रायपुर। Raipur Breaking रविवार तड़के सरगुजा में हुई सड़क दुर्घटना में मृत चंगोराभाठा के चारों युवकों का आज महादेव घाट मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया ।इस दौरान पूरा इलाका गमगीन रहा। मृतकों को परिजनों को ढांढस बंधाने पूरे मोहल्ले वासी और कांग्रेस के नेता भी पहुंचे। बता दें कि सरगुजा जिले में तेज रफ्तार ट्रक ने NH-130 पर कार सवारों को टक्कर मार दी। हादसे में 4 दोस्तों की मौत हो गई। इनमें से एक रायपुर में जिम संचालक भी था। वहीं एक युवक गंभीर हालत में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के ICU में भर्ती है।
मामला उदयपुर थाना क्षेत्र के गुमगा का है। मिली जानकारी के मुताबिक सभी युवक रायपुर के रहने वाले थे। वह शनिवार शाम को घर से जगदलपुर घूमने जाना बताकर निकले थे, लेकिन अचानक मैनपाट जाने का प्लान बना लिए। अंबिकापुर पहुंचने से करीब 60 किलोमीटर पहले सुबह 5 बजे हादसे का शिकार हो गए। कार को कटर से काटकर शवों को बाहर निकाला गया था।
Special on the 75th anniversary of the Constitution
Special on the 75th anniversary of the Constitution 26 नवंबर को भारत के संविधान को अपनाने और लागू करने की 75वीं वर्षगांठ मनाते समय, बीआर अंबेडकर द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, ताकि संविधान को भारतीय समाज के लिए अधिक प्रासंगिक बनाया जा सके, जो लगातार सामाजिक और आर्थिक असमानताओं से ग्रस्त है।
संविधान सभा की विधायी मंशा के अनुरूप, वह एक धर्मनिरपेक्ष भारत के शक्तिशाली समर्थक थे, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदू राज को रोकना था, जिसके बारे में उन्होंने कहा था कि यह देश के लिए एक आपदा होगी।
मुसलमानों के खिलाफ युद्ध की अंबेडकर की चेतावनी Special on the 75th anniversary of the Constitution
Special on the 75th anniversary of the Constitution
यह अत्यंत निंदनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता, जो जनता के जनादेश के आधार पर सत्ता पर काबिज हैं और देश पर शासन कर रहे हैं, धर्म के नाम पर नफरत फैला रहे हैं तथा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के खिलाफ नफरत और कटुता फैला रहे हैं।
Special on the 75th anniversary of the Constitution
Special on the 75th anniversary of the Constitution
अगर अंबेडकर जीवित होते, तो वे मुसलमानों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को देखकर और साथ ही, खासकर भाजपा शासित राज्यों में, हिंदुत्ववादी नेताओं द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ भाषणों को देखकर, जिसमें मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार करने और उनके सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को छीनने का आह्वान किया जा रहा है, स्तब्ध रह जाते। ऐसी सभी दुखद घटनाएं, भाजपा से जुड़े उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों की ओर से विरोध की एक भी आवाज के बिना, हो रही हैं।
Special on the 75th anniversary of the Constitution
Special on the 75th anniversary of the Constitution
संविधान की 75वीं वर्षगांठ के जश्न के समय हो रही ऐसी घटनाएं, 17 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में अंबेडकर द्वारा दी गई चेतावनी की याद दिलाती है। उस समय कुछ लोग, जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर कटुता और द्वेष के साथ बात कर रहे थे, उससे ऐसा लग रहा था कि वे मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ रहे हैं।
अंबेडकर ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि “अगर कोई व्यक्ति हिंदू-मुस्लिम समस्या को बलपूर्वक हल करने की योजना बना रहा है, जो कि युद्ध के माध्यम से हल करने का दूसरा नाम है… ताकि मुसलमानों को अपने अधीन किया जा सके”, तो उन्हें डर था कि “[यह] देश उन पर लगातार विजय प्राप्त करने में लगा रहेगा”। इसलिए उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों से इसे समझदारी से इस्तेमाल करने का आग्रह किया। उनके ये शब्द आज भारत में गूंज रहे हैं, क्योंकि देश आज धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण की चपेट में है।
संभल मस्जिद पर हमला
संविधान की 75वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, उत्तर प्रदेश के संभल में मुसलमानों को भड़काने के लिए जहर उगला गया। उन्होंने न्यायालय के आदेश पर सर्वेक्षण की जा रही जामा मस्जिद के सामने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने का विरोध किया था। यह कई शताब्दियों पहले बनी एक मस्जिद है और इस्लामी तीर्थस्थल के रूप में इसकी स्थिति पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 द्वारा संरक्षित है। यह अधिनियम किसी भी पूजा स्थल के रूपांतरण को प्रतिबंधित करता है और किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को 15 अगस्त, 1947 की स्थिति में बनाए रखने का प्रावधान करता है। कथित तौर पर पुलिस की गोलीबारी में विरोध करने वाले मुसलमानों में से पांच की जान चली गई।
