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Korba break : तालाब में डूबने से एक मोहल्ले की तीन बच्चियों की मौत,गांव में पसरा मातम 

Korba break

कोरबा | छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र में तालाब में नहाने गई तीन बच्चियां गहराई में डूब गईं. मृतकों की पहचान इंदु (7 वर्षीय), राखी (8 वर्षीय) और साधना (8 वर्षीय) के रूप में हुई है. तीनों बच्चियां एक ही बस्ती की रहने वाली थीं और आपस में सहेलियां थीं.दरअसल उस दिन तीनों बच्चियां स्कूल नहीं गई थीं और घर पर ही थीं. उनके परिजन काम पर गए हुए थे. दोपहर के समय तीनों तालाब नहाने गई थीं. काफी देर तक वापस घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई।

 

 

परिजन और ग्रामीण तालाब पर पहुंचे तो किनारे पर तीनों बच्चों के कपड़े और चप्पल मिले. इसी दौरान तालाब में इंदु का शव तैरता हुआ दिखाई दिया. संदेह गहराने पर तालाब में खोजबीन शुरू की गई.जानकारी के मुताबिक, तीनों बच्चियां स्कूल जाने के बजाय तालाब में नहाने चली गई थीं. इसी दौरान गहरे पानी में सभी डूब गईं. स्कूल से नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की. पता चला कि तीनों तालाब गईं थी. इसके बाद अलगू तालाब में उन्हें ढूंढने के प्रयास शुरू किया गया.घटना की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई. सूचना मिलते ही पाली थाना प्रभारी मनोज कौशिक स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे.

 

पुलिस और ग्रामीणों ने तालाब में उतरकर तलाश शुरू की. काफी मशक्कत के बाद राखी और साधना के शव भी बरामद कर लिए गए.बताया जा रहा है कि जब तीनों सहेली नहाने गईं, उस दौरान तालाब पर कोई नहीं था. एक ग्रामीण जब तालाब के पास पहुंचा तो एक का शव तैरता देखा. उसके बाद भीड़ जुट गई और पुलिस को सूचना दी गई. प्रारंभिक जांच में डूबने से मौत की आशंका जताई जा रही है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.पाली थाना प्रभारी मनोज कौशिक ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची. तीनों बच्चियों के शव बरामद कर आवश्यक कार्रवाई की गई है.

बालको मेडिकल सेंटर ने मध्य भारत में कैंसर उपचार को बनाया अधिक सुलभ

 

कैंसर का पता चलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन मध्य भारत के कई मरीजों के लिए असली चुनौती उपचार केंद्र तक पहुँचना भी है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को कई सौ किलोमीटर दूर बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। रहने की व्यवस्था, काम से छुट्टी और बार-बार परामर्श, जाँच, कीमोथेरेपी, सर्जरी और फॉलो-अप के लिए यात्रा, ये सब परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं।

इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में नया रायपुर में बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) की स्थापना हुई। आज आठ वर्षों बाद बीएमसी मध्य भारत में विशेषज्ञ कैंसर उपचार की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है। अब तक यहाँ 75,000 से अधिक मरीजों का उपचार, लगभग 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96,000 से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं।

कोंडागांव के 28 वर्षीय एक मरीज की कहानी इस बदलाव को समझने में मदद करती है। नया रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रहने वाले इस मरीज को दुर्लभ और गंभीर रक्त कैंसर का पता चला। बीएमसी में कई चरणों की कीमोथेरेपी के बाद उनका ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। उपचार के लिए उन्हें अलग-अलग संस्थानों के बीच भटकना नहीं पड़ा और उनका पूरा उपचार एक ही केंद्र में हुआ।

इसी तरह, 48 वर्षीय एक मरीज को पैंक्रियाज के ऐसे कैंसर का पता चला, जिसकी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से बीएमसी में उनका उपचार किया गया। दो वर्ष बाद जब वे फॉलो-अप के लिए लौटे, तो वे स्वस्थ थे और सामान्य जीवन में वापस आ चुके थे।

ये अनुभव बताते हैं कि कैंसर उपचार में विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका मरीज तक पहुँचना और उपचार का पूरा होना। बीएमसी का प्रयास इसी दिशा में है, उपचार के विभिन्न चरणों को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध कराना। यहाँ मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ हेमेटोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पैलिएटिव केयर टीम मिलकर काम करती हैं। मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के माध्यम से विशेषज्ञ मरीज की स्थिति की संयुक्त समीक्षा कर उपचार की योजना तैयार करते हैं।

