कोरबा (कुसमुंडा) New Hf Deluxe Pro Launch के बी ऑटोमोबाइल्स शोरूम कबीर चौक गेवरा बस्ती कुसमुंडा में आज दिनांक 04•08•25 को दोपहर 01 बजे किया गया।जिसमें मुख्य अतिथि के रूप मे कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल शामिल हुए.
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विशिष्ट अतिथि अतिथि के रूप मे हाजी नूर मोहम्मद आरबी,(पूर्व सदस्य उर्दू आयोग छ ग शासन),श्रीमती सुनीता पाटले,(प्रदेश मंत्री अ. जा. मोर्चा),मुकुल कर्ष,(प्रदेश विशेष आमंत्रित सदस्य पि. व. मोर्चा) लखन राठौर,(पूर्व महामंत्री एवं पूर्व पार्षद) संजय कुमार पांडेय,(प्रोपाइटर- पाण्डेय रोड लाइंस कुसमुंडा) सुखदीप सिंह,(भाजपा प्रदेश समिति सदस्य अल्पसंख्यक मोर्चा) कमलेश प्रधान,(युवा भाजपा नेता) विकेश झा,(भाजपा महामंत्री बाँकीमोंगरा मण्डल)
New Hf Deluxe Pro Launch
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मन्नू राठौर,(युवा भाजपा नेता) तेजप्रताप सिंह,(वार्ड पार्षद 25) राजकुमार कँवर,(पार्षद 24) राजेश पटेल,(युवा भाजपा नेता)अध्यक्षता,संतोष कुमार राठौर (विधायक प्रतिनिधि)एवं आस पास के काफी मात्रा में गणमान्य नागरिक, ग्राहकगण, मैकेनिक एवं पत्रकार बंधु उपस्थित रहे, लॉन्चिंग के तुरंत बाद ग्राहकों को अतिथियों के द्वारा New Hf Deluxe Pro की चाबी देकर डिलीवरी प्रदान करते हुए उन्हे बधाई दिया गया, एवं हमारे सेल्स स्टाफ के द्वारा उपस्थित सभी को न्यू मॉडल्स की खासियत बताई गई एवं फ्री टेस्ट ड्राइव भी करवाया गया और सभी को स्वल्पाहार कराया गया.
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इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन के बी आटोमोबाईल्स के प्रोपराइटर हाजी इरफान नूर आरबी एवं सेल्स की टीम ने सारे अतिथियों क़ो गुलदस्ते एवं मोमेंटो देकर स्वागत किया गया.
कोरबा 5 अगस्त 2025।CG Jail Break Case कोरबा में जिला जेल ब्रेक कांड में बड़ा एक्शन हुआ है। जिला जेल कोरबा के सहायक जेल अधीक्षक सहित 3 जेल प्रहरियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आपको बता दे पिछले दिनों 4 कैदी दिनदहाड़े जेल की 25 फीट उंची दीवार फांदकर फरार हो गये थे। इस घटना की जानकारी के बाद हड़कंप मच गया था। घटना के बाद जेल डीजी हिमांशु गुप्ता ने भी जिला कोरबा का निरीक्षण किया था। जिसके बाद अब यह एक्शन लिया है।
CG Jail Break Case
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कोरबा 5 अगस्त 2025। कोरबा में जिला जेल ब्रेक कांड में बड़ा एक्शन हुआ है। जिला जेल कोरबा के सहायक जेल अधीक्षक सहित 3 जेल प्रहरियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आपको बता दे पिछले दिनों 4 कैदी दिनदहाड़े जेल की 25 फीट उंची दीवार फांदकर फरार हो गये थे। इस घटना की जानकारी के बाद हड़कंप मच गया था। घटना के बाद जेल डीजी हिमांशु गुप्ता ने भी जिला कोरबा का निरीक्षण किया था। जिसके बाद अब यह एक्शन लिया है।
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गौरतलब है कि 2 अगस्त शनिवार को जिला जेल कोरबा से 4 कैदी दीवार फांद कर फरार हो गये थे। फरार होने वाले निरूद्व बंदियों को पुलिस ने पाक्सो और दुष्कर्म के जुर्म में गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया था। इनमें तीन आरोपी कोरबा और एक आरोपी रायगढ़ जिले का निवासी था। जेल ब्रेक की इस घटना की जानकारी के बाद जेल प्रबंधन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। पुलिस अधिकारियों द्वारा फरार कैदियों की फोटो जारी कर उनकी धरपकड़ के लिए जिले में नाकेबंदी की गयी।
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वहीं दूसरी तरफ एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने फरार कैदियों पर 10 हजार रूपये इनाम की घोषणा की गयी। लेकिन पुलिस की लगातार छापामार कार्रवाई और पतासाजी के 72 घंटे बाद भी कोई खास सफलता नही मिल सकी है। कोरबा में जिला जेल ब्रेक की जानकारी के बाद शनिवार रात ही जेल डीजी हिमांशु गुप्ता कोरबा पहुंचे थे। उन्होने जिला जेल का निरीक्षण कर इस घटना की जानकारी ली।