बुलडोजर न्याय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अधिकांश भाजपा शासित राज्यों में, कुछ अपराधों के आरोपी व्यक्तियों, विशेष रूप से मुसलमानों के घरों को ध्वस्त करने से न्यायिक विवेक इतना हिल गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान की 75वीं वर्षगांठ से ठीक 16 दिन पहले, 10 नवंबर, 2024 को अपने फैसले में, आरोपियों के घरों को ध्वस्त करके किए गए तथाकथित ‘बुलडोजर न्याय’ को सभ्य समाजों के लिए अस्वीकार्य बताया और इसे “कानूनविहीन, निर्मम स्थिति” कहा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि“राज्य प्राधिकारियों द्वारा किए गए बुलडोजर विध्वंस ने अदालतों के अधिकार को नष्ट कर दिया, क्योंकि इसने अनिवार्य रूप से एक आरोपी व्यक्ति के अपराध को निर्धारित करने और उन्हें दंडित करने के लिए एक न्यायिक भूमिका निभाई… इस तरह से, इसने शक्तियों के पृथक्करण को बदनाम किया।”
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बीआर गवई, जो फैसला सुनाने वाली पीठ का हिस्सा थे, ने कहा कि “बुलडोजर से मकान ढहाने की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय, नागरिकों के आश्रय के अधिकार का उल्लंघन है और आरोपी के परिवार को सामूहिक दंड दिया गया है।”
केवल अपराध के आरोपी व्यक्तियों के घरों को इस तरह से ध्वस्त करना उस संविधान को ध्वस्त करने के समान है, जो लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता का भंडार है।
ईसीआई का संस्थागत पतन
चुनाव कराने के मामले में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की निष्पक्षता और तटस्थता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। याद करें कि मोदी सरकार के नक्शेकदम पर चलने के आरोपी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने चुनावी बॉन्ड योजना (ईबीएस) के तहत राजनीतिक दलों को भारी मात्रा में दान देने वाले दानदाताओं की पहचान गुप्त रखने का समर्थन किया था, जो सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लंघन है, जिसमें ईबीएस को असंवैधानिक घोषित किया गया था।
सीईसी के इस तरह के आचरण से यह धारणा बनी है कि वे संवैधानिक रूप से निर्धारित स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हुए कार्यपालिका के सामने झुक रहे हैं, जिसे बनाए रखना उनका कर्तव्य है। सीईसी कुमार जिस तरह से व्यवहार कर रहे हैं, वह अंबेडकर की 16 जून, 1949 को संविधान सभा में व्यक्त की गई आशंकाओं को साबित करता है, कि किसी मूर्ख या दुष्ट को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त करने से रोकने के लिए संविधान में किसी प्रावधान के अभाव में, यह संभावना है कि ईसीआई कार्यपालिका के नियंत्रण में आ जाएगा।
दुखद बात यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो चुनाव आयुक्त कार्यपालिका के नियंत्रण में आ गए हैं। चुनाव आयोग की समझौतापूर्ण कार्यप्रणाली से इस तरह के संस्थागत पतन ने संविधान को अत्यधिक खतरे में डाल दिया है। नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों में भी यह बात सामने आई थी, जब जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि नियुक्तियां कार्यपालिका की मर्जी के अनुसार की जा रही हैं।
पीठ ने तब कहा था : “देश को चुनाव आयुक्तों के रूप में ऐसे व्यक्तियों की जरूरत है, जो आवश्यकता पड़ने पर प्रधानमंत्री से भी भिड़ने से पीछे न हटें, न कि एक कमजोर ‘हां में हां मिलाने वाले’ व्यक्ति की।”
संवैधानिक नैतिकता
यह दुखद है कि संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश का चुनाव आयोग सर्वोच्च न्यायालय द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण से बहुत दूर है। इसने अपनी पार्टी भाजपा को वोट देने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के बार-बार दिए गए इस्लामोफोबिक भाषणों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराने में कोई हिम्मत नहीं दिखाई है। यह निश्चित रूप से हमारे लोकतंत्र और संविधान के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
अम्बेडकर ने 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में संविधान के सफल संचालन के लिए हर स्तर पर संवैधानिक नैतिकता के व्यापक विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया था।
संविधान द्वारा स्थापित संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा करना, संवैधानिक नैतिकता को निरंतर विकसित करने की दीर्घकालिक प्रक्रिया का हिस्सा है। 18वें आम चुनाव के दौरान आम जनता ने मोदी के शासन के हमले से संविधान को बचाने के लिए आगे आकर जो काम किया, उससे यह उम्मीद जगती है कि वे इसे आगे भी बचाएंगे और उन सत्ताधारियों से इसकी रक्षा करेंगे, जो इसे खंडित करने पर तुले हुए हैं।
(‘न्यूजक्लिक’ से साभार। एस एन साहू भारत के राष्ट्रपति केआर नारायणन के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।)
छत्तीसगढ़: कवर्धा (ब्लैकआउट न्यूज़) fire in kawardha bus कवर्धा से लखनऊ जा रही यात्री बस में आगरपानी के पास अचानक से भीषण आग लग गई। इससे बस में हड़कंप मच गया। इस बस में 40 से ज्यादा यात्री सवार थे राहत की बात यह हैं की कोई जनहानि नहीं हुई.
