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The devotee sacrificed himself देवी भक्त ने दे दी अपनी ही बली, गला काटकर चढ़ाया माता के चरणों मे

The devotee sacrificed himself
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रायपुर: The devotee sacrificed himself शारदीय नवरात्रि पर्व में एक अधेड़ ने अपने घर के जोत जंवारा में खुद का गला काट कर देवी को चढ़ा दिया। जब परिजनों ने देखा तो इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं मामले को जांच में लिया है।यह खबर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसींवा थाना क्षेत्र के ग्राम निनवा से सामने आई हैं।

The devotee sacrificed himself

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बता दें कि ग्राम निनवा में भुनेश्वर यादव 55 वर्ष घर पर देवी ज्वारा स्थापित कर पूजा पाठ कर आज सुबह करीब 10 बजे अपने गला काट कर सिर की बलि चढ़ा दिया। इस घटना से आसपास इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना पर मौके में पुलिस की टीम पहुंच कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बताया जाता है कि घटना के वक्त घर पर कोई नहीं था। बच्चे स्कूल व पत्नी काम पर गई हुई थी। बच्चे स्कूल से आए तब लोगों को घटना की जानकारी हुई। इस घटना से गांव में दहशत का माहौल है।

Politics and Ram Rahim राम रहीम के आगे साष्टांग राजनीति…!

Politics and Ram Rahim
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सुरेश चंद रोहरा की कलम से कोरबा/(ब्लैकआउट न्यूज़) Politics and Ram Rahim हरियाणा की राजनीति में जेल में बंद आरोपी और कैद की सजा भुगत रहे कथित ‘बाबा’ राम रहीम के सामने एक बार फिर राजनीति ने हाथ जोड़ लिया है. और सर झुका कर बार-बार साष्टांग करते दिखाई दे रही है. यह तो एक उदाहरण मात्र है- हमारे देश में धार्मिक पाखंड के आगे नेता सत्ता पाने के लिए लंबे समय से साष्टांग करते रहे हैं.

Politics and Ram Rahim

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दरअसल, इसका कारण हरियाणा के नौ जिलों के करीब तीस सीटों पर लाखों की संख्या में उनके ‘भगत’ हैं. इन्हीं की वोट की ताकत के आगे बाबा विभिन्न चुनावों में उलटफेर की कोशिश करते रहे हैं इसमें कभी पास हो जाते हैं और कभी फेल…! जेल जाने के बाद उनके जादू में कमी जरूर आई है, लेकिन बाहर आते ही भक्त और नेता चरण वंदना शुरू कर देते हैं. मतदान से पहले राम रहीम का फिर पैरोल पर सशर्त बाहर आना यह बताता है कि नेताओं का अस्तित्व किस तरह कमजोर होता जा रहा है लोगों का भरोसा उठ चुका है और उन्हें ऐसे अपराधियों की आवश्यकता है जो उन्हें कुर्सी तक पहुंचाएं .

Politics and Ram Rahim

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यह चर्चा छिड़ गई है कि बाबा राम रहीम इस बार कितना चुनाव में कितना असर डालेंगे. आइए आपको बताते हैं पैरोल पर रिहाई के बाद राम रहीम की क्या स्थिति है. राम रहीम मुस्कुराते हुए सुबह सुबह भारी सुरक्षा के बीच रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गए हैं . इधर चुनाव आयोग ने सशर्त उन्हें बीस दिनों की पेरोल दी है. निर्देश है – वे न तो हरियाणा में रहेंगे और न ही चुनाव प्रचार करेंगे. मगर इसके बावजूद नेताओं को उनकी आवश्यकता महसूस हो रही है ऐसा लग रहा है कि उनके भक्त उन्हें वोट देंगे.

