कोरबा। (ब्लैकआउट न्यूज़ )Korba Road Accident कोरबा शहर के राताखार मार्ग में सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई वहीं उसके साथ बैठी युवती को काफी गंभीर चोटे आई हैं। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
Korba Road Accident
Korba Road Accident
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा दोपहर करीब 2 बजे हुआ जिसमें एक रेसर बाइक में सवार युवक और युवती रास्ते से गुजर रहे थे
बाइक चलाते वक्त युवक अनियंत्रित होकर एक कार को ठोकर मारकर दूसरी कार से जाकर टकराया और दोनों सड़क पर फेंका गए। कार और बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस के द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। समाचार लिखे जाने तक मृतक और घायल के संबंध में जानकारी अप्राप्त है.
रायपुर । Raipur murder breaking राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में सरगुजा कलेक्टर कार्यालय के एक ड्राइवर की 3 लुटेरों ने सुबह 3 बजे हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि मरीन ड्राइव पर मोबाइल लूटने आए बदमाशों ने चाकू घोंपकर हत्या की।
Raipur murder breaking
मृतक का नाम ईश्वर राजवाड़े है, जो अंबिकापुर का निवासी था। वह सरगुजा कलेक्ट्रेट में ड्राइवर का काम करता था। रविवार को सरकारी अधिकारी को लेकर वह रायपुर आया था।
तेलीबांधा तालाब के पास गाड़ी लगाने के दौरान तीन बदमाश मोबाइल लूटने लगे। इसी बीच विवाद हो गया। बीच बचाव के कारण 3 अज्ञात लुटेरों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। युवक की मौत हो गई।
Raipur murder breaking
तेलीबांधा पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीम जुट गई है। घटना स्थल के आस-पास की सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
कोरबा(ब्लैकआउट न्यूज़)KORBA BREAKING कोरबा जिले के उरगा थाना अंतर्गत बरिडीह के नहर मे एक महिला की लाश तैरती हुई मिली ग्रामीणों ने इसकी सुचना उरगा थाना को दी पोलिस मौके पर पहुंच कर जाँच मे जुट गयी है. महिला की शिनाख्त नहीं हो पायी है वही मामला हत्या का है या महज एक दुर्घटना पुलिस जाँच कर रही है.
कोरबा। Korba Court decision न्यायालय माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (पाक्सो) कोरबा, पीठासीन अधिकारी डॉ ममता भोजवानी के द्वारा विवाह का झांसा देकर नाबालिग पीड़िता का बलात अपहरण कर उसके साथ बलात्कार एवं दैहिक शोषण किए जाने संबंध में अभियुक्त विरेन्द्र यादव उर्फ ननका पिता महेश राम यादव, निवासी यादव मोहल्ला खरमोरा जिला कोरबा को मामला दोषसिद्ध ना होने की वजह से सत्र प्रकरण क्रमांक 34/2024 धारा 363, 376 (2) (एन) भादवि एवं 3-4 पाक्सो एक्ट के अपराध से दोषमुक्त किया गया है।
अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता श्यामल मल्लिक के द्वारा पैरवी किया गया।
Korba Court decision
KORBA CORT
अभियोजन के मुताबिक घटना संक्षेप में इस प्रकार है कि पीड़िता के पिता के द्वारा थाना सिटी कोतवाली कोरबा में दिनांक 20/06/2024 को शिकायत दर्ज कराया गया था कि दिनांक 18/06/2024 को पीड़िता अपनी सहेलियों के साथ छत्तीसगढ़ी पिक्चर देखने टॉकिज गई हुई थी। जहां से आरोपी के द्वारा पीड़िता को बहला फुसलाकर अपने मोटर सायकल में बिठाकर खरमोरा के स्कूल में ले गया तथा विवाह का झांसा देकर पीड़िता के साथ उसके इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध स्थापित किया।
इसके बाद आरोपी विरेंद्र यादव उर्फ ननका पीड़िता को अपने मोटर सायकल में बिठाकर धरमजयगढ़ अपने दोस्त के यहां लेकर चला गया और वहां पीड़िता के साथ 2 दिनों तक रुकने के बाद पीड़िता को यह आश्वासन देकर कि वह अपने घर जाकर अपने माता से विवाह की बात करके आता हूं कहकर चला गया।