fire in kawardha bus
fire in kawardha bus
छत्तीसगढ़ के कवर्धा में एक बड़ा हादसा टल गया। दरअसल कवर्धा से लखनऊ जा रही यात्री बस में आगरपानी के पास अचानक से भीषण आग लग गई। इससे बस में हड़कंप मच गया। इस बस में 40 से ज्यादा यात्री सवार थे।
बस में आग कैसे लगी, इसका कारण पता नहीं चल पाया है। वहीं बस रुकते ही यात्रियों ने तत्परता दिखकर तुरंत कूदकर व गेट से बाहर निकलकर अपनी जांच बचाई। इस हादसे में सभी यात्री सुरक्षित हैं। जबकि बस पूरी तरह से जलकर खाक हो गई। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बस धू-धूकर जल रही है।
fire in kawardha bus दमकल और पुलिस मौके पर किन्तु बस जलकर हुई खाक
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जानकारी मिली है आग लगने की सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी गई। घटना के बाद मौके पर दमकल पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। वहीं मौके पर पुलिस भी पहुंच गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस घटना को देखने के लिए घटना स्थल पर जमकर भीड़ जुट गई। यह पूरा मामला कुकदूर थाना क्षेत्र का है।
मेनपाठ : rape in mainpath resort मैनपाट के रिसॉर्ट में एक युवतीयुवती से रेप का मामला सामने आया हैं अकलतरा निवासी किसी विनोद केडिया का नाम सामने आ रहा हैं युवती ने इसकी शिकायत मैनपाट के कमलेशपुर थाना में की हैं पुलिस आरोपी की पतासाजी कर रही हैं.
rape in mainpath resort
बताया जाता हैं आरोपी युवक युवती को मेनपाठ घुमाने के बहाने मेनपाठ के रिसोर्ट में ले गया जहाँ आरोपी ने युवती के साथ रेप की घटना को अंजाम देकर वहां से फरार हो गया.
Horoscope of 2 December 2024 आज का दिन आपके लिए मिला-जुला रहने वाला है। आपका कोई लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा होगा। आपको बिजनेस की समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। आपकी अपने बॉस से खटपट हो सकती है, इसलिए कार्यक्षेत्र में लोगों से काम से काम ही मतलब रखें। आप अपने पिताजी से पारिवारिक समस्याओं को लेकर बातचीत करेंगे। आपका कोई पैतृक संपत्ति का बंटवारा होने से आपकी संपत्ति में भी इजाफा होगा। अविवाहित जातकों के लिए कोई बेहतर रिश्ता आ सकता है।
वृषभ Horoscope of 2 December 2024
वृषभ फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कमजोर रहने वाला है। आपका कोई पुराना रोग उभर सकता है। प्रेम जीवन जी रहे लोग अपने साथी के साथ लॉन्ग ड्राइव पर जाने की योजना बनाएंगे। आपको परिवार में किसी सदस्य से यदि कोई जिम्मेदारी मिले, तो आप उसे समय रहते पूरा करने की कोशिश करें। आप बेफिजूल के खर्चों को लेकर थोड़ी टेंशन में रहेंगे, जिन पर आपको लगाम लगाने के बारे में सोचना होगा।
मिथुन Horoscope of 2 December 2024
मिथुन फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए किसी नए बिजनेस की शुरुआत करने के लिए रहेगा। आपको अपनी किसी पुरानी गलती से सबक लेना होगा। आपके कुछ नए विरोधी उत्पन्न हो सकते हैं। आप कामों को लेकर मौज मस्ती के मूड में रहेंगे। बैंकिंग क्षेत्रों में कार्यरत लोग किसी अच्छी स्कीम में निवेश कर सकते हैं। आप यदि किसी प्रॉपर्टी की खरीदारी करने की सोच रहे थे, तो वह भी आपके लिए अच्छी रहेगी। आप अपने कीमती सामानों की सुरक्षा अवश्य करें।
कर्क Horoscope of 2 December 2024
कर्क राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए तरक्की दिलाने वाला रहेगा। आपको अपने कामों को कल पर टालने से बचना होगा। आपकी सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जिससे आपके कामों में कुछ रुकावट अवश्य आएंगी। कार्यक्षेत्र में आपको किसी स्कॉलरशिप से संबंधित परीक्षा को दे सकते हैं। आपको अपनी सेहत को लेकर थोड़ा सावधान रहना होगा। आपके आस पड़ोस में यदि कोई वाद-विवाद उत्पन्न हो, तो आप उसमें चुप रहें नहीं तो वह कानूनी मामला भी हो सकता है।
सिंह Horoscope of 2 December 2024
सिंह राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए सोच समझकर कामों को करने के लिए रहेगा। आपको अपने सहयोगियों से किसी बात को कहने का मौका मिलेगा। किसी पुरानी गलती को आप दोबारा ना दोहराएं। परिवार में सदस्यों में यदि किसी बात को लेकर खटपट चल रही है, तो उसे बातचीत के जरिए दूर करने की कोशिश करें। आपका कोई प्रॉपर्टी संबंधित मामला आपको परेशान करेगा। यदि आपने किसी से कोई लोन आदि लेने के लिए बोला था, तो वह भी आपको मिल सकता है।
कन्या Horoscope of 2 December 2024
