कोरबा (छत्तीसगढ़) मेमन जमात कोरबा द्वारा देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मेमन जमात के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद अमीन शेखानी के अध्यक्षीय नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में ध्वजारोहण किया गया तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता, भाईचारे एवं सामाजिक सौहार्द के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर समाज सुधार एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया गया। शादी-ब्याह में प्री-वेडिंग शूट, बैंड-बाजा एवं डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ समाजजनों से अपील की गई कि विवाह समारोह में होने वाले अनावश्यक एवं दिखावे से जुड़े खर्चों में कमी लाकर सादगी को अपनाया जाए तथा धन का सदुपयोग जरूरतमंदों की सहायता एवं समाजहित के कार्यों में खर्च किया जाए।
इसी क्रम में तीजा एवं चालीसवां (मृत्यु भोज) पर भी पूर्ण प्रतिबंध का निर्णय दोहराया गया। समाजजनों से विशेष गुजारिश की गई कि मृत्यु के अवसर पर समाज को भोज के लिए आमंत्रित करने के बजाय गरीब, मिस्कीन, जरूरतमंद एवं बेसहारा लोगों को भोजन कराया जाए, ताकि किसी परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और दुख की घड़ी को मानव सेवा एवं सदक़ा-ए-जारीया जैसे नेक कार्य से जोड़ा जा सके।
स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर को मानव सेवा और दुआ का दिन बनाते हुए समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने बीमार एवं अस्वस्थ समाजजनों से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम जानी तथा उनके जल्द स्वस्थ होने, अच्छी सेहत एवं सलामती के लिए दुआ की।
कार्यक्रम का माइक संचालन मेमन जमात के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद यूनुस मेमन द्वारा प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया।
समारोह में प्रमुख रूप से मोहम्मद रफीक मेमन, अब्दुल रऊफ मेमन, अब्दुल अज़ीज़ मेमन (बाबा भाई), मोहम्मद मकसूद शेखा, हाजी अमीन पारेख, डॉ. जब्बार मेमन, मोहम्मद इदरीश पारेख, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद रियाज, मोहम्मद अमीन, राजू भाई, मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद रईस मेमन, मोहम्मद आदिल सहित मेमन जमात के अनेक पदाधिकारी, वरिष्ठजन एवं समाज के सदस्य उपस्थित रहे।
मेमन जमात कोरबा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल ध्वजारोहण एवं उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सादगी, सेवा, भाईचारा, जरूरतमंदों की मदद, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन और मानवता की रक्षा करना भी सच्ची देशभक्ति का हिस्सा है।





