कोरबा electric scooter on fire इलेक्ट्रिक वाहनों मे आग लगने की शिकायत आम हो चली है आये दिन किसी न किसी इलेक्ट्रिक बाइक या स्कूटी मे राह चलते आग लग जावराही है इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के चालक चिंता में डूबे हुए है.
electric scooter on fire
प्रतिकात्मक तस्वीर
इसी तरह का एक मामला कोरबा के बुधवारी बाजार के समीप की है जहाँ चलती इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी में अचानक आग लग गई। धुआं निकलता देख वाहन चालक ने स्कूटी से कूदकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों और दमकल की मदद से आग पर काबू पाया गया। हादसा मानिकपुर चौकी क्षेत्र के बुधवारी मुख्य मार्ग पर हुआ हैं।
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इलेक्ट्रिक स्कूटी में आग
जानकारी के अनुसार कोरबा पुरानी बस्ती निवासी विकास केसरवानी बुधवारी बाजार से अपने घर लौट रहा था। तभी यह हादसा घटित हो गया। उसने इसकी सूचना इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी कंपनी को भी दी। कंपनी के कुछ कर्मचारी मौके पर पहुंचे और स्कूटी के बैटरी को डिस्कनेक्ट करने का प्रयास किया। उसके बावजूद धुआं रुक नहीं रहा था।
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उक्त घटना के बाद सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। भीड़ को देख इसकी सूचना मानिकपुर चौकी पुलिस को दी गई। इससे लोगों में इलेक्ट्रिक स्कूटी को लेकर कंपनी पर भारी आक्रोश है। इससे पहले भी अंचल में इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं घट चुकी हैं।
कोरबा/(ब्लैक आउट न्यूज)जानकारी के अनुसार, बालको थाना क्षेत्र फूटामुंडा का है दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए गया हुआ था, वाटरफॉल में नहाने के दौरान युवक पानी में डूब गया। मौजूद दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश किए,
लेकिन नहीं बच सका, घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीम ने पहुंची है युवक के शव की खोजबीन की जा रही है। डूबा हुआ युवक का पहचान हरीश बरगे पिता निरंजन लाल बरगे उम्र लगभग 27 वर्ष पड़ीमार बालकों का बताया जा रहा।
कोरबा जिले की मानिकपुर पुलिस ने उस आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है,जिसने एक नाबालिग किशोरी को अपने प्रेम जाल में फंसा कर उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया था।
बता दें कि पिछले दिनों एक नाबालिग किशोरी ने सुनालिया चौक स्थित नहर में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिसकी लाश रायगढ़ जिले के खरसिया से बरामद की गई थी। मृतका की शिनाख्ती होने के बाद पुलिस ने जांच शुरु की और आरोपी संतोष तिवारी के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया था । किशोरी द्वारा नहर में छलांग लगाए जाने के बाद से ही आरोपी फरार चल रहा था, जिसे रविवार की शाम गिरफ्तार कर लिया गया ।
कोरबा। Record of body donation in Korba कोरबा जिले के ग्राम बरपाली के महतो परिवार ने देहदान व नेत्रदान की घोषणा कर समाजसेवा के लिए उत्कृष्ट व अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है। इस विशाल हृदय कार्य हेतु भारत विकास परिषद के प्रकल्प प्रभारी महेश गुप्ता, प्रकल्प सह प्रभारी धर्मेंद्र कुदेसिया व अन्य ने परिवार को सम्मानित किया।
Record of body donation in Korba
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समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी रहे कोरबा जिले के ग्राम बरपाली, करतला ब्लॉक के निवासी वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप महतो ने तमाम विरोध के बावजूद अपने देह का दान जीवित काल में कर दिया। वे इस मामले में अपना नाम अमर कर गए कि मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा विद्यार्थियों को सीखने के लिए उनकी पार्थिव देह काम आई। जीते जी समाज के लिए अपने कृतित्व से कुछ कर गुजरने वाले प्रदीप महतो ने मृत्यु उपरांत भी समाज का भला किया।