बीएमसी ने मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, उन्नत जाँच और हेमेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का भी विस्तार किया है। यहाँ 180 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं और इसका ट्रांसप्लांट कार्यक्रम मध्य भारत के बड़े कार्यक्रमों में शामिल है।

उपचार के साथ मरीजों और उनके परिजनों की अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है। सुख सराय में उपचार के दौरान रियायती आवास की सुविधा मिलती है। दूरदराज के मरीजों के लिए परिवहन सहायता उपलब्ध है, जबकि कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार दिया जाता है। पात्र मरीजों को उपचार और जाँच के लिए बीएमसी चैरिटेबल फंड से आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिसमें सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहने वाले मरीज भी शामिल हैं।

प्रारंभिक पहचान के महत्व पर वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत कश्यप कहते हैं, “कैंसर के उपचार में इसकी शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी किस अवस्था में सामने आती है, इसका सीधा असर उपचार के विकल्पों और परिणामों पर पड़ सकता है। इसलिए नियमित जाँच और जागरूकता के माध्यम से कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में करना आवश्यक है। इसी दिशा में केंद्र ने छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण एवं शहरी समुदायों में 500 से अधिक कैंसर जाँच और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसमें स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुख का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर व ओरल (मुख) के कैंसर पर विशेष ध्यान दिया गया है।”

आज बीएमसी तक छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी मरीज पहुँच रहे हैं। इससे नया रायपुर की भूमिका क्षेत्रीय कैंसर उपचार केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है। बालको मेडिकल सेंटर में सभी सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, मुख्य मंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अलावा सभी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञ उपचार, ट्रांसप्लांट, बहु-विषयक चिकित्सा, आर्थिक सहायता, आवास, परिवहन और शुरुआती जाँच, इन सभी को एक साथ लाकर बीएमसी कैंसर उपचार की राह में आने वाली कई दूरियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। उद्देश्य यही है कि मरीज की उपचार यात्रा में दूरी उसकी उम्मीद और उपचार के बीच बाधा न बने।

10 accused sentenced to death in CG : झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को फांसी की सजा, 13 साल बाद NIA की विशेष अदालत का फैसला

10 accused sentenced to death in CG 
10 accused sentenced to death in CG 

जगदलपुर/रायपुर। 10 accused sentenced to death in CG : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद अदालत का फैसला आया है। जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इससे पहले 5 सितंबर 2026 को अदालत ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था।

25 मई 2013 को हुआ था हमला 10 accused sentenced to death in CG

10 accused sentenced to death in CG 
10 accused sentenced to death in CG

25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और अन्य कांग्रेस नेताओं सहित कुल 29 लोगों की मौत हुई थी।

करीब 13 साल चली न्यायिक प्रक्रिया 10 accused sentenced to death in CG

मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मामले में कुल 11 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि अन्य आरोपी अभी फरार बताए गए हैं।

10 दोषियों को मृत्युदंड 10 accused sentenced to death in CG

5 सितंबर को दोषसिद्धि के बाद अदालत ने 16 सितंबर को सजा का ऐलान किया। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड दिया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं।

अभी फांसी की सजा लागू नहीं होगी

 

कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा को हाईकोर्ट से पुष्टि (confirmation) मिलना आवश्यक है। दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। इसलिए अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बावजूद इसे तत्काल लागू नहीं किया जाएगा।

झीरम कांड की जांच और साजिश पर सवाल

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे गंभीर माओवादी हमलों में गिना जाता है। इस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी हमले के व्यापक षड्यंत्र, इसमें शामिल अन्य लोगों और फरार आरोपियों से जुड़े सवाल चर्चा में बने हुए हैं। अदालत का यह फैसला मामले में अभियोजन के खिलाफ चले मुकदमे में 10 दोषियों के संबंध में ट्रायल कोर्ट का निर्णय है; आगे हाईकोर्ट में अपील और मृत्युदंड की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया बाकी है।

अब UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज, 15 अक्टूबर से लागु,जाने कितने ट्रांजेक्शन पर कितना लगेगा चार्ज

