रायपुर।CG BIG BREAKING : छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में वर्ष 2022 में हुई State Tax Inspector की पदोन्नति परीक्षा अब एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। 11 सितंबर 2026 के आदेश में गंभीर अनियमितताओं के आधार पर 2022 की परीक्षा से जुड़ी पदोन्नति एवं नियुक्तियों को प्रारंभ से ही शून्य (Void ab initio) घोषित कर निरस्त किया गया है और प्रभावित कर्मचारियों को मूल पदों पर वापस भेजा गया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है—अगर पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, तो आखिर परीक्षा के दौरान क्या हुआ था और जिम्मेदार कौन है?
मेहनत परीक्षार्थियों की, सवाल पूरी व्यवस्था पर CG BIG BREAKING

इस परीक्षा में शामिल कर्मचारियों ने पदोन्नति की उम्मीद में मेहनत की, तैयारी की और परीक्षा दी। करीब 350 कर्मचारियों के लगभग 42 पदों के लिए परीक्षा में शामिल होने की बात पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उठाई थी। ऐसे में यदि चयन प्रक्रिया में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार परीक्षार्थियों को हुआ होगा जिन्होंने अपनी मेहनत के भरोसे परीक्षा दी थी।
विज्ञापन कुछ, चयन प्रक्रिया कुछ? CG BIG BREAKING
मामले का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में 28 अप्रैल 2022 के विज्ञापन में जिस नियम के अनुसार चयन की बात कही गई थी, परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने के बाद 19 मई 2022 को नए नियम अधिसूचित किए जाने और बाद में उन्हीं के आधार पर अंक देने को लेकर विवाद दर्ज है। याचिकाकर्ताओं ने इसे चयन प्रक्रिया के बीच “rules of the game” बदलने का मुद्दा बताया। हालांकि, एकल पीठ ने उस चुनौती को स्वीकार नहीं किया और 1 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज कर दी। मामला आगे भी न्यायिक प्रक्रिया में उठा है।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि कौन चयनित हुआ, बल्कि यह भी है कि चयन की पूरी प्रक्रिया विज्ञापन और लागू नियमों के अनुरूप कितनी पारदर्शी थी।
अंकों और उत्तरपुस्तिकाओं पर भी उठ चुके हैं सवाल CG BIG BREAKING
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में याचिकाकर्ताओं की ओर से उत्तरपुस्तिका में अंकों में कथित हेरफेर का मुद्दा भी उठाया गया है। ऐसे में अब यह मांग और गंभीर हो जाती है कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं, मूल्यांकन प्रक्रिया, अंकों का रिकॉर्ड, मेरिट तैयार करने की प्रक्रिया और चयन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच हो।
ननकीराम कंवर ने PM तक उठाया था मामला

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भी इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी। उन्होंने परीक्षा में कथित अनियमितताओं, चयनित अभ्यर्थियों के असामान्य रूप से अधिक अंकों और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। ये आरोप अभी जांच के जरिए सत्यापित किए जाने बाकी हैं, लेकिन अब 11 सितंबर के निरस्तीकरण आदेश के बाद इन सवालों को फिर से नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
अब असली परीक्षा जांच की है
नियुक्तियां निरस्त करना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन परीक्षा की कथित गड़बड़ी की जड़ तक पहुंचना उससे भी बड़ा सवाल है।
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच से सच्चाई सामने आएगी। और यदि कहीं अंकों, उत्तरपुस्तिकाओं, नियमों या चयन प्रक्रिया में जानबूझकर अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
सरकार ने हाई कोर्ट में लगाया केवीएट
छत्तीसगढ़ सरकार ने इन नीतियों को निरस्त करने के साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक केवीएट फाइल कर दिया है जिससे कोई कर्मचारी इस आदेश से शुभ होकर हाई कोर्ट जाना चाहे तो सरकार ने पहले ही केवीएट दायर कर दिया है ताकि उच्च न्यायालय उनको किसी तरह से स्थगन या राहत देने से पहले सरकार की बात को भी सुने इससे यह स्पष्ट हो रहा है की सरकार इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है और आगे जांच की प्रक्रिया तेज हो सकती है.
क्योंकि सवाल सिर्फ 2022 में चयनित हुए कर्मचारियों का नहीं है—सवाल उन सैकड़ों कर्मचारियों की मेहनत, परीक्षा की विश्वसनीयता और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर जनता के भरोसे का है।
अब देखना यह है कि मामला सिर्फ नियुक्तियां रद्द करने तक सीमित रहता है या परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पूरी परत भी खुलेगी।