कन्या राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। आपके धन-धान्य में वृद्धि होने से आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। आपको बिजनेस में डूबा हुआ धन भी मिलने की संभावना है। आप किसी नए काम की शुरुआत के लिए भी योजना बना सकते हैं। नौकरी में कार्यरत लोगों को प्रमोशन मिलेगा। आपको बड़ों की बातों पर ध्यान देना होगा, क्योंकि वह आपको किसी अच्छे काम की ही सलाह देंगे। परिवार का कोई सदस्य यदि घर से दूर है, तो वह आपसे मिलने आ सकता है।
तुला
तुला राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहने वाला है। आप अपने बिखरे व्यापार को संभालने की कोशिश में लगे रहेंगे। आपका कोई मित्र लंबे समय बाद आपसे मिलने आएगा, जिसमें आप कोई पुराने गले शिकवे न उखाड़े। संतान को आप कहीं घूमाने फिराने लेकर जा सकते हैं। आप उनकी फरमाइश पर किसी नए वाहन को भी घर ला सकते हैं। आपका कोई पुराना लेनदेन यदि आपको परेशान कर रहा था, तो उससे भी आपको छुटकारा मिलेगा।
वृश्चिक
वृश्चिक फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। आपको अपने कामों को लेकर योजना बनाकर चलना होगा। जीवनसाथी से यदि किसी बात को लेकर खटपट चल रही थी, तो वह भी दूर होगी। आपका मन धार्मिक कामों में खूब लगेगा और आप अपने धन का कुछ हिस्सा गरीबों की सेवा में भी लगाएंगे। नौकरी में कार्यरत लोग किसी काम में लापरवाही कर सकते हैं, जिससे उनके बॉस से भी उनको डांट खानी पड़ेगी।
धनु
धनु राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आपका कोई खास प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है। शेयर मार्केट से जुड़े लोग थोड़ा सोच समझकर इन्वेस्टमेंट करें। आपने यदि किसी पर आंख बंदकर भरोसा किया, तो वह आपके भरोसे कर तोड़ सकता है। तरक्की की राह में आ रही बाधाएं दूर होगी। आपको अपने पिताजी की कोई बात बुरी लगेगी। आपके कुछ नए विरोधी उत्पन्न हो सकते हैं। संतान की तरक्की में आ रही बाधाएं दूर होगी। घूमने फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
मकर
मकर राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन प्रेम जीवन जी रहे लोगों के लिए अच्छा रहने वाला है, उनको अपने साथी की ओर से कोई खुशखबरी सुनने को मिलेगी और आप कहीं घूमने-फिरने जाने की भी प्लानिंग कर सकते हैं। पार्टनरशिप में किसी डील को फाइनल करने से पहले आप उसमें लिखा पढ़ी अवश्य करें, नहीं तो बाद में आपके साथ धोखा हो सकता है। किसी पैतृक संपत्ति मामले में आपको थोड़ी निराशा रहेगी। आप किसी को कोई जरूरी जानकारी शेयर ना करें। पारिवारिक समस्याओं के लिए आप मिल बैठकर बातचीत करें।
कुंभ
कुम्भ राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन मौजमस्ती से भरा रहने वाला है। परिवार में किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होने से परिजनों का आना-जाना लगा रहेगा। आपको बेवजह किसी बात को लेकर गुस्सा करने से बचना होगा और आप अपनी वाणी व व्यवहार पर संयम रखें, नहीं तो लोगों को आपकी कोई बात बुरी लग सकती है। राजनीति में कार्यरत लोगों को किसी बड़े पद की प्राप्ति होने से फूले नहीं समाएंगे और बिजनेस में आप कोई बड़ा बदलाव कर सकते हैं, जो आपके लिए अच्छा रहेगा।
मीन
मीन राशि फोटो ब्लैकआउट न्यूज़
आज का दिन आपके लिए सुख-सुविधाओं पर पूरा ध्यान देने के लिए रहेगा, क्योंकि आपकी इनकम के सोर्स बढ़ेंगे, जिनसे आपको खुशी होगी। आपका कोई लंबे समय से चल रहा कोई कानूनी मामला भी सुलझ सकता है, जो आपको खुशी देगा। आप अपने मनमौजी स्वभाव के कारण कार्यक्षेत्र में कुछ गलती हो सकती हैं, जिनसे आपको समस्या होगी। संतान आपकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी। आपके कुछ नए विरोधी उत्पन्न होंगे।
रायपुर: CG Police Transfer breaking राजधानी रायपुर में बढ़ते आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने, क़ानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराधियों की धरपकड़ के मद्देनजर जिले के एसएसपी दफ्तर ने ट्रांसफर-पोस्टिंग की बड़ी लिस्ट जारी की है। सूची के मुताबिक़ 1 उप निरीक्षक समेत 260 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया गया है। देखें सूची
home remedies for cold and cough सर्द मौसम में सर्दी खांसी जुकाम जैसी समस्या आम होती हैं अस्पतालों में लगी लाइनें इसकी गवाही देती हैं आज हम आपको जो बताने जा रहे हैं इस्सके इस्तेमाल करके आप अस्पतालों की लाइन से छुटकारा पर सकते हैं अगर आप भी सर्दी खांसी जुकाम से जूझ रहे हैं तो इन घरेलु इलाज को आजमा कर देखें और झट्ट से छुटकारा पाएं.