नई दिल्ली। UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा। फीस की मैक्सिमम लिमिट 300 रुपए तक की गई है। यह अमाउंट अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर निर्भर करेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बिजनसेमैन से लिया जाएगा।

हालांकि ₹2,000 तक पेमेंट करने पर ग्राहक और बिजनेसमैन दोनों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर यह स्थिति साफ कर दी थी। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस छूट में शामिल किया गया है।

दरअसल, अगस्त में संसद से टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास होने के बाद UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर चर्चा शुरू हुई थी।

BALCO : एल्यूमिनियम निर्माण के अगले अध्याय को आकार देते बालको के इंजीनियर

बालकोनगर, 15 सितंबर, 2026। हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।

 

बालको जब 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहाँ हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।

 

पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू कहती हैं, “मैं उन युवा इंजीनियर्स में से एक हूँ, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहाँ प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।”

बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं, “एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआई और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।”

एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ कहते हैं, “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”

कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं, “हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है।”

कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।

CG BIG BREAKING : GST इंस्पेक्टर परीक्षा निरस्त, सभी चयनित इंस्पेक्टर भेजे गए मूल पदों पर, क्या अब होगी इसकी जाँच

CG BIG BREAKING
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रायपुर।CG BIG BREAKING :  छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में वर्ष 2022 में हुई State Tax Inspector की पदोन्नति परीक्षा अब एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। 11 सितंबर 2026 के आदेश में गंभीर अनियमितताओं के आधार पर 2022 की परीक्षा से जुड़ी पदोन्नति एवं नियुक्तियों को प्रारंभ से ही शून्य (Void ab initio) घोषित कर निरस्त किया गया है और प्रभावित कर्मचारियों को मूल पदों पर वापस भेजा गया है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है—अगर पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, तो आखिर परीक्षा के दौरान क्या हुआ था और जिम्मेदार कौन है?

मेहनत परीक्षार्थियों की, सवाल पूरी व्यवस्था पर CG BIG BREAKING 

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इस परीक्षा में शामिल कर्मचारियों ने पदोन्नति की उम्मीद में मेहनत की, तैयारी की और परीक्षा दी। करीब 350 कर्मचारियों के लगभग 42 पदों के लिए परीक्षा में शामिल होने की बात पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उठाई थी। ऐसे में यदि चयन प्रक्रिया में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार परीक्षार्थियों को हुआ होगा जिन्होंने अपनी मेहनत के भरोसे परीक्षा दी थी।

विज्ञापन कुछ, चयन प्रक्रिया कुछ? CG BIG BREAKING

 

मामले का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में 28 अप्रैल 2022 के विज्ञापन में जिस नियम के अनुसार चयन की बात कही गई थी, परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने के बाद 19 मई 2022 को नए नियम अधिसूचित किए जाने और बाद में उन्हीं के आधार पर अंक देने को लेकर विवाद दर्ज है। याचिकाकर्ताओं ने इसे चयन प्रक्रिया के बीच “rules of the game” बदलने का मुद्दा बताया। हालांकि, एकल पीठ ने उस चुनौती को स्वीकार नहीं किया और 1 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज कर दी। मामला आगे भी न्यायिक प्रक्रिया में उठा है।

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि कौन चयनित हुआ, बल्कि यह भी है कि चयन की पूरी प्रक्रिया विज्ञापन और लागू नियमों के अनुरूप कितनी पारदर्शी थी।

अंकों और उत्तरपुस्तिकाओं पर भी उठ चुके हैं सवाल CG BIG BREAKING 

हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में याचिकाकर्ताओं की ओर से उत्तरपुस्तिका में अंकों में कथित हेरफेर का मुद्दा भी उठाया गया है। ऐसे में अब यह मांग और गंभीर हो जाती है कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं, मूल्यांकन प्रक्रिया, अंकों का रिकॉर्ड, मेरिट तैयार करने की प्रक्रिया और चयन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच हो।

ननकीराम कंवर ने PM तक उठाया था मामला

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पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भी इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी। उन्होंने परीक्षा में कथित अनियमितताओं, चयनित अभ्यर्थियों के असामान्य रूप से अधिक अंकों और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। ये आरोप अभी जांच के जरिए सत्यापित किए जाने बाकी हैं, लेकिन अब 11 सितंबर के निरस्तीकरण आदेश के बाद इन सवालों को फिर से नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

