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BALCO : बालको में सुरक्षा संस्कृति को मिला नया बल, पांच वर्षों में 27,000 से अधिक लोगों को सुरक्षा प्रशिक्षण

बालकोनगर, 28 सितंबर 2026। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में सुरक्षा केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काम करने के तरीके और व्यवहार का अभिन्न हिस्सा है। बालको ने अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण, व्यावहारिक गतिविधियों और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों, आगंतुकों और आसपास के समुदायों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया है। इन प्रयासों का उद्देश्य ‘जीरो हार्म’ की संस्कृति को मजबूत करना और सभी के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

बालको में सभी कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और आगंतुकों के लिए सुरक्षा इंडक्शन अनिवार्य है। इसके माध्यम से कार्यस्थल पर मौजूद संभावित जोखिमों और जरूरी सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाती है। प्रचालन क्षेत्र में प्रवेश से पहले प्रतिभागियों को सुरक्षा प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाता है और इसके बाद सुरक्षा से जुड़ा आकलन भी किया जाता है। पिछले पांच वर्षों में बालको ने 27,000 से अधिक लोगों को सुरक्षा इंडक्शन दिया है। वहीं, वित्तवर्ष 2026 में 2.30 लाख से अधिक मैन-आवर्स का सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा किया गया।

सुरक्षा को व्यवहार का हिस्सा बनाने पर बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक श्री राजेश कुमार सिंह ने कहा, “बालको में सुरक्षा हमारे काम करने, नेतृत्व करने और हर दिन निर्णय लेने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जीरो हार्म हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता, जिम्मेदारी और एक-दूसरे की चिंता के माध्यम से हम सुरक्षा को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं, ताकि हर व्यक्ति सुरक्षित रूप से घर लौटे।”

बालको ने सुरक्षा प्रशिक्षण को नियमित गतिविधियों से आगे बढ़ाकर व्यवहार में शामिल करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। ‘सुरक्षा संकल्प’ के माध्यम से लगभग पांच वर्षों से कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों के बीच सुरक्षा जागरूकता बढ़ाई जा रही है। हर सत्र में अलग विषय के माध्यम से सुरक्षा के बेहतर तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

‘सुरक्षा स्टीवर्ड’ के तहत शॉप फ्लोर से चुने गए सुरक्षा चैंपियन अपने साथियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों के लिए प्रेरित करते हैं। ‘सुरक्षा पहल’ सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, जबकि ‘सुरक्षा ज्योति’ के माध्यम से सुपरवाइजरों को सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण देकर उनके नेतृत्व कौशल को मजबूत किया जाता है। वहीं, ‘सुरक्षा प्रहरी’ और ‘सुरक्षा चौपाल’ जैसे संवादात्मक मंचों के माध्यम से वरिष्ठ प्रबंधन और सुपरवाइजर सुरक्षा से जुड़े विषयों, चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर सीधे संवाद करते हैं।

इस वर्ष की शुरुआत में बालको ने ‘सेफ्टी पार्क’ भी शुरू किया। यह एक अनुभव आधारित प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ मॉडल, व्यावहारिक मॉड्यूल और दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सुरक्षा नियमों को आसानी से समझाया जाता है। इससे प्रतिभागियों को सुरक्षा प्रक्रियाओं को देखकर और समझकर सीखने का अवसर मिलता है।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बालको के प्रयासों को ग्लोबल रोड सेफ्टी अवॉर्ड 2026 से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान बालको द्वारा सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की पहचान है।

बाबा इंसान अली के 68 वें उर्स में जमजम गेस्ट हॉउस में 4 दिन चलेगा लंगर,15 साल पुरानी परंपरा रहेगी कायम

बिलासपुर। बिलासपुर जिले में स्थित हजरत बाबा सैयद इंसान अलीशाह रहमतुल्लाह के 68वें उर्स मुबारक के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए चार दिनों तक लंगर की विशेष व्यवस्था की गई है।

यह व्यवस्था हाजी अमीन साहब के पुत्र मोहम्मद आरिफ सेठ की जानिब से जमजम गेस्ट हॉउस में की जा रही है। उर्स के दौरान चार दिनों तक लंगर में दोपहर का भोजन और खाना शामिल रहेगा। आयोजक आरिफ सेठ के अनुसार लंगर का भोजन विशुद्ध रूप से शाकाहारी तैयार कराया जाएगा।

शहंशाह छत्तीसगढ़ कि बारगाह

बताते चलें कि हजरात बाबा सय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाह कि काफ़ी अहमियत हैं हर साल हजारों कि तादाद में जायरीन बाबा कि मुकद्दस बारगाह में हाजरी देने पहुंचते हैं अक़ीददत मंद लोगों कि मुरादें भी पूरी होती हैं ऐसे में इंतजामिया कमेटी भी 24 घंटे 4 दिन लंगर का एहतेमाम करती हैं इसके अलावे जमजम गेस्ट हॉउस में भी लंगर का एहतेमाम किया जाता हैं.