Politics and Ram Rahim

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दरअसल, ऐसा अनेक बार हो चुका है. राम रहीम के नाम यह रिकॉर्ड है की जेल में रहते हुए बार-बार बाहर आते रहे हैं और उसका एक ही सबब है वह है सत्ता की मदद करना. अगर देखें तो पाएंगे अब तक कथित ‘बाबा’ राम रहीम करीब दो सौ पचहत्तर दिन पैरोल या फरलो पर बाहर रह चुका है. यह कैसा संयोग है कि वह प्रायः उन्हीं दिनों जेल से बाहर आता है, जब कहीं न कहीं चुनाव चल रहे होते हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि देश की उच्चतम न्यायालय को इस पर स्वयं संज्ञान लेकर इसकी जांच करानी चाहिए और नरेंद्र मोदी की सीबीआई को भी इसे संज्ञान में लेना चाहिए.

 

याद रहे करीब महीना भर पहले ही पैरोल पर रह कर राम रहीम जेल गया था.> पूछा जा रहा है कि एक तरफ संगीन मामलों में सजायाफ्ता कैदी को पैरोल मिल जाता है, वहीं बहुत सारे आरोपियों को जमानत तक नहीं मिल पाती.बहुत सारे कैदियों को नितांत आकस्मिक स्थितियों में भी पैरोल नहीं मिलती है.

वस्तुत : नेताओं को यह जानकारी है कि राम रहीम का हरियाणा के कुछ जिलों में खासा प्रभाव है. इस लिए अनुयायियों को राजनीतिक संदेश देने उसे बाहर लाया आता है. बता दें कि इससे पहले वह हरियाणा नगर निकाय चुनाव के समय तीस दिन की पैरोल पर बाहर आया था. आदमपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले उसे चालीस दिन की पैरोल मिली थी. हरियाणा पंचायत चुनाव से पहले भी उसे पैरोल मिली थी. राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले उसे उनतीस दिन की फरलो दी गई थी. कुल मिलाकर जब तक देश के सबसे बड़ी अदालत का डंडा नहीं चलेगा यह प्रहसन जारी रहेगा.

हरियाणा में लगभग बीस फीसद दलित मतदाता हैं. इसे अपने पक्ष में लेने के लिए बाबा जैसे अपराधी को भी जेल से बाहर लाकर के नेताओं ने दिखा दिया है कि वे सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार है.

कहते हैं ना की दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है, हरियाणा में भी राजनीति और नेता यही कर रहे हैं, राम रहीम हर बार कोशिश करते हैं कि उनका प्रभाव दिखे, वर्ष 2019 के में चुनाव में सिरसा (डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय) में भी भाजपा जीत नहीं पाई. इसी तरह 2012 में कैप्टन अमरिंदर की डूबती नैय्या भी बाबा नहीं बचा पाए थे. जबकि बाबा का आशीर्वाद लेने कैप्टन सपत्नीक सिरसा ना पहुंचे थे. इतना ही नहीं डबवाली सीट पर डेरा सच्चा सौदा ने खुलकर इनेलो का विरोध किया था, पर इनेलो प्रत्याशी जीत गए. 2009 में अजय चौटाला भी डेरा के विरोध के बावजूद इस सीट से जीत गए थे.

 

कुल मिलाकर राम रहीम का जादू कभी चलता है कभी नहीं चलता मगर नेता उनका आशीर्वाद लेने के लिए उनके अपराधी चेहरे को भूल जाते हैं और यह बताते हैं कि उनका जनता से सरोकार हो या फिर नहीं हो, वे राम बाबा को सर पर बैठने के लिए तैयार है.

Singer Jassi exposed Kangana पंजाब के खिलाफ कँगना के बयान पर पंजाबी सिंगर जसबीर जस्सी का पोल खोल बयान, जाने क्या कहा जस्सी ने

Singer Jassi exposed Kangana 
Singer Jassi exposed Kangana 

मुंबई:- Singer Jassi exposed Kangana दिल ले गई कुड़ी, लौंग दा लश्कारा जैसे चार्टबस्टर गानों के लिए जाने जाने वाले पंजाबी सिंगर जसबीर जस्सी ने एक्ट्रेस-भाजपा सांसद कंगना रनौत को पंजाब को बदनाम करने के खिलाफ चेतावनी दी और धमकी दी कि अगर उन्होंने उनके राज्य के बारे में कमेंट करना जारी रखा तो वे उन्हें एक्सपोज कर देंगे. आइए जानते हैं क्या बोले जसबीर जस्सी.

