Shivay Hospital Sets an Example : बिना चिरफाड़ के लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से महिला को मिली नई जिंदगी, शिवाय हॉस्पिटल बना जिले का प्रथम अस्पताल

10-12 सेमी के 600 ग्राम  विशाल यूटरस से मिली मुक्ति, डेढ़ साल से दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव झेल रही 46 वर्षीय महिला का सफल ऑपरेशन; डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में हुई जटिल सर्जरी

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कोरबा। Shivay Hospital Sets an Example : डेढ़ साल से असहनीय दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की पीड़ा झेल रही 46 वर्षीय महिला के लिए शिवाय हॉस्पिटल में हुई आधुनिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नई जिंदगी की शुरुआत बन गई। गर्भाशय में 10 से 12 सेंटीमीटर के 600 ग्राम यूटरस के कारण महिला की हालत बेहद मुश्किल हो गई थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण मामले में विशेषज्ञों ने बिना बड़े चीरे के लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल सर्जरी कर मरीज को राहत दिलाई।

इस सफल उपचार की खास बात यह रही कि सर्जन डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में मेडिकल टीम ने जटिल ऑपरेशन को आधुनिक दूरबीन तकनीक से अंजाम दिया। शिवाय हॉस्पिटल के अनुसार, अस्पताल बिना बड़े चीरे वाली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराने वाला जिले का प्रथम अस्पताल है।

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महिला पिछले करीब डेढ़ वर्षों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और बड़े-बड़े रक्त के थक्कों की समस्या से जूझ रही थीं। हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें दिनभर में करीब 8 पैड तक बदलने पड़ते थे। लगातार रक्तस्राव और दर्द ने उनके सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था।

गर्भाशय में मिला 10-12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड Shivay Hospital Sets an Example 

Shivay Hospital Sets an Example 
Shivay Hospital Sets an Example

जांच के दौरान पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी में गर्भाशय में करीब 10 से 12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड पाया गया। ट्यूमर के कारण गर्भाशय का आकार सामान्य से बढ़कर करीब 16 से 18 सप्ताह के गर्भ जैसा हो गया था।

डॉ. पूर्णिमा सुरभि की अगुवाई में चुनौतीपूर्ण लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन Shivay Hospital Sets an Example 

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. पूर्णिमा सुरभि और गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा कुंडू की अगुवाई में मेडिकल टीम ने आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी का निर्णय लिया।

25 जुलाई 2026 को टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी (TLH) और बाइलेटरल साल्पिंगेक्टॉमी की गई। इस दौरान लेप्रोस्कोपिक मोर्सेलेशन तकनीक की मदद से विशाल ट्यूमर और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। जटिलता के बावजूद सर्जरी के दौरान किसी आपातकालीन स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।

सफल ऑपरेशन के बाद मुस्कुराते हुए घर लौटीं महिला

सर्जरी के बाद महिला की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। पूरी तरह स्वस्थ और हेमोडायनामिक रूप से स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

डेढ़ साल की पीड़ा से राहत मिलने के बाद मरीज और उनके परिजनों ने डॉ. पूर्णिमा सुरभि सहित पूरी मेडिकल टीम का आभार जताया। परिजनों के मुताबिक, शिवाय हॉस्पिटल में मिली आधुनिक चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञों के प्रयास से मरीज को एक नई जिंदगी मिली है।

शिवाय हॉस्पिटल में हुई यह सर्जरी कोरबा में आधुनिक लेप्रोस्कोपिक उपचार की बढ़ती सुविधाओं को रेखांकित करती है।

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