बस्तर : Ajab gajab news : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में रविवार को एक ऐसी अदालत लगी, जहां कटघरे में इंसान नहीं, देवी-देवता थे। भंगाराम माई की अदालत में 157 मामलों की सुनवाई हुई। किसी पर गांव में बीमारी फैलाने, किसी पर फसल खराब होने तो किसी पर अनहोनी का आरोप था।
लोक आस्था की इस अनोखी न्याय व्यवस्था में 35 देवी-देवताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि कुछ को एक साल की रिमांड पर भेज दिया गया। कई आरोपों से बरी हुए तो कुछ के काम की अदालत ने सराहना की।
Ajab gajab news
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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भंगाराम माई की अनोखी देव अदालत लगी, जहाँ 157 मामलों की सुनवाई हुई। इस लोक आस्था की न्याय व्यवस्था में 35 देवी-देवताओं को ‘उम्रकैद’ की सजा सुनाई गई और कुछ को एक साल की रिमांड पर भेजा गया।
देश में अनोखी मानी जाने वाली कोंडागांव जिले की इस देव अदालत ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा।नौ परगना के ग्रामीणों के लिए यह अदालत उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
भादो जात्रा के मुख्य पुजारी सरजू राम गौर बताते हैं कि जिन देवी-देवताओं या शक्तियों को समाज के लिए हानिकारक माना जाता है, उनके मामले यहां लाए जाते हैं। लोक परंपरा और पुजारियों की अगुवाई में चली सुनवाई के बाद दोषी मानी गई देव-शक्तियों पर फैसला सुनाया जाता है। उम्रकैद का अर्थ उनकी पूजा, स्थापना और मान्यता पर स्थायी रोक है।
अदालत की सबसे रोचक परंपरा ‘रिमांड’ है। हर मामले में तत्काल अंतिम फैसला नहीं होता। कुछ देवी-शक्तियों को एक वर्ष के लिए रिमांड पर रखा जाता है। इस दौरान उनके प्रभाव और गांव की परिस्थितियों को परखा जाता है। अगले वर्ष भादो जात्रा में मामला फिर अदालत में आता है और उसके बाद अंतिम निर्णय सुनाया जाता है।
भंगाराम माई : देवी-देवताओं की सर्वोच्च अदालत Ajab gajab news
न कोई जज है, न वकील, न आइपीसी की धारा। फैसला होता है ढोल-मांदर की थाप, पुजारी के मंत्र और सदियों से चली आ रही आदिवासी आस्था के आधार पर। दूर-दराज के गांवों से हजारों लोग सिर्फ यह न्याय देखने आते हैं।
केशकाल की भादो जात्रा सिर्फ मेला नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की अपनी सर्वोच्च अदालत है। जहां आस्था ही संविधान है और परंपरा ही कानून।
यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, लोकविश्वास और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के बीच संपन्न होती है। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं।
कोरबा | युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संसद की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से जेसीआई कोरबा सेंट्रल द्वारा सेंट जेवियर पब्लिक स्कूल में युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रिया, सदन की कार्यवाही तथा पक्ष-विपक्ष के बीच होने वाली बहस की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
युवा संसद में विद्यार्थियों ने लोकसभा स्पीकर, सत्तापक्ष एवं विपक्ष के सांसदों की भूमिका छात्रों ने निभाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में नवनिर्वाचित छात्र सांसदों को हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई गई। इसके बाद स्पीकर द्वारा सदन की कार्यवाही प्रारंभ की गई।
सदन में विभिन्न सामाजिक एवं आधुनिक विषयों को चर्चा के लिए रखा गया। विद्यार्थियों ने स्पीकर के समक्ष अपने-अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया तथा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच प्रश्नोत्तर एवं तार्किक बहस हुई। विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति और आत्मविश्वास ने कार्यक्रम को रोचक बना दिया।
युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादा, नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री किशोर शर्मा, डॉ. डी.के. आनंद, अंश अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, दीपेश अग्रवाल, कपिल विश्वकर्मा, हर्ष गुप्ता, शीतल बजाज, अध्यक्ष सीए त्रिलोकी नाथ बजाज एवं संस्था के अन्य पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।
जेसीआई कोरबा सेंट्रल द्वारा आयोजित यह युवा संसद विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र को समझने और संसदीय प्रक्रिया को करीब से अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक अवसर साबित हुई।
कोरबा। क्या स्नेह सदन वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को किसी बम या विस्फोट से खतरा है? निश्चित रूप से इस सवाल का सामान्य जवाब नहीं होगा, लेकिन प्राप्त दस्तावेजों में वृद्धाश्रम के लिए 300 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति और इसके लिए 4 लाख 91 हजार 100 रुपए के भुगतान का उल्लेख सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इनकी खरीद किस आवश्यकता और किस आधार पर की गई?