Singer Jassi exposed Kangana कंगना ने पंजाब पर क्या बोला

Singer Jassi exposed Kangana 
Singer Jassi exposed Kangana

हाल ही में हिमाचल प्रदेश में एक रैली के दौरान कंगना ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था- जहां पड़ोसी राज्य पंजाब ड्रग्स से ग्रस्त है और राज्य के युवा शराब के आदी हैं, वहीं हिमाचल इसके बिल्कुल विपरीत है. उन्होंने हिमाचल के युवाओं से पंजाब के लोगों से प्रभावित न होने का भी आग्रह किया. जसबीर जस्सी को कंगना की यह बात पंसद नहीं आई और उन्होंने कंगना को धमकी दे डाली.

Singer Jassi exposed Kangana जसबीर ने कंगना को दी धमकी

Singer Jassi exposed Kangana 
Singer Jassi exposed Kangana

कंगना की पंजाब पर की गई टिप्पणी जसबीर को पसंद नहीं आई और उन्होंने सरेआम एक्ट्रेस की आलोचना की और पंजाब के खिलाफ कुछ भी बुरा ना बोलने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा- मुझे अब यह कहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि वह पंजाब को बहुत अधिक निशाना बना रही है. वह एक बार दिल्ली में मेरी कार में मेरे और मेरी दोस्त के साथ नशे में धुत हो गई थी और उसका खुद पर कोई कंट्रोल नहीं था. उसने जितनी मात्रा में शराब और नशीली दवाओं का सेवन किया है, मुझे नहीं लगता कि किसी और ने ऐसा किया होगा. अगर उसने पंजाब के बारे में बात करना बंद नहीं किया तो मैं उसकी सारी कहानियां उजागर कर दूंगा.

Singer Jassi exposed Kangana 
Singer Jassi exposed Kangana

उन्होंने कहा कि हालांकि वह सार्वजनिक रूप से किसी महिला का नाम नहीं लेना चाहते और उसे शर्मिंदा नहीं करना चाहते, लेकिन पंजाब के खिलाफ उनकी टिप्पणियां और तंज अब नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं जिन पर कार्रवाई होना जरुरी है.

12 वीं की छात्रा खून से लथपथ बेहोशी की हालत मे मिली पुलिस जाँच मे जुटी

कोरबा।(ब्लैकआउट न्यूज़)जिले के हरदी बाजार थाना क्षेत्र में एक 12वीं की छात्रा खून से लथपथ बेहोशी की हालत में मिली है। छात्रा को तुरंत जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि छात्रा ने पानी की टंकी से छलांग लगाई हो।

 

जानकारी के अनुसार, छात्रा शुक्रवार को सुबह 10 बजे रोज की तरह अपने गांव के नजदीकी स्कूल में पढ़ाई करने गई थी, लेकिन स्कूल से छुट्टी के बाद वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने आस-पास के लोगों से पता किया, तब उन्हें गांव के नजदीक पानी की टंकी के नीचे छात्रा बेहोश पड़ी मिली। पुलिस मामले की जांच कर रही है और छात्रा के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

 

CG Police Promotion Breaking पुलिस विभाग मे बड़े पैमाने पर हुआ प्रमोशन, देखें सूची

रायपुर/CG Police Promotion छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पड़े पैमाने पर प्रमोशन किया गया है। 18 डीएसपी व सहायक सेनानियों को एडिशनल एसपी के पद पर पदोन्नति दी गई है।

CG Police Promotion

CG Police Promotion Breaking
CG Police Promotion Breaking
CG Police Promotion Breaking
CG Police Promotion Breaking
CG Police Promotion Breaking
CG Police Promotion Breaking

KORBA BIG BREAKING 4 साल की मासूम के प्राइवेट पार्ट से कोरबा मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों ने निकाला 3 जोंक