अब असली परीक्षा जांच की है

नियुक्तियां निरस्त करना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन परीक्षा की कथित गड़बड़ी की जड़ तक पहुंचना उससे भी बड़ा सवाल है।

यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच से सच्चाई सामने आएगी। और यदि कहीं अंकों, उत्तरपुस्तिकाओं, नियमों या चयन प्रक्रिया में जानबूझकर अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

सरकार ने हाई कोर्ट में लगाया केवीएट 

छत्तीसगढ़ सरकार ने इन नीतियों को निरस्त करने के साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक केवीएट फाइल कर दिया है जिससे कोई कर्मचारी इस आदेश से शुभ होकर हाई कोर्ट जाना चाहे तो सरकार ने पहले ही केवीएट दायर कर दिया है ताकि उच्च न्यायालय उनको किसी तरह से स्थगन या राहत देने से पहले सरकार की बात को भी सुने इससे यह स्पष्ट हो रहा है की सरकार इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है और आगे जांच की प्रक्रिया तेज हो सकती है.

क्योंकि सवाल सिर्फ 2022 में चयनित हुए कर्मचारियों का नहीं है—सवाल उन सैकड़ों कर्मचारियों की मेहनत, परीक्षा की विश्वसनीयता और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर जनता के भरोसे का है।

अब देखना यह है कि मामला सिर्फ नियुक्तियां रद्द करने तक सीमित रहता है या परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पूरी परत भी खुलेगी।

CG में अडानी फाउंडेशन का दावा,पहले बच्चे पढ़ना नहीं जानते थे हमने सिखाया,सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, देखें वीडियो

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अडानी के आने से पहले न ही यहां रोजगार थी और न ही शिक्षा के लिए एक अच्छा स्कूल था। प्रदेश में बच्चों को अंग्रेजी का ABCD तक पढ़ना नहीं आता था। अडानी फाउंडेशन के पहल के बाद ही यहां के बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ है। यह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ में सरकार की नाकामी को उजागर करता है।

 

दरअसल, अडानी समूह द्वारा प्रचार के लिए एक वीडियो जारी किया गया जिसमें दावा किया गया कि उसके आने के बाद से ही शिक्षा बेहतर हुआ है। यानी छत्तीसगढ़ में सरकार पूरी तरह फेल है। यदि किसी निजी कंपनी को यह बताना पड़ रहा है कि उसके आने से पहले बच्चों को बुनियादी शिक्षा तक उपलब्ध नहीं थी, तो यह सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

शिक्षा, स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी कॉरपोरेट समूह के प्रचार वीडियो में सरकारी व्यवस्था से पहले की स्थिति को बेहद खराब बताना राजनीतिक रूप से सरकार के लिए असहज पैदा करने वाली स्थिति है।

अडानी फाउंडेशन के दावे में कितना दम

अडानी फाउंडेशन का दावा है कि उसके आने से ही यह सब संभव हो पाया है। अडानी समूह की ओर से शिक्षा, स्कूलों के उन्नयन, डिजिटल सुविधाओं और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने जैसी पहलों का उल्लेख किया जाता रहा है। अडानी से जुड़े अन्य शिक्षा कार्यक्रमों में कंप्यूटर लैब और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे भी सामने आए हैं।

BALCO मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ

BALCO मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ

रायपुर, 14 सितंबर 2026। मध्य भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) द्वारा चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव 18 से 20 सितंबर 2026 तक मेफेयर लेक रिजॉर्ट्स, नया रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के साथ चूजिंग वाइजली इंडिया की सातवीं बैठक भी आयोजित होगी, जो ईकैंसर, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित की जा रही है।

इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम ‘कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना’ है। इसमें मुख्य रूप से स्तन कैंसर, स्त्री रोग संबंधी कैंसर और मूत्र-जनन तंत्र के कैंसर पर चर्चा होगी। उपचार के सही विकल्प चुनने और मरीज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मरीज-केंद्रित उपचार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभिन्न सत्रों में अनावश्यक उपचार से बचने, उपचार से जुड़े निर्णयों में मरीज की भागीदारी सुनिश्चित करने और दुनिया भर में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को भारत में रोजमर्रा के कैंसर उपचार में प्रभावी रूप से अपनाने पर चर्चा होगी।

