रायपुर 3 जुलाई 2026। Case from Nakti village in Chhattisgarh : राजधानी रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। एक ओर विस्थापित परिवार अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठ गए हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी कांग्रेस उनके समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आई है। वहीं सत्ताधारी भाजपा के सीनियर लीडर और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में अब येे पूरा मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
Case from Nakti village in Chhattisgarh

गौैरतलब है कि पिछले दिनों रायपुर जिला प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राम नकटी के बेेजाकब्जाधारियों के मकान पर बुलडोजर चला दिया था। इस कार्रवाई के बाद सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को विस्थापित कर ईडब्लू एस मकान दिया गया, लेकिन सभी को आवास नहीं पाया। इस पूरी कार्रवाई के बाद जहां कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया, वहीं नकटी गांव में हुई इस कार्रवाई की आग में बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बयान ने घी का काम कर दिया। प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित विस्थापित ग्रामीणों ने आज शुक्रवार से कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
Case from Nakti village in Chhattisgarh
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे जेल भरो आंदोलन भी शुरू करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था किए उनके घर तोड़ दिए। जिससे परिवार बारिश में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। इससे पहले भी प्रभावित परिवार अपने टूटे हुए मकानों के बीच बारिश और कीचड़ में धरने पर बैठे रहे। नकटी गांव में करीब 80 मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने के तीन दिन बाद भी लोगों का विरोध थमा नहीं है। मामले को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है।
Case from Nakti village in Chhattisgarh
गुरुवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव नकटी गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ बड़ा जनसरोकार का विषय बनाने में जुटी है। उधर भाजपा के वरिष्ठ नेता और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में रात के अंधेरे में गरीबों के घर तोड़ना किसी भी कीमत पर उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर दी है।
ग्रामीणों ने मकानों को लेकर गिनाई समस्या
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने कुछ परिवारों को EWS आवास तो आवंटित किए हैं, लेकिन सभी प्रभावितों को मकान नहीं मिले हैं। जिन लोगों को मकान मिले हैं, उनका आरोप है कि वे आकार में काफी छोटे हैं और उनमें पानी, बिजली तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ऐसे मकानों में बड़े परिवारों का रहना काफी मुश्किल है। ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि कार्रवाई से दो दिन पहले वे सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उस दौरान सांसद ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि बरसात खत्म होने तक किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं होगी और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
लेकिन 29 जून को प्रशासन ने 80 मकानों पर बुलडोजर चला दिया। फिलहाल नकटी गांव का मुद्दा लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ विस्थापित परिवार अपने पुनर्वास और मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सरकार की संवेदनहीनता का मुद्दा बना रही है। वहीं सत्ताधारी दल के सीनियर लीडर बृजमोहन अग्रवाल की नाराजगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार विस्थापितों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकालती है।




