रायपुर/ IPS transfer breaking एसपी कॉन्फ्रेंस के तत्काल बाद मुंगेली एसपी गिरिजाशंकर जायसवाल को राज्य सरकार ने हटा दिया है। अब भोजराम पटेल मुंगेली के नये पुलिस अधीक्षक होंगे। एसपी कांफ्रेंस के अगले दिन ही राज्य सरकार ने गिरिजा शंकर जायसवाल को हटाने का फैसला लिया है। गिरिजाशंकर जायसवाल को पुलिस मुख्यालय बुलाया गया है। वहीं भोजराम पटेल को बीजापुर बटालियन से मुंगेली का नया एसपी बनाया गया है।
रायपुर। transfer breaking राज्य सरकार ने 51 नायब तहसीलदारों का तबादला आदेश जारी किया है। जारी आदेश के तहत सभी को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप नई पद-स्थापना पर पदभार संभालने को कहा गया है।
रायपुर। Chhattisgarh राज्य सरकार ने 6 तहसीलदारों के तबादले का आदेश जारी कर दिया हैं। आदेश के तहत तबादला हुए अधिकारियों को 7 दिनों में अपने निर्धारित जगह में जॉइनिंग देनी होगी।देखें आदेश
रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के समान्य प्रशासन विभाग ने ईद ए मिलाद के लिए 16 सितंबर को अवकाश घोषित किया है।
इसके लिए जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 17 सितंबर को घोषित किए गए सार्वजानिक और समान्य अवकाश को निरस्त करते हुए 16 सितंबर को ईद के लिए अवकाश घोषित किया गया है।
कोरबा/Procession of Mohammadi कोरबा की सरजमीं मे मरकाजी सीरत कमेटी द्वारा हर साल की तरह इस साल भी जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर जुलुस का एहतेमाम किया गया है जिसकी तैयारिया पूर्ण कर ली गयी है.
16 सितम्बर को होने वाले जश्ने ईद मिलादुन्नबी जुलुस के पूर्व विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है जिसमे मुख्य रूप से बाईक व कार रैली, बच्चों का जुलूस व जुलूसे मोहम्मदी बड़े ही शान व शौकत के साथ निकाला जाएगा ।
मरकाजी सीरत कमेटी के अध्यक्ष मिर्जा आसिफ बेग (निशु) ने बताया की जुलुस मोहम्मदी के लिए तमाम तैयारियां की जा चुकी है जुलुस शांति पूर्ण एवं सौहाद्र पूर्ण वातावरण मे निकले इसके लिए अलग अलग केटेगरी के वालिंटियर्स नियक्ति किये गए है.कार्यक्रम निम्नानुसार संपन्न होंगे.
Procession of Mohammadi बाईक व कार रैली
Procession of Mohammadi
14 सितम्बर 2024, शनिवार दोपहर 3 बजे सीतामणी चौक से कोलयारी मस्जिद एस.ई.सी.एल. तक निकलेगी , *बच्चों का जुलूस* 15 सितम्बर 2024, इतवार दोपहर 3 बजे इत्तेहाद कमेटी कोरबा की जानिब से फैज़ाने इंसान अली मस्जिद, धनवार पारा से रानी गेट स्कूल मैदान पुरानी बस्ती में समापन होगा ,
Procession of Mohammadi जुलूसे मोहम्मदी
Procession of Mohammadi
16 सितम्बर 2024, सोमवार सुबह 9 बजे नूरी मस्जिद बुधवारी से परचम कुशाई फातेहा के बाद घंटाघर, , टी.पी. नगर चौक, पॉवर हाउस रोड, जामा मस्जिद होते हुए बस स्टैण्ड होते हुए मदीना मस्जिद पहुंचेगा। परचम कुशाई सलातो सलाम व मुए मुबारक की जियारत व दुआ के बाद जुलूस का समापन होगा ।
(आलेख संजय परातेसाभार द वायर )Special on Sitaram Yechuryअगस्त 2003 में, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – सीपीआई (एम) – के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी को उनकी पार्टी की छात्र शाखा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था।
खचाखच भरे हॉल की अगली सभी पंक्तियों को नव-प्रवेशित छात्रों ने भर दिया था, जहां येचुरी जल्द ही इस विषय पर बोलने वाले थे कि कैसे भारतीय जनता पार्टी की नीतियां न केवल अल्पसंख्यक समूहों को, बल्कि पूरे भारतीय मजदूर वर्ग को ही अपना निशाना बना रही है।