KORBA BIG BREAKING 
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कोरबा/(ब्लैकआउट न्यूज़)KORBA BIG BREAKING तालाब में नहाने के दौरान 4 साल की मासूम बच्ची के गुप्तांग में जोंक घुस गए. घर में बच्चे की चीख पुकार के बाद परिजनों ने उसे कटघोरा स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया. बच्ची की हालत बिगड़ने पर जिला मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने गुप्तांग से 3 जोंक निकाले. बच्चे का इलाज जारी है. यह घटना बांगो थाना क्षेत्र के नवापारा की है.

KORBA BIG BREAKING

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Korba medical college

जानकारी के मुताबिक, चार साल की मासूम बच्ची अपनी बड़ी दीदी के साथ घर के पास तालाब में नहाने गई थी. इस दौरान गुप्तांग में जोक घुस गया. नहाकर घर पहुंचने के बाद मासूम चीखपुकार मचाने लगी, फिर उसे कटघोरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां हालात बिगड़ने पर जिला मेडिकल काॅलेज रेफर किया गया. डॉक्टरों की टीम ने काफी मशकत के बाद एक के बाद एक तीन जोंक को बाहर निकाला. मासूम की जिला मेडिकल काॅलेज में इलाज चल रहा है.

KORBA BIG BREAKING जोंक क्या है

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जोंक एनिलिडा संघ का जन्तु है। यह उभयलिंगी होता है। काले कलर का लम्बे आकार मे होता है यह समान्यतः स्वच्छ जलाशयों में मिलता है। इसका शरीर लम्बा, चपटा एवं खंडों में विभक्त रहता है। यह वाह्य परजीवी है। इसके शरीर के दोनों सिरों पर पोषक से चिपकने के लिए चूषक मिलते हैं।

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Jonk

इसके अगले चूषक के मध्य में तिकोना मुखछिद्र होता है। एक दशक(2009-2019) में जोंक से इलाज 13 गुना तक मंहगा हुआ। आयुर्वेद में जलोकावारन पद्धति में जोंक से इलाज किया जाता रहा हैं।

Balco community health बालको ने राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य को दिया बढ़ावा

Balco community health 
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बालकोनगर, 04 अक्टूबर, 2024।balco community health वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने राष्ट्रीय पोषण माह 2024 के अवसर पर समुदाय में बच्चों, किशोरों और माताओं के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किये। इस साल की थीम ‘सभी के लिए पौष्टिक आहार’ के अनुरूप संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार के महत्व को सुनिश्चित करते हुए पौष्टिक विकल्प को बढ़ावा दिया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सामुदायिक भागीदारों के सहयोग से पोषण जागरूकता अभियान को संचालित किया गया।

Balco community health 

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पोषण माह अभियान नंद घर, आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित था। विशेषज्ञों के नेतृत्व में पोषण जागरूकता सत्र और स्थानीय सामग्री का उपयोग करके स्वस्थ खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए सामुदायिक रेसिपी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रेसिपी प्रशिक्षण में माताओं ने सरकार द्वारा प्रदान किए गए टेक होम राशन (टीएचआर) का उपयोग करके पौष्टिक भोजन तैयार करना सीखा। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविर में कुपोषण और एनीमिया को रोकने के लिए माताओं एवं बच्चों की जांच की गई।

 

समय पर एनीमिया लक्षण की जानकारी से उचित उपचार संभव हुआ। सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए ‘पोषण की बातें, पुरुषों के साथ’ नामक पहल की शुरूआत की गई। इसमें घर के पुरुषों को बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य तथा पोषण महत्व पर जानकारी प्रदान की गई।

