीडब्ल्यूडी), श्रीमती नम्रता वर्मा (असिस्टेंट इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी), नगर निगम फायर टीम तथा जिला अस्पताल की इमरजेंसी मेडिकल टीम शामिल थीं।

कंपनी की ओर से आपातकालीन नेतृत्व में बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार (चीफ इंसिडेंट कंट्रोलर), श्री संगीत साहू (साइट इंसिडेंट कंट्रोलर), श्री मयंक श्रीवास्तव (वर्क इंसिडेंट कंट्रोलर), तथा श्री भारतेंदु कमल पांडे (चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर) के तौर पर उपस्थित थे।

मॉक ड्रिल के दौरान कास्टिक सोडा टैंक के फ्लैंज से रिसाव की आभासी स्थिति बनाई गई। रिसाव का पता चलते ही ऑपरेटर ने तुरंत सेंट्रल कंट्रोल रूम को सूचना दी, जिसके बाद फायर, मेडिकल, सिक्योरिटी और रेस्क्यू टीमों को तुरंत अलर्ट किया गया। सभी आपातकालीन टीमें तेजी से मौके पर पहुंचीं और तय सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। सफलतापूर्वक रिसाव को रोकने और स्थिति सामान्य होने के बाद साइट इंसिडेंट कंट्रोलर ने आपातकाल समाप्त घोषित किया और समीक्षा बैठक आयोजित की।
कोरबा के डिप्टी डायरेक्टर इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी श्री विजय सिंह ने बालको की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और विभिन्न टीमों के बेहतर समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल औद्योगिक और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह मॉक ड्रिल बालको की सुरक्षा, आपातकालीन तैयारी और नियामकीय अनुपालन के उच्चतम मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बालको के सीईओ एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि संयंत्र में सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस प्रकार की मॉक ड्रिल हमारी ‘सुरक्षा प्रथम’ संस्कृति को मजबूत करती हैं और हमें किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार रखती हैं। नियमित अभ्यास, आधुनिक संसाधनों और बेहतर समन्वय के माध्यम से हम अपने कर्मचारियों और आसपास के समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध हैं।”