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येचुरी लगभग अचानक ही प्रकट हुए, बिना किसी धूमधाम के, जो आमतौर पर किसी राष्ट्रीय नेता के साथ होता है, और उन्होंने तय समय से थोड़ा पीछे चलने के लिए माफ़ी मांगी। उन्होंने ऊपर से बटन खोले हुए सादे सफ़ेद शर्ट और बिना किसी खास सैंडल के साथ सिलवाया हुआ ट्राउज़र पहना हुआ था। कम्युनिस्ट नेताओं के बारे में कम जानकारी रखने वाले कई छात्रों के लिए, येचुरी का विनम्र और दोस्ताना व्यवहार उल्लेखनीय और साथ ही दिल को छूने वाला था।
बहरहाल, अपने भाषण के पाँच मिनट में ही उन्होंने पूरे हॉल को मंत्रमुग्ध कर दिया था – नए छात्र भाजपा सरकार की जन-विरोधी नीतियों के बारे में उनके बिंदुवार विवरण को ध्यानपूर्वक सुन रहे थे, जिससे लगभग सभी लोग, यहाँ तक कि जो लोग उनकी पार्टी के आलोचक थे, भी आश्चर्यचकित और प्रेरित हो गए।
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अपने 45 मिनट के भाषण में – जो कि मधुर, तथ्यपरक, त्रुटिहीन और तर्कपूर्ण था – उन्होंने सांप्रदायिकता और सरकार की उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) नीतियों पर जटिल विचारों को सरलीकृत किया, जन-विरोधी नीतियों का मुकाबला करने के लिए वामपंथ को सबसे वैध राजनीतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया और छात्रों के सामने ऐसे प्रश्न छोड़ गए, जिनका सामना उन्हें सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित विश्वविद्यालय में रहने के दौरान करना पड़ रहा था।
यह सब, एक साथ। जब येचुरी ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपना भाषण समाप्त किया, तब तक वे न केवल अपनी, बल्कि देश में वामपंथ की राजनीतिक ताकत के रूप में स्थायी छाप छोड़ने में सफल हो चुके थे।
जैसे ही वे किसी दूसरी मीटिंग के लिए कैंपस से बाहर निकले, उन्होंने अपने पीछे एक अस्त-व्यस्त हॉल भी छोड़ा, जिसमें छात्र नाटकीय ढंग से उनके भाषण पर विचारों का आदान-प्रदान कर रहे थे, उनके द्वारा उठाए गए कुछ विचारों पर बहस कर रहे थे और सबसे बढ़कर, खुद को राजनीतिक और दार्शनिक सवालों की दुनिया में डुबो रहे थे, जिनका कोई आसान जवाब नहीं था। उनका जेएनयू जीवन एक धमाके के साथ शुरू हुआ था।
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येचुरी ने अपने पूरे जीवन में जेएनयू के छात्र की विशेषता को मूर्त रूप दिया – विचारशील, आलोचनात्मक, जिज्ञासु, एकजुटता और गठबंधन बनाने के लिए अटूट धैर्य के साथ। यहां तक कि जब वे अपनी पार्टी के महासचिव बनने के लिए आगे बढ़े, बहुस्तरीय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक चिंताओं से जूझते रहे और यहां तक कि अपनी पार्टी की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाने के लिए संघर्ष करते रहे – तब भी उनकी यह खासियत बनी रही।
72 वर्षीय येचुरी ने 12 सितंबर, 2024 को नई दिल्ली के एम्स में सांस संबंधी संक्रमण से लंबी लड़ाई के बाद अंतिम सांस ली। उन्हें भारत की ऐतिहासिक घटनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सबसे सुलभ और मिलनसार राजनीतिक नेताओं में से एक के रूप में जाना जाएगा।
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साम्यवाद के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता के बावजूद, उनके दरवाज़े हमेशा सभी राजनीतिक दलों के लोगों के लिए खुले रहते थे। उन्होंने अपनी राजनीतिक आभा को इतना छुपा कर रखा था कि आम लोग और यहाँ तक कि पत्रकार भी उनसे संपर्क करने में कभी नहीं हिचकिचाते थे, कभी-कभी तो उन्हें खुद भी असहजता का सामना करना पड़ता था।
येचुरी सत्तर के दशक की राजनीति की उपज थे, जिस समय भारत में सबसे ऊर्जावान छात्रों ने अपनी जगह बनाई। तेलुगु भाषी परिवार में जन्मे येचुरी अपने बचपन में ही भारत की जनसांख्यिकीय विविधता से परिचित हो गए थे। उनका बचपन उनके माता-पिता के साथ बीता था, जो सरकारी अधिकारी के रूप में काम करते थे।