लंगर कि परंपरा कायम रहेगी

इस अवसर पर जमजम गेस्ट हाउस के संचालक मोहम्मद आरिफ सेठ ने बताया कि उनके पिता मरहूम हाजी मोहम्मद अमीन सेठ द्वारा विगत 15 – 16 वर्षों से जायरीनो के लिए आम लंगर का एहतेमाम किया जाता रहा है इस परंपरा कोकायम रखते हुए हमने या निर्णय लिया है कि यह परंपरा अनवरत जारी रहेगी और जायरीनो की सेवा में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी इसी के तहत इस वर्ष भी चार दिन उर्स के मौके पर आम लंगर का एहतेमाम किया गया है जो उर्स के चार दिन लगातार जारी रहेगी.

 

 

लंगर का उद्देश्य उर्स में आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराना और सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ाना है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद है।

BALCO NEWS :  एल्युमिनियम, ऊर्जा को दूर-दूर तक पहुँचाने वाली धातु

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बालकोनगर, 22 सिंतबर 2026।  BALCO NEWS भारत जब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऊर्जा क्षेत्र आर्थिक विकास और औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पारंपरिक बिजली उत्पादन से लेकर सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बिजली पहुंचाने वाले नेटवर्क तक, देश का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही डेटा सेंटर, डिजिटल सुविधाओं, उद्योगों और व्यवसायों के विस्तार से भरोसेमंद बिजली की मांग भी बढ़ रही है।

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बिजली का उत्पादन करना केवल शुरुआत है, उसे जरूरत की जगह तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। घरों, उद्योगों, रेलवे, मेट्रो, हवाई परिवहन और व्यवसायों तक बिजली पहुंचाने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। इस व्यवस्था में एल्युमिनियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हल्का वजन, जंग से बचाव, अच्छी विद्युत चालकता और पुनर्चक्रण की क्षमता इसे ऊर्जा से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए उपयोगी बनाती है। सौर पैनलों के फ्रेम, उन्हें लगाने वाली संरचनाओं, बिजली ग्रिड और पवन ऊर्जा के विभिन्न घटकों में इसका इस्तेमाल होता है।

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भारत में कई रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाएं शहरों और औद्योगिक केंद्रों से दूर स्थित हैं, जहां बिजली की खपत अधिक होती है। ऐसे में उत्पादित बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी हैं। बिजली उत्पादन केंद्र से वितरण केंद्रों और फिर घरों एवं कारखानों तक पहुंचने के सफर में एल्युमिनियम अहम योगदान देता है। ओवरहेड बिजली लाइनों में एल्युमिनियम आधारित कंडक्टर का व्यापक उपयोग होता है। इनकी खासियत है कि ये अच्छी विद्युत चालकता के साथ हल्के भी होते हैं।

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तांबा भी बिजली का अच्छा चालक है, लेकिन एल्युमिनियम का वजन काफी कम होता है। एल्युमिनियम की विद्युत चालकता, समान आयतन के आधार पर, तांबे की लगभग 61 प्रतिशत है। हालांकि, कम वजन और अपेक्षाकृत कम लागत के कारण यह लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने के लिए उपयोगी विकल्प बनता है।

हल्के कंडक्टर बिजली के टावरों पर पड़ने वाले भार को कम करने, स्थापना लागत घटाने और शहरी तथा दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क के विस्तार में मदद करते हैं। इस तरह एल्युमिनियम देश के व्यापक बिजली नेटवर्क को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत का ऊर्जा तंत्र लगातार विकसित हो रहा है और इसमें एल्युमिनियम का उपयोग कई क्षेत्रों में होता है। एलएनजी सुविधाओं, समुद्री तेल एवं गैस प्लेटफॉर्म, भंडारण प्रणालियों और पाइपलाइन से जुड़े ढांचे के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी और विद्युत बुनियादी ढांचे में भी इसकी उपयोगिता है।

