छत्तीसगढ़ में हुए पिछले दो लोकसभा चुनावों में 5-5 सीटों में नोटा तीसरे नंबर पर रहा है। आदिवासी बहुल बस्तर और कांकेर ऐसी लोकसभा सीटें है, जहां दोनों ही चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा वोट NOTA को मिले हैं। इसी तरह राजनांदगाव, सरगुजा, महासमुंद और रायगढ़ लोकसभा में भी तीसरा रैंक NOTA का रहा है।
27 सितंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने नोटा (NONE OF THE ABOVE) यानी ऊपर के प्रत्याशियों में से कोई नहीं का विकल्प रखने का निर्देश दिया था। इसके बाद लोकसभा के दो चुनाव हो चुके हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ की आदिवासी बहुल सीट में नोटा का बटन सबसे ज्यादा लोगों ने दबाया है।
ये बटन ईवीएम में सबसे आखिर में दिया जाता है लेकिन कई निर्दलीय प्रत्याशी होने के बावजूद बीजेपी और कांग्रेस के बाद लोगों ने नोटा को ही पसंद किया। अगर मतदान में नोटा को उम्मीदवारों से भी ज्यादा वोट मिले तब क्या होगा और विजेता किसे घोषित किया जाएगा। इस रिपोर्ट से समझते हैं, लेकिन उससे पहले अहम आंकड़ों पर नजर