वे प्रारम्भ से ही एक मेधावी छात्र रहे। उन्होंने अर्थशास्त्र का अध्ययन करने के लिए नई दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज और उसके बाद 1973 में जेएनयू में प्रवेश लिया। जेएनयू में उन्होंने महान प्रोफेसर कृष्ण भारद्वाज के अधीन अध्ययन किया। इसी विश्वविद्यालय में येचुरी और प्रकाश करात, जिनके बाद वे पार्टी के महासचिव बने, दोनों ने वामपंथी राजनीति में कदम रखा था। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और मौजूदा असमानताओं के बारे में छात्रों की चिंताओं को लेकर अभियान चलाया और सरकार पर दबाव डाला।
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आपातकाल हटने के बाद वे लगातार तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। यहां उन्होंने करात और डीपी त्रिपाठी जैसे लोगों के साथ मिलकर नए खुले विश्वविद्यालय में वामपंथ की स्थिति मजबूत की।
आपातकाल के दौरान उनकी अस्थायी गिरफ्तारी ने उनकी पीएचडी पूरी करने की योजना को बाधित कर दिया, जिसके बाद वे पार्टी में पूर्णकालिक सदस्य बन गए और राष्ट्रीय स्तर पर एसएफआई का नेतृत्व किया। उनकी राष्ट्रीय भूमिका ने वास्तव में उन्हें अखिल भारतीय नेता के रूप में परिपक्व होने में मदद की ; उन्होंने व्यापक रूप से यात्रा की, देश भर में विभिन्न छात्र आंदोलनों के साथ संबंध बनाए, आम मुद्दों पर एकजुटता बनाई और एसएफआई को एक विशाल छात्र संगठन बनने में मदद की।
आपातकाल के बाद के उत्साह के दौरान उनकी रचनात्मक भूमिका को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने देखा और उन्हें जल्द ही पार्टी की केंद्रीय समिति में शामिल कर लिया गया, जो पार्टी नेताओं द्वारा निर्णय लेने वाली प्रणाली में युवा प्रतिभा को शामिल करने के प्रयास का हिस्सा था।
येचुरी की राष्ट्रीय राजनीति में शुरुआत भी उस समय हुई, जब सीपीआई(एम) अपने आप को देश के अन्य हिस्सों में फैलाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही थी। हालांकि वे प्रयास आधे-अधूरे ही रहे, लेकिन येचुरी सीपीआई(एम) की राष्ट्रीय राजनीति की चिंताओं और मुद्दों में पले-बढ़े नेता के रूप में उभरे। इसने उन्हें और करात को उस समय के अन्य युवा सीपीआई(एम) नेताओं से अलग कर दिया, जो केवल केरल और पश्चिम बंगाल जैसे पार्टी के गढ़ों में ही शामिल थे।
यह लगभग वही समय था l, जब येचुरी पूर्वी यूरोपीय देशों और अन्य ऐसे देशों की कम्युनिस्ट पार्टियों की बैठकों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सीपीआई (एम) का प्रतिनिधित्व करने के लिए पार्टी से नामांकित हुए और उन्होंने अपनी पार्टी को विश्व राजनीति का हिस्सेदार बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस विविध अनुभव ने येचुरी को न केवल राष्ट्रीय मुद्दों के इर्द-गिर्द, बल्कि तत्कालीन अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों के इर्द-गिर्द भी, अपनी राजनीतिक चिंताओं को व्यक्त करने में मदद की, जिससे वे उन दुर्लभ भारतीय राजनीतिक नेताओं में शामिल हो गए, जिन्हें विदेश नीति के मामलों की निश्चित समझ थी।
सोवियत संघ के पतन, बाबरी मस्जिद के विध्वंस और आसन्न दिवालियापन के बाद भारत सरकार को 90 के दशक की शुरुआत में एलपीजीअजॉय आशीर्वाद महाप्रशास्ता (उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण) की नीतियों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे भारत में वामपंथी आंदोलन को झटका लगा। यह लगभग वही समय था, जब सीपीआई (एम) नेतृत्व ने, जिसके येचुरी एक अभिन्न अंग थे, वास्तव में भाजपा को दूर रखने और भारतीय धर्मनिरपेक्षता के लिए एक मजबूत राजनीतिक आधार बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए।