एल्युमिनियम की एक और महत्वपूर्ण विशेषता है इसकी पुनर्चक्रण क्षमता। इसे दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। यह भारत की सस्टेनेबल विकास की दिशा में जारी कोशिशों का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, औद्योगीकरण, शहरीकरण और बढ़ते विद्युतीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग वर्ष 2027 तक हर साल 6.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। वहीं, देश अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर चुका है।

भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ना है। इन लक्ष्यों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में व्यापक विकास की जरूरत होगी।

इस दिशा में भारत की अग्रणी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों में से एक भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही है। कंपनी बिलेट्स, वायर रॉड्स, इनगॉट्स और रोल्ड उत्पादों सहित विभिन्न उत्पादों के माध्यम से बिजली ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क, विद्युत बुनियादी ढांचे, रिन्यूएबल एनर्जी प्रणालियों और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को सहयोग देती है।

घरेलू एल्युमिनियम वायर रॉड्स क्षेत्र में लगभग 33 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ बालको की महत्वपूर्ण उपस्थिति है। 5.75 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता वाली कंपनी अपनी क्षमता को 10 लाख टन तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। सूरज की रोशनी से ऊर्जा प्राप्त करने से लेकर पवन ऊर्जा का उपयोग करने और बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाने तक, एल्युमिनियम भारत के ऊर्जा भविष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कोरबा: पसान क्षेत्र में अधेड़ की लाश मिलने से सनसनी, हत्या की आशंका

भतीजे पर शक की सुई, जमीन विवाद को लेकर जताई जा रही आशंका; पुलिस जांच में जुटी

कोरबा। पसान थाना क्षेत्र में एक अधेड़ व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक तौर पर मामला हत्या से जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। परिजनों और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, मृतक के भतीजे पर शक की सुई घूम रही है। जमीन संबंधी विवाद को घटना की संभावित वजह के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। संदिग्ध व्यक्ति के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

Attack on Bhupesh Baghel’s convoy in Assam : असम में भूपेश बघेल गोगोई के काफिले पर पथराव, एसिड की बोतले भी फेकी, सियासत गरमाई 

Attack on Bhupesh Baghel's convoy in Assam
Attack on Bhupesh Baghel's convoy in Assam

Attack on Bhupesh Baghel’s convoy in Assam

रायपुर:Attack on Bhupesh Baghel’s convoy in Assam  असम के नगांव में लोकसभा उपचुनाव के प्रचार में लगे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के काफिले पर असामाजिक तत्वों ने जानलेवा हमला कर दिया है। भरे बाजार में चलती गाड़ियों पर अचानक पत्थरों की बारिश शुरू हो गई। बात सिर्फ पथराव तक नहीं रुकी, बल्कि नेताओं की गाड़ी पर एसिड तक फेंका गया। इस खौफनाक घटना ने पूरे देश की सियासत में बड़ा भूचाल ला दिया है।

शीशा बंद था, वरना जा सकती थी जान Attack on Bhupesh Baghel’s convoy in Assam 

Attack on Bhupesh Baghel's convoy in Assam
Attack on Bhupesh Baghel’s convoy in Assam

इस हमले के दौरान गाड़ियों के अंदर मौजूद कांग्रेस नेताओं की जान जाते-जाते बची। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने भूपेश बघेल और गौरव गोगोई की गाड़ी को निशाना बनाते हुए उस पर घातक एसिड फेंका। गनीमत यह रही कि उस वक्त गाड़ी के शीशे पूरी तरह बंद थे। अगर शीशे जरा भी खुले होते, तो कोई बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती थी। हालांकि, इस जानलेवा हमले में एआईसीसी के सचिव मनोज चौहान और कुछ अन्य स्थानीय नेताओं को चोटें आई हैं। घटना के बाद इलाके में भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कांग्रेस प्रत्याशी सिबामोनी बोरा भी इस काफिले का हिस्सा थीं।

असम के नगांव में भूपेश बघेल और गौरव गोगोई के काफिले पर जानलेवा पथराव।

हमलावरों ने नेताओं की गाड़ी पर फेंका एसिड, शीशा बंद होने से टली बड़ी अनहोनी।

एआईसीसी सचिव मनोज चौहान समेत कई अन्य कांग्रेसी नेताओं को हमले में चोटें आईं।

हमलावरों ने मोटरसाइकिलों से काफिले का पीछा किया, जिन पर कथित तौर पर बीजेपी के झंडे लगे थे।