इस पूरे घटनाक्रम में सुरक्षा को लेकर हुए गंभीर चूक पर अब एक्शन लिया गया है। बताया जा रहा है कि जेल ब्रेक की घटना में लापरवाही बरतने वाले 3 जेल प्रहरियों सहित सहायक जेल अधीक्षक विजयानंद सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
कोरबा ( ब्लैकआउट न्यूज़) large plantation दावते इस्लामी के अंतर्गत कार्यरत GNRF (गरीब नवाज़ रिलीफ़ फाउंडेशन) द्वारा दिनांक 3 अगस्त 2025 को कोरबा ज़िले (छत्तीसगढ़) के विभिन्न स्थानों पर एक वृक्षारोपण अभियान का सफल आयोजन किया गया।
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इस अभियान के अंतर्गत स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामाजिक समरसता व पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया। यह पहल सभी समुदायों को साथ लाकर एक हरित और स्वच्छ भारत की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम रही।
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वृक्षारोपण के लिए कोरबा वन विभाग द्वारा पौधों की नि:शुल्क व्यवस्था की गई, जिसके लिए GNRF ने उनका आभार प्रकट किया। लगाए गए पौधों में अशोक, जामुन, गुलमोहर, आम, अमरूद इत्यादि शामिल रहे, जो आने वाले वर्षों में पर्यावरण को शुद्ध करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर आयोजकों ने कहा:large plantation
“पेड़-पौधे केवल ऑक्सीजन नहीं देते, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायिनी विरासत हैं। GNRF का उद्देश्य केवल राहत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाकर हर व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।”
इस मुहिम का उद्देश्य:large plantation
पर्यावरण संतुलन बनाए रखना
सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना
भावी पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना
एकजुटता का संदेश:
यह अभियान यह दर्शाता है कि समाज का हर वर्ग यदि साथ आए, तो किसी भी सकारात्मक परिवर्तन को साकार किया जा सकता है। “हरित भारत – सुरक्षित भारत” की दिशा में यह पहल आने वाले समय में और भी व्यापक रूप लेगी।
कोरबा। complaint of fake appointment जिले के जनपद पंचायत कोरबा के लखपति बाबू ओ.पी. राठौर के विरुद्ध की गई जांच के लिए जांच दल एवं शिकायतकर्ता को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध करवाने का आग्रह कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक से किया गया है।
complaint of fake appointment
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शिकायतकर्ता अधिवक्ता डॉ.संतोष मिश्रा ने बताया कि उन्होंने जनपद पंचायत कोरबा में पदस्थ उक्त लखपति बाबू के खिलाफ दिनांक 07/05/2025 को कलेक्टर कार्यालय में शिकायत किया था जिसको जांच हेतु जनपद पंचायत कोरबा को लिखित है। परन्तु बहुत ही दु:ख के साथ यह लिखना पड़ रहा है कि आज पर्यन्त उक्त बाबू के फर्जी नियुक्ति/पदोन्नति की जांच उसके भय से जांच दल नहीं कर पा रहा है। चूंकि उक्त बाबू के द्वारा जनपद में पदस्थ होकर शासन को लाखों का चूना लगाया गया है, वर्तमान में उसकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत को गई है कि वह जैसे कि तीन सितारा होटल, पेट्रोल पंप, बंगला एवं चार पहिया गाड़ी में निवेश किया है।
complaint of fake appointment
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वर्तमान स्थिति में उक्त बाबू ने बड़े पैमाने पर भष्ट्राचार कर अपनी अवैध सम्पत्ति बनाई है इस वजह किसी भी अधिकारी को खरीद लेना एवं नेताओं से दबाव बनवाना उनके बायें हाथ का खेल है। संतोष मिश्रा ने कलेक्टर को अवगत कराया है कि ओ.पी. राठौर बाबू के द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जिला पंचायत कोरबा में मनरेगा विभाग में अपने पुत्र को तकनीकी सहायक के पद पर नौकरी दिलाने के लिए प्रभाव का दुरूपयोग किया है जो वर्तमान में जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ है।