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पीड़िता के द्वारा आरोपी को बार बार फोन करने से उसका फोन बंद पाया गया तब पीड़िता बस में बैठकर धरमजयगढ़ से दिनांक 21/06/2024 को कोरबा वापस आकर कोतवाली कोरबा में आरोपी विरेंद्र यादव उर्फ ननका के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराया गया। थाना कोतवाली कोरबा के द्वारा आरोपी को दिनांक 23/06/2024 को गिरफ्तार कर जेल अभिरक्षा में जिला जेल कोरबा में भेजा गया।
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प्रकरण में साक्षियों के परीक्षण प्रतिपरीक्षण के पश्चात अभियुक्त पर दोषसिद्ध ना होने की वजह से न्यायालय माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (पाक्सो) कोरबा, पीठासीन अधिकारी : डॉ ममता भोजवानी के द्वारा दिनांक 18/09/2024 को अभियुक्त विरेंद्र यादव उर्फ ननका को दोषमुक्त घोषित किया गया। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक श्री अरुण कुमार ध्रुव एवं अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता श्री श्यामल मल्लिक के द्वारा पैरवी किया गया।
मॉस्को. Declining Birth Rates अपने देश में लगातार घटती आबादी और बच्चों के पैदा होने की दर में भारी गिरावट का सामना कर रहे रूस ने एक अनोखा कदम उठाया है. एक विवादित कदम उठाते हुए रूस ने अपने नागरिकों से देश की घटती जन्म दर को बढ़ाने के लिए काम के ब्रेक का उपयोग सेक्स करने के लिए करने की अपील की है. हेल्थ मिनिस्टर डॉ. येवगेनी शेस्टोपालोव ने ऑफिस जाने वालों को सलाह दी कि वे लंच और कॉफी के टाइम का उपयोग अंतरंग संबंध बनाने के लिए करें. शेस्टोपालोव का बयान रूस की प्रजनन दर के 2.1 की पिछली दर से गिरकर लगभग 1.5 बच्चे प्रति महिला हो जाने के बाद आया है.
Declining Birth Rates
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यह समस्या यूक्रेन से जंग के कारण और भी बदतर हो गई है, जिसके कारण युवा रूसी देश से पलायन कर रहे हैं. शेस्टोपालोव ने सोमवार को कहा कि व्यस्त कामकाज के शेड्यूल के कारण लोगों को अपने परिवार को बढ़ाने से नहीं रोकना चाहिए. मेट्रो की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रेक का उपयोग अंतरंग संबंध बनाने के लिए किया जा सकता है क्योंकि जीवन बहुत तेजी से बीत रहा है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही कहा था कि रूसी लोगों का संरक्षण करना हमारी सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता है.
Declining Birth Rates
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गौरतलब है कि रूस की जन्म दर हाल ही में 1999 के बाद से सबसे कम हो गई है. यूक्रेन जंग के कारण आंशिक रूप से मौतों में 18 फीसदी की बढ़ोतरी से यह और भी बढ़ गया. क्रेमलिन ने जन्म दर को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय लागू किए हैं. इनमें मॉस्को में 18-40 साल की महिलाओं को मुफ्त प्रजनन जांच की पेशकश करना, नियोक्ताओं पर महिला कर्मचारियों को बच्चे पैदा करने में सहायता करने के लिए दबाव डालने की योजना का प्रस्ताव करना शामिल है. इसके अतिरिक्त गर्भपात की पहुंच को प्रतिबंधित किया जा रहा है. दंपतियों में अलगाव को हतोत्साहित करने के लिए तलाक शुल्क बढ़ा दिया गया है.
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राजनीतिज्ञ अन्ना कुजनेत्सोवा ने भी परिवार के आकार को बढ़ाने के लिए महिलाओं को 19-20 वर्ष की आयु में बच्चे पैदा करना शुरू करने की वकालत की है.
कोरबा (ब्लैकआउट न्यूज़)Kawardha incident युवा कांग्रेस ज़िला कोरबा एव एनएसयूआई द्वारा युवा कांग्रेस ज़िला महासचिव मधुसूदन दास एव एनएसयूआई ज़िलाध्यक्ष दीपक वर्मा के संयुक्त नेतृत्व में टीपीनगर चौक में कवर्धा में पुलिस की प्रताड़ना से युवक प्रशांत साहू के मौत एव साथ ही साथ उनके परिजनों,ग्रामीणों पर पुलिसिया अत्याचार को बढ़ावा देने वाले एसपी अभिषेक पल्लव पर कार्यवाही की बजाए प्रमोशन दिया गया इसी लिये प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा को सदबुद्धि देने की कामना करते हुए सदबुद्धि यज्ञ करवा कर विरोध दर्ज करवाया गया एव साथ ही साथ गृहमंत्री विजय शर्मा से इस्तीफ़े की माँग की गई ..!