तत्कालीन महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत के मार्गदर्शन में येचुरी एक ऐसे नेता के रूप में उभरे, जो न केवल राजनीतिक दलों, बल्कि विभिन्न नागरिक समाज समूहों के साथ मजबूत धर्मनिरपेक्ष गठबंधन बनाने के प्रयास में माकपा और अन्य दलों के बीच आसानी से एक पुल बन सकते थे।
गठबंधन की राजनीति में माहिर सुरजीत ने येचुरी को उस स्थिति में आने में मदद की, जहां वे अपना मित्रवत और सुलभ व्यवहार अपनाकर उन ताकतों के बीच पुल का निर्माण कर सके, जिनके एक साथ आने की कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
येचुरी एक उत्साही पाठक थे, हाजिर जवाबी में बेहद कुशल थे और पुराने हिंदी फ़िल्मी गीतों के भी बहुत बड़े प्रशंसक थे। उनके दोस्त आपको बताएंगे कि कैसे वे अस्सी के दशक से पहले के दशकों के लगभग सभी गीतों के गीतकारों और संगीतकारों को याद रखते थे और उनके पास हिंदी गीतों का एक विशाल संग्रह भी था। उन्होंने पार्टी की विभिन्न पत्रिकाओं के संपादक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान भी अपने व्यक्तित्व का यह पक्ष दिखाया था, जहाँ उन्होंने न केवल राजनीतिक लेख प्रकाशित किए, बल्कि उपन्यासकारों, कवियों और कलाकारों के साक्षात्कारों का भी प्रयोग किया।
जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने दीवार पत्रिकाओं की अवधारणा शुरू की, जिसमें अकादमिक और साहित्यिक पर्चे प्रकाशित किए गए। अपने अंतिम समय तक, उन्होंने कई प्रकाशनों के लिए लिखना बंद नहीं किया था, महत्वपूर्ण मामलों में तत्काल हस्तक्षेप किया और आम तौर पर गंभीर मुद्दों पर मजाकिया टिप्पणी या लेख के साथ माहौल को हल्का किया।
सांसद के रूप में उनका लगभग दो दशक का रिकार्ड न केवल एक प्रतिबद्ध कम्युनिस्ट के रूप में, बल्कि एक कुशल वार्ताकार और हस्तक्षेपकर्ता के रूप में भी उनकी गंभीरता को दर्शाता है।
येचुरी के दूसरों के प्रति छोटे-छोटे इशारे भी उल्लेखनीय थे, जिससे उन्हें सभी राजनेताओं का सम्मान मिला। प्रभावी संचार पर उनका जोर इतना अधिक था कि उन्होंने बंगाली और मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाएँ भी सीखीं।
जीवन के अंतिम चरण में, करात के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता के बारे में बहुत कुछ कहा गया, जो पूरी तरह से झूठ नहीं था। लेकिन कोई भी पुराना सीपीआई(एम) पर्यवेक्षक आपको बताएगा कि इन दोनों नेताओं को नेतृत्व उस समय विरासत में मिला जब ज्योति बसु, ईएमएस नंबूदरीपाद और सुरजीत जैसे दिग्गज, जिन्होंने पार्टी को खड़ा किया था, या तो सेवानिवृत्त हो चुके थे या उनकी मृत्यु हो गई थी, जिससे पार्टी के भीतर एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था।
करात को पार्टी के संगठन को बनाने की भूमिका विरासत में मिली, जबकि येचुरी भारत के संसदीय लोकतंत्र की जटिलताओं से निपटने के लिए पार्टी का चेहरा बनकर उभरे। दोनों की भूमिकाएँ अलग-अलग थीं, और वे एक-दूसरे के पूरक हो सकते थे, जैसा कि उन्होंने अपने जेएनयू जीवन में, अलग-अलग परिस्थितियों और संदर्भों में किया था। फिर भी, दोनों ने नब्बे के दशक में पार्टी के परिवर्तन के महत्वपूर्ण समय के दौरान पार्टी का प्रतिनिधित्व किया, और दोनों को सत्तर के दशक के जीवंत छात्र आंदोलन से राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरने का गौरव प्राप्त है।