करीब दो वर्ष पूर्व समाज कल्याण विभाग द्वारा कोरबा में 60 सीटर स्नेह सदन वृद्धाश्रम प्रारंभ किया गया था। वृद्धाश्रम के संचालन के लिए विभिन्न आवश्यक सामग्रियों की खरीदी की गई। इसी खरीदी से संबंधित सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों की पड़ताल में बमरोधी कंबल की खरीदी का यह मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार के तहत उपलब्ध कराए गए बिल- चालान के अनुसार स्नेह सदन वृद्धाश्रम के लिए कुल 300 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दर्शाई गई है। इसके लिए दो अलग- अलग बिलों के माध्यम से कुल 4 लाख 91 हजार 100 रुपए का भुगतान किया गया है। पहले बिल में 1,680 रुपये प्रति नग की दर से 240 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दर्शाई गई है। इसकी कुल कीमत 4 लाख 3 हजार 200 रुपए है। वहीं दूसरे बिल में 1,465 रुपए प्रति नग की दर से 60 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दिखाई गई है। इसकी कुल कीमत 87 हजार 900 रुपए है। दोनों बिल सरोज सिंघल एंड कंपनी, पावर हाउस रोड, कोरबा द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं।
बिल में गृह मंत्रालय के स्वीकृत विनिर्देश का उल्लेख
मामले को और महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि आपूर्तिकर्ता सरोज सिंघल एंड कंपनी द्वारा जारी दोनों बिलों में उत्पाद के विवरण में सामान्य कंबल का उल्लेख नहीं है, बल्कि स्पष्ट रूप से ‘अनब्रांडेड बम ब्लैंकेट’ अर्थात बमरोधी कंबल लिखा गया है। इसके साथ ही उत्पाद को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत अथवा निर्धारित तकनीकी विनिर्देश के अनुसार बताया गया है। बिल में गृह मंत्रालय के संबंधित पत्र क्रमांक और 24 अगस्त 2015 की तारीख का भी उल्लेख किया गया है। इससे दस्तावेज में दर्ज विवरण के आधार पर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि यदि आपूर्ति सामान्य कंबल की थी, तो बिल में उसे बमरोधी कंबल बताते हुए गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख क्यों किया गया?
बमरोधी कंबल का उपयोग सामान्य वृद्धाश्रम में क्यों?
बमरोधी कंबल एक विशेष सुरक्षा उपकरण होता है, जिसका उपयोग संदिग्ध विस्फोटक या विस्फोट की स्थिति में सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य विस्फोट के दौरान उत्पन्न टुकड़ों, मलबे और उसके प्रभाव से आसपास मौजूद लोगों तथा संपत्ति को यथासंभव सुरक्षा प्रदान करना होता है। ऐसे विशेष सुरक्षा उपकरण का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में संचालित वृद्धाश्रम में क्यों आवश्यक पड़ा, यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।
विभाग का दावा- साधारण कंबल की हुई है खरीद
दस्तावेज सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग, कोरबा के उप संचालक हरीश सक्सेना तथा संबंधित लिपिक से इस संबंध में चर्चा की गई। उप संचालक का कहना था कि खरीदी गई वस्तु बमरोधी कंबल नहीं, बल्कि साधारण कंबल है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रह गया। यदि वस्तु साधारण कंबल थी, तो आपूर्तिकर्ता के दोनों बिलों में उसे बमरोधी कंबल क्यों दर्शाया गया? साथ ही बिल में गृह मंत्रालय के पत्र क्रमांक और उसके द्वारा स्वीकृत तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख किस आधार पर किया गया? इस संबंध में विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। सूचना का अधिकार के तहत कंबल की खरीद के लिए मंगाए गए दर प्रस्ताव, प्राक्कलन और खरीद से संबंधित अन्य दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई थी, लेकिन उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि 300 कंबलों की आवश्यकता किस आधार पर निर्धारित की गई। इसी तरह सामग्री की आपूर्ति के बाद उसके भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया, सत्यापन करने वाले अधिकारी अथवा समिति तथा सामग्री को स्वीकार किए जाने से संबंधित अभिलेख भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए। यदि विभाग का कहना है कि खरीदी गई वस्तु सामान्य कंबल थी, तो उसका तकनीकी विवरण, खरीद का आधार, आवश्यकता का आकलन और आपूर्ति के बाद किए गए सत्यापन का अभिलेख सामने आना चाहिए।
60 सीटर वृद्धाश्रम में 300 कंबलों की आवश्यकता क्यों?
