Sonam Wangchuk’s impact in Korba : शिक्षा,लोकतंत्र और जनहित के लिए सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय अनशन 20 को

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कोरबा (ब्लैकआउट न्यूज़) Sonam Wangchuk’s impact in Korba आज जब देश के नागरिक अपने-अपने घरों में सो रहे थे, उसी समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण अनशन कर रहे देश के प्रख्यात शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक एवं पर्यावरणविद् श्री सोनम वांगचुक जी को अनशन स्थल से जबरन उठाकर ले जाने की घटना सामने आई।जो अत्यंत निंदनीय हैँ.

Sonam Wangchuk’s impact in Korba

Sonam Wangchuk's impact in Korba 
Sonam Wangchuk’s impact in Korba

सोनम वांगचुक जी कोई अपराधी नहीं हैं। वे लोकतंत्र के सिपाही हैं। वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे थे। उनसे बातचीत की जा सकती थी, उन्हें सम्मानपूर्वक अनशन समाप्त करने का आग्रह किया जा सकता था। लेकिन जिस तरीके से उन्हें अनशन स्थल से उठाकर ले जाया गया, वह लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बालको निवासी अधिवक्ता एवं सोशल कार्यकर्त्ता मो नफीस खान ने अपने फेसबुक वाल पर पोस्ट कर उक्त अनशन की जानकारी मुहय्या कराई हैँ उन्होंने शहर वासियों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में उपस्थित होने और अनशन समर्थन देने की अपील भी की हैँ उन्होंने स्पष्ट किया हैँ की यह विशुद्ध रूप से गैर राजनितिक अनशन हैँ.

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क्या लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध है?
क्या शांतिपूर्ण अनशन करना अपराध है?
क्या असहमति की आवाज़ को संवाद के बजाय जबरन दबाया जाएगा?भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, राजतंत्र नहीं। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनी जाती है, असहमति का सम्मान किया जाता है और शांतिपूर्ण आंदोलनों का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाता है।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba

Sonam Wangchuk's impact in Korba 
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सोनम वांगचुक जी जिन मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वे केवल उनके व्यक्तिगत मुद्दे नहीं हैं। वे NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा, प्रभावित छात्रों को न्याय, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही, लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत संरक्षण तथा लद्दाख के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे हैं।

 

उन्होंने देशवासियों से 20 जुलाई 2026 को उनके आंदोलन के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान किया था, लेकिन आज उन्हें बलपूर्वक अस्पताल ले जाया गया।
हर नागरिक दिल्ली नहीं जा सकता, लेकिन अपने शहर में रहकर लोकतंत्र की इस आवाज़ के साथ खड़ा जरूर हो सकता है।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba

Sonam Wangchuk's impact in Korba 
Sonam Wangchuk’s impact in Korba

इसीलिए मैं और मेरे कुछ साथी सोनम वांगचुक जी के शांतिपूर्ण आंदोलन और उनकी जनहित की मांगों के समर्थन में, 20 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे सुभाष चौक, निहारिका, कोरबा में एक दिवसीय शांतिपूर्ण एवं संविधानसम्मत अनशन पर बैठ रहे है ।

यह अनशन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षा में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा, संविधान की गरिमा, लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण असहमति के सम्मान के समर्थन में है।

Sonam Wangchuk’s impact in Korba 

अनशन के दौरान महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन भी प्रेषित किया जाएगा, जिसमें सोनम वांगचुक जी की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने, उनसे सार्थक संवाद स्थापित करने तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाएगा।

मैं कोरबा के सभी नागरिकों—विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, युवाओं और हर जागरूक नागरिक से हृदय से अपील करता हूँ कि इस शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अभियान में अपनी सहभागिता दें।

आप पूरे दिन अनशन नहीं कर सकते तो कुछ समय के लिए उपस्थित होकर अपना नैतिक समर्थन दें। और जो साथी हमारे साथ एक दिवसीय अनशन करना चाहते हैं, उनका हृदय से स्वागत है।

शिक्षा, छात्रों के भविष्य और लोकतंत्र की आवाज़ को मजबूत करें। हमने जिला प्रशासन को दिनांक 17/7/2026 को लिखित में सूचना दे दी है।
जय हिंद।

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