Balco community health

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समापन समारोह में सामूहिक प्रयास का जश्न मनाया गया। समुदाय में रोल मॉडल के रूप में काम कर रही माताओं को “चैंपियन माता” के रूप में सम्मानित किया गया। गर्भवती दम्पति के विशेष प्रशिक्षण सत्र में माता-पिता दोनों को अपने बच्चे के समग्र विकास में समान रूप से योगदान देने तथा गर्भावस्था और बचपन के दौरान आपसी सहयोग पर मार्गदर्शन दी गई। कंपनी ने अपने प्रयासों की प्रतिबद्धता को दिखाते हुए ‘पोषण टाक्स’ वीडियो की एक सीरीज शुरू की, जिसमें पोषण संबंधी प्रमुख विषयों को दिखाया जाएगा।

अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से नंद घर में मिलेट शेक वितरण अभियान का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही एक मासिक ‘पोषण पत्रिका’ का शुभारंभ किया गया जिसमें चैंपियन माताओं की कहानियाँ और व्यावहारिक, पौष्टिक व्यंजन की जानकारी दी गई।

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बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि बालको का दृष्टिकोण एल्यूमिनियम उत्पादन से आगे सामुदायिक भलाई तक फैला हुआ है, कंपनी सभी के लिए उज्जवल एवं स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा आगे बढ़े और हर मां को वह देखभाल मिले जिसकी वह हकदार है। पोषण माह के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का जश्न मनाना, स्वस्थ समुदायों के पोषण के प्रति हमारे प्रयासों को दर्शाता है। बालको प्रचालन के आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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महिला एवं बाल विकास विभाग, रायपुर के उप निदेशक श्री दिलदार सिंह मरावी ने सामुदायिक स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने में सरकार और उद्योग के बीच परस्पर सहयोग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में हम महिलाओं और बच्चों के पोषण स्वास्थ्य और सशक्तिकरण में सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि बालको अपने परियोजना के माध्यम से ऐसे पहल को आगे बढ़ा रही हैं, जो पोषण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक ब्लैकआउट के पूर्व संपादक प्रदीप महतो का दुखद निधन मेडिकल कॉलेज मे होगा देहदान

कोरबा/ (ब्लैकआउट न्यूज़ )कोरबा जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक ब्लैकआउट की पूर्व संपादक प्रदीप महतो का आज सुबह 5बजे एक निजी अस्पताल मे इलाज के दौरान निधन हो गया उनके निधन की खबर से पत्रकार जगत मे शोक व्याप्त है.

प्रदीप महतो कोरबा जिले के बरपाली ग्राम रहकर पत्रकारिता जगत मे अपनी अलग पहचान रखते थे वें बरपाली क्षेत्र के पत्रकारों को एक कड़ी मे पिरोकार रखे थे बरपाली मे प्रेस क्लब भवन बनवाने मे उनकी अहम् भूमिका रही थी वें पत्रकारिता के साथ साथ बरपाली मे एक स्कूल का संचालन भी करते थे.

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप महतो ने अपने देह दान की घोषणा की थी उनकी घोषणानुसार आज परिजन कोरबा मेडिकल कालेज को उनका पार्थिव शरीर सौपने की तैयारी कर रहे है 

 

90 के दशक मे दैनिक ब्लैकआउट के संपादक के तौर पर लम्बे समय से कार्य जर अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया.उनके निधन की खबर से क्षेत्र के पत्रकारों मे शोक व्याप्त है.

ब्लैकआउट न्यूज़ उनको अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है

 

Sai baba breaking साई बाबा काशी से निष्कासित

Sai baba breaking 
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(राकेश अचल की कलम से ) Sai baba breaking रोजाना लिखकर दिहाड़ी कमाने वाले हम जैसे लोग आजकल चकरघिन्नी बने हुए हैं। लिखने के लिए इतने मुद्दे और विषय कुकुरमुत्तों की तरह उग आते हैं। तय कर पाना कठिन हो जाता है कि कौन से मुद्दे पर लिखा जाये और कौन सा छोड़ दिया जाये? आज भी सामने चाँद मियां हैं, गांधी बब्बा हैं, सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या है और नितिन गडकरी की विषकन्या है।