मामले में दूसरा बड़ा सवाल खरीदी गई मात्रा को लेकर है। स्नेह सदन वृद्धाश्रम की क्षमता 60 बुजुर्गों की है। इसके बावजूद यहां 300 नग कंबलों की खरीद दर्शाई गई है। वृद्धाश्रम शुरू होने के समय यहां रहने वाले बुजुर्गों की संख्या शून्य थी। उद्घाटन के दौरान दूसरे क्षेत्रों से कुछ बुजुर्गों को यहां लाया गया था। इसके बाद भी समय-समय पर बुजुर्गों का प्रवेश होता रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 17 माह की अवधि में 32 बुजुर्ग वृद्धाश्रम छोड़कर जा चुके हैं। ऐसे में 60 सीटर वृद्धाश्रम के लिए 300 नग कंबलों की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई, यह भी जांच का विषय है। यदि साधारण कंबल थे तो 300 नग खरीदने का आधार क्या था?
आपूर्तिकर्ता से संपर्क का प्रयास भी विफल
मामले को और स्पष्ट करने के लिए सरोज सिंघल एंड कंपनी के बिल में दर्ज मोबाइल क्रमांक पर लगातार चार दिनों तक संपर्क करने का प्रयास किया गया, मोबाइल बंद मिला। ऐसे में इस खरीद को लेकर विभागीय पक्ष और दस्तावेजों में दर्ज विवरण के बीच अंतर दिखाई देता है।
विसंगति की निष्पक्ष जांच जरूरी
यह मामला केवल बमरोधी कंबल शब्द के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। इसमें खरीद की आवश्यकता, वस्तु की वास्तविक प्रकृति, गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख, वस्तु का वर्गीकरण, 300 नग की मात्रा, खरीद प्रक्रिया, आपूर्ति के बाद सत्यापन और भुगतानकृसभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है। यदि वास्तव में सामान्य कंबल की खरीद की गई थी तो बिल में बमरोधी कंबल और गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख क्यों किया गया, इसका स्पष्ट उत्तर सामने आना चाहिए। वहीं यदि दस्तावेजों में दर्ज विवरण के अनुसार वास्तव में बमरोधी कंबल ही खरीदे गए थे, तो 60 सीटर वृद्धाश्रम में 300 नग ऐसे विशेष सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता और उपयोगिता का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए। दस्तावेजों में सामने आई इस विसंगति की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल बिल में दर्ज विवरण की त्रुटि है, वस्तु के वर्गीकरण से जुड़ा मामला है या खरीद प्रक्रिया में किसी अन्य प्रकार की अनियमितता हुई है।
बालकोनगर, 11 सितंबर 2026।BALCO: A Leader in Community Development : किसी गांव में जब किसान अपनी फसल के लिए बारिश का इंतजार करने के बजाय सिंचाई के भरोसे दूसरी और तीसरी फसल लेने लगे, जब किसी महिला के हाथों का हुनर परिवार की आय का जरिया बन जाए, जब किसी युवा को कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार का अवसर मिले और जब किसी बच्चे को गांव की आंगनबाड़ी में बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, तब विकास केवल एक आंकड़ा नहीं रहता, वह जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन जाता है।
BALCO: A Leader in Community Development
BALCO: A Leader in Community Development
भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास यात्रा समुदाय के साथ मिलकर दीर्घकालिक बदलाव की सोच पर केंद्रित है। वित्तीय वर्ष 2026 में बालको की पहल ने 123 गांवों में 1.80 लाख लोगों तक पहुंच बनाई। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक अधोसंरचना और खेल के माध्यम से लोगों की क्षमताओं को मजबूत किया गया। किसान आधुनिक कृषि अपनाकर दूसरों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और उद्यमों का संचालन कर रही हैं तथा युवा कौशल के माध्यम से रोजगार और नेतृत्व के अवसर हासिल कर रहे हैं। यह साझी भागीदारी विकास को केवल परियोजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्थायी सामाजिक बदलाव की यात्रा बनाती है।
जीवन के हर पड़ाव से जुड़ा विकास BALCO: A Leader in Community Development
बालको की सामुदायिक विकास रणनीति ‘मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण’ पर आधारित है, जिसमें व्यक्ति और परिवार के जीवन के विभिन्न चरणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था में पोषण और शिक्षा से लेकर स्कूली शिक्षा, कौशल, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक निरंतर विकास पर ध्यान दिया गया है।
इसी सोच का उदाहरण नंद घर हैं, जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक और बच्चों के अनुकूल सीखने के स्थानों में विकसित किया गया है। वित्तवर्ष 2026 में 111 नंद घरों से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं का सहयोग मिला, जबकि 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया तथा चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में बालको ने सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं, रिमेडियल एजुकेशन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया। बालको कनेक्ट कोचिंग कार्यक्रम के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कोरबा और कवर्धा में 2 कोचिंग केंद्र संचालित किए गए। वित्तवर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ। इन प्रयासों ने युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के साथ अपने भविष्य को नई दिशा देने का अवसर दिया।
कृषि नवाचार और तकनीक से खेती में नया विश्वास BALCO: A Leader in Community Development
