छत्तीसगढ़ में ईसाई धर्म अपनाने पर झगड़ा, फिर हत्या:महिला का शव भी नहीं दे रहे दफनाने; पहले खेती करने से रोका था

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बस्तर में धर्मांतरण को लेकर फिर बवाल हो गया है। दंतेवाड़ा में जमीन विवाद में रिश्तेदारों ने एक महिला की हत्या कर दी। अब उसका शव दफनाने नहीं दे रहे हैं। महिला और उसके परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया था। इसी बात को लेकर रिश्तेदार पैतृक जमीन पर खेती भी करने नहीं दे रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, कटेकल्याण क्षेत्र के तेायलंका निवासी बिंदु सोढ़ी सोमवार को अपनी जमीन पर खेती-किसानी का काम कर रही थी। इस बीच परिवार के कुछ लोग गांव वालों के साथ पहुंच गए। उन्होंने बिंदु और इसके परिवार को खेती करने से मना किया। इसी बात को लेकर मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच जमकर विवाद हुआ।

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बिंदु सोढ़ी की रिश्तेदारों ने धारदार हथियार और डंडे से मारकर हत्या कर दी।
बिंदु सोढ़ी की रिश्तेदारों ने धारदार हथियार और डंडे से मारकर हत्या कर दी।

कुल्हाड़ी-डंडे और अन्य धारदार हथियारों से किया हमला

बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों में बात इतनी ज्यादा बढ़ गई कि रिश्तेदारों ने बिंदु पर कुल्हाड़ी, धारदार हथियारों और लाठी से हमला कर दिया। इससे बिंदु गंभीर रूप से घायल हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस महिला को जिला अस्पताल लेकर पहुंची। वहां बिंदु ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

महिला की मौत के बाद गांव में तनाव

मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजन शव को दफनाने के लिए गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन वहां तनाव का माहौल है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण और रिश्तेदार शव को दफनाने नहीं दे रहे हैं। शव अभी दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में ही रखा हुआ है। गांव में पुलिस बल को तैनात है।

ग्रामीणों को समझाने की कोशिश

महिला के रिश्तेदारों और गांव के लोगों को समझाया जा रहा है। ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा भी है। हालांकि पुलिस ने अब तक इसका खुलासा नहीं किया है। इस मामले को लेकर हमने SP, ASP और DSP रैंक के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया।

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में मॉर्चुरी के बाहर खड़े परिजन।
दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में मॉर्चुरी के बाहर खड़े परिजन।

दो माह पहले युवक का शव दफनाने पर भी हो चुका है बवाल

बस्तर जिले के कोड़ेनार में करीब 2 माह पहले भी ईसाई समुदाय के एक युवक का शव दफनाने को लेकर बवाल हो चुका है। गांववालों का कहना था कि जब तक मृतक के परिजन मूल धर्म में नहीं लौटेंगे, तब तक शव दफनाने के लिए गांव में जमीन नहीं दी जाएगी। हालांकि बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर शव दफनाया गया था।

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