Sai baba breaking 

Sai baba breaking 
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बात चाँद मियाँ से शुरू करते है। ये चाँद मियां अपने चिर-परिचित साईं बाबा हैं। काशी के ब्राम्हणों ने अपने शहर के मंदिरों से चाँद मियां की 14 प्रतिमाएं ऐसे हटा दीं, जैसे वे कोई आतंकवादी हों। साईं बाबा का नाम चाँद मियां हो या अब्दुल इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इस बात से पड़ रहा है कि समाज में नफरत मनुष्यों से होती हुई अब बुतों पर आ गयी है। साईं बाबा उर्फ़ चाँद मियां के खिलाफ नफरत का श्रीगणेश दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने किया था। काशी के ब्राम्हणों की करतूत देखकर स्वामी जी की आत्मा गदगद हो रही होगी। स्वाभाविक है ऐसा होना।

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हमारे देश में किसी चाँद मियां को पूजने की गुंजाईश नहीं है। काशी के पंडितों के बूते से बाहर है, अन्यथा वे चाँद मियां के बुतों के साथ ही अजमेर जाकर ख्वाजा साहब की मजार भी उखाड़ फेंकते, क्योंकि वे भी मियां हैं। काशी के ब्राम्हण दरअसल साईं बाबा की पूजा को प्रेत पूजा मानकर इसको सनातन विरोधी बता रहे हैं, जैसे सनातनी प्रेत,भूत,मशान की पूजा करते ही नहीं हैं। वे पूरे पितृपक्ष में क्या करते हैं, वे खुद नहीं जानते। दरअसल काशी के ब्राम्हण न चाँद का अर्थ जानते हैं और न मियाँ का। उनके लिए तो ये दोनों म्लेच्छ हैं, विजातीय हैं, विधर्मी हैं। उन्हें मंदिरों में पूजने की तो छोड़िये, इस मुल्क में भी रहने की इजाजत नहीं दी जाना चाहिए।

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कोई चार दशक पहले मैंने भी साईं बाबा के मंदिर जाकर शायद पाप किया था। मुझे उस समय किसी ब्राम्हण या शंकराचार्य ने बताया ही नहीं कि साईं बाबा चाँद मियां हैं, इसलिए उनके दर्शन करने से पाप लगता है। शिरडी के साईं मंदिर में जाने वालों को ये काशी वाले कैसे रोकेंगे, मुझे पता नहीं, क्योंकि वहां आज भी हर दिन हजारों लोग जाते हैं। काशी वालों के सांसद आजकल देश के प्रधानमंत्री भी हैं, उन्हें चाहिए कि वे देश में जहां-जहां चाँद मियां के मंदिर हैं, उनके ऊपर बुलडोजर चलवा दें। शिरडी में तो ये काम और आसान है, क्योंकि वहां उनकी अपनी डबल इंजिन की सरकार है। इसके लिए संसद में कोई विधेयक लाने या अध्यादेश जारी करने की भी जरूरत नहीं है।

इस देश की खासियत ये है कि यहां के ब्राम्हणों को अपना मूल काम करने की तो फुरसत नहीं है और ऊल-जलूल काम करने कि लिए वे हमेशा तैयार रहते हैं। मैं अभी तक ब्राम्हणों को विद्वत परिषद का सम्माननीय सदस्य मानता था, लेकिन मुझे अब लगता है कि काशी के ब्राम्हण मंडन मिश्र की परम्परा के ब्राम्हण नहीं है। वे कूप मंडूक हैं, उन्हें भी सियासत करना आ गया है। वे भी सरकार की हिन्दू राष्ट्र की कल्पना में डुबकियां लगा रहे हैं।

Sai baba breaking 

 

जन्मना मैं भी एक ब्राम्हण हूँ, लेकिन मुझे ईश्वर की कृपा से न ऐसे सपने आते हैं और न मुझे किसी की पूजा-अर्चना से कोई आपत्ति है। जिसे जो पसंद है, वो उसे पूजे। मंदिर बनाये, मस्जिद बनाये, गुरूद्वारे बनाये , गिरजाघर बनाये। चाहे तो अपने नेताओं की प्रतिमाएं बनाकर उन्हें चाँद मियां के स्थान पर लगवा कर प्राण-प्रतिष्ठित कर दे।