Record of body donation in Korba
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उन्होंने 01मई 2019 को अपने जन्मदिन के अवसर पर देहदान की घोषणा की थी। हालांकि उनके इस फैसले का पूरे परिवार ने विरोध किया था, सिर्फ पुत्र एवं पुत्रवधु को छोड़कर। मृत्यु उपरांत अंतिम क्रिया के लिए पार्थिव देह का मिलना सम्भव नहीं होता है, इसलिए विरोध हुआ किंतु बाद में सबको समझा लिया गया और श्री महतो देहदानी हो गए।
4 अक्टूबर 2024 को विधि का विधान के आगे नतमस्तक होकर उन्होंने नश्वर संसार को अलविदा कह दिया। देहदान के कारण अंतिम संस्कार हेतु पार्थिव देह नहीं मिलने से यह क्षण परिवार के असहनीय पीड़ा का था किंतु इस बात का संतोष भी, कि जिस विचारधारा को उन्होंने जिया, उसे मरने के पश्चात भी फलीभूत कर गए।
Record of body donation in Korba
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स्व.महतो का दशगात्र एवं चंदनपान की रस्म 13 अक्टूबर 2024 को पूरे विधि से सम्पन्न कराई गई। इस अवसर पर पिता के नक़्शे कदम पर चलते हुए उनके पुत्र महेन्द्र महतो (संपादक आधार स्तंभ) एवं पुत्रवधू श्रीमती प्रीति महतो (प्राचार्य जी.पी.कान्वेंट हाईस्कूल बरपाली) ने भी देहदान की घोषणा की। इन्होंने देहदान का घोषणा पत्र भरकर पिता को अपनी श्रद्धांजली दी। इसी तरह स्व.महतो की धर्मपत्नी ने अपने नेत्रों का दान करने की घोषणा की। इन घोषणाओं ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की आंखों को सहसा छलका ही दिया। इस दौरान कोरबा मेडिकल कॉलेज की टीम मौजूद रही।
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प्रदीप महतो के कृतित्व को याद किया पत्रकारों ने
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार सनन्द दास दीवान , कमलेश यादव , रमेश राठौर, रामेश्वर ठाकुर, इंद्रकुमार बघेल, श्रीमती रेणु जायसवाल, प्रीतम जायसवाल, हीराराम राठौर, राजेश मिश्रा, मोती लाल नायक, दर्शनदास मानिकपुरी, पूर्व विधायक श्याम लाल कंवर, घांसीगिरी, गोस्वामी, मनोज गुप्ता, जी.डी.मिश्रा, लखन गोस्वामी, संजीव शर्मा , विरेन्द्र शुक्ला, निमेश राठौर, सरोज रात्रे, मदन दास महंत, अजय कंवर, रितिक वैष्णव ,दुलीचंद धीवर, प्रेम शंकर हलवाई, सतीश हलवाई,
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मनोज महतो, दीपका प्रेस क्लब अध्यक्ष श्रीमती आरती महतो, राजकुमार खत्री, अमन सोनी, सत्यनारायण अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल आदि ने स्व. महतो को पुष्पांजलि अर्पित की। उनके समकालीन पत्रकारों ने संक्षिप्त में कृतित्व को याद किया। सत्यसंवाद भी उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
कोरबा,13 अक्टूबर (ब्लैकआउट न्यूज़) Garba Dandiya Celebrations पं. रविशंकर शुक्ल नगर में बीते 9 दिनों से चल रहे गरबा-डांडिया उत्सव का समापन एक शानदार समारोह के साथ हुआ, जिसने पूरे शहर को सांस्कृतिक जोश और ऊर्जा से सराबोर कर दिया। पं. रविशंकर शुक्ल नगर में आयोजित यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक उत्सव भी साबित हुआ, जिसने सभी आयु वर्ग के लोगों को एक साथ जोड़ दिया।
आयोजन के समापन में उत्साह, नृत्य और उल्लास की ऐसी छटा बिखरी कि शहर के लोगों की स्मृतियों में यह आयोजन लंबे समय तक ताज़ा रहेगा।
Garba Dandiya Celebrations
RSS nagar Garba Dandiya Celebrations
समापन समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि पद्माकर शिंदे (जिला कार्यक्रम प्रबंधक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन), थाना प्रभारी कोतवाली एम. बी. पटेल और कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल मौजूद रहे। इन प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने न केवल कार्यक्रम का महत्व बढ़ाया, बल्कि उन्होंने आयोजन के प्रति अपने गहरे सम्मान और समर्थन को भी दर्शाया।