 

वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही ने कहा, “कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना का अर्थ मरीजों को उनके घर के करीब बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना भी है। जब देश और दुनिया के विशेषज्ञ क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञों के साथ एक मंच पर आते हैं, तो ज्ञान और अनुभव साझा करने के साथ बेहतर चिकित्सा पद्धतियों से सीखने और स्थानीय स्तर पर उपचार की क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलता है। नया रायपुर में कैंसर विशेषज्ञों का एक साथ आना हमारे लिए बेहद उत्साहजनक है और ऐसे मंचों के महत्व को दर्शाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “कैंसर उपचार की क्षमता को मजबूत करने के साथ अगली पीढ़ी के विशेषज्ञों को तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष हम देशभर के 50 युवा डॉक्टरों को यात्रा सहायता देते हैं, ताकि वे कॉन्क्लेव में शामिल होकर इस क्षेत्र के श्रेष्ठ विशेषज्ञों से सीख सकें और अपने ज्ञान व कौशल को मजबूत कर सकें।”

कॉन्क्लेव में यूके, अमेरिका, यूएई, नेपाल, श्रीलंका, इजराइल, बेल्जियम, कनाडा और स्विट्जरलैंड से 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनके साथ देशभर से 200 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कैंसर विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। विशेषज्ञ कैंसर उपचार, चिकित्सा अनुसंधान, सटीक कैंसर उपचार, रेडिएशन, सर्जरी और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

तीन दिनों के दौरान 20 से अधिक परिचर्चाएं, बहु-विषयक सत्र, वाद-विवाद और वास्तविक मरीजों के मामलों पर आधारित चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें स्तन कैंसर की लाइव सर्जरी का प्रदर्शन भी शामिल होगा। साथ ही विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें इंटरस्टिशियल ब्रैकीथेरेपी, चिकित्सा अनुसंधान और क्लिनिकल ट्रायल की रूपरेखा, आनुवंशिक जांच और सटीक कैंसर उपचार, कैंसर की पैथोलॉजी, स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तथा नई पीढ़ी की न्यूक्लियर मेडिसिन और थेरानोस्टिक्स जैसे विषय शामिल होंगे।

 

कॉन्क्लेव में वीमेन फॉर ऑन्कोलॉजी की नेटवर्किंग और मार्गदर्शन बैठक भी आयोजित होगी। इसमें कैंसर उपचार के क्षेत्र में कार्यरत महिला विशेषज्ञों को एक-दूसरे से जुड़ने, अपने अनुभव साझा करने, सहयोग बढ़ाने और नेतृत्व व मार्गदर्शन के अवसर तलाशने का मंच मिलेगा।

शैक्षणिक कार्यक्रम के साथ बीएमसी की ओर से ‘कैनवास फॉर ए लाइफ’ नाम से कला और विरासत प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी बीएमसी चैरिटेबल फंड के समर्थन में होगी। यह फंड जरूरतमंद मरीजों को उपचार, जांच और पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उपचार के दौरान आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं में भी सहयोग करता है।

 

पिछले वर्ष आयोजित कॉन्क्लेव में देशभर से 1,000 से अधिक चिकित्सकों, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया था। इस वर्ष का आयोजन इससे भी व्यापक होने की उम्मीद है। कॉन्क्लेव के माध्यम से देश-दुनिया के विशेषज्ञ एक साथ मिलकर भारत में अधिक प्रभावी, समान और मरीज-केंद्रित कैंसर उपचार की दिशा में विचार साझा करेंगे। कॉन्क्लेव के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है। इच्छुक प्रतिभागी बालको मेडिकल सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बीएएलसीओएमईडीआईसीएएलसीईएनटीआरई डॉट कॉम के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले प्रतिनिधि और फैकल्टी सदस्य छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, रायपुर से सीएमई क्रेडिट पॉइंट्स प्राप्त करने के पात्र होंगे।

Ajab gajab news : CG में 35 देवी देवताओं को उम्र कैद की सजा, 157 मामलो की हुई सुनवाई