पार्टी के महासचिव के रूप में येचुरी उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते थे, जो भाजपा के खिलाफ व्यापक गठबंधन में विश्वास करता था और संसदीय वामपंथी ताकत का नेतृत्व करने के अपने गैर-रूढ़िवादी दृष्टिकोण के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध रहे।
ऐसा माना जाता है कि उन्होंने यूपीए-1 सरकार द्वारा सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक साथ रखने के लिए एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कांग्रेस के साथ लगातार जुड़े रहने वाले व्यक्ति के रूप में, कहा जाता है कि उन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, आरटीआई, शिक्षा का अधिकार और भोजन का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून पारित करने के लिए काफी प्रभावित किया था।
येचुरी को हमेशा एक धीमे, लेकिन स्थिर योद्धा के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने कट्टरवाद और वैश्वीकरण दोनों के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और वे भारतीय राजनीति में उस समय एक मजबूत ताकत बन गए थे, जब सांप्रदायिक और लाभ-लोलुप ताकतों ने अभूतपूर्व तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
कोरबा: Coal India big breaking कोल इंडिया में काम करने वाले श्रमिकों व ठेका कर्मियों के लिए एक अच्छी खबर है। स्थायी कोयला श्रमिकों को 1 करोड़ और आउटसोर्सिंग कंपनियों में कार्यरत ठेका मजदूरों को जीरो प्रीमियम में 40 लाख रुपये तक का बीमा कंपनी कराएगी। इसका लाभ एसईसीएल के 50 हजार से अधिक स्थायी व ठेका श्रमिकों को मिलेगा। कोल इंडिया प्रबंधन व एसीबीआइ के निर्देशक मंडल की बैठक में इस पर सहमति बन चुकी है।
Coal India big breaking
Coal India big breaking
इस सप्ताह ड्राफ्ट फाइनल हो जाएगा। इसके लिए 17 सितंबर के पहले एमओयू हो जाएगा। कोयला मंत्रालय 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन इसकी घोषणा कर सकता है। इस योजना की विशेषता है कि किसी तरह की दुर्घटना होने पर आश्रित को भुगतान मिलेगा। पहले केवल खान दुर्घटना पर चर्चा हो रही थी। बाद में प्रबंधन ने तर्क के साथ इनकी आवश्यकता बताई तब सहमति बनी। पहले केवल कोल इंडिया के श्रमिकों को ही बीमा के दायरे में रखा गया था, लेकिन अब ठेकाकर्मियों को भी इससे जोड़ दिया गया है।
Coal India big breaking
Coal India big breaking
इस मुद्दे पर 28 अगस्त को कोल इंडिया चेयरमैन पी.एम. प्रसाद की अध्यक्षता में कोयला कंपनियों के सीएमडी के साथ बैठक हुई थी। इसमें बताया गया कि उन ठेका श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा, जिनका बैंक से वेतन भुगतान होता है। कोल इंडिया के अधीन कार्यरत कंपनियों से ठेका श्रमिकों का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। ब्योरा में बैंक खाता, पीएफ नंबर भी मांगा जा रहा है।
कोरबा Outrage against NTPC कोरबा जिले के ग्राम धनरास में एनटीपीसी द्वारा संचालित राखड़ बांध से हो रही समस्याओं और रोजगार की मांग को लेकर ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस के बैनर तले चक्का जाम और काम बंद प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीकांत कंवर के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए।
Outrage against NTPC11 सूत्रीय मांगों पर एनटीपीसी प्रबंधन से की चर्चा
Outrage against NTPC
प्रदर्शन की जानकारी पहले ही शासन-प्रशासन को दे दी गई थी। इसको ध्यान में रखते हुए एनटीपीसी प्रबंधन ने दर्री तहसीलदार की उपस्थिति में युवाओं से चर्चा के लिए अपने कार्यालय में बुलाया। बैठक के दौरान युवाओं ने अपनी 11 सूत्रीय मांगें प्रबंधन के समक्ष रखीं। प्रबंधन ने कुछ मुद्दों पर सहमति जताई, लेकिन रोजगार से संबंधित मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया, जिससे ग्रामीण नाराज हो गए।