मुझे लगता है कि काशी में जो हुआ है, उससे एक बात तो प्रमाणित हो गयी है कि नितिन गडकरी की विषकन्या अपना काम करने में कामयाबी के बहुत नजदीक है। विषकन्या अर्थात सत्ता ने समाज में इतना जहर घोल दिया है कि वो अब आदमियों कि साथ-साथ बुतों से भी अदावत मानने लगा है। मेरा आज भी मानना है कि काशी के ब्राम्हण हों या उनके समर्थक, हिन्दू धर्म में आयी संकीर्णता की वजह से धर्म की दरकती ईंटों को देखकर आतंकित हैं, उन्हें अपनी रोजी-रोटी पर खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है। ये खतरा है या नहीं, अलग बात है, लेकिन उन्हें ये खतरा महसूस कराया जा रहा है फर्जी आंकड़े दिखाकर।

काशी के ब्राम्हण नहीं जानते कि चाँद मियां की बिरादरी में बुतपरस्ती की मुमानियत है। उनके यहां पांच वक्त की आरती नहीं, नमाज होती है, ये तो हम हिन्दुओं में ही मुमकिन है। चाँद मियां के मंदिर और बुत किसी मुसलमान ने नहीं बनवाये, हिन्दुओं ने बनवाये है। वहाँ पांच वक्त की आरती चाँद मियां की बिरादरी वालों ने शुरू नहीं की, बल्कि हिन्दुओं ने शुरू की है। ऐसे लोगों को देशद्रोही, धर्मविरोधी करार देकर देश के बाहर कर देना चाहिए।

दरअसल ये मंगल पर जाने का नहीं, अपितु गाय और गोबर की और लौटने का युग है। यहां गाय को राजमाता बनाने की होड़ चल रही है और इसके पीछे वे ही पावन हाथ हैं, जो गोमांस का निर्यात करते हैं। लेकिन काशी के पंडितों का जोर इनके ऊपर नहीं चलता। काशी वाले चाँद मियां की प्रतिमाएं तो हटा और हटवा सकते हैं, लेकिन गोमांस का भक्षण करने वाले किसी केंद्रीय मंत्री को मंत्रिमंडल से नहीं निकलवा सकते।

आज जब मै ये सब लिख रहा हूँ, तब मुझे महात्मा गाँधी की याद आती है। आज उनका जन्मदिन है। अच्छा हुआ कि वे आज नहीं हैं, अन्यथा काशी वालों की करतूत उन्हें भी बहुत परेशान करती। वे परेशान होकर आज भी ‘सबको सन्मति दे भगवान’ का भजन गाते दिखाई देते। चाँद मियां के बुतों के दुश्मनों के लिए तो बाबा गाँधी के बुत भी कांटे की तरह चुभते हैं। लेकिन सियासी मजबूरी है कि उन्हें देश में भी और विदेश में भी गांधी के बुतों के आगे बुत बनकर अपना शीश झुकाना पड़ता है। काशी ब्रांड पंडितों का जोर नहीं है, अन्यथा वे गाँधी के बुतों की जगह ‘क्रांतिवीरों’ के बुत स्थापित कर चुके होते।

बहरहाल आज पितृमोक्ष अमावस्या है। आज अपने पूर्वजों के तर्पण का आखरी दिन है। काशी के पंडित अपने पूर्वजों को कैसे विदा करते हैं, ये आप सभी ने देख लिया है।

काशी के पंडितों को पहले मियाँ शब्द के अर्थ को जान लेना चाहिये। चाँद मियां के साथ जो मियां शब्द बाबस्ता है, वो फ़ारसी का शब्द है। संस्कृत में भी होता, तो भी उसका अर्थ स्त्री का पति, स्वामी, मालिक ही होता। मियां का अर्थ अल्लाह, मुर्शिद, पीर , संगीतज्ञ, मिरासी, मूर्ख, दीवाना, बावला मीरान अर्थात सरदार, आक़ा, मालिक, हाकिम, सरदार, बुज़ुर्ग, वाली वारिस, उस्ताद, पढ़ाने वाला, मुल्ला ही होता ।