Kawardha incident
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इस अवसर पर युवा कांग्रेस ज़िला महासचिव मधुसूदन दास ने कहा की – प्रशांत साहू की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से ही पुलिस मामले की लीपापोती में जुट गई थी। यही वजह है कि जिला जेल में प्रशांत की मौत के बाद बिना पंचनामा के शव को जिला अस्पताल के शव गृह में लाकर रख दिया गया था और पूरी तैयारी थी रातों रात शव को ठिकाने लगवा दिया जाए। लेकिन इसकी जानकारी एन मौके पर कांग्रेस व साहू समाज को मिल गई और पुलिस की बर्बरता, क्रूरता सामने आ गई। अब प्रदेश के गृह मंत्री जांच की बात कर रहे हैं।
Kawardha incident
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लेकिन समझ से परे है कि आखिर जांच किस बात की जा रही है। क्या लोहारीडीह आगजनी व हत्याकाण्ड में जांच के बाद ग्रामीणों की गिरफ्तारी की गई थी। उस समय तो पुलिस, ग्रामीण महिला, पुरूष युवाओं यहां तक नाबालिको तक को जानवारों की की तरह मारते पीटते और घसीटते गिरफ्तार कर रेंगाखार जंगल ले आई थी। जहां शराब के नशे में धुत्त होकर पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों ने पूरी रात उनके साथ जानलेवा पिटाई की। पुलिस की इसी पिटाई से गंभीर रूप से घायल ग्रामीण प्रशांत साहू की जिला जेल में मौत हो गई।
Kawardha incident
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इसके अलावा एसपी अभिषेक पल्लव के ऊपर कार्यवाही करने के बजाए उनके प्रमोशन का तोहफ़ा दिया जा रहा है इससे साफ़ प्रतीत होता है कि बीजेपी सरकार कि यह मिलीजुली हरकत है और हकीकत ये है कि आज प्रदेश के गृह मंत्री लोगों के जवाब देने की स्थिति में नहीं है, उन्हें अपने मातहतों के कृत्यों पर विभाग के मुखिया होने के नाते प्रदेश की जनता से तथा पीडि़त परिवारों से माफी मांगते हुए पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। तथा मामले के सभी दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जानी चाहिए ..।
एनएसयूआई ज़िलाध्यक्ष दीपक वर्मा ने कहा की – प्रदेश की क़ानून व्यवस्था पूर्ण रूप से लचर हो चुकी है प्रदेश की बीजेपी सरकार में अफ़सरवाद पूर्ण रूप से हावी हो चुका है पता नहीं कब तक इस प्रताड़ना में आमजनों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा हम माँग करते है कि तत्काल प्रभाव से ज़िम्मेदारी लेते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए…!
इस अवसर पर प्रमुख रूप से सांसद प्रतिनिधि मंदीप शर्मा,दीपक दास महंत,कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष शब्बीर ख़ान,एनएसयूआई ज़िलाउपाध्यक्ष जुनैद मेमन,दिवाकर राजपूत,एनएसयूआई ब्लॉक अध्यक्ष प्रमोद कारके,युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष दीपेश यादव,आरटीआई कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष कमलकिशोर चंद्रा,मुकेश सिंह ऊसरवर्षे,आकाश पटेल,ब्लॉक अध्यक्ष बबलू मारवा,अनिल खूटे,सुमित यादव,धनजय राठौर,
मनजीत सिंह ठाकुर,अभिषेक सिंह,अमर पटेल,कार्तिक कुमार,अंश पांडेय,देव चौहान,असमीन एक्का,मोंटू,सुमित यादव,सुरेश चौहान,सागर चौहान,रुपेश चौहान,नीतीश चौहान,कुणाल चौहान,सूर्यभान कुर्मी,ललित चंद्रा,रमेश उराव,शिवम् लाल,लक्की,केदार साहू,नीतीश सारथी खगेश कर्ष,और अनेक युवा कांग्रेस एनएसयूआई के साथी उपस्थित….!!