home remedies for cold and cough
सर्दी-खांसी और जुकाम से राहत पाने के लिए ये घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं:
तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिएं. तुलसी की मंजरियों को रुमाल में सूंघने से नाक खुलती है.
अदरक के रस में शहद मिलाकर चटाएं. अदरक, काली मिर्च, हल्दी, अजवाइन, और तुलसी की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पिएं.
home remedies for cold and cough
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गर्म नमक के पानी से गरारे करें.
खूब सारा पानी और कैफ़ीन रहित अन्य तरल पदार्थ पिएं.
ह्यूमिडिफ़ायर का इस्तेमाल करें.
home remedies for cold and cough
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गर्म पानी से स्नान करें या भाप लें.
आराम करें और भरपूर नींद लें.
अप्रत्यक्ष धूम्रपान से बचें.
नींबू को गुनगुने पानी में निचोड़कर पिएं.
प्याज़ में एंटीमाइक्रोबियल और एंटी इंफ़्लेमेटरी गुण होते हैं.
शहद में एंटीमाइक्रोबॉयल गुण होते हैं.
काली मिर्च के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से आराम मिलता है.
सरगुजा 1 दिसंबर 2024। CG Accident Braking राजधानी रायपुर से मेनपार्ट घुमने के लिए निकले पांच दोस्त भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गये। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार ट्रक ने एनएच-130 पर कार सवारों को चपेट में लेकर टक्कर मार दी। हादसे में हार सवार 5 दोस्तों की दर्दनाक मौत हो गई।
CG Accident Braking
CG Accident Braking
बताया जा रहा है कि युवकों की मौके पर और एक युवक ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतकों को रायपुर के चंगोराभाटा निवासी दिनेश साहू, संजीव और राहुल के रूप में पहचान की हैं। इस हादसे में मृतकों के दो अन्य साथी भी शामिल है, जिनकी इस भीषण हादसे में मौत हो गयी।
CG Accident Braking
CG Accident Braking
भीषण सड़क दुर्घटना का ये मामला उदयपुर थाना क्षेत्र के गुमगा का है। जानकारी के मुताबिक सभी युवक रायपुर के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि रायपुर के चंगोराभाटा निवासी दिनेश साहू, संजीव और राहुल शनिवार की शाम घर से जगदलपुर घूमने जाना बताकर निकले थे। लेकिन अचानक सभी दोस्तों ने मैनपाट जाने का प्लान बना लिया। रास्तें में उन्होने अपने दो अन्य दोस्तों को भी साथ रख लिया। सभी दोस्त कार लेकर अंबिकापुर के लिए रवाना हो गये। बताया जा रहा है कि अंबिकापुर पहुंचने से करीब 60 किलोमीटर पहले आज तड़के 5 बजे के लगभग तेज रफ्तार ट्रक ने कार को चपेट में लेकर जोरदार टक्कर मार दी।
CG Accident Braking
CG Accident Braking
इस हादसे में कार के परखच्चे उड़ गये। वहीं कार में सवार युवक अंदर ही फंस गये। दुर्घटना की जानकारी के बाद पुलिस ने कार को कटर से काटकर शवों को बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि नेशनल हाइवे पर घना कोहरा होने के कारण ये हादसा हुआ। कोहरे के कारण कार चालक सामने से आ रहे ट्रक को देख नहीं पाये, जिसके चलते हादसा हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के सामने का हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। कार के सभी एयरबैग खुल गए।
लेकिन इस भीषण हादसे में किसी की भी जान नहीं बच सकी। उदयपुर थाना प्रभारी ने बताया कि सभी युवकों के शवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर में रखा गया है। वहीं परिजनों को भी दुर्घटना की सूचना दे दी गई है। पोस्टमॉर्टम के बाद लाश परिजनों को सौंप दिया जाएगा। दुर्घटना के बाद ट्रक का ड्राइवर मौके से फरार हो गया। जिसके खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
decision of the supreme court ‘देर आयद’ की कहावत के पहले दो शब्दों को व्यवहार में उतारते हुए आखिरकार देश की सबसे बड़ी अदालत ने बुलडोजर अन्याय पर अपना फैसला दे दिया। 13 नवंबर को सुनाए अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति का घर नहीं गिरा सकती कि वह किसी अपराध में आरोपी या दोषी है। इसकी वजह बताते हुए इस फैसले में कहा गया है कि :