‘बीजेपी के झंडे लगी बाइकों ने किया पीछा’ Attack on Bhupesh Baghel’s convoy in Assam 

इस पूरी खौफनाक घटना की जानकारी खुद भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए देश के सामने रखी। बघेल ने अपने पोस्ट में साफ तौर पर लिखा कि नगांव में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे उनके काफिले पर कुछ असामाजिक तत्वों ने प्राणघातक हमला किया। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आरोप यह है कि हमलावर मोटरसाइकिलों से काफिले का पीछा कर रहे थे और इनमें से कुछ बाइकों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के झंडे भी लगे हुए थे। इस खुलासे के बाद से कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।

चुनाव आयोग और असम पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हमले के तुरंत बाद, कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पुलिस का रुख किया। स्थानीय थाने में इस पूरी घटना की नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। इसके साथ ही भूपेश बघेल और अन्य नेताओं ने नगांव के कलेक्टर और एसपी (SP) से भी तत्काल मुलाकात कर अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। बघेल ने खुले तौर पर भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान इतनी बड़ी सुरक्षा चूक कैसे हो सकती है?

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि यह हमला असम की भाजपा सरकार के अंदर भूपेश बघेल के प्रति खौफ को साफ-साफ दिखाता है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि पथराव और एसिड अटैक के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की तुरंत पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

ब्लैकमेलिंग के मामले में एक महिला और उसके साथी को ढाई लाख लेते पुलिस ने रंगे हाथ दबोचा देखें VIDEO

जबलपुर : मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक हनीट्रैप का मामला सामने आया है इसमें एक जमीन कारोबारी को अपने जाल में फंसा कर पूजा दास नामक युवती ने ब्लैकमेल करना शुरू किया पहले मां की बीमारी के लिए 8 लाख रुपए मांगे फिर 20 लाख रुपया की मांग की नहीं देने पर उसकी प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कार दी इस बीच पुलिस ने एक होटल में युवती को ढाई लाख रूपए लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया हैं.

बताया जा रहा है कि 2025 में एक डांस कार्यक्रम के दौरान इनकी मुलाकात प्लॉटिंग कारोबारी सार्थक_सिंह से हुई। इसके बाद कथित तौर पर निजी वीडियो के नाम पर ब्लैकमेलिंग और पैसों की मांग का मामला सामने आया।

आरोप है कि पहले माँ की बीमारी के नाम पर 8 लाख रुपये मांगे गए। फिर शादी का दबाव बनाया गया और बात नहीं बनी तो कथित तौर पर 20 लाख रुपये की मांग की गई।

कथित धमकी दी गई कि पैसे नहीं दिए तो निजी वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। इसके बाद 7 लाख रुपये में डील होने और पहली किस्त के तौर पर ढाई लाख रुपये देने की बात सामने आई।

सार्थक सिंह ने पुलिस का सहारा लिया। पुलिस के मुताबिक, जबलपुर के एक होटल में ढाई लाख रुपये लेते हुए पूजा दास को कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ा गया।

पूरे मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया से होगी।

शोक समाचार : छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ कोरबा जिला उपाध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार राजू खत्री का निधन

 

बरपाली : बरपाली निवासी पत्रकार एवं पूर्व जनपद सदस्य राजू खत्री उर्फ राज कुमार खत्री का आज आकस्मिक निधन हो गया है उनका अंतिम संस्कार कल बाइस सितम्बर को स्थानीय मुक्ति धाम में किया जावेगा वे अपने पीछे पत्नि दो पुत्र एक पुत्री सहित छोड़ गए उनके आकस्मिक निधन पर पूरे गाँव में शोक की लहर छा गई है वे पत्रकार के साथ ही साथ अच्छे सामाजिक कार्यकर्ता थे.