(आलेख : एस एन साहू)मोदी सरकार ने Article on one nation one election ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना को स्वीकार करके संविधान सभा की विधायी मंशा और बी.आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण को नकार दिया है।
यह जानना जरूरी है कि रामनाथ कोविंद आयोग की सिफारिश के आधार पर 18 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सैद्धांतिक तौर पर जिस ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव को स्वीकार किया है, भारत के संविधान निर्माताओं ने कभी भी उसकी परिकल्पना नहीं की थी और न ही कभी इसका प्रस्ताव किया था।
Article on one nation one election
Article on one nation one election
जब संविधान सभा ने 15 और 16 जून, 1949 को भारत के निर्वाचन आयोग की स्थापना से संबंधित प्रारूप में संविधान के अनुच्छेद 289 (संविधान के अनुच्छेद 324 के समतुल्य) पर चर्चा की, तो ऐसा प्रस्ताव कभी सामने नहीं आया।
इसलिए, कोविंद आयोग की उक्त सिफारिश और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया जाना संविधान सभा की विधायी मंशा का स्पष्ट उल्लंघन है।
Article on one nation one election अंबेडकर ने कभी भी ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार के बारे में नहीं सोचा था
Article on one nation one election
यहां 15 जून, 1949 को संविधान सभा में हुई चर्चाओं पर गौर करना उचित होगा, जब डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अनुच्छेद 289 को पेश किया था, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह प्रावधान था कि संसद और प्रत्येक राज्य के विधानमंडल के लिए सभी चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उनके संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण कार्यपालिका से बाहर एक निकाय में निहित होगा, जिसे चुनाव आयोग कहा जाएगा।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर उस स्थिति के प्रति बहुत सचेत थे जब किसी भी समय उपचुनाव हो सकता था।
Article on one nation one election
इसके बाद उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्थायी निकाय होगा, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त कहलाने वाला एक व्यक्ति होगा, जिसके पास चुनाव कराने के लिए एक ढांचागत तंत्र होगा, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि “आमतौर पर चुनाव पांच साल के अंत में होंगे।”
लेकिन उन्हें इस बात का पूरा ध्यान था कि किसी भी समय उपचुनाव हो सकता है, इसलिए उन्होंने आगे कहा कि, “विधानसभा को पांच साल की अवधि समाप्त होने से पहले भंग किया जा सकता है। इसलिए, मतदाता सूचियों को हर समय अद्यतन रखना होगा, ताकि नया चुनाव बिना किसी कठिनाई के हो सके।”
“इसलिए, यह महसूस किया गया कि इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, यह पर्याप्त होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कहलाने वाले एक अधिकारी को स्थायी रूप से पद पर रखा जाए, और जब भी चुनाव नजदीक आएं, तो राष्ट्रपति चुनाव आयोग में अन्य सदस्यों की नियुक्ति करके तंत्र में और वृद्धि कर सकते हैं।”
स्पष्ट रूप से, संविधान सभा में डॉ. अंबेडकर द्वारा कही गई यह बात कि चुनाव सामान्यतः पांच साल के अंत में होंगे तथा यदि कोई विधानसभा भंग हो जाती है, तो पांच वर्ष की समय-सीमा के भीतर पुनः चुनाव कराने की आवश्यकता होगी, उनकी इस मंशा को रेखांकित करती है कि भारत में विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने का प्रावधान संविधान द्वारा नहीं किया जा सकता है।
Article on one nation one election संविधान सभा में शिब्बन लाला सक्सेना का रुख*
संविधान सभा के एक अन्य प्रतिष्ठित सदस्य शिब्बन लाल सक्सेना ने अनुच्छेद 289 पर चर्चा में भाग लेते हुए डॉ. अंबेडकर द्वारा उठाए गए इस बिंदु का उल्लेख किया कि चुनाव आयोग के पास चुनाव संपन्न होने के बाद पर्याप्त कार्य नहीं रह जाता, इसलिए इसमें केवल मुख्य चुनाव आयुक्त होना चाहिए तथा अन्य आयुक्तों की नियुक्ति, यदि आवश्यक हो, तो चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा से पहले की जानी चाहिए।
सक्सेना ने आगे कहा, “हमारे संविधान में, सभी चुनाव एक साथ नहीं होंगे, बल्कि वे विभिन्न विधानसभाओं में पारित अविश्वास प्रस्ताव और उसके परिणामस्वरूप विधानसभाओं के विघटन के अनुसार अलग-अलग समय पर होंगे।”
अपने विचार व्यक्त करने से पहले ही उन्होंने कहा, “हमारा संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह चार साल के निश्चित चक्र का प्रावधान नहीं करता है। चुनाव शायद लगभग हमेशा किसी न किसी प्रांत में होते रहेंगे।”