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बस्तर : Ajab gajab news : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में रविवार को एक ऐसी अदालत लगी, जहां कटघरे में इंसान नहीं, देवी-देवता थे। भंगाराम माई की अदालत में 157 मामलों की सुनवाई हुई। किसी पर गांव में बीमारी फैलाने, किसी पर फसल खराब होने तो किसी पर अनहोनी का आरोप था।

लोक आस्था की इस अनोखी न्याय व्यवस्था में 35 देवी-देवताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि कुछ को एक साल की रिमांड पर भेज दिया गया। कई आरोपों से बरी हुए तो कुछ के काम की अदालत ने सराहना की।

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भंगाराम माई की अनोखी देव अदालत लगी, जहाँ 157 मामलों की सुनवाई हुई। इस लोक आस्था की न्याय व्यवस्था में 35 देवी-देवताओं को ‘उम्रकैद’ की सजा सुनाई गई और कुछ को एक साल की रिमांड पर भेजा गया।

 

देश में अनोखी मानी जाने वाली कोंडागांव जिले की इस देव अदालत ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा।नौ परगना के ग्रामीणों के लिए यह अदालत उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

भादो जात्रा के मुख्य पुजारी सरजू राम गौर बताते हैं कि जिन देवी-देवताओं या शक्तियों को समाज के लिए हानिकारक माना जाता है, उनके मामले यहां लाए जाते हैं। लोक परंपरा और पुजारियों की अगुवाई में चली सुनवाई के बाद दोषी मानी गई देव-शक्तियों पर फैसला सुनाया जाता है। उम्रकैद का अर्थ उनकी पूजा, स्थापना और मान्यता पर स्थायी रोक है।

अदालत की सबसे रोचक परंपरा ‘रिमांड’ है। हर मामले में तत्काल अंतिम फैसला नहीं होता। कुछ देवी-शक्तियों को एक वर्ष के लिए रिमांड पर रखा जाता है। इस दौरान उनके प्रभाव और गांव की परिस्थितियों को परखा जाता है। अगले वर्ष भादो जात्रा में मामला फिर अदालत में आता है और उसके बाद अंतिम निर्णय सुनाया जाता है।

भंगाराम माई : देवी-देवताओं की सर्वोच्च अदालत Ajab gajab news

न कोई जज है, न वकील, न आइपीसी की धारा। फैसला होता है ढोल-मांदर की थाप, पुजारी के मंत्र और सदियों से चली आ रही आदिवासी आस्था के आधार पर। दूर-दराज के गांवों से हजारों लोग सिर्फ यह न्याय देखने आते हैं।

केशकाल की भादो जात्रा सिर्फ मेला नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की अपनी सर्वोच्च अदालत है। जहां आस्था ही संविधान है और परंपरा ही कानून।

यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, लोकविश्वास और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के बीच संपन्न होती है। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं।

जेसीआई कोरबा सेंट्रल की युवा संसद में दिखा लोकतंत्र का जीवंत स्वरूप

कोरबा | युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संसद की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से जेसीआई कोरबा सेंट्रल द्वारा सेंट जेवियर पब्लिक स्कूल में युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रिया, सदन की कार्यवाही तथा पक्ष-विपक्ष के बीच होने वाली बहस की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

युवा संसद में विद्यार्थियों ने लोकसभा स्पीकर, सत्तापक्ष एवं विपक्ष के सांसदों की भूमिका छात्रों ने निभाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में नवनिर्वाचित छात्र सांसदों को हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई गई। इसके बाद स्पीकर द्वारा सदन की कार्यवाही प्रारंभ की गई।

सदन में विभिन्न सामाजिक एवं आधुनिक विषयों को चर्चा के लिए रखा गया। विद्यार्थियों ने स्पीकर के समक्ष अपने-अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया तथा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच प्रश्नोत्तर एवं तार्किक बहस हुई। विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति और आत्मविश्वास ने कार्यक्रम को रोचक बना दिया।

युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादा, नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री किशोर शर्मा, डॉ. डी.के. आनंद, अंश अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, दीपेश अग्रवाल, कपिल विश्वकर्मा, हर्ष गुप्ता, शीतल बजाज, अध्यक्ष सीए त्रिलोकी नाथ बजाज एवं संस्था के अन्य पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

जेसीआई कोरबा सेंट्रल द्वारा आयोजित यह युवा संसद विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र को समझने और संसदीय प्रक्रिया को करीब से अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक अवसर साबित हुई।