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चूंकि तीन माह पश्चात भी जांच दल अभी तक उसके खिलाफ कोई जांच नही कर पा रही है, इससे यह प्रतीत होता है कि उसका भय जनपद पंचायत में बना हुआ है। जिससे मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है।
वर्तमान में भाजपा की सरकार के कथनी व करनी में अंतर स्पष्ट है कि एक तरफ तो सरकार भष्ट्राचारियों पर कार्यवाही का दम भर रही है और जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही है।
दूसरी तरफ एक सामान्य बाबू जो कि भष्ट्राचार को अंजाम देकर लाखों को मालिक बन बैठा है, शिकायत करने के उपरांत अभी तक कार्यवाही नहीं हो पा रही है जो शिकायतकर्ता के लिए तकलीफदेह होने के साथ डर भी लगने लग गया है क्योंकि उक्त बाबू झूठा षड़यंत्र कर फंसा सकता है।
कलेक्टर व एसपी से आग्रह किया गया है कि उक्त बाबू की जांच हेतु जनपद पंचायत कोरबा द्वारा गठित टीम एवं शिकायतकर्ता को उचित सुरक्षा उपलब्ध करवाने का कष्ट करें, आपके आभारी रहेंगे।
पंजाब Fake encounter मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत आज पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी, डीएसपी समेत पांच दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। 1993 के फर्जी एनकाउंटर मामले में पांच पूर्व पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिया गया है।
पंजाब के तरनतारन में वर्ष 1993 के फर्जी मुठभेड़ मामले में दोषी पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी और डीएसपी सहित पांच पुलिस अधिकारियों की सजा पर सोमवार को फैसला सुनाया है। मोहाली की सीबीआई अदालत ने पूर्व एसएसपी भूपिंदरजीत सिंह, इंस्पेक्टर सूबा सिंह, डीएसपी दविंदर सिंह, एएसआई गुलबर्ग सिंह और एएसआई रघबीर सिंह (सभी सेवानिवृत्त) को आपराधिक साजिश, हत्या, रिकॉर्ड नष्ट करने और फर्जीवाड़ा करने के आरोप में शुक्रवार को दोषी करार था। उक्त दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
Fake encounter
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मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत आज पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी, डीएसपी समेत पांच दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। 1993 के फर्जी एनकाउंटर मामले में पांच पूर्व पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिया गया है।
विस्तार Fake encounter
पंजाब के तरनतारन में वर्ष 1993 के फर्जी मुठभेड़ मामले में दोषी पंजाब पुलिस के पूर्व एसएसपी और डीएसपी सहित पांच पुलिस अधिकारियों की सजा पर सोमवार को फैसला सुनाया है। मोहाली की सीबीआई अदालत ने पूर्व एसएसपी भूपिंदरजीत सिंह, इंस्पेक्टर सूबा सिंह, डीएसपी दविंदर सिंह, एएसआई गुलबर्ग सिंह और एएसआई रघबीर सिंह (सभी सेवानिवृत्त) को आपराधिक साजिश, हत्या, रिकॉर्ड नष्ट करने और फर्जीवाड़ा करने के आरोप में शुक्रवार को दोषी करार था। उक्त दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
Fake encounter
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पीड़ित परिवारों के वकील सरबजीत सिंह वेरका ने बताया कि जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 2002 में भूपिंदरजीत सिंह डीएसपी गोइंदवाल, इंस्पेक्टर के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। गुरदेव सिंह एसएचओ सरहाली, एसआई ज्ञान चंद, एएसआई देविंदर सिंह, एएसआई गुलबर्ग सिंह, इंस्पेक्टर सूबा सिंह एसएचओ थाना वेरोवाल, एएसआई जगीर सिंह, एएसआई रघुबीर सिंह, एचसी मोहिंदर सिंह, एचसी अरूर सिंह को नामजद किया गया। लेकिन 2010-21 की अवधि के दौरान इस मामले की सुनवाई रुकी रही और इस अवधि के दौरान पांच आरोपियों की मृत्यु हो गई।
Fake encounter
वेरका ने यह भी बताया कि सीबीआई ने इस मामले में 67 गवाहों का हवाला दिया था लेकिन दुर्भाग्य से देरी से सुनवाई के दौरान 36 गवाहों की भी मृत्यु हो गई और इस मामले में केवल 28 ने गवाही दी। अंत में आज शुक्रवार को पांच आरोपियों भूपिंदरजीत, दविंदर, सूबा, गुलबर्ग और रघबीर सिंह को यूएस 120 बी, 120-बी आर/डब्ल्यू 302 आईपीसी, 120 बी आर/डब्ल्यू 201 आईपीसी और 120 बी आर/डब्ल्यू 218 आईपीसी के लिए अपराध करने का दोषी ठहराया गया और दोषी को हिरासत में ले लिया गया और जेल भेज दिया गया और अब सोमवार को सजा सुनाई जाएगी अदालत में उपस्थित परिवार के सदस्यों ने कहा कि घटना के 32 साल बाद न्याय मिला है।