उन्होंने यह उल्लेख करते हुए कि भारतीय संघ में राज्यों के एकीकरण के बाद भारत में लगभग तीस प्रांत होंगे, यह स्पष्ट किया कि “हमारे संविधान में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर विधानमंडल को भंग करने का प्रावधान है” और दूरदर्शितापूर्वक टिप्पणी की, “इसलिए यह पूरी तरह संभव है कि प्रांत और केंद्र में विभिन्न विधानमंडलों के चुनाव एक साथ नहीं होंगे।”
उन्होंने जोरदार ढंग से कहा कि, “हर बार कहीं न कहीं कोई न कोई चुनाव हो रहा होगा।” फिर उन्होंने बहुत बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा, “हो सकता है कि शुरुआत में या पहले पांच या दस सालों में ऐसा न हो। लेकिन दस या बारह साल बाद, हर पल किसी न किसी प्रांत में चुनाव हो रहे होंगे।”
उन्होंने कहा, “इसलिए, यह कहीं अधिक किफायती और उपयोगी होगा, यदि एक स्थायी चुनाव आयोग की नियुक्ति की जाए – न केवल मुख्य चुनाव आयुक्त, बल्कि आयोग के तीन या पांच सदस्य, जो स्थायी होने चाहिए और जिन्हें चुनाव संचालित करने चाहिए।”
उन्होंने इस धारणा को खारिज कर दिया कि चुनाव आयोग कार्य के मामले में अक्षम होगा, क्योंकि उनके अनुसार, सरकारों के पतन के बाद विधानसभाओं के समय से पहले विघटन तथा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद उत्पन्न होने वाली स्थिति की अनिवार्यताओं को ध्यान में रखते हुए बार-बार चुनाव कराए जाएंगे।
1949 में शिब्बन लाल सक्सेना का यह कथन कि “हमारे संविधान में सभी चुनाव एक साथ नहीं होंगे” स्पष्ट रूप से संविधान सभा की विधायी मंशा को दर्शाता है, जिसके अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए, जैसा कि मोदी शासन ने स्वीकार किया है।
यह डॉ. अंबेडकर के उपर्युक्त कथन से मेल खाता है, जिन्होंने कहा था कि चुनाव “सामान्यतः पांच वर्ष के अंत में होंगे” और वे इस तथ्य से गहराई से अवगत थे कि विधानमंडल अपने निर्धारित पांच वर्ष की अवधि से पहले ही भंग हो सकता है और इसके लिए चुनाव आवश्यक हो जाएगा।
आर.के.सिधवा का रुख
संविधान सभा में चुनाव आयोग पर चर्चा के दौरान बोलते हुए एक अन्य प्रमुख सदस्य आर.के. सिधवा ने कहा, “अब सभी प्रांतों में हमारे लगभग 4,000 सदस्य होंगे और उपचुनाव होंगे। निश्चित रूप से, हर महीने दो या तीन चुनाव होंगे – कुछ गुजर जाएंगे, कुछ उच्च पदों पर पदोन्नत होंगे – कुछ इधर-उधर जाएंगे।”
उन्होंने कहा कि, “इस संविधान सभा में, अल्प अवधि में ही अनेक उपचुनाव हुए हैं, यद्यपि उनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं है, परन्तु जिन स्थानों से वे आए हैं, वहां अनेक चुनाव हुए हैं।”
इसलिए, उन्होंने कहा कि आवश्यकता और निष्पक्षता के अलावा, चुनाव आयोग को एक न्यायसंगत मतदाता सूची तैयार करने के लिए काम करना चाहिए, जिसे अक्सर उन लोगों द्वारा दूषित कर दिया जाता है, जो कार्यपालिका के साथ मिलीभगत करके इसमें नाम डाल देते हैं।
चुनाव में मतदाता सूची को प्रमुख मानते हुए उन्होंने एक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना की अपील की, ताकि एक से अधिक चुनाव आयोजित करने की आवश्यकता वाली स्थिति से निपटा जा सके।
उन्होंने उन लोगों की बात पर ध्यान नहीं दिया, जो कह रहे थे कि इस उद्देश्य के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा, तथा उन्होंने एक ऐसे चुनाव आयोग की वकालत की, जो निष्पक्षता, न्यायसंगतता और सत्यनिष्ठा के साथ चुनाव कराने के लिए सशक्त हो।
जवाबदेही की संस्कृति ख़त्म होती जा रही है
इसलिए, मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना पर केंद्रित कोविंद आयोग की सिफारिश को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करने का निर्णय संविधान सभा की विधायी मंशा और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण को नकारता है।
ऐसी सिफारिश संसदीय लोकतंत्र के उस चरित्र के विपरीत है, जिसे सरकार की विधायिका के प्रति जवाबदेही के रूप में परिभाषित किया गया है। जितनी जल्दी इस सिफारिश से मुंह मोड़ लिया जाएगा, जवाबदेही के आदर्श को बनाए रखने के लिए उतना ही बेहतर होगा, जो पिछले दस वर्षों के दौरान बुरी तरह से नष्ट हो गया है।
(लेखक, भारत के राष्ट्रपति दिवंगत के.आर. नारायणन के प्रेस सचिव थे।)
रायपुर, 21 सितंबर 2024।Balco Medical Breaking वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन के अतंर्गत संचालित बालको मेडिकल सेंटर द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का दूसरा संस्करण समापन की ओर। 20 से 22 सितम्बर तक आयोजित कॉन्क्लेव में कैंसर उपचार के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए कैंसर क्षेत्र के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए
जिसमें लंदन, कनाडा, न्यूजीलैंड, इजरायल, अमेरिका और स्पेन के ख्याति प्राप्त संकाय सदस्य के साथ भारत के शीर्ष कैंसर संस्थानों के प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद थे। कॉन्क्लेव ने ज्ञान साझा करने, विचार-मंथन और नेटवर्किंग के लिए एक मंच प्रदान किया।