Outrage against NTPCराखड़ परिवहन बंद और डेम पर काम ठप्प
Outrage against NTPC
प्रबंधन से रोजगार के मुद्दे पर कोई सकारात्मक जवाब न मिलने के बाद नाराज ग्रामीणों ने राखड़ बांध पर पहुंचकर वाहनों को रोक दिया और वहां चल रहे काम को बंद करवा दिया। इस विरोध प्रदर्शन के बाद एनटीपीसी प्रबंधन ने अपने कार्यालय के गेट पर सीआईसीएफ जवानों को तैनात कर दिया, जबकि ग्रामीण वहीं बैठकर नारेबाजी करते रहे। ग्रामीणों की मांगों के प्रति प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया, जिससे प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा।
पुलिस की मध्यस्थता के बाद प्रदर्शन हुआ समाप्त
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी युवाओं से चर्चा की। युवाओं ने उन्हें बताया कि एनटीपीसी प्रबंधन की मनमानी के कारण ग्राम के लोग समस्याओं का सामना कर रहे हैं, खासकर रोजगार से जुड़ी मांगों को बार-बार नजर अंदाज किया जा रहा है।
थाना प्रभारी ने प्रबंधन के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की बात कही। काफी देर बाद प्रबंधन के अधिकारी वहां पहुंचे, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। अंततः थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों से प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक बैठक करने की सलाह दी, जिसे अगले 1-2 दिनों में आयोजित करने की बात कही गई। इस पर दोनों पक्ष सहमत हुए और ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे। एनटीपीसी राखड़ बांध के कारण ग्राम में प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं, जिनका समाधान ग्रामीण लंबे समय से मांग रहे हैं।
इस विरोध प्रदर्शन ने एनटीपीसी प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने धनरास के ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से उठाया गया है, और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच क्या सहमति बनती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
कोरबा। Scam in PM housing नगर पालिका परिषद कटघोरा वार्ड क्र.-04 संतोषी मंदिर के पास कटघोरा निवासी गोपेन्द्र कुमार पाण्डेय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मेघा पाण्डेय ने तिलक भवन प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में आरोप लगाते हुए कहा कि वार्ड पार्षद श्रीमती अर्चना अग्रवाल द्वारा भयादोहन किया जा रहा है और प्रताड़ित करने के उद्देश्य से कार्यपालिक दण्डाधिकारी के न्यायालय में बार-बार शिकायत कर मुझे परेशान किया जा रहा है।
श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि श्रीमती अर्चना अग्रवाल द्वारा बेजा कब्जा में निर्माण कार्य करा रहे हो, की धमकी देते हुए 50 हजार रूपए की मांग की और 50 हजार न दे पाने के कारण उन्होंने तहसील ऑफीस में मेरे विरूद्ध शिकायत की। तहसीलदार न्यायालय से स्टे लगा दिया गया और मेरा पक्ष सुनने के बाद तहसीलदार ने स्टे हटा दिया।
सीमांकन में हमारी पैतृक भूमि खसरा नंबर 800, 801/3 कुल रकबा 26 डिसमिल में नगर पालिका परिषद कटघोरा द्वारा पूर्व पार्षद पवन अग्रवाल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था और मुझे एक किस्त देकर वर्तमान पार्षद श्रीमती अग्रवाल ने सीएमओ को बोलकर किस्त भी रूकवा दी, जबकि मेरा घर पूर्णता की ओर है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि तहसीलदार कटघोरा द्वारा स्टे हटाने के बाद श्रीमती अग्रवाल ने नगर पालिका कटघोरा में जनप्रतिनिधि हूं, कहकर नगर पालिका की तरफ से फिर से बेजा कब्जा कहकर तहसील ऑफिस में फिर से शिकायत कर दी है। एक बार तहसीलदार द्वारा स्टे हटाने के बाद अर्चना अग्रवाल द्वारा मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। श्री पाण्डेय का आरोप है कि मेरे भाई राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने श्रीमती अग्रवाल को एक ट्रैक्टर ईंट, 10 बोरी सीमेंट हैसियत के अनुसार दिया था,