Garba Dandiya Celebrations विजेताओं का अद्भुत सम्मान: परफॉर्मेंस ने दर्शकों को मोहित किया
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समारोह के अंतिम दिन गरबा और डांडिया की धुनों पर जब प्रतिभागियों ने अपने रंग-बिरंगे परिधानों में मंच संभाला, तो पूरा माहौल उल्लास और जोश से भर उठा। सभी की नजरें प्रतियोगिता के अंतिम परिणाम पर टिकी थीं। आराध्या पी.सी. ने अपने अद्भुत नृत्य कौशल के दम पर प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें फ्रिज से सम्मानित किया गया। आर्यन ने अपने नृत्य के माध्यम से दर्शकों का दिल जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया और उन्हें रोटी मेकर भेंट किया गया। तृतीय स्थान की विजेता अशेलेषा सिंह राजपूत को साउंड सिस्टम प्रदान कर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल उनकी कड़ी मेहनत को सराहा, बल्कि यह उनके समर्पण और नृत्य कला के प्रति उनके जुनून का प्रतीक भी बने।
Garba Dandiya Celebrations हर किसी को मिला सम्मान: सांत्वना पुरस्कार और बच्चों के लिए खास उपहार
Garba Dandiya Celebrations
इस आयोजन की विशेषता रही कि न केवल विजेताओं, बल्कि हर दिन के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को भी मान्यता दी गई। पूरे नौ दिनों में 20 प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे उनके उत्साह और कला को प्रोत्साहन मिला। इसके अलावा, 70 मासूम बच्चों को आकर्षक उपहार भेंट किए गए, जिन्होंने अपने भोलेपन और मासूमियत से सभी का दिल जीता।
गरबा-डांडिया केवल नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का गहरा प्रतीक है, जिसने कोरबा के समाज को एक सूत्र में बांध दिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को जीवित रखा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक समृद्धि और सामूहिक सौहार्द का संदेश भी दिया।
Garba Dandiya Celebrations
मुख्य अतिथि पद्माकर शिंदे ने अपने उद्बोधन में कहा, “ऐसे आयोजनों से हमारी युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है और यह आयोजन केवल नृत्य का नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का माध्यम है।” एम. बी. पटेल ने कहा, “कोरबा जैसे शहर में इतना बड़ा और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होना गर्व की बात है। इस तरह के कार्यक्रम सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करते हैं।” कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल ने भी आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
Garba Dandiya Celebrations कोरबा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक: हर साल नए कीर्तिमान
आयोजन समिति के अध्यक्ष गणेश्वर दुबे ने कहा, “हमारा लक्ष्य हर वर्ष इस आयोजन को और भी भव्य और विस्तृत बनाना है, ताकि यह न केवल मनोरंजन का माध्यम बने, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का वाहक भी।” तीन वर्षों से चल रहा यह उत्सव अब कोरबा की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है, और आने वाले सालों में इसे और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
यह आयोजन कोरबा के लोगों को न केवल मनोरंजन का अद्भुत अवसर प्रदान करता है, बल्कि यह समाज में आपसी सहयोग, सौहार्द और एकता को मजबूत करने वाला भी साबित होता है। पूरे 9 दिनों के इस भव्य आयोजन ने कोरबा के सांस्कृतिक इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ा, जिसे यहां के लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
