सक्ति /ब्लैकआउट न्यूज़ : Vedanta Accident Update : छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले में वेदांता पावर प्लांट में धमाके के बाद 20 लोगों की मौत हो गई कई गंभीर रूप से घायल है सरकार ने एवं स्वयं कंपनी मुआवजे का ऐलान किया है वही कल ही छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम योग आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन वेदांता प्लांट पहुंचकर मौके का जायजा लिया एवं FIR करने का आदेश दे दिया जिसमें पुलिस ने वेदांता समूह के चेयरमेन अनिल अग्रवाल के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है.
Vedanta Accident Update

इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और यह बात जग जाहिर हैं की छत्तीसगढ़ में गौतम अडानी अपना पैर पसार चुके हैं गौतम अडानी का नाम आते ही यह बात स्पष्ट हो जाती है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीकी मित्र गौतम अडानी के खिलाफ राज्य सरकार जा नहीं सकती उसी के उलट सक्ति के पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 20 लोगों की मौत एवं कई लोगों के गंभीर होने पर अनिल अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है.
क्या कहता है कानून Vedanta Accident Update

इस संदर्भ में कानून के जानकर यह कहते हैं कि पावर प्लांट में हादसे की जिम्मेदारी हमेशा डायरेक्टर पर नहीं होती, बल्कि यह केस-टू-केस आधार पर निर्भर करती है। भारत में पावर प्लांट (थर्मल, हाइड्रो आदि) फैक्ट्रीज एक्ट 1948, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 और भारतीय दंड संहिता (या नया BNS) जैसे कानूनों के तहत चलते हैं।
दुर्घटना की जिम्मेदारी पर न्यायलय का कथन Vedanta Accident Update

1. Occupier की जिम्मेदारी (Factories Act 1948)
Occupier वह व्यक्ति होता है जिसके पास फैक्ट्री (पावर प्लांट) के मामलों पर ultimate control होता है।
कंपनी के मामले में कोई एक डायरेक्टर को occupier माना जाता है (Section 2(n))।Occupier की मुख्य ड्यूटी
स्वास्थ्य, सुरक्षा और वेलफेयर सुनिश्चित करना (Section 7A) सुरक्षित प्लांट, मशीनरी, रखरखाव और ट्रेनिंग प्रदान करना।हादसे होने पर लापरवाही साबित होने पर occupier पर दंडनीय कार्रवाई हो सकती है।
अगर हादसा लापरवाही (negligence) से हुआ है, तो occupier (या नामित डायरेक्टर) जिम्मेदार हो सकता है।लेकिन यहाँ यह बताना लाजमी होगा की अनिल अग्रवाल वेदांता ग्रुपके डायरेक्टर हैं ना की एक पावर प्लांट के और ना ही अनिल अग्रवाल नामित व्यक्ति हैं फिर उनके खिलाफ मामला दर्ज करना एक साजिश का हिस्सा लगता हैं.
2. क्रिमिनल जिम्मेदारी (IPC/BNS के तहत)Section 304A (गैर इरादतन हत्या by negligence) या समान धाराएं लागू हो सकती हैं।सभी डायरेक्टर पर ऑटोमैटिक जिम्मेदारी नहीं होती। केवल वह व्यक्ति जिम्मेदार होता है:जो day-to-day operations में शामिल हो।जबकि वेदांता के चेयरमेन अनिल अग्रवाल day-to-day operations मे शामिल ही नहीं हैं जिसकी active role या direct negligence साबित हो।
Vicarious liability (पद के कारण जिम्मेदारी) आमतौर पर क्रिमिनल केस में लागू नहीं होती, जब तक स्पष्ट कानून न हो। सिर्फ पद (Chairman/MD) होने से कोई डायरेक्टर आरोपी नहीं बन सकता।न्यायलय (जैसे सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट) कहते हैं कि specific allegation और सबूत जरूरी हैं।
4. प्लांट के संचालन मे क्या हैं दूसरा कानून Vedanta Accident Update
Electricity Act 2003 (Section 53, 161): सेफ्टी नियमों का पालन न करने पर इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जांच कर सकता है, रिपोर्टिंग जरूरी होती हैं Nuclear पावर प्लांट के लिए अलग Civil Liability for Nuclear Damage Act है, जहां operator (ज्यादातर NPCIL) मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है।कंपनी के रूप में भी corporate liability हो सकती है (फाइन आदि)।
हर हादसे में हर डायरेक्टर पर जिम्मेदारी नहीं होती।
जिम्मेदारी तब होती है जब वह occupier नामित हो।
Direct involvement या negligence साबित हो (मेंटेनेंस, ट्रेनिंग, सेफ्टी प्रोटोकॉल में चूक)।
जांच एजेंसी/कोर्ट सबूत देखकर फैसला करती हैं ।
Vedanta Accident Update
आमतौर पर प्लांट मैनेजर, सेफ्टी ऑफिसर या ऑपरेशन हेड पर प्राथमिक जिम्मेदारी आती है। टॉप डायरेक्टर तभी फंसते हैं जब उनकी भूमिका साफ दिखे।
लाशों के ढेर मे सज रही हैं राजनितिक बिसात Vedanta Accident अपडेट
यहां यह बताना लाज भी होगा कि सक्ति के वेदांता पावर प्लांट में लाशों के ढेर में राजनीतिक बिसात सज रही है कांग्रेस जहां जांच समिति बनाकर घटना स्थल का निरीक्षण कर पत्रकार वार्ता आयोजित कर अपना निष्कर्ष को आम करने के बाद अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली है.
भारतीय जनता पार्टी इस दुर्घटना में 20 लोगों की मौत और सैकड़ो के घायल होने की सेज पर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने में लगी हुई है या यू कह लीजिए की वेदांता ग्रुप के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल को घेरने की तैयारी में लग गए इसी तरह के हादसे कई बार दूसरे प्लांट में भी हुए हैं जिसमें अडानी का पावर प्लांट भी शामिल है कभी ऐसा नहीं हुआ कि ऐसी दुर्घटना के नेपथ्य में कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया हो सक्ति में हुए हादसे में एक नई परंपरा की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी कर रही है जो आने वाले दिनों में अगर चलन में आते हैं तो निश्चित ही छत्तीसगढ़ में निवेशकों को यहां निवेश करने में काफी दिक्कतें आ सकती है निवेशक छत्तीसगढ़ आने में कटराने लगेंगे जिससे छत्तीसगढ़ के लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा.