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार आज भी कृषि है। इसी सोच के साथ मोर जल मोर माटी कार्यक्रम के माध्यम से जल सुरक्षा, आधुनिक कृषि और आय के विविध स्रोतों को एक साथ जोड़ा गया है। वित्तवर्ष 2026 में यह पहल 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंची और 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया।
जल संरक्षण की विभिन्न व्यवस्थाओं, सूक्ष्म सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई के साथ किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत गुणवत्ता वाले बीजों के चयन, मिट्टी की जांच तथा फसल में कीट एवं पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाईं। इससे उत्पादन में लगभग 1.25 से 1.5 गुना वृद्धि, औसत कृषि आय में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि और खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। जल सुरक्षा से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया। पशुपालन, लाख उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के वैकल्पिक स्रोत भी विकसित हुए। इस तरह खेती अधिक स्थायी आजीविका का आधार बनी।
वेदांता स्किल स्कूल: कौशल से रोजगार तक BALCO: A Leader in Community Development
ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाने में वेदांता स्किल स्कूल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तवर्ष 2026 में कोरबा, कवर्धा और सरगुजा स्थित तीन केंद्रों में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 82 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार या उद्यमिता से जुड़ाव हासिल किया। रोजगार उपलब्ध कराने वाली 75 संस्थाओं का नेटवर्क 12 राज्यों तक विस्तारित हुआ।
प्रशिक्षण में 61 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी रही, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ युवाओं को व्यक्तित्व विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से परिचय, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य संबंधी सत्र और कर्मचारियों का मार्गदर्शन भी मिला। यह पहल युवाओं में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता विकसित कर उन्हें बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्नति परियोजना: लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता तक BALCO: A Leader in Community Development
बालको के सामुदायिक विकास प्रयासों में महिला सशक्तिकरण को आर्थिक और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उन्नति परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है।
वित्तवर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 561 समूह और 6,003 महिलाओं तक पहुंची। इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक रूप से सक्रिय हैं। समूहों की सामूहिक बचत बढ़कर 0.92 करोड़ रुपये हुई, जबकि 90 प्रतिशत समूह नियमित बैठकों और आंतरिक ऋण व्यवस्था में सक्रिय रहे। 19 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोड़ा गया, जिससे लगभग 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला।
उन्नति महासंघ के सहयोग से उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी के अंतर्गत कोसा रेशम जैसे उद्यमों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं और लगभग 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। वहीं 21 सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से 104 महिलाओं को अवसर मिला और प्रति महिला लगभग 3,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय का अवसर बना।
कोसा रेशम: विरासत से आजीविका तक BALCO: A Leader in Community Development
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोसाकारी पहल की शुरुआत की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘कोसाकारी’ नाम से ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत ने बुनकरों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में नई राह खोली।
स्वास्थ्य: बेहतर उपचार आपके द्वार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालको ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अत्याधुनिक कैंसर उपचार तक बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की है। आरोग्य परियोजना के माध्यम से वित्तवर्ष 2026 में 93,442 लोगों तक सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को ओपीडी सेवाएं मिलीं।
65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई। 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। 2,310 महिलाओं की एनीमिया जांच में 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ। दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों ने 70 बस्तियों में पखवाड़ेवार सेवाएं दीं, जिनका 26,500 लोगों ने लाभ लिया।
नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर ने उन्नत कैंसर उपचार की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,290 मरीजों ने सामुदायिक विकास सहायता के तहत उपचार सेवाओं का लाभ लिया। केंद्र में 2,800 सर्जरी, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार हुए। साथ ही, मध्य भारत की पहली दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली स्थापित की गई।