रायपुर/(आलेख : संजय पराते) The inside story of smart meters दक्षिण मुंबई में बेस्ट (विद्युत वितरण कंपनी) ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के काम को स्थगित कर दिया है। इस कंपनी के 10.8 लाख आवासीय और व्यवसायिक उपभोक्ता है और 3 लाख स्मार्ट मीटर वह लगा चुकी है। जिन घरों या दुकानों में ये मीटर लगाए गए हैं, सबकी शिकायत है कि पहले की अपेक्षा दुगुने और तिगुने बिजली बिल आ रहे हैं।
उपभोक्ताओं का विरोध इतना जबरदस्त है कि बेस्ट को स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की यह परियोजना स्थगित करनी पड़ी है। यह ‘स्थगन’ इसलिए जरूरी था कि कुछ दिनों के बाद ही महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं।
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संजय पराते लेखक
रांची में सरकार द्वारा जोर-जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाए जाने की खबरों के बीच एक खबर यह भी है कि बिहार के भागलपुर जिले के जगदीशपुर ब्लॉक में नेहा कुमारी नामक एक बीपीएल उपभोक्ता को 64 लाख रुपये का बिजली बिल भेजा गया है और उसकी शिकायत की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बिहार में स्मार्ट मीटरों के जरिए उपभोक्ताओं को लूटने और फ्रॉड बिलिंग की शिकायतें बहुत बढ़ गई है।
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स्मार्ट मीटर का भारी विरोध
ये स्मार्ट मीटर अडानी और टाटा की कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हैं। उत्तरप्रदेश में विद्युत वितरण निगम ने अडानी समूह के स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का 25000 करोड़ रुपयों का टेंडर निरस्त कर दिया है, क्योंकि अडानी प्रति मीटर 10000 रूपये ले रहा था। निगम का मानना है कि इन मीटरों की कीमत वास्तविक लागत से बहुत ज्यादा है।
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महाराष्ट्र के ओॅरंगाबाद मे स्नार्ट मीटर का विरोध
पूरे देश में इन स्मार्ट मीटरों को लगाए जाने के खिलाफ प्रदर्शनों की बाढ़ आ गई है और जगह-जगह उपभोक्ता इन मीटरों को उखाड़ कर फेंक रहे हैं और पुराने मीटरों को ही लगाने की मांग कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) भी स्मार्ट बिजली मीटर परियोजना के पक्ष में नहीं है। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार इस परियोजना के पक्ष में अड़ी हुई है। उसका कहना है कि बिजली क्षेत्र के ‘आधुनिकीकरण’ (इसे ‘निजीकरण’ पढ़ें) के लिए यह जरूरी है। लेकिन सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि यह कैसा ‘आधुनिकीकरण’ है, जो उपभोक्ताओं पर कहर ढा रहा है!
The inside story of smart meters
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भाजपा सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को नए स्मार्ट मीटरों का विरोध नहीं करना चाहिए, क्योंकि पुराने और नए में कोई अंतर नहीं है। लेकिन भाजपा सरकार चुप है कि यदि दोनों मीटरों में कोई अंतर नहीं है, तो देश के 28 करोड़ मीटरों को बदलने के लिए 2.80 लाख करोड़ रुपयों को खर्च करने की कवायद क्यों की जा रही है। अंततः इस खर्च से फायदा किसे होना है?
इसी सवाल के जवाब में पूरी ‘राम कहानी’ छिपी है। चूंकि ये स्मार्ट मीटर अडानी और टाटा द्वारा बनाए जा रहे हैं, पुराने मीटरों को बदलने का सीधा फायदा अडानी और टाटा को ही होगा। जिस धनराशि का उपयोग आम जनता के लिए समाज कल्याण कार्यों के लिए होना चाहिए था, उसकी जगह 2.80 लाख करोड़ रुपए इन दो कॉर्पोरेटों की तिजोरियों में डाला जा रहा है।
लेकिन मामला केवल यही तक नहीं है। असली मामला है बिजली क्षेत्र के निजीकरण का और कॉरपोरेट कंपनियों के लिए बाजार बनाने का। इन मीटरों को प्री-पेड योजना से जोड़ा जा रहा है, जिसका अर्थ है कि इन मीटरों को (मोबाइल की तरह) पहले रिचार्ज करना होगा — याने पैसा खतम, बिजली गुल! यदि एजेंसी की किसी तकनीकी खराबी के कारण भी स्मार्ट मीटर नो-बैलेंस दिखाएगा, तो आपकी बिजली कट जायेगी और फिर से जोड़ने के लिए जुर्माना अदा करना पड़ेगा।