Balco Medical Breaking
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कॉन्क्लेव का थीम “कॉमन सेंस ऑन्कोलॉजी (सीएसओ) फॉर आउटकम्स दैट मैटर” विषय पर केंद्रित था। यह वैश्विक ऑन्कोलॉजी समुदाय में एक बढ़ता हुआ अभियान है जो कैंसर की देखभाल के लिए व्यावहारिक और रोगी-केंद्रित है। इसका उद्देश्य निम्न-मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में सस्ती और बेहतर कैंसर देखभाल तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करना है। कॉन्क्लेव में ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) के साथ एक लाइव सर्जरी किया गया। इसके साथ कैंसर उपचार में महत्वपूर्ण कौशल को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने वाली 10 कार्यशालाएँ भी शामिल थीं।
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कॉन्क्लेव पर वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने बालको मेडिकल सेंटर के लिए अपना विचार साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य कैंसर की देखभाल के लिए पूर्णरूप से रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाते हुए इसके उपचार मानक को बढ़ाना है। यह कॉन्क्लेव रोगियों के लिए बेहतर उपचार प्राप्त करने के लिए सामूहिकता की शक्ति में हमारे विश्वास को दर्शाता है।
ईकैंसर के मुख्य संपादक और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो कैंसर सेंटर में ग्लोबल ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. एनरिके सोटो ने रोगी के दृष्टिकोण से ऑन्कोलॉजी पर पुनर्विचार करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक हितों पर ध्यान केंद्रित करना है इसके साथ ही स्पष्ट संचार की कमी रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए उपचार संबंधी निर्णय लेने में बाधा बन रही है। हमारी प्राथमिकताओं को पुनः संतुलित करने के लिए शिक्षा, संचार, नीति, अनुसंधान डिजाइन और निवेश में बदलाव की आवश्यकता है।
साथ ही उन्होंने कहा कि हमें ऐसे समाधान अपनाने की आवश्यकता जो लागत-प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण हों। इससे निम्न-मध्यम आय वाले देशों में कैंसर उपचार पर वास्तविक प्रभाव डाला जा सकता है तथा इस पहल से सुनिश्चित हो पाएगा कि वित्तीय क्षमता की परवाह किए बिना कैंसर का इलाज आसान हो।
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बालको मेडिकल सेंटर की चिकित्सा निदेशक डॉ. भावना सिरोही ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हमारी चर्चाएँ अकादमिक शोधपत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया भर में कैंसर उपचार में सकारात्मक बदलाव लाएँ। इस वर्ष के सम्मेलन में चिकित्सक और नर्स के साथ-साथ शोधकर्ताओं, रोगी, कैंसर पीड़ित और विशेषज्ञ ने भी भाग लिया जिससे यह कैंसर चर्चाओं के लिए एक बहुआयामी मंच बना।
टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के उप निदेशक और कैंसर सर्जरी प्रमुख डॉ. शैलेश वी. श्रीखंडे ने बीएमसी की बेहतरीन सर्जरी विशेषज्ञता पर बात करते हुए कहा कि बीएमसी की सुविधाएं देश के प्रमुख कैंसर केंद्रों के बराबर है। यह इस क्षेत्र का अनूठा संस्था जिसके आठ कैंसर विशेषज्ञों में से पांच क्वालिफाइड एमसीएचस हैं। केंद्र के ऑपरेटिंग थिएटर (ओटी) और ओवरऑल इन्फ्रास्ट्रक्चर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं जो बीएमसी को विश्व स्तरीय उपचार देने में सक्षम बनाता है।
विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिनिधियों कॉन्क्लेव को मूल्यवान अंतर्दृष्टि और रणनीतियों के लिए अपने विचार व्यक्त किया। इससे कैंसर संबंधित संस्थानों में कैंसर उपचार में सुधार लाने के लिए एक अभियान की शुरुआत हुई। इस कॉन्क्लेव में पहली बार एक समर्पित नर्सिंग कॉन्क्लेव भी शामिल था जिसमें कैंसर देखभाल में नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया।
बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का यह दूसरा संस्करण एक ऐतिहासिक आयोजन बन गया है। कॉन्क्लेव में 1000 से अधिक चिकित्सक, नर्स, शोधकर्ता, रोगी, कैंसर सर्वाइवर और विशेषज्ञ एक साथ आए हैं जिससे पूरे भारत में कैंसर उपचार तक सभी की पहुंच के लिए ऑन्कोलॉजी क्षेत्र को बढ़ावा देने का एक मंच मिला।
कोरबा/ब्लैकआउट न्यूज़ : Patho lab will be in trouble बिलासपुर रायपुर, पुणे,मुंबई जैसी जगहों मे बैठकर कोरबा अद्योगिक नगरी मे डिजिटल सिग्नेचर से पैथो लेब चलाने वाले डाक्टरों पर प्रशासन की कार्यवाही का डंडा चलने के बाद अवैध पैथो लेब संचालकों मे हड़कंप मचा हुआ है. इसी तरताम्य मे बिलासपुर से बैठकर कोरबा ने माइक्रो पेथ लेब चलाने वाले डॉ मृतुन्जय MD पैथ ने इस्तीफा दे दीया है.