शुक्रवार को सीबीआई पंजाब मोहाली के विशेष न्यायाधीश बलजिंदर सिंह सरा की अदालत ने 32 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया, जिसमें एक ही गांव यानी रानी विल्लाह के तीन एसपीओ सहित सात युवकों को तरनतारन पुलिस द्वारा दो मुठभेड़ों में उठा लिया गया। उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया, प्रताड़ित किया गया और फिर उन्हें मारा हुआ दिखाया गया।
लावारिस के तौर पर कर दिया अंतिम संस्कार Fake encounter
इस मामले की जांच सीबीआई ने पंजाब पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 12 दिसंबर 1996 को पारित आदेशों पर की थी। 1997 में सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की और फिर 1999 में, नरिंदर कौर यानी एसपीओ शिंदर सिंह की पत्नी, गांव रानीविल्लाह के बयान पर नियमित मामला दर्ज किया, जिसे मुठभेड़ में मारा गया दिखाया गया था। उसके शव को अज्ञात और लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
सीबीआई के लोक अभियोजक ने बताया कि सीबीआई द्वारा जांच के दौरान यह साबित हुआ कि 27 जून 1993 की सुबह, इंस्पेक्टर गुरदेव सिंह एसएचओ थाना सरहाली के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने एसपीओ शिंदर सिंह, देसा सिंह, सुखदेव सिंह, बलकार सिंह उर्फ बॉबी और दलजीत सिंह सभी निवासी गांव रानी वल्लाह थाना सरहाली अमृतसर को सरकारी ठेकेदार जोगिंदर सिंह के निवास से उनके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में जबरन उठा लिया, जहां वे गनमैन के रूप में ड्यूटी कर रहे थे। उसके बाद उन्हें थाना सरहाली ले जाया गया, जहां उन्हें अवैध रूप से रखा गया और गांव संगतपुरा के एक डकैती मामले में उनकी संलिप्तता स्वीकार करने के लिए बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया।
फिर उनके घरों की तलाशी लेने के लिए उन्हें गांव रानी वल्लाह ले जाया गया। जांच में यह भी पता चला कि जोगिंदर सिंह ठेकेदार और क्षेत्र के अन्य सम्मानित दूसरी ओर 2 जुलाई 1993 को सरहाली पुलिस ने एक झूठी एफआईआर दर्ज की थी जिसमें कहानी गढ़ी गई थी कि शिंदर सिंह, देसा सिंह और सुखदेव सिंह उनको जारी किए गए हथियार व गोला-बारूद के साथ ड्यूटी से फरार हो गए हैं। जांच से यह भी पता चला कि उपरोक्त एसपीओ के अपहरण के 6/7 दिनों के बाद बलकार सिंह उर्फ काला को भी गांव रानी वल्लाह में उसके घर से उठाया गया था।
रिकॉर्ड में की गई थी हेराफेरी
सीबीआई द्वारा की गई जांच में आगे खुलासा हुआ कि 12 जुलाई 1993 को भूपिंदरजीत सिंह, तत्कालीन डीएसपी गोइंदवाल साहिब और इंस्पेक्टर गुरदेव सिंह एसएचओ थाना सरहाली के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने दिखाया था कि गांव करमूवाला के मंगल सिंह को डकैती के एक मामले में वसूली के लिए गांव घरका ले जाते समय पुलिस पार्टी पर आतंकवादियों ने हमला किया और क्रॉस फायरिंग के दौरान मंगल सिंह और तीन हमलावर मारे गए मृतकों के पास से एक 303 राइफल, एक स्टेनगन और एक एसएलआर के साथ इस्तेमाल और जिंदा कारतूस बरामद दिखाए गए थे।
कथित मुठभेड़ के संबंध में मामला थाना सरहाली में दर्ज किया गया और मुठभेड़ को वास्तविक दिखाने के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई थी। हालांकि पुलिस फाइल के अनुसार हमलावरों के शवों को एएसआई गुलबर्ग सिंह और एएसआई देविंदर सिंह द्वारा पहचाना गया था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इनका अंतिम संस्कार अज्ञात और लावारिस के रूप में किया गया था। इस मुठभेड़ में बरामद दिखाए गए हथियार और गोला-बारूद को जांच के लिए सीएफएसएल भेजा गया था,
जिसने राय दी कि कथित मुठभेड़ के स्थान से पुलिस द्वारा एकत्र किए गए खाली खोखे, मृतकों से बरामद दिखाए गए हथियारों से जुड़े नहीं हो सकते और पीएमआर के अनुसार मृत्यु-पूर्व चोटें भी साबित करती हैं कि मृतकों को मृत्यु से पहले प्रताड़ित किया गया था।