लेकिन खतरा केवल यहीं तक नहीं है। यदि बिजली क्षेत्र का निजीकरण होता है, तो बिजली वितरण और इसकी दरों को निर्धारित करने का काम भी अडानी और टाटा की कॉरपोरेट कंपनियां ही करेगी और ये कंपनियां ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बढ़े-चढ़े दामों पर बिजली बेचने के लिए स्वतंत्र होगी। विद्युत नियामक आयोग निष्प्रभावी हो जाएगा और इनके दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार के पास कोई ताकत नहीं होगी। क्रॉस सब्सिडी, जिसके कारण आज गरीबों, घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को सस्ती बिजली मिलती है, बंद हो जाएगी।
आर्थिक रूप से कमजोर ये तबके इन दामों को वहन करने की स्थिति में ही नहीं होंगे। इसके साथ ही, भाजपा सरकार बिजली की कीमतों को टाइम ऑफ डे (टीओडी) से भी जोड़ने जा रही है, जिसका अर्थ है कि रात के समय बिजली महंगी मिलेगी, जबकि सभी लोग बिजली का अधिकतम उपयोग रात को ही करते हैं।
भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तावित जन विरोधी बिजली संशोधन विधेयक में ये सभी प्रावधान हैं और पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना इसी का हिस्सा है। इन मीटरों का जीवनकाल केवल 7 साल है। जैसे कुछ सालों बाद मोबाइल काम करना बंद कर देते हैं, वैसे ही इन मीटरों को 7 साल बाद बदलना जरूरी हो जाएगा। आज सरकार अपने खजाने से पैसा दे रही है, कल उपभोक्ताओं को अपनी जेब से देना होगा। आज इन मीटरों की कीमत 10000 रूपये हैं, 7 साल बाद इनकी कीमत दुगुने से भी ज्यादा होगी।
आज पूरी दुनिया में बिजली वितरण का 70% से ज्यादा हिस्सा सार्वजनिक स्वामित्व में है, जिसके चलते क्रॉस सब्सिडी देना संभव होता है और कमजोर तबकों को वहनीय कीमतों पर बिजली मिलती है। लेकिन हमारे देश में भाजपा सरकार क्रॉस सब्सिडी को खत्म करने और पूरे बिजली वितरण के काम का निजीकरण करने की दिशा में बढ़ रही है। महंगी बिजली देश के खाद्यान्न उत्पादन और खाद्यान्न सुरक्षा को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगी। वैश्विक भूख सूचकांक में आज देश 105वें स्थान पर है। महंगी बिजली इस दर्जे को और नीचे ले जाएगी। साफ है कि यह नीति कॉर्पोरेटों को मालामाल करेगी और गरीबों को और ज्यादा कंगाल। यह नीति देश को अंधेरे में ढकेलने की साजिश है।
आज आम जनता के लिए बिजली एक बुनियादी जरूरत है, जिसके बिना मानव सभ्यता के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यदि कोई सरकार आम जनता को इस बुनियादी जरूरत से ही वंचित करने की कोशिश करती है, तो ऐसी सरकार को असभ्य और बर्बर ही कहा जाएगा। सभ्यता को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि ऐसी असभ्य सरकार की विदाई सुनिश्चित की जाए। इतिहास बताता है कि आम जनता की लामबंदी और राजनैतिक इच्छा शक्ति से ऐसा होना मुमकिन है।
94242-31650)
कोरबा/(ब्लैकआउट न्यूज़) Father killed his 4 year old son छत्तीसगढ़ के कोरबा में सौतेले पिता ने शराब के नशे मे अपने ही 4 साल के बच्चे को पटक-पटक कर मार डाला। इस दौरान बच्चे की मां वहीं मौजूद थी। करीब 4 महीने पहले ही उसने आरोपी से शादी की थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामला उरगा थाना क्षेत्र का है।
Father killed his 4 year old son
Father killed his 4 year old son
मिली जानकारी के मुताबिक, कटघोरा निवासी रामशिला शादीशुदा थी। उसका पति छोड़कर चला गया था। रामशिला का 4 साल का बेटा भी था। उसकी परवरिश और देखभाल को देखते हुए पहरीपारा गांव के रहने वाले मंजीत कुर्रे से लव मैरिज कर ली। शादी के बाद रामशिला का बेटा उनके साथ ही रहता था। जिसे लेकर दोनों के बिच अक्सर विवाद होता था उस रात पति शराब के नशे मे चूर होकर घर आया और बच्चे को लेकर विवाद होने लगा. पिता ने बच्चे को पटक पटक कर मार डाला.