Shivay Hospital Korba: डॉ. नागेंद्र बागरी की निगरानी में 600 ग्राम के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग, 90 दिन NICU के बाद 2.070 किलो होकर घर जाने को तैयार

Shivay Hospital Korba
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कोरबा। Shivay Hospital Korba : उम्मीद कितनी भी छोटी क्यों न हो, अगर उसे संभालने वाले हाथ मजबूत हों तो जिंदगी मुश्किल से मुश्किल जंग भी लड़ सकती है। कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में जन्मे 600 ग्राम के एक नन्हे मासूम की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसने जन्म के बाद करीब 90 दिनों तक जिंदगी की कठिन परीक्षा का सामना किया और अब 2 किलो 70 ग्राम वजन के साथ डिस्चार्ज होने की स्थिति तक पहुंच गया है।

सर्वमंगला नगर निवासी विजय समर्थ और उनकी पत्नी करीब चार साल से अपने घर में बच्चे की किलकारी का इंतजार कर रहे थे। चार साल बाद जब खुशियों ने दस्तक दी, तो उसके साथ एक ऐसी चुनौती भी आई, जिसने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया।

 

15 जून की वह रात…Shivay Hospital Korba

Shivay Hospital Korba
Shivay Hospital Korba

15 जून 2026 की रात करीब 1 बजे गर्भवती महिला को गंभीर और आपात स्थिति में शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा लाया गया। गर्भकाल महज 25 सप्ताह था। स्थिति को देखते हुए अस्पताल की टीम ने तत्काल जांच और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। डाक्टरों के कुशल मतदर्शन में करीब 2:20 बजे डिलीवरी हुई, लेकिन खुशी के उस पल के साथ परिवार के सामने जिंदगी की सबसे कठिन चुनौती खड़ी थी। नवजात का वजन महज 600 ग्राम था। इतना छोटा शरीर… और जिंदगी की इतनी बड़ी जंग।

नवजात को तत्काल NICU में भर्ती किया गया। इसके बाद शुरू हुआ करीब 90 दिनों का वह सफर, जिसमें हर दिन बच्चे की सांस और स्वास्थ्य को लेकर परिवार की उम्मीदें जुड़ी रहीं।

 

90 दिन NICU में… हर दिन उम्मीद और इंतजार  Shivay Hospital Korba

600 ग्राम के इस अति-प्रीमैच्योर बच्चे को करीब तीन महीने तक NICU में विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया। इस दौरान उसे विशेष नवजात देखभाल, श्वसन सहायता, नियंत्रित तापमान और लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत रही। इस पूरे उपचार के दौरान Paediatric विशेषज्ञ Dr. Nagendra Bagri सहित NICU की टीम ने बच्चे की लगातार निगरानी की। परिवार के लिए हर दिन एक ही सवाल होता था…आज बच्चा कैसा है?और हर छोटे सुधार के साथ उम्मीद थोड़ी और मजबूत होती गई।

धीरे-धीरे मासूम का वजन बढ़ने लगा। उसकी स्थिति में सुधार आता गया और 600 ग्राम से शुरू हुआ सफर अब 2.070 किलोग्राम तक पहुंच चुका है।

आरएमओ डॉ प्रवीण और डॉ बरखा ने भी संभाली कमान

नवजात की देखरेख के लिए आरएमओ डॉ प्रवीण और डॉ बरखा ने भी अहम भूमिका निभाते हुए लगातार बच्चे की देखरेख में लगे है। डॉ प्रवीण ने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ मरीज का बेहतर उपचार कर उन्हें नए जीवन देने का प्रयास करना।

 

डर से उम्मीद तक… पिता की आंखों में बदली तस्वीर

बच्चे के पिता विजय समर्थ उस मुश्किल दौर को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि पहली बार जब उन्होंने अपने बच्चे को देखा तो वह बेहद छोटा और नाजुक था। परिवार के लिए वह समय बेहद कठिन था।

विजय समर्थ के अनुसार, शिवाय हॉस्पिटल की डॉक्टरों और नर्सिंग टीम ने इलाज के साथ परिवार को लगातार हिम्मत दी। करीब तीन महीने तक बच्चे की देखभाल और निगरानी ने परिवार को उम्मीद बनाए रखने की ताकत दी।आज वही बच्चा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।

चार साल के लंबे इंतजार के बाद परिवार के लिए यह सिर्फ बच्चे के स्वस्थ होने की खबर नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी खुशी की वापसी है।

600 ग्राम से 2.070 किलो तक…

15 जून को जन्म के समय जिस बच्चे का वजन महज 600 ग्राम था, 19 सितंबर तक उसका वजन बढ़कर 2 किलो 70 ग्राम हो गया।परिवार के लिए यह महज वजन का आंकड़ा नहीं है।यह 90 दिनों की चिंता, इंतजार, दुआ और उम्मीद का हिसाब है।