Patho lab will be in trouble
Patho lab will be in trouble
बताया जाता है कोरबा, कटघोरा सहित तीन पैथो लेब मे डॉ मृतुन्जय के डिजिटल हस्ताक्षर से पैथोलॉजिकल रिपोर्ट जारी की जाती थी विगत दिनों अखबारों और न्यूज़ पोर्टलों मे प्रमुखता से समाचार प्रकशित होने पर कोरबा CHMO नींद से जागे और नोटिस की ओपचारिकता पूरी की लेकिन चोर की दाढ़ी मे तिनकाजैसी कहावत चरितार्थ Said गयी और अवैध पेथो लेब संचालको भय का वातावरण निर्मित हो गया और वें स्वयं बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिए. अब ये अलग बात है की चार आठ दिनों बाद ये फिर अपनी दुकानदारी शुरू कर लेंगे और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ शुरू हो जायेगा.
Patho lab will be in troubleमेडिकल लैब के लिए मानक
Patho lab will be in trouble
👉 पैथालॉजिकल लैब:
👉छोटा लैब
रूटीन (नियमित) क्लीनिकल प्रक्रियाएँ, जैसे एचबी, टीएलसी, डीएलसी, यूरिन शुगर (ब्लड एवं यूरिन) जाँच ।
Patho lab will be in trouble बड़ा लैब
Patho lab will be in trouble
👉 उपरोक्त प्रक्रिया और ब्लड यूरिया, कॉलेस्ट्राल, आरएफटी, एलएफटी, लिपिड प्रोफाईल, बायो केमेस्ट्री, माईक्रोबॉलाजी, हिस्टोपैथालॉजी, कामन हारमोन ऐसेः टी3, टी4, टीएसएच, प्रोलेक्टिन, यूरिन एवं ब्लड कल्चर, इलिसा टेस्ट आदि। लैब का न्यूनतम क्षेत्रफल होगा 120 वर्गफुट + 40 वर्गफुट
👉क्लीनिकल लैब में प्रति टेक्निशियन 600 मि.मी. चौड़ा और 900 मि.मी. ऊँचा तथा लगभग 2 मीटर लंबा बेंच होना चाहिए तथा लैब के भारसाधक पैथॉलाजिस्ट के लिए पर्याप्त कक्ष होना चाहिए। प्रत्येक लैब बेंच में स्वान नेक फिटिंग्स, रीजेन्ट शेल्विंग, गैस एवं पॉवर प्वाइंट और कॉउंटर केबिनेट के साथ लैब सिंक होना चाहिए। लैब बेंच का शीर्ष एसिड अल्कली प्रूफ होना चाहिए।
👉 सभी क्लीनिकल लैब को मरीज के जाँच परिणामों के विवरण के साथ मरीज का नाम, उनका पता और रिफरल डॉक्टर के नाम का यथोचित रूप से रिकार्ड रखना चाहिये।
👉 सभी पैथॉलाजी लैब अग्निशमक यंत्रों जैसे, नगरपालिक प्राधिकरणों द्वारा यथा निर्धारित आग बुझाने के यंत्र का संधारण करेंगे।
👉 सभी लैब में स्टॉफ के लिए निजी सुरक्षा उपकरण (पी. पी. ई.) होना चाहिए।
👉 सम्यक् एकांतता (गोपनीयता) सहित सैम्पल संग्रहण के लिए सुविधायुक्त स्वच्छ शौचालय होना चाहिए।
पर्यवेक्षी चिकित्सक
👉 छोटे मेडिकल लैब के संचालन हेतु न्यूनतम योग्यता एम.बी.बी.एस की डिग्री होगी।
👉बड़े लैब के संचालन हेतु न्यूनतम योग्यता पैथालॉजी में एम.डी./ डी.सी.पी. होगी।
👉 तकनीकी कर्मी पर्यवेक्षी चिकित्सक के पर्यवेक्षण के अधीन जाँच करने वाले तकनीकी व्यक्ति के पास निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए :-
👉 किसी विश्वविद्यालय, राज्य सरकार, केन्द्रीय तकनीकी बोर्ड द्वारा मेडिकल लैब टेक्नालॉजी में (कम से कम एक वर्ष की अवधि के पाठ्यक्रम के साथ) डिप्लोमा।
👉छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समय-समय पर अनुमोदित कोई भी पाठ्यक्रम।
👉 संग्रहण केन्द्र संग्रहण केन्द्र का संचालन, किसी डीएमएलटी अथवा प्रशिक्षित नर्स द्वारा किया जा सकता है। संग्रहण केन्द्र में कम से कम 80 वर्गफुट क्षेत्रफल का एक कमरा होना चाहिए, जहाँ संग्रहण तथा सैम्पल के भंडारण की सुविधा हो तथा केन्द्र से मेडिकल लैब तक सैम्पल का उचित परिवहन प्रदान किया जाना चाहिए। परिवहन सावधानीपूर्वक कोल्ड चैन के उचित रखरखाव के साथ किया जाना चाहिए।
Raipur, September 20, 2024 –BALCO Medical Centre – BALCO Medical Centre (BMC), one of India’s foremost cancer care facilities, hosted a live surgical demonstration for oncologist surgeons from across the country as part of the Annual BMC Chhattisgarh Cancer Conclave. The event, led by leading oncologists from Tata Memorial Hospital, Mumbai, highlighted the use of Augmented Reality (AR), an advanced technology in cancer care, for performing complex cancer surgeries. The event saw participation from over 120 individuals, creating a platform for sharing insights on cutting-edge oncology practices.