बेहतर जीवन के लिए सामुदायिक सुविधाएं
विकास का अर्थ बुनियादी सुविधाओं तक सम्मानजनक पहुंच भी है। वित्तवर्ष 2026 में बालको ने 4 सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और 2 सामुदायिक मंच बनाए, जिनसे 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला। इन सुविधाओं ने स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए साझा स्थान उपलब्ध कराए।
खेल और संस्कृति से नई उड़ान
युवाओं की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें अवसर देने के लिए लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी कार्यक्रम शुरू किया गया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीरंदाजी विरासत को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जोड़ते हुए 29 स्कूलों में तीरंदाजी प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की जांच हुई और 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षण में सफलता हासिल की।
आंकड़ों से आगे, बदलाव की कहानी
1.80 लाख लोगों तक पहुंच बालको की सामुदायिक विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आंकड़ा है, लेकिन इसकी असली पहचान उन बदलावों में है, जो लोगों के जीवन में दिखाई देते हैं। किसान का बढ़ा आत्मविश्वास, महिला की आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता, कौशल और रोजगार से जुड़ता युवा, बेहतर सीखने के अवसर पाता बच्चा और समय पर स्वास्थ्य सेवा से मजबूत होता परिवार, यही इस यात्रा की वास्तविक उपलब्धियां हैं।
बालको का प्रयास सामुदायिक विकास को परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय साझी विकास यात्रा बनाना है, जहां समुदाय अपनी क्षमताओं को मजबूत कर भविष्य की चुनौतियों का सामना स्वयं कर सके। स्थायी विकास तभी संभव है, जब सहयोग आत्मविश्वास में, आत्मविश्वास क्षमता में और क्षमता पूरे समुदाय की ताकत में बदल जाए। यही बालको की भावना है, प्रेरित करना, सक्षम बनाना और समुदाय के साथ मिलकर बेहतर, समावेशी और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना।
कोरबा। Shivay Hospital Sets an Example : डेढ़ साल से असहनीय दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की पीड़ा झेल रही 46 वर्षीय महिला के लिए शिवाय हॉस्पिटल में हुई आधुनिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नई जिंदगी की शुरुआत बन गई। गर्भाशय में 10 से 12 सेंटीमीटर के 600 ग्राम यूटरस के कारण महिला की हालत बेहद मुश्किल हो गई थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण मामले में विशेषज्ञों ने बिना बड़े चीरे के लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल सर्जरी कर मरीज को राहत दिलाई।
इस सफल उपचार की खास बात यह रही कि सर्जन डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में मेडिकल टीम ने जटिल ऑपरेशन को आधुनिक दूरबीन तकनीक से अंजाम दिया। शिवाय हॉस्पिटल के अनुसार, अस्पताल बिना बड़े चीरे वाली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराने वाला जिले का प्रथम अस्पताल है।
महिला पिछले करीब डेढ़ वर्षों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और बड़े-बड़े रक्त के थक्कों की समस्या से जूझ रही थीं। हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें दिनभर में करीब 8 पैड तक बदलने पड़ते थे। लगातार रक्तस्राव और दर्द ने उनके सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था।
गर्भाशय में मिला 10-12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड Shivay Hospital Sets an Example
Shivay Hospital Sets an Example
जांच के दौरान पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी में गर्भाशय में करीब 10 से 12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड पाया गया। ट्यूमर के कारण गर्भाशय का आकार सामान्य से बढ़कर करीब 16 से 18 सप्ताह के गर्भ जैसा हो गया था।
डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में चुनौतीपूर्ण लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन Shivay Hospital Sets an Example
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. पूर्णिमा सुरभि और गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा कुंडू की अगुवाई में मेडिकल टीम ने आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी का निर्णय लिया।
25 जुलाई 2026 को टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी (TLH) और बाइलेटरल साल्पिंगेक्टॉमी की गई। इस दौरान लेप्रोस्कोपिक मोर्सेलेशन तकनीक की मदद से विशाल ट्यूमर और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। जटिलता के बावजूद सर्जरी के दौरान किसी आपातकालीन स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।
सफल ऑपरेशन के बाद मुस्कुराते हुए घर लौटीं महिला
सर्जरी के बाद महिला की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। पूरी तरह स्वस्थ और हेमोडायनामिक रूप से स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
डेढ़ साल की पीड़ा से राहत मिलने के बाद मरीज और उनके परिजनों ने डॉ. पूर्णिमा सुरभि सहित पूरी मेडिकल टीम का आभार जताया। परिजनों के मुताबिक, शिवाय हॉस्पिटल में मिली आधुनिक चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञों के प्रयास से मरीज को एक नई जिंदगी मिली है।