शिवाय हॉस्पिटल के डॉक्टर नागेंद्र बागरी के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है।

 

शिवाय हॉस्पिटल: जहां नन्ही सांसों की जंग में परिवार के साथ खड़ी रही टीम

600 ग्राम जैसे बेहद कम वजन वाले नवजात की देखभाल में लगातार निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सा की जरूरत होती है। ऐसे समय में Dr. Nagendra Bagri (Paediatric), Dr. Barkha (Duty Doctor) और NICU टीम की निरंतर चिकित्सा निगरानी ने इस नन्हे मासूम के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिवाय हॉस्पिटल की NICU टीम के लिए भी यह मामला एक चुनौतीपूर्ण नवजात देखभाल का उदाहरण रहा, जहां उपचार के साथ परिवार को लगातार भरोसा और हिम्मत देना भी जरूरी था।

BALCO Cancer Hospital : बीएमसी का वार्षिक कॉन्क्लेव कैंसर के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगाः विष्णु देव साय

BALCO Cancer Hospital 
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रायपुर, 19 सितंबर 2026। वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की इकाई और मध्य भारत में कैंसर उपचार के प्रमुख केंद्र बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया। 18 से 20 सितंबर तक नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

BALCO Cancer Hospital 

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इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, आईएएस भी उपस्थित रहे।

इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के लिए राज्य के प्रयासों को और मजबूत करना तथा भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के व्यापक लक्ष्य में योगदान देना है।

BALCO Cancer Hospital 

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम संभव है। हमारा संकल्प है कि हम सर्वाइकल कैंसर मुक्त छत्तीसगढ़ से सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत की ओर आगे बढ़ें। इस मिशन में बीएमसी का वार्षिक कॉन्क्लेव क्षेत्र में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।”

छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “यह उत्साहजनक है कि देश और दुनिया के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रायपुर में एक साथ आए हैं।”

‘कैंसर उपचार में संतुलन की पुनर्स्थापना’ विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव में स्तन, स्त्री रोग संबंधी और मूत्र-जनन तंत्र के कैंसर के उपचार में सही विकल्प चुनने पर विशेष चर्चा हुई। इसमें आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के साथ वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित निर्णय, मरीज-केंद्रित उपचार, उपचार की किफायती पहुँच, रोकथाम और समान अवसर पर जोर दिया गया।

बीएमसी ने एकैन्सर, टाटा मेमोरियल सेंटर और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में 20 से अधिक विशेषज्ञ पैनल चर्चाएँ, सजीव सर्जिकल प्रदर्शन और विशेष व्यावहारिक कार्यशालाएँ आयोजित कीं। कॉन्क्लेव में 500 से अधिक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय विशेषज्ञों तथा 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।

BALCO Cancer Hospital 

कैंसर उपचार में उल्लेखनीय योगदान के लिए बीएमसी ने वेदावती अग्रवाल ऑरेशन अवॉर्ड से डॉ. रवि कन्नन को सम्मानित किया। उन्हें टिकाऊ और समान अवसर वाली कैंसर देखभाल तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने में उनके योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। यह ऑरेशन वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने अपनी माता और वेदांता के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल की माता स्वर्गीय श्रीमती वेदावती अग्रवाल जी की स्मृति में शुरू किया है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर वाली कैंसर देखभाल को सभी तक पहुँचाने की साझा सोच को आगे बढ़ाना है।

डॉ. भावना सिरोही, मेडिकल डायरेक्टर, बालको मेडिकल सेंटर ने कहा, “बीएमसी में हमारा मानना है कि कैंसर की रोकथाम बीमारी का बोझ कम करने का एक प्रभावी तरीका है और केवल भौगोलिक दूरी के कारण किसी मरीज की गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुँच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। हमारा उद्देश्य मध्य भारत में ऐसी व्यापक कैंसर देखभाल व्यवस्था विकसित करना है, जहाँ मरीजों को अपने घर के करीब रोकथाम, जाँच, निदान, उपचार, पुनर्वास और सहायक सेवाएँ मिल सकें।

महिलाओं में होने वाले कैंसर के बेहतर उपचार पर केंद्रित चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रमुखता दी गई। बीएमसी एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रमों और सुलभ स्व-जाँच विधियों के माध्यम से सरकारी पहलों को सहयोग दे रहा है। उन्नत इंटरस्टिशियल ब्रैकीथेरेपी की शुरुआत के साथ बीएमसी उन्नत अवस्था के सर्वाइकल कैंसर के उपचार में बेहतर परिणामों की दिशा में काम कर रहा है।