वैसे पहाड़ी राजपूत, राजाओं के ख़ानदानी लोग, ठाकुर, शहज़ादे, शाही ख़ानदान के लोग भी एक-दूसरे के लिए जाने-अनजाने मियां शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं। हम तो उन शाइरों को जानते हैं, जिनके नाम के आगे मियां ऐसे जुड़ा होता है, जैसे किसी शहजादे की टोपी में सुर्खाब का पर। मियां नासिख़, मियां मुसहफ़ी, मियां जुराअत, मियां इशक़ का नाम तो आपने भी सुना ही होगा। हमारे शिवदयाल अष्ठाना तो हमें हमेशा मियां ही कहकर पुकारते थे। वे लखनऊ के थे। वे भी आज हंस रहें होंगे कहीं स्वर्ग में ये सब देखकर।

(लेखक मशहूर कवि, उपन्यासकार और पत्रकार हैं। कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित हैं।)

यह आलेख लेखक की अपनी अभिव्यक्ति है आलेख को यथावत प्रकाशित किया जा रहा है इससे ब्लैकआउट न्यूज़ का कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है.

New update on 2000 rupee note क्या आपके पास अभी भी 2000 के गुलाबी नोट हैं तो जान लीजिये इसे कहाँ बदला जा सकता है

New update on 2000 rupee note
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नई दिल्ली:New update on 2000 rupee note देश में 2000 रुपये के गुलाबी नोटों पर प्रतिबंध लगे डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. लेकिन लोगों के पास अभी भी 7000 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के ये नोट हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर के पहले दिन इन नोटों पर बड़ा अपडेट देते हुए बताया कि प्रचलन से बाहर किए जाने के बाद से अब तक कुल 2000 रुपये के 98 फीसदी नोट वापस आ चुके हैं.

New update on 2000 rupee note

New update on 2000 rupee note
New update on 2000 rupee note

.2 फीसदी नोट अभी भी आने का इंतजारमंगलवार यानी 1 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय बैंक RBI ने प्रचलन से बाहर किए गए 2000 रुपये के नोटों की वापसी का डेटा साझा करते हुए बताया कि इस मूल्य के 98 फीसदी नोट बैंकों में वापस आ चुके हैं. पीटीआई के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने बताया है कि लोगों के पास अभी भी 7,117 करोड़ रुपये के गुलाबी नोट हैं. इन नोटों के प्रचलन से बाहर किए जाने के बाद शुरुआती दौर में इनकी वापसी तेजी से हुई. लेकिन अब ये बेहद धीमी गति से वापस आ रहे हैं

2000 के नोट कब और क्यों बंद किए गए?स्वच्छ नोट नीति के तहत आरबीआई ने 19 मई 2023 को देश में प्रचलन में सबसे अधिक मूल्य के इस 2000 रुपये के नोट को वापस लेने की घोषणा की थी. इसके बाद केंद्रीय बैंक ने इन नोटों को स्थानीय बैंकों और 19 आरबीआई क्षेत्रीय कार्यालयों में वापस करने और बदलने के लिए 23 मई से 30 सितंबर 2023 तक का समय दिया था. हालांकि, इसके बाद यह समयसीमा लगातार बढ़ाई गई.अभी भी जमा कर सकते हैं 2000 के नोटआपको बता दें कि इन नोटों को अभी भी बदला जा सकता है.

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हालांकि स्थानीय बैंकों में यह काम नहीं होगा. केंद्रीय बैंक पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि प्रचलन से वापस लिए गए इन गुलाबी नोटों को अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम में स्थित 19 आरबीआई कार्यालयों के अलावा इंडिया पोस्ट के माध्यम से अपने किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर जमा किया जा सकता है.