शिवाय हॉस्पिटल में हुई यह सर्जरी कोरबा में आधुनिक लेप्रोस्कोपिक उपचार की बढ़ती सुविधाओं को रेखांकित करती है।
बालकोनगर, 5 सितंबर 2026। वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने कर्मचारी कल्याण और टाउनशिप विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘वरदान’ अपार्टमेंट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक श्री राजेश कुमार सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में युवा कर्मचारियों को उनके नए आवास की चाबियां सौंपी गईं।
‘वरदान’ अपार्टमेंट को बालको के युवा कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। ‘वरदान’ नाम शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। इसी भावना के साथ इस आवासीय परिसर को आधुनिक जीवनशैली और बेहतर सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। जी+9 संरचना वाले ‘वरदान’ अपार्टमेंट में कुल 172 सुसज्जित आवास हैं। प्रत्येक आवास को वन बीएचके स्टूडियो अपार्टमेंट की अवधारणा पर तैयार किया गया है, जो खास तौर पर युवा कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखता है।
इस अवसर पर श्री राजेश कुमार सिंह ने कहा, “बालको की प्रगति में हमारे कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका कल्याण हमारी विकास यात्रा का एक अहम हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहाँ कर्मचारी कार्यस्थल के साथ-साथ अपने घर और समुदाय में भी बेहतर जीवन जी सकें। ‘वरदान’ अपार्टमेंट इसी दिशा में एक कदम है। यह हमारे युवा कर्मचारियों को सुविधाजनक और बेहतर आवास उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी। हमें विश्वास है कि यह बालकोनगर में बेहतर जीवनशैली और सुखद आवासीय वातावरण बनाने के हमारे प्रयासों को और मजबूती देगा।”
प्रत्येक आवास में मॉड्यूलर किचन, टेलीविजन, फर्निश्ड अलमारी, सोफा-कम-बेड तथा फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं से कर्मचारियों को अपने नए घर में आराम और सुविधा के साथ रहने में मदद मिलेगी। परिसर में तीन लिफ्ट, आधुनिक कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण की व्यवस्था, सुरक्षित वातावरण और लगभग 35,000 वर्गफुट का हरित एवं मनोरंजन क्षेत्र विकसित किया गया है। इसके अलावा कैफेटेरिया-कम-डाइनिंग स्पेस और बैंक्वेट हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ये सुविधाएं कर्मचारियों को साथ एक साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराएंगी।
‘वरदान’ अपार्टमेंट में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। परिसर में 50 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था की गई है। यह बालको और वेदांता समूह के स्थायित्व लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जल संरक्षण के लिए 80 किलोलीटर प्रतिदिन (80 हजार लीटर) क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और तीन वर्षा जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इन व्यवस्थाओं से पानी के बेहतर उपयोग और संरक्षण में मदद मिलेगी।
‘वरदान’ अपार्टमेंट केवल रहने की जगह नहीं है, बल्कि यह बालको की कर्मचारी-केंद्रित सोच का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को काम के साथ-साथ बेहतर जीवन के लिए भी सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। आधुनिक सुविधाओं से तैयार यह परिसर कर्मचारियों को बेहतर जीवन, आपसी जुड़ाव और नई शुरुआत का अवसर प्रदान करता है। यह पहल बालको की कर्मचारी कल्याण और टाउनशिप में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कोरबा | बिलासपुर जिले के प्रसिद्ध लुतरा शरीफ दरगाह में शहंशाहे छत्तीसगढ़ हजरत बाबा सैयद इंसान अली शाह का सालाना उर्स इस वर्ष 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। पांच दिवसीय उर्स को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इंतजामिया कमेटी दरगाह लुतरा शरीफ की ओर से कोरबा में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर उर्स के कार्यक्रम और व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
इंतजामिया कमेटी ने परेशान वार्ता में बताया की उर्स में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सहयोग से साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, आवागमन और विश्राम सहित अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है।
उर्स के दौरान सर्वधर्म समभाव की भावना के तहत शाकाहारी शाही लंगर की व्यवस्था भी रहेगी।
परचम कुशाई के साथ होगा उर्स का आगाज
28 सितंबर को उर्स की शुरुआत दरगाह परिसर में परचम कुशाई की रस्म के साथ होगी। दुआ और अकीदत के बीच मुख्य परचम फहराया जाएगा। इसके बाद संदल-चादर का आयोजन होगा। रात 10 बजे ऑल इंडिया नातिया मुशायरा होगा, जिसकी सदारत कारी शब्बीर अहमद अशरफी कोरबा करेंगे। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से नात और मनकबत पेश करने वाले शायर शामिल होंगे।
29 सितंबर को गुस्ल और शाही संदल उर्स के दूसरे दिन 29 सितंबर को मजार-ए-पाक का गुस्ल और शाही संदल होगा। रात 9 बजे बाबा सरकार की शान में अजीमुशान जलसा-ए-तकरीर आयोजित किया जाएगा। इसमें किछौछा शरीफ से सैय्यद राशिद मक्की मियां की तकरीर होगी।