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए बीएमसी का नया स्तन स्वास्थ्य क्लिनिक पूरी तरह महिला कैंसर विशेषज्ञों द्वारा संचालित है। कई स्थानीय महिलाएँ स्तन और स्त्री रोग संबंधी जाँच के लिए महिला चिकित्सकों को प्राथमिकता देती हैं। यह विशेष टीम महिलाओं को गोपनीय, सहज और सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराती है, जिससे वे जाँच के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित हों।”

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शोध के महत्व पर डॉ. दिवाकर पांडे, कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, बालको मेडिकल सेंटर ने कहा, “कैंसर उपचार की प्रभावी और टिकाऊ रणनीति तैयार करने में शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह देखकर खुशी होती है कि युवा कैंसर विशेषज्ञ अपने मरीजों और समुदायों की स्थानीय जरूरतों से जुड़े शोध में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। ऐसे शोध से रोकथाम और उपचार की ऐसी रणनीतियाँ विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो प्रभावी होने के साथ किफायती और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हों।”

कॉन्क्लेव में वूमेन फॉर ऑन्कोलॉजी (डब्ल्यू4ओ) का आयोजन भी हुआ। यह महिला कैंसर विशेषज्ञों के बीच सहयोग, मार्गदर्शन और नेतृत्व को बढ़ावा देने वाला मंच है।

अकादमिक कार्यक्रमों के साथ बीएमसी ने ‘कैनवास फॉर ‘ए’ लाइफ’ कला एवं विरासत प्रदर्शनी भी आयोजित की। इसका उद्देश्य बीएमसी चैरिटेबल फंड के माध्यम से मरीजों को उपचार, जाँच और पोषण के लिए आर्थिक सहायता के साथ उपचार के दौरान आवास और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव का समापन क्षेत्र में कैंसर की रोकथाम को जनस्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

SECL द्वारा हरदीबाजार के CHC, पटवारी भवन को जमींदोज किये जाने पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश भाजपा विधायक के नेतृत्व में GM दफ़्तर में तालाबंदी

कोरबा / हरदीबाजार 19 सितंबर 2026: राज्य, जिला पंचायत और केंद्र में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के बावजूद कटघोरा के भाजपा विधायक प्रेमचंद पटेल को अपनी ही व्यवस्था और प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। शुक्रवार तड़के पुलिस बल की मौजूदगी में एसईसीएल (SECL) द्वारा हरदीबाजार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को बुलडोजर से जमींदोज किए जाने के बाद विधायक और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।

शनिवार को विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में सराई सिंगार, रेंकी और आसपास के गांवों के सैकड़ों भू-विस्थापितों ने दीपका स्थित SECL महाप्रबंधक (GM) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी और दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।

वोट बैंक खिसकने की आशंका और चुनावी रोष

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विधायक का यह सख्त रुख न केवल जनहित से जुड़ा है, बल्कि आगामी चुनावों में होने वाले बड़े राजनीतिक नुकसान का परिणाम भी है। SECL की दीपका विस्तार परियोजना के तहत 18 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के कारण कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा पर बुलडोजर चलने और विस्थापितों की अनदेखी से जनता में गहरा आक्रोश है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

विस्थापितों और विधायक की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने SECL प्रबंधन पर एकतरफा और तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:

100% उचित मुआवजा: भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी परिवारों को नियमानुसार पूर्ण और न्यायसंगत मुआवजा मिले।

नौकरी और पुनर्वास: प्रभावित विस्थापितों को स्थायी नौकरी और सम्मानजनक नई बसाहट उपलब्ध कराई जाए।

वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्था: ध्वस्त किए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के विकल्प के तौर पर तत्काल योग्य डॉक्टरों और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की जाए।

वार्ता विफल, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

धरने के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दीपका जीएम अशोक कुमार मौके पर पहुंचे और विधायक व ग्रामीणों से चर्चा की। हालांकि, ठोस और लिखित आश्वासन न मिलने के कारण वार्ता पूरी तरह विफल रही। विस्थापितों और विधायक ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक मांगों का लिखित समाधान नहीं होता, आंदोलन खत्म नहीं होगा। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।