decision of the supreme court
decision of the supreme court
“कार्यपालिका किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा सकती। केवल आरोप के आधार पर यदि कार्यपालिका व्यक्ति की संपत्ति को ध्वस्त करती है तो यह कानून के शासन पर प्रहार होगा। कार्यपालिका न्यायाधीश बनकर आरोपी व्यक्ति की संपत्ति को ध्वस्त नहीं कर सकती। बुलडोजर द्वारा इमारत को ध्वस्त करने का भयावह दृश्य अराजकता की याद दिलाता है, जहां ताकत ही सब कुछ मानी जाती थी। संवैधानिक लोकतंत्र में इस तरह की मनमानी कार्रवाई के लिए कोई जगह नहीं है। इस तरह की कार्रवाई कानून के सख्त हाथ से की जानी चाहिए। हमारे संवैधानिक लोकाचार इस तरह के कानून की अनुमति नहीं देते।”
decision of the supreme court
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🔵 इस फैसले की एक महत्त्वपूर्ण प्रस्थापना घर के अधिकार को नागरिक का मौलिक अधिकार बताया जाना है। कोर्ट ने कहा कि घर “सिर्फ एक संपत्ति नहीं होता, यह परिवार की सामूहिक आशाओं का प्रतीक होता है।“ जीवन का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और आश्रय का अधिकार इसका एक पहलू है। यह नई और अच्छी बात है, बशर्ते उसे इसी तरह से पढ़ा जाए और अमल में लाया जाए।
🔵 सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खण्डपीठ का यह निर्णय भारत के संविधान की धारा 142 के तहत हुई सुनवाई के तहत आया है ; यह वह धारा है, जो कोर्ट को इस बात की हैसियत देती है कि जिन मामलों में अभी तक कानून नहीं बन पाया है, उन मामलों में न्याय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है और नीति निर्धारित कर सकता है, ऐसे निर्देश दे सकता है, जो भविष्य के लिए नियम विधान माने जायेंगे।
यही वजह रही होगी कि अपने इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने वह प्रक्रिया भी तय की है, जिसे अपना कर अवैध निर्माणों को हटाया या गिराया जा सकता है। इस बारे में उसने 15 निर्देश दिए हैं।
decision of the supreme court
supreme court
🔵 स्वाभाविक ही है कि जिन दिनों में बुलडोजर अन्याय का प्रतीक और वाहक दोनों बनकर निर्लज्ज निर्ममता से इस्तेमाल किया जा रहा हो, राजनीतिक प्रतिशोध और समाज के वंचित, उपेक्षित और लक्षित हिस्सों को कुचलने का जरिया बनाया जा रहा हो, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का आमतौर से स्वागत ही हो सकता है ; हुआ भी। मगर इसे कितनी ही उदारता के साथ क्यों न पढ़ा जाये, इसके बारे में ‘देर आयद’ की कहावत के अगले दो शब्द ‘दुरुस्त आयद’ कहना मुश्किल है।
इस स्वागतेय निर्णय की सीमाए हैं। ये वे सीमाएं हैं, जो इन दिनों न्यायिक निर्णयों की, विशेषकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की पहचान और प्रवृत्ति के रूप में सामने आयीं है। इनमें अच्छे-अच्छे वाक्यों की तो भरमार होती है, मगर उसके अनुरूप कदम नहीं दिखाई देते।
🔵 जैसे, महाराष्ट्र में हुआ दलबदल और उसके जरिये बनी सरकार तो गैरकानूनी है, मगर अब जो हो गया सो हो गया ; जैसे बाबरी मस्जिद को तोडा जाना कानूनों का उल्लंघन तो था ही, अपराध भी था, मगर किसी को इसके लिए दण्डित करना तो दूर वह पूरी जमीन ही छीनकर जबरिया आपराधिक तोड़-फोड़ करने वालों को ही सौंप दी जाना चाहिये। इस तरह के जैसे, और भी न जाने कैसे-कैसे और कई तो ऐसे वैसे फैसले भी हैं।
ऐसे फैसलों की खासकर, अभी हाल ही में रिटायर हुए मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने इस तरह के कहीं न पहुँचने, कहीं न पहुँचाने वाले निर्णयों की झड़ी ही लगा दी थी।
decision of the supreme कोर्ट
supreme court