लेकिन जबतक 50 हजार नहीं दोगे, मैं तुम लोगों को छोड़ूंगी नहीं, कहकर बार-बार शिकायत कर रही हैं, जिसके कारण मैं मेरा परिवार, बूढ़े माता-पिता मानसिक रूप से प्रताड़ित हैं। श्री पाण्डेय ने कहा कि श्रीमती अर्चना अग्रवाल की धमकी से हम भयभीत और डरे हुए हैं।
श्री पाण्डेय ने बताया कि भाजपा नेत्री होने के कारण वे बड़े नेताओं से फोन करा कर हमें भयभीत कर रहीं हैं। कटघोरा थाने में भयादोहन और प्रताड़ना की शिकायत गत 29 अगस्त को की गई है, लेकिन कटघोरा थाना द्वारा न्याय न मिलने के कारण 10 सितंबर को एसपी कार्यालय में भी गुहार लगाते हुए आवेदन दिया गया है। उन्होंने कहा कि न्याय न मिलने के कारण मैंने प्रेस की शरण ली और श्रीमती अर्चना अग्रवाल द्वारा गरीब परिवार को प्रताड़ित किए जाने से तंग आकर मैंने उनके कारनामों का खुलासा किया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेरे एक और रिश्तेदार की जमीन जो तालाब के किनारे में है, उसकी जमीन को तालाब में है कहकर औने-पौने दाम में अपने परिचित के पास बिकवा दी।
श्री पाण्डेय ने कहा कि श्रीमती अर्चना अग्रवाल को जिताने में हमने पूरा सहयोग किया और मैं भी भाजपा का अदना सा कार्यकर्ता हूं और उनके द्वारा मेरे ही परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। गरीब ब्राम्हण सोचकर कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने मुझे स्वेच्छानुदान से 5 हजार की राशि भी प्रदान कीhousin
जब भाजपा के शासन काल में भाजपा कार्यकर्ता ही परेशान है और न्याय नहीं मिल रहा है, तो आखिर हमारे जैसे प्रताड़ित कार्यकर्ता जाएं तो जाएं कहा, इस लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर विश्वास कर मैं यहां पहुंचा हूं।
AJAB GAJAB NEWS दुनिया भर में कई ऐसी खूबसूरत और रहस्यमई जगह है जिसमें कई जगहों पर पर्यटकों के जाने पर रोक लगाई गई है इन जगहों पर जाने पर लोगों की रूह कहां जाती है इस जगह कई जगह बेहद AJABखूबसूरत है लेकिन इन जगहों पर पर्यटकों के जाने पर रोक है इन जगहों के रहस्यमय और डरावनी होने कीAJAB वजह से लोगों को जाने पर रोक लगाई गई है भारत में मे भी दो ऐसी जगह है जहाँ पर्यटकों के जाने पर रोक है.
AJAB GAJAB NEWS नॉर्थ सेंटिनल दीप भारत
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भारत के अंडमान में स्थित नॉर्थ सेंटिनल दीप बाहरी लोगों के लिए पूरी तरह से बना है इस दीप पर जाने का माध्यम सिर्फ नाम है इस रहस्य में दीप पर आज भी 60 हजार साल पुराने इंसानी कबीले की लोग रहते हैं इनका बाहरी दुनिया से कोई भी संपर्क नहीं है न सेंटिनल दीप में रहने वाली जनजाति और उसके इलाके को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है इस दीप पर पहुंचने की कोशिश करने वाले लोगों पर कबीले के लोग हमला कर देते हैं और इन्हें मार भी डालते हैं इसलिए नाग सेंटिनल दीप पर किसी भी बाहरी सेक्स के आने पर प्रतिबंध लगा हुआ है
AJAB GAJAB NEWS बैरन दीप भारत
AJAB GAJAB NEWS
भारत में स्थित बैरन द्वीप पर ज्वालामुखी स्थित है जानकार बताते कि भारत का इकलौता दीप है जहां पर ज्वालामुखी है अंडमान सागर में स्थित बैरन दीप को पर्यटक दूर से ही देख सकते हैं क्योंकि यहां पर पर्यटकों की जाने पर रोक है इंसानों के नहीं जाने की वजह से इसको बैरन दीप कहा जाता है