कोरबा/National Cow Service Day” Should Be Celebrated : छत्तीसगढ़ के प्रथम मुस्लिम युवा मोहम्मद रफीक मेमन ने 10 वर्ष पहले राष्ट्रीय गौ-सेवा दिवस” की मांग के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार को गौ संरक्षण, पंजीयन, गणना, खरीदी-बिक्री व्यवस्था एवं गौ संवर्धन की पूर्ण व्यवहारिक योजना भी सौंपी थी।
आज देशभर में विभिन्न मुस्लिम संगठन, सामाजिक संस्थाएं एवं धर्मगुरु गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तथा गौ संरक्षण को लेकर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं, किन्तु छत्तीसगढ़ के कोरबा निवासी युवा योजनाकार एवं कर सलाहकार मोहम्मद रफीक मेमन ने यह अभियान आज से लगभग 10-11 वर्ष पूर्व ही प्रारंभ कर दिया था।
National Cow Service Day” Should Be Celebrated

वर्ष 2015-16 में मोहम्मद रफीक मेमन द्वारा “राष्ट्रीय गौ-सेवा दिवस” घोषित करने एवं गौ संरक्षण हेतु एक विस्तृत प्रशासनिक एवं सामाजिक योजना केंद्र एवं राज्य शासन को प्रस्तुत की गई थी। उस समय यह विषय सामान्य चर्चा में भी नहीं था, किन्तु मोहम्मद रफीक मेमन ने दूरदृष्टि का परिचय देते हुए गायों के संरक्षण, पंजीयन, गणना, अवैध तस्करी रोकने, रोजगार सृजन तथा वैज्ञानिक गौ-प्रबंधन का व्यवहारिक मॉडल शासन को सौंपा था।
National Cow Service Day” Should Be Celebrated

इस अभियान के समर्थन में उस समय बड़े पैमाने पर पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया, जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा सभी धर्मों एवं समाजों के लोगों ने इसका समर्थन किया। गायत्री परिवार सहित कई सामाजिक संगठनों ने एक मुस्लिम युवा द्वारा गौ सेवा के लिए किए जा रहे इस प्रयास की खुलकर सराहना की थी।
National Cow Service Day” Should Be Celebrated
मोहम्मद रफीक मेमन द्वारा शासन को भेजी गई योजना के प्रमुख बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण एवं व्यवहारिक थे, जिनमें विशेष रूप से निम्न सुझाव शामिल थे :
● प्रत्येक वर्ष 14 दिसंबर को “राष्ट्रीय गौ-सेवा दिवस” घोषित किया जाए, ताकि बच्चों एवं युवाओं को गौ सेवा, गौ संरक्षण एवं भारतीय कृषि व्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जा सके।
● देश एवं राज्य स्तर पर सभी गायों का अनिवार्य पंजीयन किया जाए तथा प्रत्येक गाय को एक यूनिक पहचान संख्या (Unique Identification) प्रदान की जाए।
● प्रत्येक गाय पर राज्य का विशेष मोनो/चिन्ह लगाया जाए, जिससे यह पहचान हो सके कि गाय किस जिले एवं किस राज्य की है।
● गाय की खरीदी-बिक्री पूर्ण रूप से रिकॉर्ड आधारित हो तथा विक्रय से पूर्व संबंधित विभाग को सूचना देना अनिवार्य किया जाए।
● गाय के जन्म, मृत्यु, गुम होने अथवा विक्रय की जानकारी निर्धारित समय सीमा में विभाग को देना अनिवार्य हो।
● निर्धारित समय पर जानकारी नहीं देने पर अर्थदंड (Penalty) लगाने का प्रावधान किया जाए।
● जिन गायों का पंजीयन नहीं हो अथवा जिन पर सरकारी मोहर/चिन्ह न हो, उन्हें शासन द्वारा लावारिस मानकर पंजीकृत करने की व्यवस्था लागू की जाए।
● जो व्यक्ति गाय का पालन-पोषण आगे नहीं कर सके, वह संबंधित विभाग को गाय सौंप सके तथा उसे उचित मूल्य प्राप्त हो।
● पंजीकृत गायों हेतु राज्य शासन द्वारा निःशुल्क बीमा एवं उपचार की व्यवस्था लागू की जाए।
● पंचायत एवं जिला स्तर पर गायों की वास्तविक गणना एवं डेटा तैयार किया जाए, जिससे प्रत्येक जिले में गायों की संख्या, नस्ल एवं उपयोग की जानकारी उपलब्ध हो सके।
● गौ आधारित खाद, जैविक खेती, दुग्ध उत्पादन एवं औषधीय उपयोग को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएं।
● केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा “गौ-सेवा सहायता कोष” बनाया जाए, जिसमें देशभर से सहयोग लेकर गौ संरक्षण एवं गौ आधारित रोजगार योजनाओं को संचालित किया जा सके।
● अवैध गौ-तस्करी एवं अवैध विक्रय पर प्रभावी रोक लगाने हेतु पंजीयन आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाए।
● गौ पालन को सामाजिक, आर्थिक एवं कृषि विकास से जोड़ते हुए युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं।
मोहम्मद रफीक मेमन का कहना है कि आज देश जिस विषय पर चर्चा कर रहा है, उसकी व्यवहारिक रूपरेखा उन्होंने एक दशक पूर्व ही शासन को प्रस्तुत कर दी थी। उन्होंने कहा कि गौ सेवा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, जैविक खेती, दुग्ध उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक समरसता से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
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उन्होंने राज्य शासन से पुनः मांग की है कि 14 दिसंबर को “गौ-सेवा दिवस” घोषित किया जाए तथा उनकी प्रस्तुत गौ सेवा योजना के प्रमुख बिंदुओं को लागू कर गौ संरक्षण को व्यवस्थित एवं प्रशासनिक रूप दिया जाए।
मोहम्मद रफीक मेमन ने कहा कि यदि शासन इस प्रकार की व्यवस्थित पंजीयन एवं संरक्षण प्रणाली लागू करता है तो इससे गायों की वास्तविक गणना, संरक्षण, चिकित्सा, बीमा, अवैध तस्करी पर नियंत्रण एवं लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी।
आज जब देशभर में विभिन्न समाज एवं मुस्लिम संगठन भी गौ संरक्षण के समर्थन में आगे आ रहे हैं, तब यह विषय और अधिक प्रासंगिक हो गया है कि छत्तीसगढ़ शासन 14 दिसंबर को “राष्ट्रीय गौ-सेवा दिवस” घोषित कर देश के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करे।

