30 सितंबर को मुंबई के मुजतबा अजीज नाज़ा की कव्वाली30 सितंबर को अम्मी जान साहिबा की संदल-चादर की रस्म होगी। रात 10 बजे महफिले समा में मुंबई के रेडियो-टीवी सिंगर मुजतबा अजीज नाज़ा कव्वाली पेश करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में जायरीनों के शामिल होने की संभावना है।
1 अक्टूबर को रईस अनीस अंसारी की कव्वाली
चौथे दिन 1 अक्टूबर को रात 10 बजे महफिले कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। इसमें बिजनौर, उत्तर प्रदेश के रईस अनीस अंसारी अपनी कव्वाली पेश करेंगे।
कुल की फातिहा के साथ 2 अक्टूबर को उर्स का समापन
2 अक्टूबर को उर्स के अंतिम दिन सुबह 11 बजे रंग की महफिल होगी। इसमें बिजनौर के रईस अनीस साबरी की मौजूदगी रहेगी। किछौछा शरीफ के सैय्यद महमूद अशरफ की सदारत में कुल की फातिहा के साथ पांच दिवसीय उर्स का समापन होगा।दोपहर से देर रात तक चलता रहेगा शाही लंगर इंतजामिया कमेटी के मुताबिक उर्स के सभी दिनों में दोपहर से देर रात तक दरबारी शाही लंगर यानी भंडारे की व्यवस्था लगातार जारी रहेगी। कमेटी का कहना है कि लुतरा शरीफ में हर धर्म और समुदाय के लोग आस्था के साथ पहुंचते हैं। उर्स के दौरान भी सर्वधर्म समभाव की परंपरा को कायम रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहेगा।
पत्रकार वार्ता में सदर हाजी मो. इकबाल हक, खजांची फैजान अहमद शेबू, नूरी मज़ीद सदर मो. आरिफ खान, नायव खजांची- जावेद रब्बानी (कोरबा) लंगर इंचार्ज हाजी मो. कुदुस (बिलासपुर) मेंबर्स- हाजी मो. नजीर अहमद (बलौदा), मो. सज्जाद सिद्दीकी (कोरबा), सैयद इंसान अली (बिलासपुर), शेख सिकंदर (बिलासपुर), मो. एजाज खान (लुतरा शरीफ), मुशर्रफ खान (विलासपुर), अब्दुल वहाब अशरफी (लुतरा शरीफ), हाजी अनवारूल हक (लुतरा शरीफ), हाजी अब्दुल करीम वेग (लुतरा शरीफ), अब्दुल शहनवाज मेमन (लुतरा शरीफ), शेख अब्दुल गफ्फार (लुतरा शरीफ) सहित बिलासपुर, कोरबा, बलौदा और लुतरा शरीफ के सदस्य शामिल हैं।
कोरबा। मिनीमाता बांगो बांध के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार बढ़ रही पानी की आवक के चलते बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में बांध का जलस्तर 358.71 मीटर और जलभराव 94.30 प्रतिशत दर्ज किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से बांध के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी को हसदेव नदी में नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है।
कार्यपालन अभियंता, मिनीमाता बांगो बांध संभाग क्रमांक-3, माचाडोली, कोरबा से प्राप्त जानकारी के अनुसार बांध में वर्तमान में 54,115 क्यूसेक पानी की आवक (Inflow) दर्ज की गई है। बढ़ती आवक को देखते हुए मुख्य अभियंता बिलासपुर एवं अधीक्षण अभियंता कोरबा से चर्चा और अनुमति के बाद रात 12 बजे बांध के नौ रेडियल गेटों को अलग-अलग ऊंचाई तक खोला गया।
इन गेटों से छोड़ा जा रहा पानी
बांध के गेट क्रमांक 1, 2, 3, 9, 10 और 11 बंद हैं। वहीं—
गेट क्रमांक 4 — 0.50 मीटर
गेट क्रमांक 5 — 0.60 मीटर
गेट क्रमांक 6 — 0.80 मीटर
गेट क्रमांक 7 — 0.60 मीटर
गेट क्रमांक 8 — 0.50 मीटर
इस प्रकार रेडियल गेटों की कुल ओपनिंग 3 मीटर है। इन गेटों से लगभग 17,197 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
इसके अलावा हाइडल पावर प्लांट के माध्यम से 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस तरह मिनीमाता बांगो बांध से कुल 26,197 क्यूसेक पानी हसदेव नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
दर्री बैराज पर भी रखी जा रही नजर
बांगो बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इसका प्रभाव दर्री बैराज में भी पड़ने की संभावना है। विभाग द्वारा बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए दर्री बैराज के गेटों की ओपनिंग भी पहले से बढ़ाई जा रही है, ताकि अचानक अधिक पानी पहुंचने पर स्थिति नियंत्रित रहे।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पूरे जलप्रवाह और बांध की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है। बढ़ती आवक को देखते हुए आवश्यकता के अनुसार गेटों की ओपनिंग में आगे भी बदलाव किया जा सकता है।
फिलहाल बांध से पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है और जलस्तर एवं नदी के प्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है।
बालकोनगर। बालको थाना क्षेत्र के भद्रापारा इलाके में बुधवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई, जब श्री अपार्टमेंट के समीप मुख्य मार्ग के किनारे एक मानव भ्रूण दिखाई दिया। सड़क किनारे पड़े इस मासूम अस्तित्व पर स्थानीय लोगों की नजर पड़ते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
बताया जा रहा है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भ्रूण को सड़क किनारे छोड़ दिया गया था। स्थानीय लोगों ने जैसे ही इसे देखा, तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी और भ्रूण को उपचार एवं आवश्यक जांच के लिए निजी अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना की सूचना डायल-112 के माध्यम से पुलिस तक पहुंची। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि भ्रूण यहां तक कैसे पहुंचा और इसे सड़क किनारे छोड़ने वाला आखिर कौन है।
घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस परिस्थिति में एक अजन्मे जीवन को इस तरह सड़क किनारे छोड़ दिया गया? क्या इसके पीछे कोई मजबूरी थी या फिर मामला किसी गंभीर घटना से जुड़ा है? इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल बालको पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच सहित अन्य संभावित पहलुओं के आधार पर भ्रूण को छोड़ने वाले व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
बालकोनगर, 2 सितंबर 2026। एक औद्योगिक टाउनशिप केवल आवास और कार्यस्थल तक सीमित नहीं होती, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधा, मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। बालकोनगर में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बालको द्वारा टाउनशिप को अधिक सुंदर, हरित, स्वस्थ, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
नगर निगम कोरबा, वार्ड क्रमांक 39 के पार्षद श्री सतेंद्र दुबे ने कहा, “बालको सामुदायिक विकास के साथ-साथ टाउनशिप के सर्वांगीण विकास की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रहा है। टाउनशिप एवं आसपास के क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण, आंबेडकर स्टेडियम का आधुनिकीकरण एवं सौंदर्यीकरण तथा अन्य जनहितकारी परियोजनाएं इसके विकास प्रयासों का प्रमाण हैं। इन कार्यों से स्थानीय समुदाय को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। कंपनी द्वारा हरियाली एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आवासीय परिसर में वृक्षारोपण करना तथा सामुदायिक भवनों का निर्माण भी सराहनीय पहल है। ये भवन स्थानीय निवासियों के सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों में उपयोगी साबित हो रहे हैं। टाउनशिप एवं आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए बालको प्रबंधन के निरंतर प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं।”
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बालको टाउनशिप की पहचान उसकी हरियाली और खुले स्थानों से भी जुड़ी है। नेहरू उद्यान, फॉरेस्ट वॉकवे, स्मृति उद्यान और जुबली पार्क जैसे स्थानों के विकास और सौंदर्यीकरण से टाउनशिप का वातावरण अधिक आकर्षक और जीवंत हुआ है। बेहतर हरियाली, प्रकाश व्यवस्था और सुविधाओं के साथ ये स्थान निवासियों को प्रकृति के करीब समय बिताने, टहलने और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के अवसर उपलब्ध कराते हैं।
Balco
बालको टाउनशिप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, बालको टाउनशिप स्कूल, एमजीएम स्कूल और बाल सदन जैसी शैक्षणिक संस्थाएं बच्चों और युवाओं को शिक्षा एवं समग्र विकास के अवसर प्रदान कर रही हैं। पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, रचनात्मकता, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी ध्यान दिया जाता है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालको अस्पताल बालकोनगर और आसपास के समुदाय के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 125 बेड के इस अस्पताल में सामान्य चिकित्सा के साथ शिशु रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, हड्डी रोग, ईएनटी, नेत्र रोग, दंत चिकित्सा, रेडियोलॉजी और अन्य विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। आईसीयू, डायलिसिस, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और आपातकालीन सेवाएं जैसी आधुनिक सुविधाएं भी यहां उपलब्ध हैं।
स्वच्छ और स्वस्थ टाउनशिप के लिए वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बालको टाउनशिप में स्थापित सॉलिड एंड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सेंटर द्वारा घरेलू कचरे को इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से एकत्र कर जैविक और अजैविक कचरे में अलग किया जाता है। जैविक कचरे को खाद में बदला जाता है, जबकि प्लास्टिक कचरे का जिम्मेदार तरीके से सह-प्रसंस्करण किया जाता है। घर के स्तर पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए निवासियों को प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है।
टाउनशिप के सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए मंगल भवन का नवीनीकरण किया गया है, जहां जिम सहित सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं। इंडियन कॉफी हाउस की शुरुआत ने भी टाउनशिप के सामाजिक जीवन को नया आयाम दिया है। यह कर्मचारियों, परिवारों, निवासियों और आगंतुकों के लिए मिलने-जुलने और संवाद का सुविधाजनक स्थल बन रहा है। खेल सुविधाओं के विकास के लिए अंबेडकर स्टेडियम के आधुनिकीकरण और सौंदर्यीकरण पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही टाउनशिप एवं आसपास के क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण एवं चौड़ीकरण तथा अन्य जनहितकारी परियोजनाओं के माध्यम से नागरिक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
बालको टाउनशिप में हो रहे ये बदलाव इस सोच को दर्शाते हैं कि औद्योगिक प्रगति केवल उत्पादन और व्यवसाय तक सीमित नहीं होती। वास्तविक विकास तब होता है, जब उसके साथ लोगों का जीवन और समुदाय भी बेहतर बने। हरियाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, खेल, सामाजिक जुड़ाव और आधुनिक नागरिक सुविधाओं का समन्वय बालकोनगर को एक जीवंत और सुविधासंपन्न समुदाय का स्वरूप दे रहा है।