मुठभेड़ की कहानी गढ़कर दर्ज किया झूठा केस
सीबीआई जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सुखदेव सिंह जिसका 27 जून 1993 को सरहाली पुलिस द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों के साथ अपहरण किया गया था, को बाद में वेरोवाल पुलिस थाने की पुलिस को सौंप दिया गया था। सीबीआई की जांच में यह भी पाया गया कि वेरोवाल पुलिस ने जून 1993 के दौरान सरबजीत सिंह को उसके गांव हंसावाला अमृतसर से और हरविंदर सिंह निवासी जलाबाद को कैथल, हरियाणा से अगवा किया था
और बाद में 28 जुलाई 1993 को भूपिंदरजीत सिंह डीएसपी गोइंदवाल और इंस्पेक्टर सूबा सिंह, तत्कालीन एसएचओ थाना वेरोवाल तरनतारन के नेतृत्व में वेरोवाल पुलिस के एक पुलिस दल के साथ एक अन्य मुठभेड़ में तीनों को मारा हुआ दिखाया गया था।
पुलिस ने 28 जुलाई 93 को फर्जी मुठभेड़ को सही ठहराने के लिए एक बोल्ट एक्शन राइफल, एक 12 बोर एसबी बंदूक और एक 303 राइफल के साथ इस्तेमाल और जिंदा कारतूस की बरामदगी दिखाते हुए मेमो तैयार किया और मुठभेड़ की कहानी गढ़कर उपरोक्त व्यक्तियों की हत्याओं को छिपाने के लिए 28 जुलाई 1993 को थाना वेरोवाल तरनतारन में एक झूठा मामला दर्ज करवाया और झूठे दस्तावेज तैयार किए।
कोरबा 04 अगस्त 2025/korba RI suspended कलेक्टर कोरबा श्री अजीत वसंत द्वारा श्री विमल कुमार भगत राजस्व निरीक्षक रा.नि.मं. चैतमा को अपने पदीय क्षेत्र के शासकीय कार्यों के दायित्वों का निर्वहन करने के प्रति उदासीनता एवं घोर लापरवाही बरतने के कारण सेवाओं से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन काल में उनका मुख्यालय राजस्व निरीक्षक मंडल जटगा, तहसील पसान नियत किया गया है। निलंबन अवधी में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
korba RI suspended
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कलेक्टर कार्यालय कोरबा से जारी आदेश क्रमांक 2008/भू0 अभि0/स्थापना/2025 कोरबा दिनांक 04.08.2025 के अनुसार कार्यालय कलेक्टर जिला धमतरी (छ0ग0) के पत्र क्रमांक / 5618 / वित्त – 1 / 2025 धमतरी दिनांक 18.06.2025 द्वारा श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक मगरलोड सह पटवारी ह. नं. 13 राजाडेरा, तहसील मगरलोड, जिला- धमतरी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने/
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प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज किये जाने के संबंध में प्रेषित प्रतिवेदन / उल्लेखित तथ्यों के आधार पर एवं तहसीलदार पाली के पत्र क्रमांक / 459 / तह0 / कानूनगो / 2025 पाली दिनांक 16. 04.2025 के प्रस्ताव पत्र अनुसार श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक, रा.नि.मं.- चैतमा, तहसील-पाली दिनांक 24.03.2025 से बिना किसी सूचना के अनाधिकृत रुप से अपने शासकीय कार्य में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें तहसीलदार पाली के पत्र क्रमांक / 406/ तह0 / कानूनगो / 2025 पाली दिनांक 03.04.2025 द्वारा जारी कारण बताओं सूचना पत्र का जवाब निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक, रा.नि. मं. – चैतमा, तहसील – पाली द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन के प्रति उदासीनता एवं घोर लापरवाही बरती गई है। उक्त कृत्य सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन किये जाने का लेख कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। प्राप्त प्रस्ताव पत्र के परिपालन में कार्यालयीन पत्र क्रमांक / 553 / भू-अभि० / स्था0 / 2025 कोरबा दिनांक 25/04/2025 द्वारा श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक, रा.नि.मं. – चैतमा, तहसील – पाली, जिला- कोरबा (छ.ग.) कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया था।