Father killed his 4 year old son रावण दहन के बाद रात में शराब पीकर घर पहुंचा
Father killed his 4 year old son
मंजीत कुर्रे शनिवार रात गांव के पास ही रावण दहन देखने गया हुआ था। रात करीब 12:30 में शराब के नशे में घर लौटा। आरोप है कि उसने पहुंचते ही रामशिला से बच्चे को लेकर फिर विवाद करना शुरू कर दिया। इसके बाद रामशिला को कमरे से बाहर निकाल दिया। फिर सो रहे बच्चे को उठाया और पटक-पटक कर मार दिया।
इस दौरान दुर्गा पंडाल के पास कुछ ग्रामीण रुके हुए थे। शोर सुनकर वह दौड़कर मंजीत के घर पहुंचे। वहां बच्चा लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ा हुआ था। इसके बाद परिजनों के साथ बच्चे को लेकर कोरबा मेडिकल कॉलेज पहुंचे, वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
Father killed his 4 year old son CSP ने बताया
Father killed his 4 year old son
कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि आरोपी के गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। महिला से भी मारपीट की गई है। उसकी हालत फिलहाल ठीक है। अस्पताल में उपचार चल रहा है।
Father killed his 4 year old son बच्चे को बचाने विनती करती रही मां
वारदात के दौरान मां रामशिला बार-बार बच्चे को छोड़ देने की विनती करते रही, लेकिन आरोपी नहीं रुका। उसने बीच-बचाव करने का प्रयास किया तो आरोपी ने रामशिला से भी मारपीट की। रामशिला को भी घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
चांपा। sky lift crane fell रावण दहन कार्यक्रम के दौरान जिस स्काई लिफ्ट क्रेन पर राम,लक्ष्मण,हनुमान का पात्र बने कलाकर सवार थे वह स्काई लिफ्ट पलट गया. हादसे में राम, लक्ष्मण और हनुमान बने तीनों कलाकारों को तो जहां चोट आई, वहीं तीन दर्शक को ज्यादा चोट आई है. इनमें से एक को बिलासपुर रेफर किया गया है.चांपा के भालेराव मैदान में शनिवार की रात प्रतिवर्ष होने वाला रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
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कार्यक्रम में सांसद कमलेश जांगड़े के साथ कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी विवेक शुक्ला मौजूद थे. रावण संवाद के लिए बेन स्काई लिफ्ट लगा वाहन लाया गया था, जो अचानक पलट गया. हादसे में राम, लक्ष्मण और हनुमान का पात्र निभा रहे कलाकार को हल्की चोट आई, वहीं नीचे खड़े तीन दर्शक गंभीर रूप से घायल हो गए. इनमें से एक अवधेश सिंह के दोनों पैर का घुटना टूट गया, जिसे उपचार के लिए बिलासपुर रेफर किया गया.
मुंबई/Memon Olympic वल्ड मेमन ऑर्गनिजेशन द्वार आयोजित मेमन औलाम्पिक मे फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, चैस, टेबल टेनिस, स्वीमिंग, तीरंदाजी, शूटिंग, रेस 100 मी एवं 400 मी रोलर स्पीड स्केटिंग, बास्केट बाल, वालीवाल शामिल किया गया है.
Memon Olympic
Memon Olympic
विश्व मेमन संगठन
_विश्व भर में मेमन के इतिहास में आयोजित होने जा रहे सबसे बड़े आयोजन की घोषणा_
WMO कॉन्क्लेव 2.0 – मेमन ओलंपिक 2025
नांदेड़, महाराष्ट्र में [8 जनवरी – 12 जनवरी 2025] तक
गर्व से WMO इंडिया चैप्टर इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ा रहा है
पात्रता: भारत भर से मेमन के प्रतिभागी भाग लेने के पात्र हैं
Memon Olympic
Memon Olympic
शामिल खेल:
1. फुटबॉल 2. क्रिकेट (लेदर बॉल) 3. बैडमिंटन 4. शतरंज 5. टेबल टेनिस 6. तैराकी 7. तीरंदाजी 8. शूटिंग (10 मीटर, 25 मीटर, 50 मीटर) 9. रेस पुरुष और महिला (100 मीटर और 400 मीटर) 10. रोलर स्पीड स्केटिंग 11. बास्केटबॉल 12. वॉलीबॉल *पंजीकरण: पंजीकरण के लिए, कृपया निम्नलिखित Google फ़ॉर्म भरें:
https://forms.gle/iZ5EVNBvwp4AfPgS6 सभी खेल सभी मेमन लड़के और लड़कियों के लिए हैं समय सीमा: मेमन ओलंपिक 2025 के लिए पंजीकरण करने की अंतिम तिथि *15 अक्टूबर है 2024
नोट:
1) केवल उन खेलों पर विचार किया जाएगा और उन्हें खेला जाएगा जिनमें सबसे अधिक प्रतिभागी होंगे।
2) यदि उपरोक्त लिंक नीले रंग में नहीं है और आप लिंक नहीं खोल पा रहे हैं तो कृपया इस नंबर को सेव कर लें और लिंक नीला हो जाएगा और फिर आप लिंक खोल सकते हैं
प्रोजेक्ट लीड:यामीन थारा
WMO यूथविंग अध्यक्ष – भारत
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
MCTN हेल्प डेस्क 8888177000
बालकोनगर, 12 अक्टूबर, 2024।Vedanta empowered girls शक्ति की उपासना के ये नौ दिन, उर्जा आत्मसात करने के होते हैं। सही मायने में शक्ति को पहचानना ही नवरात्र उत्सव मनाना है। महिलाएं अपने आंतरिक शक्ति को पहचानते हुए समाज में खुद को सशक्त बना रही हैं। कंपनी ने स्थानीय समुदाय की लड़कियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए उल्लेखनीय पहल कियें हैं। समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कंपनी के सामुदायिक विकास प्रयासों में प्रमुख स्तंभ है। लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वावलंबन, पोषण और मार्गदर्शन में कंपनी द्वारा संचालित नंदघर, वेदांता स्किल स्कूल, नयी किरण एवं कनेक्ट परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें हैं।
Vedanta empowered girls
Vedanta empowered girls
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से अनिल अग्रवाल फाउंडेशन द्वारा नंद घर अत्याधुनिक आंगनवाड़ी मॉडल प्रदान करता है, जो ई-लर्निंग से सुसज्जित है। बच्चे की विकासात्मक यात्रा में स्कूली शिक्षा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह आजीवन सीखने, मानसिक विकास और आवश्यक सामाजिक कौशल का निर्माण करता है। कंपनी, बाला (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) पेंटिंग और डिजिटल लर्निंग सहित इंटरैक्टिव लर्निंग मॉडल के माध्यम से सर्वोत्तम श्रेणी के पाठ्यक्रम प्रदान करने का काम कर रही है। बालको द्वारा संचालित 33 नंद घर में 50 प्रतिशत से अधिक 423 बच्चियां बेहतर शिक्षा एवं पोषण प्राप्त कर रही हैं।
Vedanta empowered girls
Vedanta empowered girls
वर्ष 2016 में ‘परियोजना कनेक्ट’ की शुरूआत की गई। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से स्थानीय लड़कियों को आगामी पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर प्राप्त हुए। कनेक्ट परियोजना के माध्यम से सेमा (विज्ञान, अंग्रेजी, गणित और लेखा) विषयों पर नियमित कक्षाओं से छात्राएं लाभान्वित हुई हैं। साथ ही व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस परियोजना में कला, शिल्प, नृत्य, संगीत, कैलीग्राफी, स्पोकेन इंग्लिश, मिट्टी के बर्तन, योग और एरोबिक्स आदि का ज्ञान दिया जाता है।
कंपनी ने समुदाय में नयी किरण परियोजना के अंतर्गत माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन पर जागरूकता अभियान चलाया। माहवारी संबंधी मिथकों और भ्रांतियों को दूर करते हुए स्वच्छता प्रथाओं को विकसित किया है। कंपनी ने छत्तीसगढ़ राज्य में जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से 48,000 से अधिक लोगों को जागरूक किया है। इसकी मदद से लड़कियां खुलकर माहवारी जैसे विषय पर बात कर रही हैं।
Vedanta empowered girls
Vedanta empowered girls
रोजगारपरक कौशल से स्वावंलबी बनाने के उद्देश्य से बालको ने 2010 में वेदांता स्किल स्कूल की स्थापना की थी। वित्तीय वर्ष 2024 में 1241 प्रशिक्षार्थियों को कार्यक्रम से लाभ हुआ जिनमें 72% छात्राएं थीं। वेदांता स्किल कुल सात ट्रेडों में मुफ्त आवासीय प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। 45 से 60 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इससे स्थानीय लड़कियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं तथा वो बाधाओं को पीछे छोड़ राष्ट्र विकास में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।