Attempt to save the responsible officer गौठान मे बछड़े की मौत के मामले मे निर्दोष ठेकेदार पर FIR जिम्मेदार अफसर को कौन बचा रहा है

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कोरबा( ब्लैकआउट न्यूज़ )Attempt to save the responsible officer नगर निगम कोरबा के खरमोरा गौठान में 13 अगस्त को एक बछड़े की मौत का मामला अब बड़ा सवाल बन गया है। घटना को हुए कई दिन बीत गए, लेकिन अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। उल्टा, नगर निगम ने उस ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करा दी जिसका गौठान से कोई संबंध ही नहीं था।जिम्मेदार अफसर को आखिर कौन बचा रहा है यह एक बड़ा प्रश्न है.

ठेकेदार को बनाया बली का बकरा Attempt to save the responsible officer

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जानकारी के अनुसार, जिस ठेकेदार रशीद खान पर नगर निगम ने लापरवाही का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई, उसे केवल सफाई कार्य हेतु श्रमिक उपलब्ध कराने का ठेका दिया गया था। अनुबंध की शर्तों में गौठान या पशुओं की देखरेख का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। ठेकेदार का दायित्व केवल सफाई कर्मी उपलब्ध कराना था।

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इसके बावजूद नगर निगम अधिकारियों ने पूरा ठीकरा ठेकेदार पर फोड़ दिया और उसे ही दोषी ठहराने की कोशिश की। सवाल उठता है कि जब गौठान में पशुओं की देखभाल, चारा-पानी और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए निगम द्वारा दो-दो इंचार्ज कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, तो आखिर जिम्मेदारी उन पर क्यों नहीं तय की गई?

ठेकेदार ने प्रमाण सहित थाने मे शिकायत की फिर भी अफसर पर कार्यवाही नहीं Attempt to save the responsible officer

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठेकेदार ने अपनी बेगुनाही के प्रमाणों के साथ लिखित आवेदन जिला पुलिस अधीक्षक, जिला कलेक्टर और थाना सिविल लाइन को सौंपा है। लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी और तंत्र इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

निगम अधिकारी की सीधी जिम्मेदारी, लेकिन कार्यवाही सिफ़र Attempt to save the responsible officer

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में निगम अधिकारी अनिरुद्ध प्रताप सिंह गौठान के प्रभारी हैं। पशुओं की मौत उनकी देखरेख और पर्यवेक्षण की कमी का सीधा परिणाम है। नगर निगम ही गौठान में मवेशियों के लिए चारा और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करता है। इसके बावजूद अब तक अनिरुद्ध प्रताप सिंह या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई भी आपराधिक या विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल 

 

नगर निगम के चुने हुए जनप्रतिनिधियों की खामोशी भी सवालों के घेरे में है। निर्दोष ठेकेदार पर झूठा केस दर्ज होना और असली दोषियों पर कार्रवाई न होना जनता के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है। लेकिन किसी पार्षद या जिम्मेदार जनसेवक ने अब तक मुखर होकर आवाज नहीं उठाई।

साय सरकार में कौन बचा रहा दोषियों को?

साय सरकार बनने के बाद प्रशासन और शासन की जवाबदेही को लेकर जनता में उम्मीदें जगी थीं। लेकिन खरमोरा गौठान की यह घटना सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रही है। जब पशुओं के साथ क्रूरता और लापरवाही का इतना बड़ा मामला सामने आया है और प्रमाण सहित शिकायतें दी गई हैं, तब भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल है। आखिर ऐसे अफसर को संरक्षण कौन दे रहा है?

जनता का आक्रोश, प्रशासन की लापरवाही

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि निर्दोष ठेकेदार को बलि का बकरा बनाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है। यदि जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर है।

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