जारी कारण बताओ सूचना पत्र के परिपालन में दिनांक 26/06/2025 को श्री विमल कुमार भगत, रा० नि० द्वारा जवाब प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत जवाब प्रतिवेदन संतोषप्रद प्राप्त नहीं हुआ है एवं जिला धमतरी में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मगरलोड जो कि एक शासकीय सेवक है उनके द्वारा कुटरचना करते हुए कदाचार किया गया एवं गैर कानूनी तरीके से आर्थिक लाभ करने के उद्धेश्य से उक्त कृत्य किया गया है, जो अपराध की श्रेणी में आता है।
कार्यालय कलेक्टर जिला धमतरी (छ0ग0) के पत्र क्रमांक / 5618 / वित्त – 1 / 2025 धमतरी दिनांक 18.06.2025 के प्राप्त प्रतिवेदन / तहसीलदार पाली के प्रेषित प्रस्ताव एवं कार्यालयीन पत्र के अनुसार श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक, रा.नि.मं. – चैतमा, तहसील – पाली, जिला – कोरबा (छ.ग.) का उक्त कृत्य अपने पदीय क्षेत्र के शासकीय कार्यों के दायित्वों का निर्वहन करने के प्रति उदासीनता एवं घोर लापरवाही बरती गई है। उनका उक्त कृत्य छ0ग0 सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 ( 1 ) नियम 3 (क) (ख) (ग) के तहत् उल्लंघन होना पाया गया है।
श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक, रा.नि.मं. – चैतमा, तहसील – पाली द्वारा निर्धारित समयावधि में संतोषप्रद जवाब प्रस्तुत नहीं करने तथा समक्ष में उपस्थित नहीं होने के कारण उनका उक्त कृत्य सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम – 3 (1) नियम-3(क) (ख) (ग) का उल्लघन होने के फलस्वरुप
छ०ग० सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत् श्री विमल कुमार भगत, राजस्व निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निलंबन काल में मुख्यालय राजस्व निरीक्षक मंडल जटगा, तहसील पसान नियत किया जाता है। निलंबन अवधी में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
कोरबा। Chairman’s letter to the Chief Minister नगर पालिक निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने बिजली विभाग में हुए करोड़ों के घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है, जिसमें इस घोटाले की उच्चस्तरीय जाँच करने तथा एफ.आई.आर. दर्ज कर दोषियों से वसूली की कार्यवाही की माँग किया है।
Chairman’s letter to the Chief Minister
Chairman’s letter to the Chief Minister
छत्तीसगढ राज्य विद्युत वितरण विभाग में आरडीएसएस योजना के अंतर्गत लगभग 77 करोड़ रुपये की लागत से कोरबा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए केबल लगाने का ठेका दिया गया था। ठेका कंपनी द्वारा घटिया क्वालिटी का केबल लगाया गया जिससे अब तक कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पाई है।
Chairman’s letter to the Chief Minister
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नूतनसिंह ठाकुर ने बताया कि पुरानी बस्ती कोरबा के विभिन्न वार्डों में केबलिंग कार्य केवल कागजों में हुआ है और जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ। घटिया क्वालिटी के केबल लगाने के कारण इन इलाकों में केबल से बिजली सप्लाई आज तक नहीं हो सका। भौतिक सत्यापन के बिना विभाग ने करोड़ों रुपए भुगतान कर दिया। बिजली विभाग में यह भ्रष्टाचार अधिकारियों की मिली-भगत का परिणाम है।
इस घोटाले को गंभीर बताते हुए उन्होंने मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने शासन की राशि का दुरुपयोग किया है, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफ.आई.आर. दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए तथा पूरी राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
Chairman’s letter to the Chief Minister
नूतनसिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात कर रही है, ऐसे में जनता को बताना जरूरी है कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले पर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। ठेकेदार -अधिकारियों ने गठजोड़ कर शासन के करोडो रूपए की हेराफेरी करने वाले वालों पर FIR दर्ज किया जाए और शासकीय राशि की वसूली दोषियों से किया जाए।