🔵 इसी तर्ज पर यह बुलडोजर वाला निर्णय भी यह मानता तो है कि यह जहाँ भी चला, घोर मनमानी से चला, गैरकानूनी चला, लोकतंत्र के मान्य सिद्धांतों के विपरीत नितांत असंवैधानिक तरीके से चला, इसने आवास और आश्रय के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया, आदि-इत्यादि, मगर इसके बावजूद यह अभी तक हुए बुलडोजर ध्वंसों और विनाशों की जवाबदेही, अब तक की घटनाओं, वारदातों का उत्तरदायित्व तय नहीं करता, ना ही उनकी समीक्षा कर जिम्मेदारी निर्धारित करने का कोई प्रबंध ही करता है।
इसके पीडितों-प्रताडितों की क्षति को पूरे जाने का संकेत तक नहीं देता, उसे लोकतंत्र और संविधान के विपरीत बताने के बावजूद इसके जाहिर-उजागर असली इरादे को चिन्हांकित नहीं करता।
🔵 बुलडोजर, जैसा कि दावा किया जाता रहा, सिर्फ कथित अवैध या बिना स्वीकृति के बने मकानों, आवासों, भवनों को गिराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा ; यह एक राजनीतिक प्रोजेक्ट है उस गिरोह का, जिसकी ओर से इसी सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर भारत के संविधान में से ‘धर्मनिरपेक्षता’ शब्द को हटाये जाने की मांग की गयी थी और जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ठीक ही खारिज किया था।
इसी के साथ यह भी कहा था कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ इस देश के संविधान का एक अविभाज्य और कभी न हटाया जा सकने वाला अंग है। यह गिरोह जिस मकसद को याचिका के जरिये हासिल नहीं कर सका, उसे बुलडोजर के जरिये लागू करना चाहता है।
🔵 बुलडोजर प्रतीक है उस फासीवाद का, जिसे कभी हो हिंदुत्व, तो अभी सनातन के नाम पर छुपाया जा रहा है। अब तक चले बुलडोजर के तथ्य इस सत्य को उजागर करते हैं कि यह उस बर्बरता का ब्रांड है, जिसे भाजपा सरकारों द्वारा मुसलमानों और दलितों, आदिवासियों और आर्थिक रूप से वंचितों को सबक सिखाने और कार्पोरेट्स के हितो को आगे बढाने के लिए तैयारी के साथ सायास खड़ा किया गया है।
यह वह यमदूत है, जो सिर्फ लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता को ही नहीं, सभ्य समाज की पहचान क़ानून के राज और क़ानून की निगाहों में सबकी बराबरी की अवधारणा को ही मौत के घाट उतार देना चाहता है। इसका जिस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, वह इन इरादों को पूरी तरह स्पष्ट कर देता है।
🔵 उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के साथ योगी आदित्यनाथ ने इसे ब्रांड बनाने की परियोजना शुरू की ; तुरंत ही इसे चुनावी आम सभाओं में लाइन लगाकर खड़ा किया जाने लगा ; अटल, दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी, यहाँ तक कि खुद मोदी और योगी की तस्वीरों के कटआउट्स से भी ज्यादा प्राथमिकता पर बुलडोजर रखे जाने लगे ; कई आम सभाओं के लिए तो इन्हें ही मंच बनाया जाने लगा। यूपी से शुरू हुई बुलडोजर को नेता मानने की मुहिम बाकी प्रदेशों में भी पहुँच गयी और यह उन्माद का समानार्थी बन गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कुछ बदला-सुधरा नहीं है। झारखण्ड में योगी की सभाओं में विध्वंस की ये मशीनें कतारबद्ध प्रदर्शित की गयीं। महाराष्ट्र में विश्व की सबसे विशाल झुग्गी बस्ती धारावी और बाकी बस्तियों पर इसे चलाकर अडानी का कब्जा कराने की तो बाकायदा घोषणा ही की गयी।
🔵 13 नवम्बर के फैसले के बाद, उसमें निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद यह यूपी में भी चल रहा है, एम पी में भी विचर रहा है। ये दीदादिलेरी सिर्फ हिमाकत नहीं है, एक संदेश है ; आधी-अधूरी बातें करने वाली न्यायपालिका के सदाशयी उपदेशों को अँगूठा दिखाते हुए पुलिस, प्रशासन सहित समूची कार्यपालिका को बुलडोजर की तरह काम में लग जाने का सन्देश। हाल में हुए उपचुनावों में उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम चीन्ह-चीन्ह कर उन्हें जिस तरह, लाठियां चलाकर, पिस्तौल तक दिखाकर वोट डालने से रोका गया, वह इसी की बानगी है।