BALCO Medical Centre
BALCO Medical Centre
During the conclave, the experts performed live surgical demonstrations showcasing advanced techniques for pancreatic and gastric cancer treatment using Microsoft HoloLens 2, an Augmented Reality (AR) headset. This technology converts traditional 2D imaging, such as CT and MRI scans, into interactive 3D holograms, offering 3D operative planning in cancer surgeries. It also enhances surgeons’ understanding of the tumour and surrounding anatomy, allowing them to better evaluate tumour characteristics and vascular variations. The experts emphasized its importance in improving preoperative planning and surgical accuracy, which play an essential role in cancer care.
BALCO Medical Centre
BALCO Medical Centre
“This innovative approach revolutionizes the way we perform complex surgeries such as pancreatic cancer resections,” said Dr. Shailesh V. Shrikhande, Head of Cancer Surgery and Deputy Director of Tata Memorial Hospital, Mumbai. He demonstrated Pancreato-duodenectomy or Whipple procedure widely regarded as perhaps the most complex of operations. He further added, “The complexity of pancreatic surgery, given the intricate anatomy, makes HoloLens technology crucial for minimizing complications and improving patient outcomes. With the use of 3D holographic imaging, we can teach young pancreatic surgeons, prepare them better for the difficult and steep learning curve and this will ultimately bring advanced cancer care closer to patients, reducing the need for them to travel long distances for treatment.”
BALCO Medical Centre
Professor Manish Bhandare, Gastrointestinal and Hepato-Pancreato-Biliary Surgeon, Tata Memorial Hospital, Mumbai, operated on a gastric cancer case and highlighted the importance of live surgical demonstrations: “These sessions create a platform for surgeons across the country to learn cutting-edge developments in cancer management. Sharing real-time insights improves our collective ability to deliver advanced care to patients.”
Dr. Shravan Nadkarni, Consultant Surgical Oncologist at BALCO Medical Centre, emphasized the potential of augmented reality in transforming surgical outcomes in India. “This is one of the first instances of HoloLens 2 being used in oncological surgery in this part of the world. It allows us to evaluate tumour margins and vascular structures with extraordinary accuracy, leading to safer surgeries and better patient outcomes.”
“The technology has been extensively used in the West and is now beginning to make its mark in India. By integrating augmented reality with surgical techniques, surgeons can minimize complications and enhance surgical precision, promising better healthcare for patients in regions like Chhattisgarh”, commented Dr. Mou Roy, Director, Surgical and Clinical Oncology at BALCO Medical Centre.
Dr. Bhawna Sirohi, the Medical Director of BALCO Medical Centre, expressed her enthusiasm at the successful launch of the conclave: “Having such a group of surgeons and oncologists of international stature visit BMC is a significant step toward improving cancer care in this region. We are committed to delivering affordable, high-quality treatment options for the population, and this event is a milestone in that journey.”