कोरबा। (संतोष कुमार सारथी)death of contract worker सीएसईबी प्लांट में ठेका वेल्डर के रूप में कार्यरत एक युवक की काम के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद जिला अस्पताल में परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया।
death of contract worker
death of contract worker
मृतक की पहचान सूरज गोस्वामी (26 वर्ष) पिता काशीपुरी गोस्वामी, निवासी कटनी (मध्यप्रदेश) के रूप में हुई है। वह बीते डेढ़ वर्ष से एम.एस. कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से सीएसईबी प्लांट के कन्वेयर बेल्ट सेक्शन में वेल्डर के रूप में कार्यरत था।
घटना बीती रात ड्यूटी के दौरान हुई, जब सूरज की अचानक मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए मुआवजे की मांग की।
death of contract worker
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स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और पुलिस ने हस्तक्षेप किया। वार्ता के बाद ठेकेदार ने 11 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई, जिसमें से 4 लाख रुपये नगद तत्काल परिजनों को दिए गए। शेष राशि लिखित समझौते के तहत दी जाएगी।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर ठेका कंपनी और प्लांट प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बालकोनगर, 01 अगस्त 2025।Farming with BALCO’s SRI technology वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने सिस्टम ऑफ राइस इनटेसिफिकेशन (एसआरआई) तकनीक से खेती को नई दिशा दी। इससे किसानों की आय में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 473 किसान एसआरआई तकनीक के माध्यम से लाभान्वित हुए हैं। वहीं आगामी वर्ष में 546 किसानों को इस नवाचार से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
Farming with BALCO’s SRI technology
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इस वर्ष कुल 546 एकड़ भूमि पर एसआरआई विधि के अंतर्गत धान की खेती की गई, जिससे किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। एसआरआई तकनीक के प्रभावों की बात करें तो किसानों की शुद्ध आय में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। धान की औसत उपज 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़कर 15-18 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई है। बीज, सिंचाई और रसायनों के उपयोग में कमी आने से इनपुट लागत में उल्लेखनीय बचत हुई है।
Farming with BALCO’s SRI technology
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बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक ने कहा कि बालको में हमारा विश्वास केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि हम ग्रामीण जीवन की बेहतरी और टिकाऊ कृषि की दिशा में भी अपनी भूमिका को गंभीरता से निभाते हैं। एसआरआई जैसी नवोन्मेषी तकनीक किसानों के लिए एक सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही हैं। एसआरआई के जरिए कम संसाधनों में अधिक उत्पादन और आय में वृद्धि हमारे सामुदायिक विकास प्रयासों की सफलता है। यह कृषि तकनीक समृद्ध और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की ओर एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में हम और अधिक किसानों को इस बदलाव से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Farming with BALCO’s SRI technology
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सोनपुरी की राजिलाबाई कंवर बताती है कि पहले डर लगता था कि कम बीज से कैसे अच्छी फसल होगी, लेकिन एसआरआई विधि ने मेरी सोच ही बदल दी। जहाँ पहले 10-12 क्विंटल धान मिलता था, अब 15-18 क्विंटल तक की पैदावार हो रही है। कम खर्च में ज्यादा मुनाफा, यही तो हर किसान का सपना होता है। अब बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी निकल आता है। एसआरआई सिर्फ खेती का तरीका नहीं, बल्कि खुशहाल जिंदगी का रास्ता है। अब मैं अपनी बहनों को भी यह तकनीक सिखाती हूँ ताकि उनका भी भला हो सके।