यूपी के ही संभल में जो हो रहा है, वह इसी का एक रूप है : जिस आधार पर संभल किया गया है, वह संकेत है कि यदि उनकी चली, तो अब बात सिर्फ संभल तक नहीं रुकने वाली, बाबरी ध्वंस के बाद बने कानून कि 15 अगस्त 1947 के पहले के धर्मस्थलों के विवाद अब नहीं उठाये जायेंगे, के अस्तित्व में होने के बावजूद हर शहर-गाँव तक पहुंचाई जायेगी ; महंगाई, बेरोजगारी, कुपोषण सहित सारे सर्वेक्षणों और उनकी रिपोर्ट्स पर रोक लगाने वाले हर मस्जिद का सर्वे करके उन्माद उकसाने में जुटे हैं। बाबरी मस्जिद के मलबे को सीढ़ी बनाकर सत्ता में आया गिरोह अब बाकी मस्जिदों को खंडहरों में बदलकर सरकार में बने रहने का रास्ता ढूंढ रहा है।
🔵 विडम्बना की बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा है, जब देश संविधान को अंगीकार करने की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा है। वह संविधान, जिसने 562 रियासतों में टुकड़े-टुकड़े देश को संघीय गणराज्य बनाया, जिसने पृथ्वी के सभी धर्मों की मौजूदगी और दुनिया की तकरीबन हर नस्ल के कबीलों की कभी वापस न लौटने वाली आमद के समावेश से बने भूखण्ड को हिन्दुस्तान बनाया। अतीत से सबक लेकर और 1857 से शुरू राजनीतिक और उससे भी कही पहले से जारी सामाजिक न्याय की उथल-पुथल और जनता के संघर्षो के दम पर एक ऐसा संविधान बनाया,
जिसमे एक धतूरे को छोड़कर बाकी सभी फलो का स्वाद और हर तरह के फूलों की सुगंध शामिल है। जिसने अपनी अनेक अन्तर्निहित सीमाओं के बावजूद इस देश को कमोबेश एकजुट और गतिमान बनाए रखा।
🔵 जो लोग आज बुलडोजर पर बैठकर इस सबको रौंदने के लिए बढ़े आ रहे हैं, उनके निशाने पर सिर्फ मुसलमान नहीं है, उनके निशाने पर 5 हजार वर्ष का हासिल है, तीन चौथाई से ज्यादा अवाम है, इस देश का संविधान और इस तरह से पूरा इंडिया दैट इज भारत के रूप में पहचाने जाने वाला पूरा हिन्दुस्तान है।
🔴 दोहराना जरूरी है कि न यह हिन्दुस्तान रातों रात अस्तित्व में आया है, न ही 75 वर्ष पूर्व 26 नवम्बर 1949 को मंजूर किया गया संविधान ही अचानक से बना है ; ये दोनों ब्रिटिश गुलामी के खिलाफ जनता के कठिन, किन्तु एकजुट, जुझारू और कुर्बानियों से भरे संघर्ष और जन उभारों की कोख से जन्मे है और अब जन आंदोलनों और संघर्षों से ही इसे बचाया और महफूज रखा जा सकता है।
🔴 यह भी दोहराना जरूरी है कि भेड़िये मान-मनुहार करने या पुचकारने से नहीं मानते ; नीलकंठ बनके खुद विष पीने और अमृत उन्हें छका देने से इतिहास आगे नहीं बढ़ता। तीसरा नेत्र खोलना ही पड़ता है, जरूरत पड़ने पर तांडव भी दिखाना पड़ता है। लॉरेंस बिश्नोईयों की डराने की कोशिशों, अडानियों की तिजोरियों की कालिखों और उन्मादी साजिशों से जीते-हारे एक-दो चुनाव निर्णायक नहीं होते७। फैसलाकुन होती है जनता, अपनी मुश्किलों को देश की मुश्किलों से जोड़कर लडती-जूझती जनता ।
🔴 और यह जनता है, जो गोलमोल शब्दों में आधे-अधूरे फैसले नहीं सुनाती, इतिहास बनाती है। 26 नवम्बर को हुई किसान-मजदूरों की देशव्यापी विरोध कार्यवाहियां इसी तरह की जनकार्यवाही है। ऐतिहासिक किसान आंदोलन और उसी दिन हुई मजदूरों की शानदार राष्ट्रीय हड़ताल की चौथी वर्षगाँठ के मौके पर हुई यह कार्यवाही सिर्फ आश्वस्ति ही नहीं देती, रास्ता भी दिखाती है ; इसलिए कि ये जागरण और प्रतिरोध की जगमगाती मशालें हैं और भेड़िये मशाल जलाना नहीं जानते।
(लेखक लोकजतन के संपादक और अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव हैं।
कोरबा : ब्लैक आउट न्यूज( संतोष सारथी)-कोरबा जिले में ट्रैक्टर के नीचे दबने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, घटना बालको थाना क्षेत्र के चुईयां नाला के समीप की बताई जा रही है जिसमें रेत से भरे ट्रैक्टर पलटने से एक युवक उसकी चपेट में आगया जिससे उसकी मौत हो गई है। घटना शनिवार के शाम 7 30 बजे की बताई जा रही है, स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर चुईयां नाला से रेत भरकर निकल रही थी, इस दौरान पूरा हादसा हो गया है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर बालको पुलिस पहुंची एवं ट्रैक्टर को जेसीबी के माध्यम से शव को बाहर निकालने का कार्य किया गया है। मृतक चुईयां ग्राम का होना बताया जा रहा है।