कोरबा। Molestation of a minor in Korba : शहर में एक 16 वर्षीय नाबालिग से कथित छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले में शहर के कारोबारी चेतन दास चौधरी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी के अनुसार, कोतवाली थाना क्षेत्र की एक नाबालिग ने पुलिस के समक्ष पहुंचकर शिकायत की कि चेतन दास चौधरी नामक व्यक्ति ने उसके साथ छेड़छाड़ की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध किया है और आरोपी के विरुद्ध POCSO Act तथा BNS की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पीड़िता ने थाने पहुंचकर सुनाई आपबीती Molestation of a minor in Korba

इस प्रकरण की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि शिकायतकर्ता नाबालिग है। ऐसे मामलों में कानून पीड़ित बच्चे की सुरक्षा, गोपनीयता और निष्पक्ष जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। लिहाजा पीड़िता की पहचान अथवा ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके।
पुलिस के मुताबिक फिलहाल मामले की विवेचना जारी है। आरोपी की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है और आगे की कार्रवाई जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
अग्रिम जमानत की जुगत में आरोपी Molestation of a minor in Korba
इधर सूत्रों का दावा है कि आरोपी को आज जिला न्यायालय परिसर में देखा गया और अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाए जाने की चर्चा है। हालांकि इस सूचना की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए इसे तथ्य के रूप में नहीं बल्कि सूत्रों से मिली जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उम्र या रसूख नहीं—निष्पक्ष जांच हो Molestation of a minor in Korba
बताया जा रहा है कि आरोपी की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। लेकिन इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आरोपी की उम्र, आर्थिक स्थिति अथवा सामाजिक रसूख नहीं, बल्कि 16 वर्षीय पीड़िता द्वारा पुलिस के सामने लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और संवेदनशील जांच है।
यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। वहीं आरोपी को भी न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
नाबालिग के साथ किसी भी प्रकार के यौन दुर्व्यवहार या छेड़छाड़ के आरोप को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पुलिस-प्रशासन के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि पीड़ित बच्चे को दोष देने, दबाव बनाने या उसकी पहचान उजागर करने के बजाय उसे सुरक्षा और न्याय दिलाने में सहयोग करे।