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रोगबहरी के अर्जुन कुमार ने बताया कि पहले मैं 1.5 एकड़ खेत में छिड़काव विधि से कड़ी मेहनत करता था, लेकिन उपज सिर्फ 12 क्विंटल तक ही सीमित रहती थी। मन में हमेशा यह असमंजस रहता था कि क्या मैं अपनी ज़मीन और मेहनत का सही उपयोग कर रहा हूँ? फिर एक दिन एसआरआई तकनीक के बारे में सुना और 90 डिसमिल में इसे आजमाने का निर्णय लिया। जब 16 क्विंटल की उपज मिली, तो मन गर्व और खुशी से भर गया। ऐसा लगा जैसे मेरी मेहनत का असली फल अब मिला हो। कम बीज, कम पानी, कम कीटनाशक फिर भी भरपूर फसल। एसआरआई ने मेरी खेती को ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास को भी मज़बूत किया है।
एसआरआई तकनीक न केवल धान की उत्पादकता बढ़ा रही है, बल्कि किसानों के जीवन में स्थायित्व, आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती भी ला रही है। कृषि विभाग द्वारा इस पद्धति को और अधिक किसानों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बालको अपने सामुदायिक विकास संकल्प से स्थानीय किसानों को सशक्त बनाने का मजबूत स्तंभ साबित हुआ है।
Farming with BALCO’s SRI technology
कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों से ग्रामीणों को परिचित कराने के उद्देश्य से मॉडल एग्री-फार्म वेदांत एग्रीकल्चर रिसोर्स सेंटर (वीएआरसी) विकसित किया गया है। इसका संचालन कृषक उत्पादक संघ (एफ.पी.ओ.) द्वारा किया जाता है। इस केंद्र में कृषकों को मृदा परीक्षण, सिंचाई की अत्याधुनिक सुविधाएं, सब्जी की खेती, मल्टीलेयर फार्मिंग, एसआरआई, एसडब्ल्यूआई, ट्रेलिस फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक्स और बायो फ्लोक के माध्यम से मत्स्य पालन तथा सब्जियों के संरक्षण विशेषज्ञों द्वारा कृषि की अत्याधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है। कृषि नवाचार को बढ़ावा देने की दृष्टि से कुछ विदेशी सब्जियों के उत्पादन की परियोजना भी शुरू हो चुकी है।
बिलासपुर( लॉक का न्यूज़) Love marriage society punished DSP छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लव मैरिज करने पर एक पुलिस अधिकारी और उनके परिवार को सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ रहा है। डीएसपी डॉ. मेखलेंद्र प्रताप सिंह द्वारा अंतरजातीय विवाह करने पर न सिर्फ समाज ने उन्हें और उनके परिवार को समाज से बाहर कर दिया, बल्कि परिवार को लगातार प्रताड़ना और धमकियां भी दी जा रही हैं।
क्या है पूरा मामला?Love marriage society punished DSP
Love marriage society punished DSP
डॉ. मेखलेंद्र प्रताप सिंह, जो वर्तमान में सरगुजा संभाग में पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर पदस्थ हैं, मूल रूप से बिलासपुर जिले के कोंटा थाना क्षेत्र के ग्राम नुनेरा निवासी हैं। उन्होंने सरगुजा जिले के नान दमाली गांव की एक युवती से प्रेम विवाह किया, जो उनके समाज की ‘मर्यादा’ के विपरीत माना गया।
समाज ने जारी किया बहिष्कार का फरमानLove marriage society punished DSP
सतगढ़ तंवर समाज द्वारा एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि डॉ. मेखलेंद्र ने समाज के “नियम” तोड़े हैं और उन्हें तथा उनके पूरे परिवार को समाज से बहिष्कृत किया जाएगा।
28 अप्रैल 2025 को समाज की ओर से आधिकारिक लेटर पैड में बहिष्कार आदेश जारी किया गया।
पुलिस ने किया मामला दर्ज Love marriage society punished DSP
शादी के बाद से डीएसपी के परिवार को लगातार मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
उनके गांव में रह रहे भाई-बहन को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।डीएसपी ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है, जिस पर जांच के बाद समाज के अध्यक्ष मनोहर प्रताप सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
इस संवेदनशील मामले को लेकर बिलासपुर ग्रामीण की एएसपी अर्चना झा ने बताया:
“डीएसपी मेखलेंद्र प्रताप सिंह द्वारा की गई शिकायत की पुष्टि जांच में हुई है। संबंधित समाजिक पदाधिकारियों पर केस दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलाई जा रही है।”